दिल्ली : सीबीआई ने हेड कांस्टेबल को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया
नई दिल्ली ।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार किया है। सीबीआई को हेड कांस्टेबल के रिश्वत लेने की जानकारी मिली थी। इसी क्रम में सीबीआई ने आरोपी पुलिसकर्मी को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
सीबीआई ने 25 अगस्त को थाना अशोक विहार में तैनात दिल्ली पुलिस के आरोपी हेड कांस्टेबल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोप है कि एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता से उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने के लिए 3 लाख रुपए की मांग की थी। बातचीत के बाद, आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता के खिलाफ लंबित शिकायत को बंद करने के लिए 2 लाख रुपए की रिश्वत लेने पर सहमति जताई।
दिल्ली : सीबीआई ने हेड कांस्टेबल को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया
आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता को 25 अगस्त को ही 1 लाख रुपए का आंशिक भुगतान करने का निर्देश दिया। सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी हेड कांस्टेबल को एक लाख रुपए की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। शिकायतकर्ता से आंशिक भुगतान के रूप में एक लाख रुपए वसूले गए। फिलहाल, सीबीआई ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है।
भ्रष्ट लोक सेवकों के विरुद्ध सीबीआई की सख्त कार्रवाई भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के प्रति उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सीबीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जिन नागरिकों को भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिलते हैं या जिनसे सरकारी अधिकारियों की ओर से रिश्वत की मांग की जाती है, तो वे व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, सीबीआई ने नागरिकों के लिए 011-24367887 और मोबाइल नंबर 9650394847 भी साझा किए हैं, जहां वे अपनी शिकायत दे सकते हैं।
भीलवाड़ा जिले के सदर थाना पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए इंजन चोरी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई अपराध की रोकथाम और पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में पुलिस द्वारा किए गए तेज़ और प्रभावी प्रयास का परिणाम है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुवाणा निवासी सांवरमल पुत्र जगन्नाथ जाट और किशन पुत्र विनोद लुहार के रूप में हुई है। पुलिस की यह कार्रवाई स्थानीय लोगों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करने वाली है और अपराधियों में कानून का भय पैदा करने वाली मानी जा रही है।
थानाधिकारी कैलाश विश्नोई ने बताया कि 6 अगस्त को सिदड़ियास निवासी रमेश पुत्र कन्हैयालाल तेली ने सदर थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता रमेश ने बताया कि उसके मकान के बाहर दो पानी के इंजन रखे हुए थे, जो सुवाणा के पास प्रियदर्शनी कॉलोनी स्थित मकान में रखे गए थे। रमेश ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जब वह अगली सुबह वहां पहुंचा, तो देखा कि दोनों इंजन गायब थे। उन्होंने अंदेशा जताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा रात के अंधेरे में यह चोरी की गई है।
पुलिस ने शिकायत मिलने के तुरंत बाद संज्ञान लेते हुए बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 305 ए के तहत मामला दर्ज किया और घटना की जांच शुरू की। थानाधिकारी कैलाश विश्नोई के नेतृत्व में गठित टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी सहायता के साथ-साथ पारंपरिक पुलिसिंग के जरिए संदिग्धों की तलाश की गई। इसके अलावा मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया, जिसके चलते कुछ ही समय में दो संदिग्धों के नाम पुलिस के सामने आए।
जांच के दौरान सामने आया कि सुवाणा निवासी सांवरमल और किशन कुछ दिनों से क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त थे और उनके बारे में पूर्व में भी छोटी-मोटी चोरी की घटनाओं में संलिप्तता की सूचनाएं मिली थीं। इन सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और चोरी किए गए दोनों इंजन की जानकारी दी। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर चोरी हुए इंजन भी बरामद कर लिए हैं।
इस मामले में कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम में हेड कांस्टेबल जयप्रकाश, सुरत सिंह, महेन्द्र सिंह गुर्जर और विनोद कुमार शामिल थे। इन सभी अधिकारियों ने अपनी सजगता, समर्पण और सूझबूझ से इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस टीम की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से यह साफ होता है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने और अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस तत्पर है।
भीलवाड़ा जिले में इंजन चोरी जैसी घटनाएं अक्सर किसानों और आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती हैं। पानी के इंजन ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और घरेलू कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। ऐसे में जब कोई इंजन चोरी हो जाता है, तो उसका सीधा असर पीड़ित के जीवन पर पड़ता है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से न केवल रमेश को न्याय मिला है, बल्कि अन्य नागरिकों में भी यह विश्वास जगा है कि अगर वे कानून के सहारे जाएं, तो उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा।
इंजन चोरी के आरोप में दो गिरफ्तार
इस घटना से एक और महत्वपूर्ण पहलू भी सामने आता है—अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे तरीके और पुलिस की अपराध से निपटने की रणनीति। जिस तरह से आरोपी रात के अंधेरे में चोरी कर गए, वह दर्शाता है कि अपराधी किस हद तक सोच-समझकर वारदात को अंजाम देने की योजना बनाते हैं। लेकिन वहीं, पुलिस की सूझबूझ और तेजी यह दर्शाती है कि अपराधियों के मंसूबों को नाकाम किया जा सकता है, बशर्ते कि पुलिस और जनता मिलकर काम करें।
इस मामले में पुलिस द्वारा जिस तत्परता और दक्षता के साथ काम किया गया, वह सराहनीय है। थानाधिकारी कैलाश विश्नोई और उनकी टीम की मेहनत से एक महत्वपूर्ण संदेश गया है कि अपराध चाहे कितना भी छोटा या बड़ा हो, कानून का शिकंजा हर अपराधी तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही, इस मामले ने यह भी स्पष्ट किया है कि तकनीक और परंपरागत पुलिसिंग के समन्वय से जटिल से जटिल मामले भी सुलझाए जा सकते हैं।
भीलवाड़ा पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इन आरोपियों का संबंध किसी संगठित गिरोह से तो नहीं है। कई बार देखा गया है कि ऐसे आरोपी एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा होते हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं और बाद में चोरी की संपत्ति को बेचकर लाभ कमाते हैं। यदि इन आरोपियों से और जानकारी मिलती है, तो अन्य चोरी के मामलों का भी खुलासा हो सकता है। पुलिस इस दिशा में भी अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है।
इस घटना के उजागर होने के बाद स्थानीय नागरिकों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है। सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार माध्यमों में भी इस खबर को प्रमुखता से जगह दी गई है। लोगों ने उम्मीद जताई है कि पुलिस आगे भी इसी तरह से सजग रहेगी और अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाएगी। साथ ही, आम जनता से भी यह अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि समाज में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस और नागरिकों के बीच एक मजबूत विश्वास और सहयोग की आवश्यकता है। यदि लोग सजग रहें और पुलिस को समय पर सही जानकारी दें, तो किसी भी प्रकार के अपराध को रोका जा सकता है। यह मामला पुलिस और समाज दोनों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है।
अंततः यह कहा जा सकता है कि सदर थाना पुलिस ने इस मामले में जो तत्परता और संवेदनशीलता दिखाई है, वह प्रशंसनीय है। उनकी कार्रवाई न केवल पीड़ित रमेश के लिए राहत का कारण बनी, बल्कि समूचे क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश भी पहुंचा। ऐसे प्रयास न केवल अपराधियों में भय पैदा करते हैं, बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास का माहौल भी बनाते हैं। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि भीलवाड़ा पुलिस आगे भी इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी और समाज में कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाती रहेगी।
मुंबई एयरपोर्ट पर 1.02 करोड़ का सोना जब्त, मोम में छिपाकर की गई थी तस्करी
मुंबई, 25 अगस्त
मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग ने एक बार फिर सतर्कता और कड़ी निगरानी से तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम करते हुए 24 कैरेट शुद्ध सोने की डस्ट की तस्करी का पर्दाफाश किया है। यह घटना 25 अगस्त को हुई जब ड्यूटी पर तैनात कस्टम अधिकारियों ने एक संदिग्ध यात्री को रोका और गहन जांच में उसके शरीर के अंदर छिपाकर लाए गए 1075 ग्राम सोने की डस्ट को जब्त किया। इस सोने की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग ₹1.02 करोड़ आंकी गई है।
यह मामला इसलिए और भी चौंकाने वाला है क्योंकि आरोपी ने अत्यंत जोखिम भरे तरीके से तस्करी को अंजाम देने की कोशिश की। उसने सोने की डस्ट को वैक्स (मोम) में भरकर चार छोटे टुकड़ों में छिपाया और उन टुकड़ों को अपने शरीर के अंगों में इस तरह छिपा लिया कि सामान्य जांच में उसका पकड़ना बेहद मुश्किल था। हालांकि, मुंबई कस्टम्स की सतर्क नजर और अनुभव ने उसे पकड़ने में सफलता पाई और एक बड़ा अपराध समय रहते सामने लाया जा सका।
पकड़े गए व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी गई है क्योंकि मामला अभी जांच के अधीन है। यह यात्री सऊदी अरब के जेद्दाह से मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आया था। कस्टम अधिकारियों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसे पूछताछ और जांच के लिए अलग ले जाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में वह सामान्य नजर आया, लेकिन जब मेडिकल एक्स-रे जांच की गई, तो अधिकारियों के सामने सच्चाई उजागर हो गई। उसके शरीर के अंदर चार वैक्स के पैकेट पाए गए, जिनमें शुद्ध सोने की डस्ट भरकर छिपाई गई थी।
यह तरीका जितना चतुराई भरा प्रतीत होता है, उतना ही खतरनाक भी है। शरीर के अंदर किसी भी प्रकार का रसायन, धातु या कठोर वस्तु छिपाना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गतिविधियां न केवल कानूनी रूप से गलत हैं, बल्कि जीवन के लिए भी घातक साबित हो सकती हैं। इस मामले में आरोपी ने तस्करी के लोभ में अपने जीवन को भी खतरे में डाला।
मुंबई कस्टम्स के अधिकारियों ने जब्त किए गए सोने की जांच की तो पाया कि वह 24 कैरेट की शुद्धता वाला था, जो कि सोने की सबसे उच्च गुणवत्ता मानी जाती है। इसका कुल वजन 1075 ग्राम निकला, जो कि किसी एक व्यक्ति द्वारा शरीर में छिपाकर लाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। इससे यह संकेत मिलता है कि आरोपी इस तस्करी को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित हो सकता है या उसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है।
मुंबई एयरपोर्ट पर 1.02 करोड़ का सोना जब्त, मोम में छिपाकर की गई थी तस्करी
मुंबई कस्टम्स विभाग ने आरोपी को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया है और उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी हैं, जिनके आधार पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि यह तस्करी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट का हिस्सा हो सकती है। इस दिशा में कस्टम विभाग की एक विशेष जांच टीम काम कर रही है, जो आरोपी से पूछताछ कर इस तस्करी नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
सोने की तस्करी भारत में कोई नई बात नहीं है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के उपभोक्ता देशों में से एक है, और इसी वजह से यहां अवैध तरीके से सोना लाने की कोशिशें अक्सर होती रहती हैं। मुंबई एयरपोर्ट, जो देश के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में से एक है, पर आए दिन तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं। लेकिन कस्टम विभाग की मुस्तैदी और आधुनिक तकनीक के सहारे इन पर कड़ी नजर रखी जाती है।
इस ताजा मामले में भी कस्टम विभाग की त्वरित कार्रवाई सराहनीय रही। उन्होंने न केवल तस्कर को समय रहते पकड़ लिया, बल्कि इस पूरे मामले को विधिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाते हुए एक सशक्त संदेश दिया है कि कानून से बचना आसान नहीं है। यह कार्रवाई भविष्य के तस्करों को एक चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है।
मुंबई कस्टम्स विभाग ने इस घटना के बाद एक सार्वजनिक अपील जारी की है, जिसमें नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे किसी भी तरह की अवैध गतिविधियों से दूर रहें और अगर कहीं कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। विभाग ने यह भी कहा है कि सीमा शुल्क अधिकारियों की सतर्कता और कड़ी निगरानी के चलते ही इस प्रकार के अपराध पकड़े जाते हैं, लेकिन इसमें आम जनता का सहयोग भी आवश्यक होता है।
कस्टम विभाग ने हवाई अड्डों पर सुरक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने का संकेत दिया है। इसके तहत यात्रियों की गहन जांच, एक्स-रे और मेडिकल जांच जैसे उपायों को और सख्त किया जा सकता है, ताकि शरीर के अंदर छिपाकर लाए जा रहे सामान की पहचान की जा सके। विभाग ने यह भी कहा है कि तस्करी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं और इन्हें रोकने के लिए हर संभव तकनीकी और मानव संसाधन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की तस्करी को बढ़ावा देने वाले कारणों में से एक बड़ा कारण सोने पर लगाया गया आयात शुल्क है। इसकी वजह से कुछ लोग तस्करी को एक आसान विकल्प मानते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि तस्करी न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इस तरह के मामलों में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि पकड़े गए व्यक्ति के पीछे की कड़ियों को खोजा जाए। अकेले व्यक्ति से सोना छिपाकर लाना संभव नहीं होता, इसके लिए पूरा नेटवर्क काम करता है, जिसमें विदेशों में बैठे सप्लायर, भारत में रिसीवर और लोकल वितरक शामिल हो सकते हैं। इसीलिए कस्टम विभाग की जांच का दायरा केवल आरोपी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी लोगों और संपर्कों को भी खंगाला जाएगा जो इस तस्करी के नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने फिर से यह साबित कर दिया है कि भले ही तस्करी के तरीके बदलते रहें, लेकिन अगर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क और सजग रहें तो ऐसे प्रयासों को रोका जा सकता है। कस्टम अधिकारियों की सतर्कता और संवेदनशीलता के कारण ही यह सोने की तस्करी नाकाम हुई और देश को एक बड़ा आर्थिक नुकसान होने से बचा लिया गया।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि यह मामला देश की सीमा सुरक्षा और आर्थिक नीति से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों से यह संदेश भी जाना चाहिए कि किसी भी तस्करी या अवैध व्यापार की गतिविधियों में शामिल व्यक्ति को कानून के शिकंजे से नहीं बचाया जा सकता। मुंबई कस्टम्स की यह कार्रवाई समाज में एक नजीर बनकर सामने आई है और निश्चित ही इससे आने वाले समय में अवैध गतिविधियों पर कुछ हद तक लगाम लगेगी।
मुंबई कस्टम्स की इस कार्यवाही ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि चाहे तस्कर कितनी भी चालाकी से तस्करी का प्रयास करें, कानून और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तकनीकी दक्षता से बच पाना आसान नहीं है। यह कार्रवाई कानून, व्यवस्था और सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो देश के आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भारत विकास परिषद 2 सितंबर को लगाएगी विशाल रक्तदान शिविर
भारत विकास परिषद की लालसोट शाखा द्वारा आयोजित होने जा रहा
यह रक्तदान एवं स्वास्थ्य जांच शिविर न केवल सेवा का कार्य है, बल्कि एक ऐसा जन-जागरण अभियान है जो समाज के हर व्यक्ति को जीवन बचाने की प्रेरणा देता है। 2 सितंबर को पुलिस थाने के सामने स्थित संस्कृत पाठशाला में प्रस्तावित यह शिविर, परिषद के उन प्रयासों का प्रतीक है जो वह समाज की भलाई और मानव सेवा के लिए निरंतर करती आ रही है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ‘रक्तदान महादान’ के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में, जैसे दुर्घटना, ऑपरेशन या गंभीर बीमारियों के समय रक्त की कमी से किसी भी व्यक्ति की जान न जाए। परिषद इस बात को भलीभांति समझती है कि जीवन बचाने के लिए रक्तदान से सरल और प्रभावशाली कोई और कार्य नहीं हो सकता।
परिषद के अध्यक्ष श्री अमित बड़ाया ने इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि रक्तदान एक महापुण्य कार्य है और इसकी जितनी आवश्यकता आज के समय में है, शायद पहले कभी नहीं रही। उनका यह भी मानना है कि युवाओं, सामाजिक संगठनों और प्रत्येक जागरूक नागरिक को इस कार्य में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने अपील की कि अधिक से अधिक लोग आगे आएं और रक्तदान करें, जिससे किसी जरूरतमंद को समय पर जीवनरक्षक रक्त मिल सके। अध्यक्ष का यह भाव समाज में सेवा भावना को प्रोत्साहित करता है और जनमानस को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।
शाखा के सेवा गतिविधि संयोजक लोकेंद्र जैन ने बताया कि इस रक्तदान शिविर के साथ-साथ एक सामान्य स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित किया जाएगा। यह पहल दर्शाती है कि परिषद केवल रक्तदान तक ही सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य के लिए भी चिंतित है। इस शिविर में ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांचें की जाएंगी, जो व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य का एक आधारभूत मूल्यांकन प्रस्तुत करेंगी। इससे न केवल रक्तदाताओं को, बल्कि उपस्थित नागरिकों को भी अपने स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। यह कार्यक्रम निवारक स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक सराहनीय पहल है।
बैठक में शिविर की तैयारियों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसमें पंजीकरण की प्रक्रिया, शिविर स्थल की व्यवस्थाएं, मेडिकल टीम की उपलब्धता और रक्त संग्रहण की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। यह योजना दर्शाती है कि परिषद ने इस आयोजन को अत्यंत गंभीरता से लिया है और उसे यह भलीभांति समझ है कि एक सफल आयोजन के लिए सुसंगठित व्यवस्थाएं और समर्पित टीम आवश्यक होती है। बैठक में शामिल सभी सदस्यों ने समन्वयपूर्वक काम करते हुए यह संकल्प लिया कि शिविर के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और हर कार्य समयबद्ध तरीके से सम्पन्न हो।
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रांतीय प्रकल्प प्रभारी विष्णु अग्रवाल सहित नीरज शर्मा, धर्मेंद्र अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अवधेश गुप्ता, प्रहलाद रड़बा, आशीष सेठी, हंसराज गोयल, धर्मचंद अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, किशन खंडेलवाल, राजेश सोनी और अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे। इन सभी का एक साथ आना इस बात का प्रतीक है कि समाज सेवा के कार्यों में जब सामूहिक प्रयास होते हैं, तो उसके परिणाम भी प्रभावशाली और दूरगामी होते हैं। इन सभी सदस्यों ने अपने विचार साझा किए और इस पुनीत कार्य को सफल बनाने के लिए एकजुटता और समर्पण के साथ काम करने का संकल्प दोहराया।
भारत विकास परिषद 2 सितंबर को लगाएगी विशाल रक्तदान शिविर
भारत विकास परिषद का यह आयोजन वास्तव में उन सामाजिक मूल्यों को जीवंत करता है, जिनमें सेवा, सहयोग और सद्भाव प्रमुख हैं। यह शिविर केवल रक्त एकत्रित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त मंच है। इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं और लोगों को यह अहसास कराते हैं कि एक छोटा सा कार्य, जैसे रक्तदान, किसी के जीवन में कितनी बड़ी राहत बन सकता है।
भारत जैसे विशाल देश में जहां हर दिन हजारों लोग रक्त की कमी के कारण जीवन से संघर्ष कर रहे होते हैं, ऐसे शिविर उनके लिए आशा की एक किरण हैं। लालसोट शाखा द्वारा आयोजित यह शिविर केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक सोच है – एक विचारधारा है – जो समाज को अपनी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करती है। इस प्रकार की पहल हमें एक बेहतर, स्वस्थ और जागरूक समाज की ओर अग्रसर करती है।
इस शिविर की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि समाज के कितने लोग इसमें अपनी भागीदारी निभाते हैं। परिषद ने जो अपील की है, वह हर नागरिक के दिल से जुड़ने योग्य है। यह केवल एक सामाजिक संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह जब-जब ऐसे आयोजनों की जानकारी पाए, तो उसमें अवश्य भाग ले। रक्तदान करने से न केवल किसी की जान बचाई जा सकती है, बल्कि इससे स्वयं रक्तदाता को भी स्वास्थ्य लाभ होता है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि नियमित रूप से रक्तदान करने से शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया सक्रिय रहती है और रक्तसंचार बेहतर होता है।
भारत विकास परिषद की यह पहल निश्चित ही एक सराहनीय कदम है और इसे जितना अधिक प्रचार और समर्थन मिलेगा, उतना ही अधिक इसका सामाजिक प्रभाव पड़ेगा। ऐसे आयोजनों से युवाओं में सेवा का भाव उत्पन्न होता है, वृद्धों को सम्मान मिलता है और समाज में एकजुटता की भावना मजबूत होती है। रक्तदान जैसे कार्यों के माध्यम से सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को सुदृढ़ किया जा सकता है। परिषद ने यह संदेश दिया है कि अगर हम सब मिलकर कार्य करें, तो कोई भी सेवा असंभव नहीं है।
आने वाले समय में अगर ऐसे शिविर लगातार आयोजित होते रहें, तो निश्चित ही समाज में रक्त की कमी जैसी समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही, स्वास्थ्य जांच जैसे छोटे प्रयास लोगों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हैं, जिससे वे समय रहते उपचार ले सकें और स्वस्थ जीवन जी सकें। यह शिविर केवल रक्तदान और जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक नई सामाजिक चेतना का प्रारंभ है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि 2 सितंबर को होने वाला यह शिविर न केवल एक आयोजन है, बल्कि समाज सेवा की एक गूंज है, जो हर व्यक्ति को अपनी भागीदारी निभाने का आह्वान करता है। भारत विकास परिषद, लालसोट शाखा का यह प्रयास आने वाले समय में एक मिसाल बनेगा और अन्य संगठनों को भी प्रेरित करेगा कि वे भी ऐसे जनोपयोगी कार्यों में आगे आएं। जब सेवा और समर्पण का संगम होता है, तभी एक स्वस्थ और मजबूत समाज का निर्माण संभव होता है। यही इस शिविर का मूल उद्देश्य है – सेवा, सहयोग और समर्पण के साथ जन-जन को जोड़ना और जीवन को बचाना।
जम्मू : बाढ़ में 3500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
जम्मू ।
जम्मू जिले में लगातार भारी बारिश के कारण बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके बाद जिला प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवकों ने मिलकर त्वरित बचाव अभियान चलाया। इस अभियान के तहत 3500 से अधिक लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। प्रशासन का मुख्य ध्यान संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को निकालने, उन्हें अस्थायी आश्रय, भोजन, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को बहाल करने पर है।
आरएस पुरा में 85 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। परगवाल के हमीरपुर कोना और गुजराल गांव से 347 निवासियों को अखनूर और जम्मू में स्थानांतरित किया गया। उत्तर जम्मू की नई बस्ती और लोअर मुठी से 160 लोगों को मुठी के कैलाश रिसॉर्ट्स में शरण दी गई, जहां लंगर की व्यवस्था की गई है। नगरोटा में 100 लोगों को कोंडोली मंदिर ले जाया गया, और मरम्मत दल राजमार्गों से मलबा हटाकर आपातकालीन सेवाओं के लिए मार्ग खोल रहे हैं।
जम्मू : बाढ़ में 3500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
सुचेतगढ़ के बदयाल कजियां और टिब्बा बैंस में मकान ढहने के बाद दो परिवारों के 15 सदस्यों को बचाया गया। जम्मू के इंद्र नगर और बल्लोल में 150 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया, कुछ को बृज नगर में स्थानांतरित किया गया। सित्तरियाला में 45 लोगों को निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जौरियां में राहत शिविर स्थापित किया गया। सतवारी में 300 निवासियों को एचएसएस सतवारी में स्थानांतरित किया गया, जहां सामुदायिक रसोई के माध्यम से भोजन और पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
खौर और परगवाल में इंद्री, मान चक, बकोरे, हमीरपुर कोना और गजराल से 500 से अधिक लोगों को बचाया गया। खौर में 48 लोगों को सरकारी हाई स्कूल गर्खल और 50 लोगों को सामुदायिक भवन गर्खल में रखा गया है। जिला प्रशासन ने यूथ हॉस्टल जम्मू सहित कई राहत शिविर स्थापित किए हैं। मुथी और सतवारी में सामुदायिक रसोई संचालित हो रही हैं, और सभी राहत स्थलों पर चिकित्सा दल तैनात हैं।
उपायुक्त डॉ. राकेश मिन्हास ने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और राहत सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और स्वयंसेवकों के समन्वित प्रयासों की सराहना की, जिनके कारण कोई जनहानि नहीं हुई। स्थिति पर नजर रखी जा रही है और राहत कार्यों की प्रगति के साथ और जानकारी साझा की जाएगी।
1988 बैच IPS अनीश दयाल सिंह डिप्टी NSA बने, 30 साल IB में सेवा दी
केंद्र सरकार ने 24 अगस्त को रिटायर्ड IPS ऑफिसर अनीश दयाल सिंह को भारत का डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (Deputy NSA) नियुक्त किया है। वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवाल को रिपोर्ट करेंगे। अनीश 31 दिसंबर, 2024 को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी CRPF के डायरेक्टर जनरल के पद से रिटायर हुए थे। इससे पहले उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), NSG, ITBP, SSB और CRPF जैसे महत्वपूर्ण संगठनों का नेतृत्व किया है। अनीश की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुई। कॉलेज भी उन्होंने यहीं रहते हुए पूरा किया। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स यानी BA में अपना ग्रेजुएशन किया है।
इसके बाद अनीश ने UPSC सिविल सर्विस की परीक्षा दी और उसमें क्वालिफाई हुए। वे 1988 बैच के IPS ऑफिसर बने और उन्हें मणिपुर कैडर मिला। IPS बनने के बाद उनकी ट्रेनिंग तेलंगाना (तब आंध्रप्रदेश) के हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी यानी (SVPNPA) में हुई। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, अनीश 21 अगस्त, 1989 को IPS में औपचारिक रूप से शामिल हुए। उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में काम करने का मौका मिला। उन्होंने लगभग 30 सालों तक IB में काम किया। इस दौरान जॉइंट डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अपनी सेवाएं दी। वो काउंटर-टेररिज्म और इंटरनल सिक्योरिटी से जुड़े डिपार्टमेंट में शामिल थे। अनीश दयाल सिंह को साल 2004 और 2012 में विशिष्ट सेवा के लिए इंडियन पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस से सम्मानित किया गया था।
1988 बैच IPS अनीश दयाल सिंह डिप्टी NSA बने, 30 साल IB में सेवा दी
ITBP के DG रह चुके हैं
2022 में, वे 4 सीनियर बैचमेट्स (अनीश दयाल सिंह, मनोज यादव, मनोज लाल, अमिताभ रंजन) के साथ IB चीफ पद के लिए सुपर्सीडेड हुए। इसके बाद तपन डेका को IB चीफ बनाया गया। 3 अक्टूबर, 2022 को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के डायरेक्टर जनरल बने। इसके साथ ही उन्हें सशस्त्र सीमा बल (SSB) के डायरेक्टर जनरल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।
CRPF के DG रहते हुए रिटायर्ड हुए
29 नवंबर, 2023 के सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी CRPF का एडिशनल चार्ज मिला। फिर 28 दिसंबर, 2023 को अनीश को CRPF का डायरेक्टर जनरल बनाया गया। 31 दिसंबर, 2024 तक उन्होंने DG के रूप में काम किया। फिर इसी पद से रिटायर्ड हुए।
CRPF के 130 बटालियनों का पुनर्गठन किया
CRPF में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 30 से अधिक फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेसेस (FOBs) स्थापित किए। 4 नई बटालियनों का गठन किया। साथ ही, कुल 130 बटालियनों का पुनर्गठन किया। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पहले विधानसभा चुनावों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने में CRPF की भूमिका की भी देखरेख की।
सहारनपुर एसएसपी आशीष तिवारी के निर्देशन मेसंघन चेकिंग अभियान लगातार जारी
सहारनपुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जनपदीय पुलिस द्वारा बैंक तथा एटीएम के आसपास खड़े संदिग्ध व्यक्ति तथा वाहनों की लगातार संघन चैकिंग की जा रही है। पुलिस बैंकों के आसपास खडे संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रही है ताकि अपराधों व खासकर बाइक चोरी को रोका जा सके और बैंक व ए टीएम की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके इस अभियान के तहत बैंकों में सुरक्षा उपकरणों जैसे सीसीटीवी कैमरों और अलार्म सिस्टम की भी जांच की जाती है और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जाती है। तथा सुरक्षा-व्यवस्था सम्बन्धी उपकरण को चैक कर बैंक सुरक्षा कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
सहारनपुर जिले में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए एसएसपी आशीष तिवारी ने 108 पुलिसकर्मियों का तबादला कर दिया है। ये सभी पुलिसकर्मी पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही थाने में तैनात थे। फेरबदल की सूची में मुख्य आरक्षी, आरक्षी और महिला आरक्षी शामिल हैं। एसएसपी कार्यालय के अनुसार, यह स्थानांतरण पुलिस बल के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
सहारनपुर एसएसपी आशीष तिवारी के निर्देशन मेसंघन चेकिंग अभियान लगातार जारी
अधिकारियों का मानना है कि एक ही स्थान पर अधिक समय तक रहने से कार्यक्षमता प्रभावित होती है। साथ ही स्थानीय प्रभाव भी बढ़ता है। यह कई बार विभागीय निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।एसएसपी ने इस फेरबदल को नियमित प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्षमता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
पुलिस विभाग के इस कदम से विभागीय कर्मचारियों में हलचल देखी जा रही है। वहीं आम जनता ने इस निर्णय को सकारात्मक बताया है। लोगों का कहना है कि नए पुलिसकर्मियों की तैनाती से कार्यप्रणाली में बदलाव आएगा। जिले में पहले भी समय-समय पर इस प्रकार के फेरबदल होते रहे हैं। लेकिन एक साथ 100 से अधिक पुलिसकर्मियों का तबादला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दौसा में 13 सितंबर को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
दौसा।
आगामी 13 सितंबर 2025 को दूसरी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की अगुवाई में दौसा में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाना निश्चित है, जिसका उद्देश्य राजीनामा योग्य मामलों का आपसी समझौते पर आधारित निपटारा सुनिश्चित करना है। इसकी तैयारियों की समीक्षा और दिशा-निर्देश हेतु हाल ही में एक विस्तृत बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश और DLSA अध्यक्ष हुकम सिंह राजपुरोहित ने की।
मोहापौर संतोष अग्रवाल (DLSA सचिव) ने बताया कि बैठक में सभी न्यायिक अधिकारियों को आदेशित किया गया कि वे राजीनामा योग्य मामलों की पहचान करें और पक्षकारों के बीच प्री-काउंसलिंग एवं समझौता वार्ता आयोजित करवा कर निष्पादन सुनिश्चित करें। विशेष रूप से धारा 138 NI एक्ट (चेक बाउंस) एवं धन वसूली मामलों को प्रमुखता दी गई। बैठक में न्यायिक अधिकारियों—प्रेम राजेश, रेखा राठौड़, बृजेश कुमार, रविकांत सोनी, उमेश वीर, सीमा करोल, रविकांत मीना, अंकिता दायमा, कविता मीना, रचना बालोत, पुलकित शर्मा आदि—की उपस्थिति रही।
लोक अदालत: न्याय की तेज और सस्ती रास्ता
लोक अदालत एक ऐसा वैकल्पिक विवाद निपटान मंच है जहाँ अदालतों में लंबित या मुकदमेबाजी शुरू होने से पहले (pre-litigation) के मामलों को आपसी समझौते से हल किया जाता है। यह व्यवस्था Legal Services Authorities Act, 1987 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर लागू की गई है। इससे प्राप्त लाभों में शामिल हैं:
न्याय प्रक्रिया में व्यय और समय की बचत, क्योंकि सुनवाई सामान्य न्यायालयों की अपेक्षा तेज और सरल होती है।
कोर्ट फीस वापस प्राप्त हो सकती है यदि मामला लोक अदालत में समझौते पर निपट जाता है।
फैसले अंतिम और बाध्यकारी होते हैं, जिन्हें सामान्य अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती ।
इन सुविधाओं के कारण लोक अदालत आम जनता में न्याय की पहुंच को सरल, किफायती और प्रभावी बनाती है।
दौसा में लोक अदालत का प्रसंग
दौसा में इस लोक अदालत आयोजन से पहले की गई तैयारियों का अभिप्रेत उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अधिकांश राजीनामा योग्य मुकदमे, विशेषकर चेक बाउंस व मनी रिकवरी, समय रहते समाधानित हों। प्रारंभिक पहचान (pre-identification) और प्री-काउंसलिंग इस प्रक्रिया की रीढ़ है, ताकि मुद्दों के पक्षकार समझौते के लिए प्रेरित हो सकें। यह प्रक्रिया लोक अदालत में सुनवाई से पहले भी अपनाई जा रही है, जैसा कि अन्य जिलों में होता आया है।
उदाहरण स्वरूप, 2023 में दौसा में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 13,467 प्रकरणों को समझौता वार्ता के लिए चिन्हित किया गया था, जिनमें लंबित और प्रिलिटिगेशन दोनों प्रकार के विवाद शामिल थे। इसी तरह, अन्य राज्यों जैसे गुजरात, पंजाब (पटियाला), बिहार (पूर्णिया) में भी 13 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन की तैयारियाँ चल रही हैं, जिनमें चेक बाउंस, मनी रिकवरी, MACT, श्रम विवाद और अन्य सिविल एवं क्रिमिनल कंपाउंडेबल मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है
दौसा में 13 सितंबर को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
बैठक की भूमिका और रणनीतियाँ
दौसा की बैठक में निदर्शित मुख्य बिंदु थे:
राजीनामा योग्य मामलों की पहचान — प्राथमिकता के आधार पर ज़्यादा से ज़्यादा प्रकरणों को लोक अदालत में लाना।
प्री-काउंसलिंग — पक्षकारों के बीच वार्ता करवा कर आपसी समझौते की संभावनाएँ बढ़ाना।
स्थानीय न्यायिक अधिकारियों और DLSA का समन्वय — बैठक में उपस्थित प्रेम राजेश, रेखा राठौड़ सहित अन्य न्यायिक अधिकारी इस कार्य में अहम भूमिका निभाएंगे।
धारा 138 NI एक्ट और धन वसूली मामलों को विशेष महत्व — क्योंकि ये अक्सर राजीनामा योग्य और समझौते की संभावना रखने वाले प्रकरण होते हैं।
इन रणनीतियों से न केवल मामले सुचारू रूप से निपटेंगे, बल्कि न्याय का लाभ आम जनता तक पहुंचने में और तेजी आएगी।
उम्मीद और सकारात्मक प्रभाव
इस लोक अदालत आयोजन से संभवतः निम्नलिखित सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं:
अदालतों पर फैलता बोझ कम होगा, क्योंकि कई मामले समझौते से निपट जाएंगे।
न्याय उपलब्धता में वृद्धि — लोग समय और खर्च की बचत के साथ न्याय पा सकेंगे।
स्थानीय न्याय तंत्र में विश्वास बढ़ेगा, क्योंकि संवेदनशील और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
निकटता और किफ़ायती व्यवस्था : लोक अदालत ज़्यादा करीब, तेज और कम शुल्क वाली व्यवस्था होती है।
निष्कर्ष
दौसा में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल है, जो न्याय तंत्र को सरल, न्यायसंगत और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राजीनामा योग्य मामलों की पहचान, प्री-काउंसलिंग, और लोक अदालत के benches की स्थापना की तैयारियों से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन न्याय के मार्ग को संक्षिप्त और प्रभावी बनाना चाहता है।
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आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही सीएम रेखा गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा
नई दिल्ली ।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को लोदी एस्टेट स्थित सरदार पटेल विद्यालय में इलेक्ट्रिक स्कूल बस सेवा की शुरुआत की। इस दौरान उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और सांसद बांसुरी स्वराज भी मौजूद रहीं। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल विद्यालय ने इलेक्ट्रिक बस बेड़े में शामिल होकर प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया है। इस कदम से बच्चों की यात्रा और भी सुरक्षित व आधुनिक होगी। साथ ही दिल्ली को स्वच्छ वायु और हरित भविष्य की राह मिलेगी। उन्होंने विद्यालय की इस उपलब्धि पर प्रिंसिपल, मैनेजमेंट और टीचर्स की सराहना की।
रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज पूरा देश हरित भारत, स्वच्छ भारत के संकल्प को आगे बढ़ा रहा है। हमारी सरकार शीघ्र ही सभी स्कूलों में हरित प्रतियोगिताएं शुरू करेगी, ताकि हर बच्चा प्रकृति, स्वच्छता और सतत विकास को अपने जीवन का हिस्सा बना सके। साथ ही स्कूलों को इलेक्ट्रिक बस सेवा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही, जहां सिर्फ गंदगी नजर आती थी। अब उपराज्यपाल और सरकार के प्रयासों से गंदगी की जगह पार्क और हरित क्षेत्र विकसित हो चुके हैं। इसी कड़ी में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ हवा की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। दिल्ली के सरदार पटेल स्कूल में बच्चों की आवाजाही के लिए इलेक्ट्रिक बसों की फ्लीट को जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस कदम को दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही सीएम रेखा गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा
रेखा गुप्ता ने कहा कि अगर दिल्ली के सभी स्कूलों में बच्चों के परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल किया जाए तो शहर के प्रदूषण स्तर को कई गुना कम किया जा सकता है। उन्होंने सरदार पटेल स्कूल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल न केवल बच्चों को प्रकृति से जोड़ती है, बल्कि उन्हें बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी सिखाती है। उन्होंने कि स्कूल ही बच्चों को अच्छे संस्कार और सही दिशा देते हैं। बच्चे अगर शुरू से ही यह समझेंगे कि सफाई, पर्यावरण संरक्षण और देश को स्वच्छ बनाए रखना ही असली देशभक्ति है तो वे कभी गलत दिशा में नहीं जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार अब यह सुनिश्चित करेगी कि हर स्कूल में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी प्रतियोगिताएं और अभियान चलाए जाएं। इससे बच्चों को साफ-सुथरे माहौल में जीने की प्रेरणा मिलेगी और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ पर्यावरण छोड़ पाएंगे। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल स्कूल की यह पहल मिसाल है और सरकार का प्रयास रहेगा कि आने वाले समय में हर स्कूल इलेक्ट्रिक बसों की फ्लीट से जुड़ सके। उन्होंने इसे दिल्ली के भविष्य और बच्चों की सेहत के लिए एक बेहतर कदम बताया।
जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग
परिचय
मालपुरा। सेवायत संघ द्वारा जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन के माध्यम से मालपुरा नगर पालिका की आगामी वार्ड पार्षदों के उपचुनाव की मतदान तिथि को बदलने की मांग की गई है। संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने इस मांग के पीछे महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक कारण प्रस्तुत किए हैं।
मांग की पृष्ठभूमि
3 सितंबर 2025 को जलझूलनी एकादशी का महत्त्वपूर्ण त्योहार मनाया जाएगा, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की डोल यात्रा निकाली जाती है और पूरे नगर में उत्सव के स्वरूप में इसी कार्यक्रम को मनाया जाता है। इस कारण जिले में अवकाश घोषित किया जाता रहता है और अधिकांश लोग इस पावन अवसर का उत्सवभार और आध्यात्मिकता में सहभागी होते हैं।
सेवायत संघ के प्रतिनिधियों की भूमिका
ज्ञापन सौंपने के समय उपस्थित थे:
श्री चंद्रमोहन उपाध्याय
श्री ज्ञानेंद्र रावल
श्री अमरचंद मेंदवासिया
श्री आर. एल. दीपक
श्री चंद्रप्रकाश शर्मा
श्री दिनेश पांडे और अन्य गणमान्य सदस्य
इन प्रतिनिधियों ने एसडीएम अमित चौधरी को ज्ञापन सौंपते हुए जोर देकर कहा कि मतदान तिथि बदलाव से मतदान प्रतिशत में वृद्धि होगी, चुनावी प्रक्रिया में अधिक सहभागिता सुनिश्चित होगी और धार्मिक अनुष्ठानों व संवेदनशीलता के बीच तालमेल बनेगा।
जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
एसडीएम अमित चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि यह मुद्दा शीघ्र शीर्ष अधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा और उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन धर्म और लोकतंत्र, दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्षता और संवेदनशीलता से निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
धार्मिक-लोकराज्य संतुलन का महत्व
यह मांग केवल चुनाव तिथि परिवर्तन का अनुरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक शासन और धर्मनिष्ठता के संतुलन का प्रतीक है। वोटिंग की सहूलियत से जुड़ा यह सवाल जनता की भागीदारी और व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी विषय है।
संभावित प्रभाव और लाभ
उच्च मतदान सहभागिता: धार्मिक उत्सवों में आने वाले लोग मतदान के अभाव में अपनी नागरिक जिम्मेदारी को निभा न सकें, यह स्थिति टाली जा सकती है।
धार्मिक और लोकनीति का सामंजस्य: प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह कदम सामाजिक समरसता को बढ़ावा दे सकता है।
सार्वजनिक विश्वास में वृद्धि: संवेदनशील निर्णयों के माध्यम से प्रशासन की परीक्षा पूरा होना और लोकशाही पर भरोसा बनना।
निष्कर्ष
इस प्रकार, मालपुरा सेवायत संघ की यह मांग लोकतंत्र और धर्मिक तटस्थता को संतुलित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। साँझा संवाद और संवेदनशील निर्णय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करता है। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वे इस मांग का उचित, समयबद्ध और सकारात्मक निर्णय निर्बाध रूप से ले।