गोल गांव पातल की ढाणी में पिंजरे में कैद हुआ पैंथर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

गोल गांव पातल की ढाणी में पिंजरे में कैद हुआ पैंथर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

गोल गांव पातल की ढाणी में पिंजरे में कैद हुआ पैंथर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
गोल गांव पातल की ढाणी में पिंजरे में कैद हुआ पैंथर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

राजस्थान के दौसा जिले के लालसोट उपखंड क्षेत्र से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक पैंथर का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। यह घटना उपखंड के गोल गांव स्थित पातल की ढाणी की है, जहां पिछले कुछ दिनों से एक पैंथर की मौजूदगी ने ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बना दिया था। शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में पैंथर के फंसने के बाद पूरे इलाके ने राहत की सांस ली।

घटना की पृष्ठभूमि दो दिन पहले शुरू हुई, जब इसी पैंथर ने एक गाय के बछड़े पर हमला कर दिया था। इस हमले के बाद गांव और आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई थी। ग्रामीणों ने अपने पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी शुरू कर दी थी और रात के समय बाहर निकलने से भी परहेज करने लगे थे। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी लोगों में चिंता बढ़ गई थी।

जैसे ही इस घटना की सूचना वन विभाग को मिली, अधिकारियों ने तुरंत मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पैंथर की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिसके बाद उसे पकड़ने के लिए एक रणनीति तैयार की गई। वन विभाग की टीम ने इलाके में एक मजबूत पिंजरा लगाया और उसमें कुत्ते के मांस को चारे के रूप में रखा, ताकि पैंथर को आकर्षित किया जा सके।

वन्यजीवों के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए यह तरीका अक्सर कारगर साबित होता है, और इस मामले में भी यही हुआ। शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे पैंथर भोजन के लालच में पिंजरे में घुस गया और दरवाजा बंद होते ही वह उसमें कैद हो गया। इस सफल प्रयास के बाद तुरंत वन विभाग की टीम को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही रेंजर रामकिशन के नेतृत्व में वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। टीम ने पूरी सावधानी और सुरक्षा उपायों के साथ पैंथर को अपने कब्जे में लिया। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि न तो पैंथर को कोई नुकसान पहुंचे और न ही आसपास के लोगों की सुरक्षा पर कोई खतरा हो।

पैंथर को सुरक्षित रूप से पिंजरे सहित राजकीय वाहन में रखा गया और उसे दौसा ले जाया गया। वहां पशु चिकित्सकों द्वारा उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसे किसी प्रकार की चोट या बीमारी नहीं है। जांच के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने निर्णय लिया कि पैंथर को उसके प्राकृतिक आवास में ही छोड़ा जाएगा।

गोल गांव पातल की ढाणी में पिंजरे में कैद हुआ पैंथर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
गोल गांव पातल की ढाणी में पिंजरे में कैद हुआ पैंथर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, पैंथर को बाद में एक सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि वह अपने प्राकृतिक वातावरण में लौट सके और मानव बस्तियों से दूर रहकर अपना जीवन व्यतीत कर सके। वन विभाग का यह प्रयास न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी सहायक है।

पैंथर के पकड़े जाने के बाद पातल की ढाणी और आसपास के गांवों में लोगों ने राहत की सांस ली। पिछले दो दिनों से जो भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ था, वह अब काफी हद तक खत्म हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की सराहना की और कहा कि समय पर कदम उठाने से किसी बड़ी घटना को टाला जा सका।

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। जैसे-जैसे मानव बस्तियां जंगलों के करीब आती जा रही हैं, वैसे-वैसे इस तरह की घटनाएं बढ़ने की संभावना भी बढ़ रही है। ऐसे में वन विभाग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

वन विभाग ने इस घटना के बाद ग्रामीणों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार का वन्यजीव दिखाई दे, तो वे तुरंत इसकी सूचना विभाग को दें। साथ ही, उन्होंने यह भी सलाह दी है कि लोग खुद से किसी वन्यजीव को पकड़ने या उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें, क्योंकि यह न केवल खतरनाक हो सकता है, बल्कि कानूनन अपराध भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए जागरूकता और सतर्कता दोनों जरूरी हैं। ग्रामीणों को वन्यजीवों के व्यवहार के बारे में जानकारी होना चाहिए, ताकि वे समय रहते उचित कदम उठा सकें। इसके अलावा, वन विभाग को भी नियमित रूप से ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करनी चाहिए, जहां वन्यजीवों की आवाजाही अधिक होती है।

इस पूरे अभियान की सफलता का श्रेय वन विभाग की टीम की तत्परता, योजना और समन्वय को जाता है। रेंजर रामकिशन और उनकी टीम ने जिस कुशलता से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने यह साबित किया कि सही रणनीति और समय पर कार्रवाई से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

अंततः, यह घटना न केवल एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय लोग मिलकर काम करें, तो मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है। पातल की ढाणी के ग्रामीणों के लिए यह अनुभव भले ही डरावना रहा हो, लेकिन इसका सुखद अंत सभी के लिए राहत लेकर आया है।

झारखंड में मालवाहक वाहन की चपेट में आने से मां-बेटे समेत तीन की मौत

झारखंड में मालवाहक वाहन की चपेट में आने से मां-बेटे समेत तीन की मौत

झारखंड में मालवाहक वाहन की चपेट में आने से मां-बेटे समेत तीन की मौत
झारखंड में मालवाहक वाहन की चपेट में आने से मां-बेटे समेत तीन की मौत

लोहरदगा । झारखंड के लोहरदगा जिले में नेशनल हाईवे-39 (कुड़ू-रांची मुख्य पथ) पर शुक्रवार को एक सड़क हादसे में मां-पुत्र समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना कुड़ू थाना क्षेत्र के ढुलुवाखुंटा के समीप की है, जहां शराब लदे एक मालवाहक वाहन और स्कूटी के बीच आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद हाईवे पर घंटों आवागमन बाधित रहा और ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। कुड़ू थाना क्षेत्र के रोन्हैया कोलसिमरी गांव निवासी विषुण भगताइन अपने पुत्र किशोर भगत और भतीजा निरंजन उरांव के साथ स्कूटी पर सवार होकर मांडर अस्पताल जा रही थीं, जहां उनके पति इलाजरत हैं। इसी दौरान रांची से पलामू जा रहे शराब लदे मालवाहक वाहन ने स्कूटी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि किशोर भगत और निरंजन उरांव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि विषुण भगताइन ने लोहरदगा सदर अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में दम तोड़ दिया। हादसे के बाद मालवाहक वाहन बीच सड़क पर ही पलट गया, जिससे उसमें लदी शराब की बोतलें सड़क पर बिखर गईं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई और कुछ लोग शराब लूटने का प्रयास करने लगे। मौके पर पहुंचे कुड़ू थाना प्रभारी अजीत कुमार ने स्थिति को संभाला और शराब लूटने की कोशिश कर रहे लोगों को खदेड़ कर भगाया।

झारखंड में मालवाहक वाहन की चपेट में आने से मां-बेटे समेत तीन की मौत
झारखंड में मालवाहक वाहन की चपेट में आने से मां-बेटे समेत तीन की मौत


हादसे से आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर हाईवे जाम कर दिया। हालांकि, सीओ संतोष उरांव और थाना प्रभारी अजीत कुमार ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद जाम हटवाया। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता के रूप में अंतिम संस्कार के लिए कुछ नकद राशि और दो क्विंटल चावल उपलब्ध कराया है।
इस दुर्घटना में मालवाहक वाहन में सवार तीन लोग भी घायल हुए हैं, जिनकी पहचान रांची के कांके निवासी विनत मुंडा, विकास मिंज और टिंकू राम के रूप में हुई है। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल विनत मुंडा और विकास मिंज को बेहतर इलाज के लिए रिम्स, रांची रेफर किया गया है।

आतंकियों से निपटने, उनके कैंप नष्ट करने के अभ्यास के साथ पूरा हुआ ‘डस्टलिक’

आतंकियों से निपटने, उनके कैंप नष्ट करने के अभ्यास के साथ पूरा हुआ ‘डस्टलिक’

आतंकियों से निपटने, उनके कैंप नष्ट करने के अभ्यास के साथ पूरा हुआ ‘डस्टलिक’
आतंकियों से निपटने, उनके कैंप नष्ट करने के अभ्यास के साथ पूरा हुआ ‘डस्टलिक’

नई दिल्ली । भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित संयुक्त युद्धाभ्यास ‘डस्टलिक’ शुक्रवार को संपन्न हो गया। यह युद्धाभ्यास दोनों देशों की सेनाओं द्वारा उज्बेकिस्तान में किया जा रहा था। यहां जवानों ने बेहद तेज गोलीबारी को अंजाम दिया और गोलीबारी का त्वरित जवाब भी दिया। रॉकेट से हमले करने का युद्धाभ्यास किया गया। युद्ध क्षेत्र में मानव रहित यंत्रों व ड्रोन का उपयोग, घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने अभ्यास भी इस मिशन का हिस्सा रहा। युद्धाभ्यास के दौरान दुश्मन के ठिकानों की टोही और निगरानी व आतंकी कैंप में घुसकर कार्रवाई करने का अभ्यास भी किया गया। युद्धाभ्यास में पर्वतारोहण, रस्सी के सहारे उतरना, स्नाइपर कार्रवाई भी शामिल रही। भारतीय सेना का कहना है कि यह संयुक्त अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच सामरिक तालमेल और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। अभ्यास के दौरान सैनिकों ने अवैध सशस्त्र समूहों को निष्क्रिय करने से जुड़े विभिन्न ऑपरेशनों का अभ्यास किया। इससे वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई की तैयारियों को और बेहतर बनाया जा सकेगा। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद-रोधी अभियानों में दोनों देशों के अनुभवों और श्रेष्ठ तरीकों का आदान-प्रदान करना था। युद्धाभ्यास में आधुनिक युद्धक रणनीतियों, समन्वित कार्रवाई और विभिन्न परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया।

आतंकियों से निपटने, उनके कैंप नष्ट करने के अभ्यास के साथ पूरा हुआ ‘डस्टलिक’
आतंकियों से निपटने, उनके कैंप नष्ट करने के अभ्यास के साथ पूरा हुआ ‘डस्टलिक’


सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार युद्धाभ्यास ‘डस्टलिक’ ने न केवल भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग को और सुदृढ़ किया, बल्कि दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को भी बेहतर बनाया। इससे भविष्य में किसी भी संयुक्त मिशन या ऑपरेशन को अधिक कुशलता से अंजाम देने में मदद मिलेगी। समापन समारोह के दौरान दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने अभ्यास की सफलता पर संतोष व्यक्त किया और इसे द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और गहरा करने की दिशा में अहम बताया।
डस्टलिक का यह सातवां संस्करण है। यह युद्धाभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, सामरिक दक्षता और संयुक्त अभियान क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सेना के मुताबिक इस सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त अभियानों की क्षमता को बढ़ाना रहा। इसके अंतर्गत दोनों देशों की सेनाओं ने दुश्मन के खिलाफ संयुक्त योजना निर्माण किया।
सामरिक अभ्यास किए गए। वहीं विशेष सैन्य हथियारों के उपयोग और अवैध सशस्त्र समूहों के विरुद्ध अभियान चलाने की रणनीतियों पर फोकस किया गया। युद्ध कौशलों के अलावा भारत और उज्बेकिस्तान की सेनाओं ने आतंकवादी कार्रवाई का जवाब देने, छापेमारी, खोज और आतंकवादी ठिकाने नष्ट करने के सैन्य अभियान किए।

गाजीपुर रेप मामले को सपा नेता डिंपल यादव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, प्रशासन के बर्ताव पर उठाए सवाल

गाजीपुर रेप मामले को सपा नेता डिंपल यादव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, प्रशासन के बर्ताव पर उठाए सवाल

गाजीपुर रेप मामले को सपा नेता डिंपल यादव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, प्रशासन के बर्ताव पर उठाए सवाल
गाजीपुर रेप मामले को सपा नेता डिंपल यादव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, प्रशासन के बर्ताव पर उठाए सवाल

मैनपुरी । उत्‍तर प्रदेश में गाजीपुर दुष्‍कर्म मामले को लेकर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि एक पिछड़ी जाति की लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ और गंभीर परिस्थितियों में उसकी मृत्यु हो गई, जो समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है। उन्‍होंने आरोप लगाया कि प्रतिनिधिमंडल पीड़िता के परिवार से मिलने गया तो प्रशासन का रवैया असंवेदनशील था। सपा नेता डिंपल यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि जब एक प्रतिनिधिमंडल पीड़िता के परिवार से मिलने गया, तब प्रशासन और अधिकारियों का रवैया अत्यंत असंवेदनशील था। उनके अनुसार इस तरह का व्यवहार देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार यह मुद्दा उठाती रही है कि भारतीय जनता पार्टी संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। महिला आरक्षण और जनगणना के मुद्दे पर भी डिंपल यादव ने अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल 2023 संसद में पारित हुआ था और इस पर किसी तरह का भ्रम या गलत जानकारी फैलाना उचित नहीं है।

गाजीपुर रेप मामले को सपा नेता डिंपल यादव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, प्रशासन के बर्ताव पर उठाए सवाल
गाजीपुर रेप मामले को सपा नेता डिंपल यादव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, प्रशासन के बर्ताव पर उठाए सवाल


उन्होंने कहा कि सरकार को जनगणना का कार्य जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि जनगणना कराई जानी है, तो उसे जातिगत आधार पर भी कराया जाना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने और महिलाओं को आरक्षण देने की मांग दोहराई। उनका मानना है कि नई सीटों के निर्माण के बाद ही प्रभावी रूप से आरक्षण लागू किया जा सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के हितों को लेकर गंभीर है, तो मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू किया जा सकता है।
डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण का मुद्दा भाजपा के लिए केवल एक मुखौटा है और सरकार परिसीमन से बचने के लिए जनगणना कराने में रुचि नहीं दिखा रही है।

ट्रेनों में 'मौत' बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश

ट्रेनों में ‘मौत’ बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश

ट्रेनों में 'मौत' बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश
ट्रेनों में ‘मौत’ बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश

धनबाद । झारखंड के कोडरमा-धनबाद रेलखंड पर नकली साधुओं के एक गिरोह द्वारा दिए गए नशीले प्रसाद को खाने से उत्तर प्रदेश के मांडा की रहने वाली एक महिला यात्री की मौत हो गई। महिला अस्पताल में चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ी, लेकिन अंततः उसे बचाया नहीं जा सका। इस सनसनीखेज वारदात के बाद रेल पुलिस ने घेराबंदी कर वाराणसी के रहने वाले सात नकली साधुओं को गिरफ्तार किया है। झारखंड के रेल डीजी अनिल पलटा को लगातार मिल रहे इनपुट्स के बाद जीआरपी और आरपीएफ की एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। पुलिस ने विभिन्न रेलवे स्टेशनों के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों को खंगाला, जिसमें संदिग्धों की संदिग्ध गतिविधियां कैद हुई थीं। पकड़े गए सातों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे वाराणसी और आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं। वे अलग-अलग टुकड़ियों में बंटकर विभिन्न राज्यों की ट्रेनों, विशेषकर स्लीपर और जनरल बोगियों में यात्रियों को अपना निशाना बनाते थे। इस गिरोह के सदस्य साधु का भेष धारण कर खुद को किसी प्रतिष्ठित मठ से जुड़ा बताते हैं। ट्रेन में सफर के दौरान वे यात्रियों से मेल-जोल बढ़ाकर उनका विश्वास जीतते हैं और फिर ‘विशेष प्रसाद’ के नाम पर नशीला लड्डू थमा देते हैं।

ट्रेनों में 'मौत' बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश
ट्रेनों में ‘मौत’ बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश


मांडा की रहने वाली के साथ भी यही हुआ। लड्डू खाते ही वह अचेत हो गई, जिसके बाद लुटेरे उसकी नकदी और चांदी के गहने लेकर चंपत हो गए। पुलिस पूछताछ में यह उजागर हुआ कि यह एक संगठित सिंडिकेट है, जो साधु के भेष का इस्तेमाल केवल अपराध को छिपाने के लिए ‘कवर’ के तौर पर करता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने यात्रियों को अपना शिकार बनाया है और इनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली नशीली दवाओं का स्रोत क्या है।
रेल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यात्रा के दौरान किसी भी अपरिचित व्यक्ति, चाहे वह किसी भी भेष में हो, उसके द्वारा दिए गए प्रसाद या किसी भी खाद्य सामग्री को कतई स्वीकार न करें। धर्म और आस्था की आड़ में किसी अजनबी पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है।

बांदरसिंदरी पुलिस ने दिल्ली में मजदूर बन 18 साल से फरार 10 हजार के इनामी शराब तस्कर को दबोचा

बांदरसिंदरी पुलिस ने दिल्ली में मजदूर बन 18 साल से फरार 10 हजार के इनामी शराब तस्कर को दबोचा

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अजमेर। राजस्थान पुलिस ने एरिया डोमिनेशन अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। अजमेर जिले की बांदरसिंदरी थाना पुलिस ने साल 2009 से फरार चल रहे ₹10,000 के इनामी शराब तस्कर दिनेश सिंह उर्फ दिनेश कुमार जाट 52 निवासी गांव व थाना छाँवला जिला द्वारका नई दिल्ली को छावला इलाके से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। 18 साल तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला यह आरोपी एक रसूखदार राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है। 

पुलिस अधीक्षक हर्ष वर्धन अग्रवाला के कुशल निर्देशन और एएसपी ग्रामीण दीपक कुमार व वृत्ताधिकारी आयुष वशिष्ठ के सुपरविजन में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। एसपी अग्रवाला ने बताया कि यह मामला 2 जनवरी 2009 का है, जब बांदरसिंदरी पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान हरियाणा नंबर के एक संदिग्ध ट्रक को रुकवाने का प्रयास किया था। उस वक्त ट्रक चालक और खलासी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए थे। पुलिस ने जब ट्रक की तलाशी ली, तो उसमें 856 पेटियां अंग्रेजी शराब की बरामद हुई थीं। इस मामले में ट्रक मालिक दिनेश सिंह निवासी दिल्ली के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया, लेकिन वह तब से ही फरार चल रहा था। न्यायालय ने उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था और हाल ही में पुलिस अधीक्षक अजमेर द्वारा उस पर ₹10,000 का इनाम घोषित किया गया था।
मजदूर बन फार्म हाउस में घुसी पुलिस की टीम
थानाधिकारी दयाराम चौधरी के नेतृत्व में गठित टीम के लिए आरोपी को पकड़ना एक बड़ी चुनौती थी। जब टीम दिल्ली के छावला पहुंची तो पता चला कि आरोपी का भाई एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी का पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष और विधायक प्रत्याशी रह चुका है, जिसके दबदबे के कारण ग्रामीण कोई जानकारी देने को तैयार नहीं थे।
टीम ने हार नहीं मानी और छद्म रूप धारण कर आरोपी का नंबर हासिल किया। पुलिस ने वीडियो कॉल के जरिए आरोपी की पहचान सुनिश्चित की। जब सूचना मिली कि आरोपी गांव के बाहर एक निर्माणाधीन फार्म हाउस में छिपकर रहता है, तो पुलिस टीम के सदस्य स्वयं मजदूर बनकर फार्म हाउस में निर्माण कार्य करने लगे। कई दिनों तक रेकी करने के बाद 21 अप्रैल 2026 की सुबह जैसे ही दिनेश सिंह मजदूरों को संभालने आया, पहले से अंदर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया।

बांदरसिंदरी पुलिस ने दिल्ली में मजदूर बन 18 साल से फरार 10 हजार के इनामी शराब तस्कर को दबोचा
बांदरसिंदरी पुलिस ने दिल्ली में मजदूर बन 18 साल से फरार 10 हजार के इनामी शराब तस्कर को दबोचा


भीड़ और राजनीतिक दबाव को बहादुरी से झेला
जैसे ही आरोपी को पुलिस ने पकड़ा, उसने अपने रसूखदार भाई को सूचना दे दी। कुछ ही देर में उसका भाई 60-70 समर्थकों के साथ फार्म हाउस पहुंच गया और पुलिस कार्यवाही का विरोध करने लगा। भारी भीड़ और राजनीतिक रसूख के बावजूद, बांदरसिंदरी पुलिस की टीम ने अदम्य साहस, संयम और सूझबूझ का परिचय दिया। टीम बिना किसी दबाव के आरोपी को सफलतापूर्वक स्थानीय थाने लेकर पहुंची। वहां भी भीड़ ने विरोध जारी रखा, लेकिन पुलिस उच्चाधिकारियों से निरंतर संपर्क बनाए रखते हुए आरोपी को सकुशल राजस्थान लेकर आई।
वर्तमान में आरोपी दिनेश सिंह से अवैध शराब तस्करी और इसमें प्रयुक्त वाहन के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। 18 साल पुराने इस मामले में पुलिस की इस सूझबूझ भरी कार्रवाई की चारों ओर प्रशंसा हो रही है।
टीम में एसएचओ दयाराम चौधरी पुलिस निरीक्षक सहित एएसआई रामस्वरूप, कांस्टेबल राजू लाल, अनिल कुमार, सीताराम और सत्येंद्र कुमार शामिल थे।

भिनाय पुलिस की बड़ी कार्यवाही: हत्या के प्रयास के मामले में 9 साल से फरार वांछित अपराधी गिरफ्तार

अजमेर रेंज आईजी राजेन्द्र सिंह व पुलिस अधीक्षक श्री हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देशन में चलाए जा रहे एरिया डोमिनेशन अभियान के तहत भिनाय थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने वर्ष 2017 से हत्या के प्रयास और लूट के संगीन मामले में फरार चल रहे वांछित अपराधी कमालुद्दीन पुत्र ईलियास (30) निवासी दूदू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले 9 वर्षों से गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था।
यह मामला मार्च 2017 का है, जब आरोपियों ने बेगलियावास निवासी एक व्यक्ति के साथ बेरहमी से मारपीट कर उसके हाथ-पैर तोड़ दिए थे और नकदी लूटकर हत्या का प्रयास किया था। थानाधिकारी ओमप्रकाश पुलिस निरीक्षक के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी आसूचना और मुखबिरों की सहायता से सटीक जाल बिछाकर आरोपी को दबोचा। इस सफल कार्यवाही में हेड कांस्टेबल भागचंद और कांस्टेबल ओमसिंह की विशेष भूमिका रही। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से फरारी के दौरान की गतिविधियों के संबंध में पूछताछ कर रही है।

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने सुलझाया 40 साल पुराना कोल्ड मर्डर केस, आरोपी पति गिरफ्तार

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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने सुलझाया 40 साल पुराना कोल्ड मर्डर केस, आरोपी पति गिरफ्तार

नई दिल्ली । दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने करीब 40 साल पुराने एक कोल्ड मर्डर केस को सुलझा लिया है। आरोपी का नाम चंद्रशेखर प्रसाद बताया गया है, जो मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला है। गिरफ्तारी के समय उसकी उम्र करीब 84 साल बताई जा रही है। यह मामला 1986 का है, जब पूर्वी दिल्ली के शकरपुर इलाके में आरोपी ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी थी। पति को पत्नी के चरित्र पर शक था, इसी शक के चलते उसने गुस्से में आकर ईंटों से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी। इस दौरान घर में काम करने वाले घरेलू सहायक को भी हथियार के बल पर धमकाया गया था। वारदात के बाद आरोपी अपने साथियों के साथ फरार हो गया। बाद में अदालत ने उसे 1987 में फरार घोषित कर दिया था। इसके बाद यह मामला लगभग चार दशकों तक अनसुलझा पड़ा रहा। इस दौरान पुलिस के सामने कई चुनौतियां आई, क्योंकि यह केस बहुत पुराना था। उस समय न तो मोबाइल फोन थे, न आधार जैसी पहचान प्रणाली और न ही डिजिटल रिकॉर्ड। कोई स्पष्ट फोटो या आधुनिक डेटा उपलब्ध नहीं था। ऐसे में आरोपी की पहचान और उसका पता लगाना बेहद मुश्किल काम था।
क्राइम ब्रांच की टीम ने इस केस को दोबारा खोला और धीरे-धीरे पुराने सुरागों को जोड़ना शुरू किया। जांच में पता चला कि आरोपी के बच्चे दिल्ली और बिहार में रहते हैं। इसी जानकारी के आधार पर कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों पर नजर रखी गई और उन्हें सर्विलांस पर रखा गया। इसके साथ ही टीम ने बिहार के नालंदा जिले में जाकर स्थानीय स्तर पर भी जांच की। वहां से यह जानकारी मिली कि आरोपी समय-समय पर धार्मिक या पारिवारिक अवसरों पर आता-जाता रहता है और अभी भी जीवित है।

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने सुलझाया 40 साल पुराना कोल्ड मर्डर केस, आरोपी पति गिरफ्तार
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने सुलझाया 40 साल पुराना कोल्ड मर्डर केस, आरोपी पति गिरफ्तार


तकनीकी इनपुट और मानव खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। धीरे-धीरे पता चला कि वह दिल्ली के नॉर्थ-वेस्ट इलाके में छिपकर रह रहा है। इसके बाद 22 अप्रैल 2026 को एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत उसे पकड़ लिया गया।
यह गिरफ्तारी नांगली पूना इलाके में एक फैक्ट्री के स्टोर रूम से की गई, जहां वह अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, उसने इतने सालों तक अलग-अलग जगहों पर पहचान बदलकर जीवन बिताया। कभी वह बिहार में रहा, कभी पंजाब और हरियाणा में, और कुछ समय के लिए एक आश्रम में भी छिपा रहा। यहां तक कि पंजाब के पटियाला में वह रिक्शा चलाने का काम भी कर चुका था।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि घरेलू विवाद और पत्नी के चरित्र पर शक के कारण उसने गुस्से में आकर यह हत्या की थी और फिर मौके से फरार हो गया था।
इस पूरे ऑपरेशन में इंस्पेक्टर सुनील कुमार कलखांडे के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी, जिसमें कई अधिकारी और हेड कांस्टेबल शामिल थे। इस टीम ने महीनों तक लगातार मेहनत की, पुराने रिकॉर्ड खंगाले, तकनीकी सर्विलांस का इस्तेमाल किया और ग्राउंड इंटेलिजेंस पर काम किया।

ट्रेनों में 'मौत' बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश

ट्रेनों में ‘मौत’ बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश

ट्रेनों में 'मौत' बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश
ट्रेनों में ‘मौत’ बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश

धनबाद । झारखंड के कोडरमा-धनबाद रेलखंड पर नकली साधुओं के एक गिरोह द्वारा दिए गए नशीले प्रसाद को खाने से उत्तर प्रदेश के मांडा की रहने वाली एक महिला यात्री की मौत हो गई। महिला अस्पताल में चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ी, लेकिन अंततः उसे बचाया नहीं जा सका। इस सनसनीखेज वारदात के बाद रेल पुलिस ने घेराबंदी कर वाराणसी के रहने वाले सात नकली साधुओं को गिरफ्तार किया है। झारखंड के रेल डीजी अनिल पलटा को लगातार मिल रहे इनपुट्स के बाद जीआरपी और आरपीएफ की एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। पुलिस ने विभिन्न रेलवे स्टेशनों के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों को खंगाला, जिसमें संदिग्धों की संदिग्ध गतिविधियां कैद हुई थीं। पकड़े गए सातों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे वाराणसी और आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं। वे अलग-अलग टुकड़ियों में बंटकर विभिन्न राज्यों की ट्रेनों, विशेषकर स्लीपर और जनरल बोगियों में यात्रियों को अपना निशाना बनाते थे। इस गिरोह के सदस्य साधु का भेष धारण कर खुद को किसी प्रतिष्ठित मठ से जुड़ा बताते हैं।

ट्रेनों में 'मौत' बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश
ट्रेनों में ‘मौत’ बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश

ट्रेन में सफर के दौरान वे यात्रियों से मेल-जोल बढ़ाकर उनका विश्वास जीतते हैं और फिर ‘विशेष प्रसाद’ के नाम पर नशीला लड्डू थमा देते हैं।
मांडा की रहने वाली के साथ भी यही हुआ। लड्डू खाते ही वह अचेत हो गई, जिसके बाद लुटेरे उसकी नकदी और चांदी के गहने लेकर चंपत हो गए। पुलिस पूछताछ में यह उजागर हुआ कि यह एक संगठित सिंडिकेट है, जो साधु के भेष का इस्तेमाल केवल अपराध को छिपाने के लिए ‘कवर’ के तौर पर करता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने यात्रियों को अपना शिकार बनाया है और इनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली नशीली दवाओं का स्रोत क्या है।
रेल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यात्रा के दौरान किसी भी अपरिचित व्यक्ति, चाहे वह किसी भी भेष में हो, उसके द्वारा दिए गए प्रसाद या किसी भी खाद्य सामग्री को कतई स्वीकार न करें। धर्म और आस्था की आड़ में किसी अजनबी पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है।

अमर कॉलोनी केस: रेप-हत्या आरोपों के बीच चोरी की थ्योरी आई सामने

अमर कॉलोनी केस: रेप-हत्या आरोपों के बीच चोरी की थ्योरी आई सामने

अमर कॉलोनी केस: रेप-हत्या आरोपों के बीच चोरी की थ्योरी आई सामने
अमर कॉलोनी केस: रेप-हत्या आरोपों के बीच चोरी की थ्योरी आई सामने

नई दिल्ली । दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके में आईआरएस अधिकारी की बेटी की हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि आरोपी पहले से उस घर में रह रहे लोगों की दिनचर्या के बारे में जानता था। इसी को ध्यान में रखते हुए वह घर में घुसा और वारदात को अंजाम दिया। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने दक्षिण-पूर्वी दिल्ली की अमर कॉलोनी में एक वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी की 22 वर्षीय बेटी की हत्या और कथित यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान राहुल मीणा के रूप में हुई है। उसे 22 अप्रैल को कई टीमों के संयुक्त अभियान के बाद द्वारका से पकड़ा गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी पहले ही उस घर से परिचित था और परिवार की रोजमर्रा की दिनचर्या के बारे में जानता था। घटना वाले दिन, जब पीड़िता के माता-पिता बाहर गए हुए थे तो वह कथित तौर पर घर में घुस गया।
सूत्रों ने बताया कि पीड़िता छत पर बने स्टडी रूम में थी, जहां वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी।

अमर कॉलोनी केस: रेप-हत्या आरोपों के बीच चोरी की थ्योरी आई सामने
अमर कॉलोनी केस: रेप-हत्या आरोपों के बीच चोरी की थ्योरी आई सामने

लाश के पास एक टूटा हुआ लैंप मिला। हालांकि उस पर खून के कोई निशान नहीं थे। पुलिस को शक है कि पीड़िता पर किसी भारी चीज से भी हमला किया गया था। हालांकि, जांचकर्ताओं ने घटनास्थल से एक मोबाइल चार्जिंग वायर भी बरामद किया है, जिसकी जांच सबूत के तौर पर की जा रही है। शक है कि हमले के बाद यौन हिंसा भी की गई थी।
जांचकर्ताओं ने बताया कि इसके बाद आरोपी ने घर में रखी कीमती चीजों तक पहुंचने की कोशिश की। उसने कथित तौर पर पीड़िता के फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल करके एक लॉकर खोलने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाया। इसके बाद उसने लॉकर को तोड़कर उसमें से नकदी और गहने निकाले और फरार हो गया। माना जा रहा है कि घटनास्थल से भागने से पहले आरोपी ने अपने कपड़े भी बदल लिए थे।
पुलिस सूत्रों ने आगे बताया कि आरोपी को ऑनलाइन जुए की लत थी और कथित तौर पर वह इस घटना से एक दिन पहले राजस्थान के अलवर में भी इसी तरह के एक अपराध में शामिल था।
हालांकि आरोपी ने लूटपाट को ही अपना मकसद बताया है, लेकिन जांचकर्ता इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि कहीं यह हत्या पहले से सोची-समझी साजिश तो नहीं थी। इस मामले में आगे की जांच जारी है।

हजारीबाग: रांची-पटना हाईवे पर दो ट्रकों की सीधी भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग

हजारीबाग: रांची-पटना हाईवे पर दो ट्रकों की सीधी भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग

हजारीबाग: रांची-पटना हाईवे पर दो ट्रकों की सीधी भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग
हजारीबाग: रांची-पटना हाईवे पर दो ट्रकों की सीधी भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग

हजारीबाग । झारखंड के हजारीबाग जिले के पदमा ओपी थाना क्षेत्र अंतर्गत इटखोरी मोड़ के पास दो मालवाहक ट्रकों की सीधी टक्कर के बाद दोनों वाहनों में भीषण आग लग गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहनों के इंजन से निकली चिंगारी ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया, जिससे हाईवे पर अफरातफरी का माहौल बन गया। राहत की बात यह रही कि इस बड़े हादसे में किसी की जान नहीं गई। इस हादसे की वजह से रांची-पटना रोड पर करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा। जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त ट्रकों में से एक में भारी मात्रा में कोल्ड ड्रिंक लदा था, जबकि दूसरे ट्रक में स्पंज लोड था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भिड़ंत के तुरंत बाद आग लग गई और देखते ही देखते लपटें आसमान छूने लगीं।

हजारीबाग: रांची-पटना हाईवे पर दो ट्रकों की सीधी भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग
हजारीबाग: रांची-पटना हाईवे पर दो ट्रकों की सीधी भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग

घटना की सूचना मिलते ही पदमा ओपी प्रभारी संचित दुबे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे पर यातायात को रोक दिया। आग की भयावहता को देखते हुए तत्काल बरही से फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया गया। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कोल्ड ड्रिंक से लदा ट्रक पूरी तरह जलकर राख हो चुका था।
गनीमत रही कि आग फैलने से पहले ही दोनों वाहनों के चालक और सह-चालक सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। हादसे के बाद सुरक्षा कारणों से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थीं। पदमा ओपी प्रभारी संचित दुबे ने बताया कि दमकल टीम ने आग बुझा दी है और स्थिति अब नियंत्रण में है। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को किनारे हटाने का काम शुरू कर दिया है। फिलहाल हाईवे पर ‘वन-वे’ मार्ग खोलकर यातायात को धीरे-धीरे सामान्य किया जा रहा है।