एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण

एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण

एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण
एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है, जिससे लोगों को जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर जलभराव, ट्रैफिक जाम और असुविधाओं का सामना भी करना पड़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आगामी एक सप्ताह यानी 28 अगस्त से 2 सितंबर तक दिल्ली-एनसीआर में लगातार बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रह सकता है। इस अनवरत बारिश के पीछे न केवल सक्रिय मानसूनी हवाएं जिम्मेदार हैं, बल्कि इस बार मौसम में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का भी महत्वपूर्ण योगदान है, जिसने वर्षा को अधिक व्यापक और तीव्र बना दिया है।

मानसून और पश्चिमी विक्षोभ का मिलन

भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा सामान्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण होती है, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नम हवाओं को लेकर आता है। यह हवाएं जब उत्तर भारत के मैदानों से टकराती हैं, तो वर्षा का कारण बनती हैं। लेकिन इस बार मानसून की सक्रियता के साथ-साथ पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो गया है, जो सामान्यत: सर्दियों में हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी और बारिश के लिए जिम्मेदार होता है।

वर्तमान परिदृश्य में पश्चिमी विक्षोभ के कारण वातावरण में अस्थिरता बढ़ गई है। नमी से भरे बादलों के साथ जब यह टकराते हैं, तो “थंडरस्टॉर्म विद रेन” (गरज के साथ बारिश) की स्थिति बन जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में इस बार बारिश का पैटर्न सामान्य मानसून से थोड़ा अलग नजर आ रहा है।

मौसम का पूर्वानुमान: तापमान और उमस

आईएमडी के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। हालांकि तापमान में गिरावट होगी, लेकिन ह्यूमिडिटी (आर्द्रता) का स्तर 95 से 99 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिससे उमस बनी रहेगी। यह स्थिति खासकर उन लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकती है, जो बाहर यात्रा करते हैं या लंबे समय तक खुले वातावरण में काम करते हैं।

बिना चेतावनी के बदलता मौसम

दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों मौसम के उतार-चढ़ाव की एक खास बात यह है कि बिना किसी औपचारिक चेतावनी के भी अचानक बारिश, तेज हवा, गरज और बिजली गिरने की घटनाएं हो रही हैं। मौसम विभाग ने अभी तक कोई “ऑरेंज” या “रेड अलर्ट” जारी नहीं किया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर परिवर्तनशील मौसम ने जनजीवन को प्रभावित किया है।

यह बदलाव न केवल लोगों की दिनचर्या पर असर डाल रहा है, बल्कि सड़क यातायात, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, कार्यालय और बाजार व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। कई बार सुबह साफ आसमान होता है, लेकिन दोपहर या शाम को अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती है, जिससे आम जनता के लिए तैयार रहना मुश्किल हो जाता है।

बारिश के फायदे और परेशानियां

बारिश से तापमान में गिरावट आई है, जिससे लोगों को गर्मी और लू से राहत मिली है। खासकर पिछले कुछ सप्ताहों से जो उमसभरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही थी, उसमें अब काफी हद तक कमी आई है। घरों में कूलर और एसी की आवश्यकता कम हुई है और पर्यावरण में एक ताजगी महसूस की जा रही है।

लेकिन दूसरी ओर, लगातार बारिश के कारण जलभराव की समस्या ने फिर से लोगों को परेशान किया है। एनसीआर के कई इलाकों में जैसे नोएडा सेक्टर 62, गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन, गुरुग्राम के सुभाष चौक और दिल्ली के आईटीओ, लक्ष्मी नगर, कीर्ति नगर आदि जगहों पर सड़कें पानी में डूबी हुई नजर आईं। इससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में घंटों लग गए।

एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण
एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण

सरकारी प्रयास और चेतावनियां

स्थानीय प्रशासन की ओर से नगर निगमों और जल निकासी विभागों को अलर्ट किया गया है, ताकि बारिश के कारण होने वाले जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से निपटा जा सके। पंपों की तैनाती, मैनहोल की सफाई और यातायात नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन तीव्र और लगातार बारिश इन प्रयासों को भी चुनौती दे रही है।

आईएमडी और राज्य सरकार ने आम नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की गई है। जिन इलाकों में जलभराव अधिक है, वहां से गुजरते समय सतर्कता रखने और बिजली के खंभों व खुले तारों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

मानसून की चाल पर विशेषज्ञों की राय

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मॉनसून के अंतिम चरण की ओर इशारा कर रही है, लेकिन यह चरण काफी सक्रिय और तीव्र हो सकता है। सितंबर के पहले सप्ताह तक उत्तर भारत में मानसून की गतिविधियां जारी रहेंगी। इसके बाद धीरे-धीरे यह दक्षिण की ओर सिमटना शुरू करेगा और अक्टूबर तक समाप्ति की ओर बढ़ेगा।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण अब मौसम के पैटर्न में स्पष्ट परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। बारिश की तीव्रता, स्थानिकता और समयसीमा में पहले की तुलना में भिन्नता देखी जा रही है। यही कारण है कि एक ही क्षेत्र में कहीं तेज बारिश होती है और कहीं सूखा रहता है।

आम नागरिकों के लिए सुझाव

इस तरह की बारिश के दौरान आम जनता के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:

  • छाता या रेनकोट साथ रखें।
  • जलभराव वाले रास्तों से बचें, क्योंकि इनमें गड्ढे या खुले मैनहोल हो सकते हैं।
  • वाहन सावधानी से चलाएं और सड़क पर फिसलन से बचने के लिए धीमी गति रखें।
  • बिजली गिरने की संभावना के दौरान खुले मैदान या पेड़ के नीचे खड़े न हों।
  • बच्चों को बाहर खेलने से रोकें और घर के अंदर सुरक्षित स्थानों पर रखें।

निष्कर्ष

एनसीआर में मौसम का यह बदलता मिजाज एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर यह बारिश नई चुनौतियां भी लेकर आ रही है। मानसूनी हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ की संयुक्त सक्रियता ने बारिश को न केवल व्यापक बल्कि अप्रत्याशित भी बना दिया है। इस स्थिति में प्रशासन और नागरिकों — दोनों को सजग रहना जरूरी है। मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए आम लोगों को अलर्ट रहने, पूर्व योजना बनाने और अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में यदि यही स्थिति बनी रही, तो यह वर्षा क्षेत्र में जल स्तर बढ़ाने और पर्यावरण के लिए लाभकारी तो होगी, लेकिन शहरी व्यवस्था की परीक्षा भी लेगी। मौसम विभाग की सलाह का पालन करना और प्रशासनिक निर्देशों के अनुरूप कार्य करना सभी की सुरक्षा और सुविधा के लिए अनिवार्य है।

भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा

भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा

भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा
भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में 28 अगस्त को जीएसटी चोरी और फर्जी बिलिंग के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, जब महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की जयपुर जोनल यूनिट ने बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया। इस व्यापक कार्रवाई ने न केवल भीलवाड़ा के व्यापारिक समुदाय को हिला दिया, बल्कि पूरे राज्य में जीएसटी अनुपालन को लेकर एक सख्त और निर्णायक संदेश भी दिया है। जयपुर से आई विशेष जांच टीमों ने शहर में फैले 10 से अधिक प्रोसेस हाउस और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर एक साथ कार्रवाई कर एक संगठित टैक्स चोरी तंत्र का खुलासा किया। इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों को बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक डेटा मिले हैं, जिनकी जांच फिलहाल जारी है।

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई मुख्य रूप से निखिल डाड के ठिकानों पर केंद्रित रही, जो पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड के पुत्र हैं। इसके अलावा, माहेश्वरी केमिकल्स से जुड़े अनुज सोमानी के प्रतिष्ठानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। प्रारंभिक जांच में 10 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी सामने आई है, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह आंकड़ा जांच पूरी होने तक कहीं अधिक हो सकता है। दरअसल, फर्जी बिलिंग, इनवॉइसिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के माध्यम से किए गए इस वित्तीय धोखाधड़ी का दायरा व्यापक प्रतीत हो रहा है, और इसकी जड़ें शहर के बाहर अन्य जिलों या राज्यों तक भी फैली हो सकती हैं।

डीजीजीआई की यह छापेमारी राजस्थान में अब तक की सबसे बड़ी टैक्स चोरी के मामलों में से एक मानी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई काफी समय से जारी खुफिया निगरानी और विश्लेषण का परिणाम है। पिछले कुछ महीनों में भीलवाड़ा में कुछ व्यापारिक इकाइयों द्वारा जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में असमानता, फर्जी आईटीसी क्लेम और बेहिसाब लेन-देन को लेकर एजेंसियों को संदेह था। खुफिया सूचनाओं की पुष्टि के बाद ही यह कार्रवाई की गई, जिसमें तकनीकी विश्लेषण और डेटा ट्रैकिंग का उपयोग किया गया।

विशेष बात यह है कि इस छापेमारी के दौरान आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स की मदद ली गई, जिससे कंप्यूटर, मोबाइल, टैबलेट, सर्वर और क्लाउड स्टोरेज में संग्रहीत डेटा को तुरंत एक्सेस कर उसका विश्लेषण किया जा सका। इसमें कुछ ऐसे इनवॉइस और रिकॉर्ड्स भी मिले, जिनका न तो कोई भौतिक व्यापारिक आधार था और न ही वस्तुओं या सेवाओं का कोई वास्तविक आदान-प्रदान। इस तरह की “पेपर ट्रांजेक्शन” से जीएसटी क्रेडिट का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की चोरी की जा रही थी, जो स्पष्ट रूप से कर नियमों का उल्लंघन है।

यह पूरा प्रकरण दर्शाता है कि किस प्रकार कुछ व्यापारी समूह सुनियोजित तरीके से कर चोरी का तंत्र विकसित करते हैं। फर्जी फर्मों के नाम पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन, बिना माल आपूर्ति के बिल जारी करना, आईटीसी का गलत क्लेम करना, और फिर उन पैसों को अन्य वैध लेन-देन में मिलाकर ब्लैक मनी को सफेद बनाना — यह सब एक जटिल आर्थिक अपराध का हिस्सा है। निखिल डाड और अनुज सोमानी जैसे स्थानीय रूप से प्रभावशाली नामों का इसमें शामिल होना यह भी बताता है कि जीएसटी चोरी केवल छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि उच्च स्तर के नेटवर्क और राजनीतिक संरक्षण की संभावनाओं से भी जुड़ी हो सकती है।

भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा
भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा

छापेमारी के बाद शहर में तनाव का माहौल है, खासकर व्यापारिक समुदाय के बीच। बहुत से व्यापारी, जिनके संपर्क इन फर्मों या व्यक्तियों से रहे होंगे, अब जांच एजेंसियों के रडार पर आ सकते हैं। वहीं, कर विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। विभागीय अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। फर्मों की बैंक डिटेल्स, GST रिटर्न्स, ई-वे बिल, स्टॉक रजिस्टर, और अन्य कारोबारी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि फर्जी बिलिंग की जड़ें कितनी गहरी हैं और किन-किन संस्थाओं को लाभ पहुंचाया गया है।

यह कार्रवाई राज्य सरकार और केंद्र सरकार के उस साझा दृष्टिकोण का भी हिस्सा है, जिसके तहत पूरे देश में जीएसटी अनुपालन को सख्ती से लागू करने और टैक्स चोरी को खत्म करने के लिए निरंतर अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में जीएसटी प्रणाली में आईटी आधारित ट्रैकिंग और एनालिटिक्स को शामिल किया गया है, जिससे अब बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करके संदिग्ध गतिविधियों की पहचान संभव हो गई है। इसी तकनीकी ताकत का इस्तेमाल इस छापेमारी में किया गया, जिससे यह कार्रवाई इतनी सफल हो सकी।

DGGI ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसी सघन कार्रवाई की जाएगी, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो कर चोरी के लिए कुख्यात हैं या जहां से लगातार इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटालों की शिकायतें मिलती रही हैं। भीलवाड़ा, जो वस्त्र उद्योग के लिए जाना जाता है, वहां यह घटना काफी गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि इससे व्यापारिक ईमानदारी और कर अनुपालन की छवि को ठेस पहुंची है। हालांकि, ऐसी कार्रवाइयों से यह उम्मीद भी जगी है कि सरकार टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है और ईमानदार करदाताओं को एक सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है।

छापेमारी के बाद जिन प्रतिष्ठानों की जांच हुई, उनमें से कई ने अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन जांच एजेंसियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोषी पाए जाने वालों पर न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि आवश्यकतानुसार गिरफ्तारी और आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे। यह कार्रवाई न केवल एक कर चोरी के मामले की जांच है, बल्कि यह एक उदाहरण स्थापित करने का प्रयास है कि सरकार किसी भी कीमत पर टैक्स चोरी बर्दाश्त नहीं करेगी।

अंततः, भीलवाड़ा की इस घटना ने यह प्रमाणित कर दिया है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी और खुफिया तंत्र की मदद से अब कोई भी कर चोरी की योजना ज्यादा दिनों तक छिपाई नहीं जा सकती। जीएसटी जैसे एकीकृत कर प्रणाली की सफलता इसी में है कि इसका लाभ तभी मिलेगा जब सभी व्यापारी और उद्यमी ईमानदारी से इसका पालन करें। इस कार्रवाई ने यह भी दर्शाया है कि सरकार अब सजग है, और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है — चाहे उसका सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक प्रभाव कितना ही बड़ा क्यों न हो। जांच के पूर्ण परिणाम आने तक और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, लेकिन यह निश्चित है कि यह कार्रवाई राजस्थान के जीएसटी इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी।

जम्मू-कश्मीर के उरी में दो आतंकवादी मारे गए, घुसपैठ की कोशिश नाकाम

जम्मू-कश्मीर के उरी में दो आतंकवादी मारे गए, घुसपैठ की कोशिश नाकाम

जम्मू-कश्मीर के उरी में दो आतंकवादी मारे गए, घुसपैठ की कोशिश नाकाम
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जम्मू-कश्मीर में आतंकी घुसपैठ की कोशिशें और सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के गुरेज सेक्टर में 28 अगस्त को नियंत्रण रेखा (LoC) पर आतंकियों की एक और घुसपैठ की कोशिश को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया। गुरेज सेक्टर के नौशहरा नार्द इलाके में हुई इस घटना में सेना ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया। सेना द्वारा इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि और कोई आतंकी छिपा न हो या भाग न गया हो। इस तरह की घटनाएं दर्शाती हैं कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन लगातार जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सेना की मुस्तैदी के कारण वे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं।

घुसपैठ की यह कोशिश कोई पहली नहीं थी। इससे कुछ ही दिन पहले, 25 अगस्त को बारामूला जिले के उरी सेक्टर में भी आतंकियों ने घुसपैठ का प्रयास किया था। उरी के तोरणा इलाके में आतंकियों की संदिग्ध गतिविधि देखकर नियंत्रण रेखा पर तैनात सैनिकों ने त्वरित कार्रवाई की। दोनों ओर से हुई गोलीबारी के बाद इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। सुरक्षा बलों का मकसद स्पष्ट था—किसी भी कीमत पर आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसने नहीं देना। इस अभियान की सफलता ने यह साबित किया कि भारतीय सेना LoC पर किसी भी तरह की हरकत को नजरअंदाज नहीं करती और तत्काल जवाब देने की क्षमता रखती है।

इसके अलावा, 13 अगस्त को भी उरी सेक्टर में LoC के पास एक अन्य मुठभेड़ में एक भारतीय जवान शहीद हो गया था। इस घटना में आतंकवादी भारतीय क्षेत्र में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जिसे सेना ने रोक दिया। इस मुठभेड़ से यह स्पष्ट होता है कि घुसपैठ की कोशिशें लगातार बनी हुई हैं और आतंकी संगठन भारत की सीमा में अशांति फैलाने के प्रयासों में लगे हुए हैं। हालांकि, भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते इन मंसूबों को बार-बार विफल कर दिया जा रहा है।

घटनाओं की यह श्रृंखला इस बात का संकेत है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियां एक बार फिर तेज हो रही हैं, लेकिन इस बार सुरक्षा बलों की रणनीति और प्रतिक्रिया कहीं अधिक संगठित और प्रभावशाली है। केवल घुसपैठ रोकने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं है, बल्कि अब पूरे आतंकी तंत्र को नष्ट करने की रणनीति अपनाई गई है। सेना और सुरक्षाबल आतंकियों के साथ-साथ उनके स्थानीय सहयोगियों (Over Ground Workers – OGWs) और समर्थकों को भी निशाना बना रहे हैं। यह व्यापक दृष्टिकोण केवल तत्काल खतरे से निपटने तक सीमित नहीं, बल्कि आतंकवाद की जड़ों को खत्म करने का प्रयास है।

इस अभियान को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का पूरा समर्थन प्राप्त है। वे लगातार सुरक्षा स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं कि आतंकी नेटवर्क को हर स्तर पर ध्वस्त किया जाए। उनका जोर इस बात पर है कि आतंकियों के पीछे मौजूद आर्थिक और सामाजिक तंत्र को तोड़ा जाए, जिससे आतंकवाद को पनपने का कोई आधार न मिल सके। उनके निर्देश पर सुरक्षा एजेंसियां हवाला नेटवर्क, ड्रग्स तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इन्हीं रास्तों से आतंकियों को वित्तीय सहायता मिलती है।

जम्मू-कश्मीर के उरी में दो आतंकवादी मारे गए, घुसपैठ की कोशिश नाकाम
जम्मू-कश्मीर के उरी में दो आतंकवादी मारे गए, घुसपैठ की कोशिश नाकाम

खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों ने बीते कुछ महीनों में कई हवाला रैकेट और ड्रग्स की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इन नेटवर्क के तार सीधे सीमा पार बैठे आतंकी सरगनाओं से जुड़े हुए पाए गए। इसका मतलब यह है कि न केवल हथियार, बल्कि पैसा और नशा भी आतंकवाद के लिए एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए अब सुरक्षा एजेंसियां इन अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए खास रणनीति के तहत काम कर रही हैं। सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और संदेहास्पद गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।

इस तरह के समन्वित प्रयासों का उद्देश्य स्पष्ट है—केवल आतंकियों को मार गिराना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को खत्म करना जो उन्हें ताकत देती है। सुरक्षा बलों का यह दृष्टिकोण पहले की अपेक्षा कहीं अधिक व्यापक और रणनीतिक है। अब आतंकी घटनाओं के बाद केवल जवाबी कार्रवाई नहीं होती, बल्कि पहले से खुफिया जानकारी के आधार पर प्री-एम्पटिव स्ट्राइक यानी पूर्व-कार्रवाई भी की जा रही है। स्थानीय युवाओं को आतंकवाद की राह पर जाने से रोकने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास के कार्यक्रमों को सक्रिय किया गया है ताकि युवाओं को सकारात्मक दिशा में मोड़ा जा सके।

कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालात भले चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन अब सुरक्षा एजेंसियां और सरकार मिलकर न केवल आतंकवाद से निपटने में जुटी हैं, बल्कि उसके मूल स्रोतों को भी खत्म करने की दिशा में काम कर रही हैं। आए दिन होने वाली घुसपैठ की कोशिशें बताती हैं कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, लेकिन सेना और सुरक्षाबलों की तत्परता और संगठित रणनीति इस बात का संकेत देती है कि आतंकवाद को जड़ से मिटाने की कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। इस दिशा में राजनीतिक नेतृत्व, प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल भी मजबूत हुआ है, जिससे आतंकियों और उनके समर्थकों को कहीं भी सुरक्षित पनाह नहीं मिल पा रही।

जम्मू-कश्मीर की जनता भी अब धीरे-धीरे समझने लगी है कि शांति और विकास के लिए आतंकवाद का खत्म होना जरूरी है। स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ रही है, और वे सुरक्षा बलों के प्रयासों को सहयोग भी दे रहे हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है जो बताता है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति न केवल सामरिक दृष्टिकोण से सही है, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी प्रभावी सिद्ध हो रही है। यदि इसी तरह निरंतरता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर एक बार फिर स्थायी शांति और विकास की राह पर अग्रसर हो सकेगा।

हल्द्वानी: खाई में पलटी स्कूल बस, 12 से ज्यादा बच्चे घायल, चालक पर लापरवाही का आरोप

हल्द्वानी: खाई में पलटी स्कूल बस, 12 से ज्यादा बच्चे घायल, चालक पर लापरवाही का आरोप

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हल्द्वानी ।

उत्तराखंड के हल्द्वानी के लालकुआं कोतवाली क्षेत्र के बरेली रोड पर जयपुर बीसा गांव में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। निजी स्कूल की एक बस, जिसमें बच्चे सवार थे, दूसरी बस को साइड देने के चक्कर में अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बस का शीशा तोड़कर सभी बच्चों को बाहर निकाला, जिसमें 12 से ज्यादा बच्चे घायल हो गए। घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। बस चालक और परिचालक को भी गंभीर चोटें आई हैं। हादसा मोटाहल्दू क्षेत्र के पदमपुर देवलिया गांव के पास हुआ, जहां बस रामपुर रोड से बच्चों को स्कूल ले जा रही थी। घटनास्थल स्कूल के नजदीक होने की वजह से स्थानीय लोगों ने निजी वाहनों से घायलों को हल्द्वानी के निजी अस्पताल पहुंचाया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दो स्कूल बसें चौराहे के पास साइड ले रही थीं। इस दौरान एक बस ज्यादा किनारे चली गई और खाई में पलट गई। हादसे की सूचना मिलते ही क्षेत्र के अभिभावक चिंता में पड़ गए और स्कूल पहुंचकर अपने बच्चों की कुशलक्षेम पूछने लगे।

हल्द्वानी: खाई में पलटी स्कूल बस, 12 से ज्यादा बच्चे घायल, चालक पर लापरवाही का आरोप
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ग्राम प्रधान रमेश चंद्र जोशी ने हादसे के लिए बस चालकों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि बस में करीब 40 बच्चे सवार थे, जिनमें से 12 से ज्यादा घायल हुए। प्रधान ने कहा, “इस क्षेत्र के बस चालक अक्सर नशे की हालत में गाड़ी चलाते हैं। पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।” उन्होंने बताया कि हादसे वाली जगह पर नाला है, लेकिन शुक्र है कि नाले में पानी नहीं था, वरना कई बच्चों की जान जा सकती थी। वहीं, ग्राम प्रधान ने जिला प्रशासन पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी प्रशासन मौके पर नहीं पहुंचा। स्थानीय लोगों ने ही घायलों को बचाकर अस्पताल भेजा। इस घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और लोगों ने स्कूलों में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग उठाई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

मध्य प्रदेश: वैष्णो देवी लैंडस्लाइड में मंदसौर के दो लोगों की मौत

मध्य प्रदेश: वैष्णो देवी लैंडस्लाइड में मंदसौर के दो लोगों की मौत

मध्य प्रदेश: वैष्णो देवी लैंडस्लाइड में मंदसौर के दो लोगों की मौत
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भोपाल ।

जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर हुए भूस्खलन में मध्य प्रदेश के मंदसौर के दो लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, मंदसौर जिले के भीलखेड़ी गांव के कुछ लोग वैष्णो देवी दर्शन के लिए गए थे।
जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने भीलखेड़ी गांव का दौरा किया और परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। इस दुखद भूस्खलन में मारे गए लोगों की पहचान फकीरचंद गुर्जर (50) और रतन बाई (65) के रूप में हुई है।
इस घटना में इलाके के दो लोग घायल हुए हैं जिनकी पहचान सोहन बाई (47) और देवीलाल (45) के रूप में हुई है।
इलाके से अभी भी लापता दो लोगों की पहचान परमानंद (29) और अर्जुन (25) के रूप में हुई है।
वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश देवड़ा ने अपनी संवेदना व्यक्त की।
देवड़ा ने बताया कि मंदसौर के भीलखेड़ी गांव के गुर्जर समुदाय के लोग 23 अगस्त को वैष्णो देवी दर्शन के लिए गए थे और उनमें से कुछ की मृत्यु हो गई है।

मध्य प्रदेश: वैष्णो देवी लैंडस्लाइड में मंदसौर के दो लोगों की मौत
मध्य प्रदेश: वैष्णो देवी लैंडस्लाइड में मंदसौर के दो लोगों की मौत


देवड़ा ने बुधवार रात एक्स पर लिखा, “वैष्णोदेवी मंदिर मार्ग पर हुए भूस्खलन हादसे में हमारी मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भीलखेड़ी के दर्शनार्थियों के हताहत होने की जानकारी प्राप्त हुई है। ग्राम भीलखेड़ी से गुर्जर समाज के तीर्थयात्री माता वैष्णोदेवी के दर्शनों हेतु ट्रेन से 23 अगस्त को रवाना हुए थे। इनमें यात्रियों की दु:खद मृत्यु का समाचार प्राप्त हुआ है। दो-तीन यात्री घायल हैं और एक दो अब भी लापता हैं। हादसा दु:खद है और परिवारजन पर वज्रपात की तरह गिरा है। मैं दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ एवं लापता यात्रियों के सकुशल मिलने की प्रार्थना माता वैष्णोदेवी से करता हूं। घटना को लेकर मेरी मंदसौर जिला कलेक्टर एवं जम्मू कश्मीर प्रशासन से चर्चा हुई है। हम हरसंभव मदद के लिए तत्पर हैं।”
रिपोर्टों के अनुसार, मलबे से 35 शव बरामद किए गए हैं, जबकि करीब 23 तीर्थयात्री घायल हुए हैं।
भारी बारिश के कारण कुछ तीर्थयात्रियों को भूस्खलन क्षेत्र में एक शेड के नीचे शरण लेनी पड़ी।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घायलों का हाल-चाल लेने के लिए अस्पताल का दौरा किया।
उपराज्यपाल ने एक्स पर लिखा, “मैंने भूस्खलन में घायल हुए श्रद्धालुओं से मुलाकात की। मैंने डॉक्टरों से सर्वोत्तम संभव उपचार सुनिश्चित करने का आग्रह किया।”

उदयपुर के प्राइवेट स्कूल में जिम ट्रेनर पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, आरोपी फरार

उदयपुर के प्राइवेट स्कूल में जिम ट्रेनर पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, आरोपी फरार

उदयपुर के प्राइवेट स्कूल में जिम ट्रेनर पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, आरोपी फरार
उदयपुर के प्राइवेट स्कूल में जिम ट्रेनर पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, आरोपी फरार

उदयपुर में मासूम बच्चियों और महिलाओं के प्रति हो रही दुष्कर्म की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. ताजा मामला फतहपुरा का बताया जा रहा है, जहां पर एक जिम ट्रेनर ने एक नामी स्कूल में 13 साल की बच्ची के साथ हैवानियत की हदें पार कर दीं. इतना ही नहीं, जब उसका मन भर गया तो वह वहां से फरार हो गया.

मासूम छात्रा ने घर पहुंच कर अपने घरवालों को सारी आपबीती बताई. परिजन तुरंत बच्ची को लेकर के थाने पहुंचे और यहां पर आरोपी जिम ट्रेनर प्रदीप सिंह झाला के खिलाफ तहरीर पेश की. फिलहाल पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी जिम ट्रेनर प्रदीप सिंह झाला के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. दुष्कर्म के बाद आरोपी प्रदीप सिंह झाला फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है.

उदयपुर के प्राइवेट स्कूल में जिम ट्रेनर पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, आरोपी फरार
उदयपुर के प्राइवेट स्कूल में जिम ट्रेनर पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, आरोपी फरार

जानकारी के मुताबिक, फतहपुरा के एक नामी स्कूल में प्रदीप सिंह झाला जिम ट्रेनर है. प्रदीप यहां पर बच्चों की ट्रेनिंग देता है. बीते 25 अगस्त को स्कूल में छुट्टी घोषित की गई थी. जानकारी नहीं होने की वजह से छात्रा छुट्टी वाले दिन भी स्कूल पहुंच गई. उसे अकेला देखकर प्रदीप सिंह झाला की नीयत उस पर डोल गई और उसने उसे दबोच लिया. हैवान ने स्कूल परिसर में ही उसके साथ गलत काम किया.

डरी-सहमी छात्रा किसी तरह से जब घर पहुंची तो उसने अपने परिजनों को इसके बारे में बताया. गुस्साे परिजन तुरंत अंबामाता थाने पहुंचे और यहां पर स्कूल के जिम ट्रेनर प्रदीप सिंह झाला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई.

थाना अधिकारी मुकेश सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि मामले में जिम ट्रेनर प्रदीप सिंह झाला की तलाश की जा रही है. बच्ची को छुट्टी की जानकारी नहीं थी, जिसके चलते वह स्कूल पहुंच गई थी. छुट्टी वाले दिन बच्ची को अकेला देखकर प्रदीप सिंह ने उसके साथ दुष्कर्म किया. आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे पर राज्यपाल की शोक संवेदना

जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे पर राज्यपाल की शोक संवेदना

जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे पर राज्यपाल की शोक संवेदना
जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे पर राज्यपाल की शोक संवेदना

जयपुर।

जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भारी वर्षा के कारण हुए दुखद हादसे ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने हादसे में मारे गए श्रद्धालुओं की मृत्यु पर संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत पीड़ादायक क्षण है, जब धार्मिक आस्था और विश्वास के साथ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को प्रकृति के क्रोध का शिकार होना पड़ा। राज्यपाल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और उनके शोक संतप्त परिवारों को यह अपार दुख सहन करने की शक्ति दें।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि इस प्रकार की आपदाएँ न केवल भौतिक रूप से हानि पहुँचाती हैं, बल्कि लोगों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं। उन्होंने हादसे में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए राज्य और केंद्र सरकार से यह आग्रह किया कि सभी प्रभावित श्रद्धालुओं को हर संभव सहायता प्रदान की जाए।

यह हादसा माँ वैष्णो देवी यात्रा के उस पवित्र मार्ग पर हुआ है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आस्था और श्रद्धा के साथ अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। जब इस प्रकार का भीषण हादसा एक धार्मिक स्थल के मार्ग पर होता है, तो यह केवल एक भौगोलिक आपदा नहीं रह जाती, बल्कि यह संपूर्ण समाज की भावनाओं को झकझोर देती है। राज्यपाल ने कहा कि यह समय केवल संवेदना प्रकट करने का नहीं है, बल्कि इससे सीख लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का भी है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीमों और सुरक्षाबलों की तत्परता की सराहना की, जो रात-दिन राहत कार्यों में लगे हुए हैं।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आगे यह भी कहा कि इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारियां और सतर्कता आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि धार्मिक स्थलों और यात्रा मार्गों पर पर्यावरणीय अध्ययन और आपदा प्रबंधन की सुदृढ़ व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को टाला जा सके। उन्होंने यह भी आह्वान किया कि सभी नागरिक, विशेष रूप से वे जो तीर्थयात्रा पर जाते हैं, मौसम की चेतावनियों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें ताकि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।

इस हादसे ने जिन परिवारों से उनके प्रियजन छीन लिए हैं, उनके लिए यह समय अत्यंत कठिन है। राज्यपाल ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते, वे उन सभी परिवारों के साथ इस शोक की घड़ी में खड़े हैं और उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि राज्य और राष्ट्र का हर संवेदनशील नागरिक उनके दुख में सहभागी है। उन्होंने कहा कि ईश्वर से यही प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को मोक्ष प्राप्त हो और उनका परिवार इस दुःख को सहने की शक्ति अर्जित कर सके।

जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे पर राज्यपाल की शोक संवेदना
जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे पर राज्यपाल की शोक संवेदना

राज्यपाल ने यह भी आह्वान किया कि समाज के प्रत्येक नागरिक को इस त्रासदी से कुछ न कुछ सीख अवश्य लेनी चाहिए। चाहे वह पर्यावरणीय चेतना हो, प्रशासनिक व्यवस्था हो, या तीर्थयात्रियों की सुरक्षा—हर पक्ष को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह सामूहिक उत्तरदायित्व है जिसमें स्थानीय लोग, सेवाभावी संस्थाएं और स्वयं यात्री भी शामिल हैं।

घायलों की बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सभी घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और उनके इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करे। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे में जिन लोगों की जान गई है, उनके परिवारों को मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि वे इस कठिन समय में आर्थिक रूप से थोड़ी राहत पा सकें। साथ ही जो लोग अब भी लापता हैं, उनकी तलाश के लिए बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।

राज्यपाल ने कहा कि धर्म और आस्था के इन केन्द्रों की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। माँ वैष्णो देवी न केवल जम्मू-कश्मीर, बल्कि पूरे भारत की धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं और वहाँ पर होने वाली किसी भी घटना का प्रभाव देश के करोड़ों श्रद्धालुओं पर पड़ता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि वहाँ की अवस्थाओं को निरंतर बेहतर बनाया जाए।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने हादसे की गंभीरता को समझते हुए यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में तीर्थयात्रा मार्गों पर मौसम आधारित चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया जाए। साथ ही आपदा प्रबंधन टीमों को हाईटेक संसाधनों से लैस किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे शीघ्र प्रतिक्रिया दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मस्थलों के पास रहने वाले स्थानीय नागरिकों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए जिससे वे स्वयं भी राहत कार्यों में प्रशासन की मदद कर सकें।

इस प्रकार राज्यपाल का वक्तव्य न केवल संवेदना प्रकट करने का माध्यम था, बल्कि एक दूरदर्शी दृष्टिकोण का भी प्रतीक था जिसमें वे भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस रणनीति की बात कर रहे थे। उन्होंने समाज से यह भी आग्रह किया कि हमें पीड़ितों के प्रति केवल संवेदनशील नहीं, बल्कि सक्रिय सहायक बनना होगा। चाहे वह आर्थिक सहायता हो, रक्तदान हो, या राहत सामग्री इकट्ठा करना—हर नागरिक को अपने स्तर से प्रयास करने चाहिए।

अंत में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि यह घटना हमारे लिए चेतावनी है कि प्राकृतिक आपदाएं कब और कैसे आ जाएं, इसका कोई ठिकाना नहीं। लेकिन हम यदि पहले से सचेत रहें, जागरूक रहें, और योजनाबद्ध रूप से काम करें, तो हम जान-माल की हानि को बहुत हद तक रोक सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि माँ वैष्णो देवी की कृपा से हम इस आपदा से उबरेंगे और भविष्य में अधिक सुरक्षित व व्यवस्थित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करेंगे।

इस प्रकार राज्यपाल का यह शोक संदेश एक संवेदनशील, जिम्मेदार और प्रेरणादायक नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

RERA कोर्ट का झटका : वकील की डायरी खोने से खारिज हुआ केस, अब मिला दूसरा मौका

RERA कोर्ट का झटका : वकील की डायरी खोने से खारिज हुआ केस, अब मिला दूसरा मौका

RERA कोर्ट का झटका : वकील की डायरी खोने से खारिज हुआ केस, अब मिला दूसरा मौका
RERA कोर्ट का झटका : वकील की डायरी खोने से खारिज हुआ केस, अब मिला दूसरा मौका

जयपुर। 

राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की अदालत में एक अजीबोगरीब वाकया सामने आया है, जहाँ एक बिल्डर के खिलाफ चल रहा महत्वपूर्ण केस सिर्फ इसलिए खारिज हो गया क्योंकि शिकायतकर्ता का वकील अपनी डायरी ही घर भूल गया था। हालांकि, अब RERA ने शिकायतकर्ता को दूसरा मौका देते हुए उनके केस को फिर से बहाल कर दिया है, लेकिन इस घटना ने कोर्ट की कार्यवाही और वकीलों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता जगराम सिंह मीणा ने मोजिका रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई थी । शिकायत संख्या RAJ-RERA-C-N-2023-6731 के तहत यह मामला चल रहा था। मामले की सुनवाई 24 अप्रैल, 2025 को हुई और उसी दिन इसे खारिज कर दिया गया। शिकायतकर्ता के वकील, रामस्वरूप मीणा, ने कोर्ट में एक बहाली याचिका (restoration application) दायर कर बताया कि 24 अप्रैल, 2025 को उनके घर पर एक रिश्तेदार बीमार था।

RERA कोर्ट का झटका : वकील की डायरी खोने से खारिज हुआ केस, अब मिला दूसरा मौका
RERA कोर्ट का झटका : वकील की डायरी खोने से खारिज हुआ केस, अब मिला दूसरा मौका

इसी कारण उन्हें अपने पैतृक स्थान जाना पड़ा। जयपुर छोड़ते समय वे गलती से अपनी डायरी साथ ले जाना भूल गए। इस डायरी के अभाव में वे कोर्ट की कॉज लिस्ट (cause list) नहीं देख पाए और उनकी अनुपस्थिति में यह मामला खारिज हो गया।
RERA के सदस्य सुधीर कुमार शर्मा ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को एक और मौका दिया जाना उचित है। इसके बाद, बहाली याचिका को स्वीकार करते हुए केस को उसके मूल नंबर पर बहाल कर दिया गया। कोर्ट ने अब अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर, 2025 की तारीख तय की है। साथ ही, शिकायतकर्ता के वकील को निर्देश दिया गया है कि वे अगली सुनवाई से पहले शिकायत की एक प्रति प्रतिवादी को उपलब्ध कराएं। इस मामले में भले ही शिकायतकर्ता को दूसरा मौका मिल गया हो, लेकिन यह घटना दिखाती है कि एक छोटी सी गलती कैसे किसी की कानूनी लड़ाई को खतरे में डाल सकती है।

RAS 2023 इंटरव्यू : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र वालों पर RPSC का शिकंजा, मेडिकल जांच से भागे अभ्यर्थी

RAS 2023 इंटरव्यू : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र वालों पर RPSC का शिकंजा, मेडिकल जांच से भागे अभ्यर्थी

RAS 2023 इंटरव्यू : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र वालों पर RPSC का शिकंजा, मेडिकल जांच से भागे अभ्यर्थी
RAS 2023 इंटरव्यू : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र वालों पर RPSC का शिकंजा, मेडिकल जांच से भागे अभ्यर्थी

अजमेर। 

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित RAS भर्ती परीक्षा-2023 के इंटरव्यू में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों का मामला सामने आया है। ऐसे संदिग्ध मामलों को देखते हुए आयोग ने पहली बार दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए मेडिकल जांच अनिवार्य की, जिसके बाद कई अभ्यर्थी निर्धारित तिथि पर मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए। आयोग के सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि मेडिकल जांच से दूरी बनाने वाले कुछ उम्मीदवारों ने अपनी श्रेणी को दिव्यांग से सामान्य या किसी अन्य श्रेणी में बदलने के लिए आवेदन किया है। यह भी सामने आया है कि इनमें से कई अभ्यर्थी पहले से ही तृतीय श्रेणी शिक्षक, पटवारी या अन्य सरकारी पदों पर कार्यरत हैं, जिनकी पिछली नियुक्तियाँ भी दिव्यांग कोटे से हुई थीं।
आयोग का मानना है कि ऐसे अभ्यर्थी बार-बार आरक्षण का गलत फायदा उठा रहे हैं। आयोग ने संबंधित प्रशासनिक विभागों को भी इन कर्मचारियों की दिव्यांगता की दोबारा जांच कराने के लिए पत्र लिखा है।
आयोग के अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू ने कहा कि फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो अभ्यर्थी मेडिकल जांच के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं, उनकी RAS 2023 की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है और उन्हें भविष्य में सरकारी भर्तियों से भी वंचित किया जा सकता है।

RAS 2023 इंटरव्यू : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र वालों पर RPSC का शिकंजा, मेडिकल जांच से भागे अभ्यर्थी
RAS 2023 इंटरव्यू : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र वालों पर RPSC का शिकंजा, मेडिकल जांच से भागे अभ्यर्थी

यह कदम पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा करेगा और फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी नौकरी में बैठे लोगों पर भी शिकंजा कसेगा।
RAS 2023 भर्ती प्रक्रिया : एक नजर
इंटरव्यू चरण: वर्तमान में RAS 2023 के 8वें चरण के इंटरव्यू चल रहे हैं, जो 18 सितंबर तक चलेंगे।
कुल पद: 972 (राज्य सेवा 491, अधीनस्थ सेवा 481)।
प्रारंभिक परीक्षा: 1 अक्टूबर 2023 को हुई, जिसमें 4,57,927 अभ्यर्थी शामिल हुए।
मुख्य परीक्षा: 20 और 21 जुलाई 2024 को आयोजित हुई।
साक्षात्कार के लिए चयनित: 2168 अभ्यर्थी।
RAS 2024 मुख्य परीक्षा के परिणाम का इंतजार :
RPSC द्वारा 17 और 18 जून 2025 को आयोजित RAS 2024 की मुख्य परीक्षा के परिणाम का भी बेसब्री से इंतजार है। इस भर्ती में कुल 1096 पद हैं।

झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई : सेना का जवान सहित सात तस्कर गिरफ्तार, लाखों का गांजा व एमडी जब्त

झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई : सेना का जवान सहित सात तस्कर गिरफ्तार, लाखों का गांजा व एमडी जब्त

झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई : सेना का जवान सहित सात तस्कर गिरफ्तार, लाखों का गांजा व एमडी जब्त
झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई : सेना का जवान सहित सात तस्कर गिरफ्तार, लाखों का गांजा व एमडी जब्त

झालावाड़।

 राजस्थान पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाकर दो अलग-अलग मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने भारी मात्रा में गांजा और सिंथेटिक ड्रग एमडीएमए जब्त करते हुए कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक भारतीय सेना का जवान भी शामिल है, जो तस्करी में सहयोग कर रहा था। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत पुलिस थाना डग की टीम ने एक ट्रक को रोका, जो लोहे के सरियों से भरा था। तस्करों ने पुलिस को चकमा देने के लिए गांजे की खेप को सरियों के नीचे छिपा रखा था। तलाशी के दौरान पुलिस ने ट्रक से 103.600 किलोग्राम गांजा बरामद किया। ट्रक चालक जहीर खान (35) और उसके साथी विनोद शर्मा (28) निवासी झालरापाटन को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
इसी दौरान पुलिस ने गांजे की खेप को एस्कॉर्ट कर रही एक लग्जरी कार को रोका। कार में सवार पीरूलाल मालवीय (34) राजगढ़ मध्य प्रदेश हाल कोतवाली झालावाड़ और अनवर उर्फ अन्नू (29) निवासी झालरापाटन को भी गिरफ्तार किया गया। पीरूलाल मालवीय के पास से भारतीय सेना का आईडी कार्ड बरामद हुआ, जिसका इस्तेमाल वह पुलिस नाकाबंदी से बचने और साथियों को सतर्क करने के लिए करता था। पुलिस अब इस बड़े नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई : सेना का जवान सहित सात तस्कर गिरफ्तार, लाखों का गांजा व एमडी जब्त
झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई : सेना का जवान सहित सात तस्कर गिरफ्तार, लाखों का गांजा व एमडी जब्त

झालावाड़ में सिंथेटिक ड्रग्स का सौदा, 3 आरोपी गिरफ्तार
इसी तरह की एक अन्य कार्रवाई में, झालरापाटन पुलिस ने गश्त के दौरान एक बिना नंबर वाली फोर्ड इको स्पोर्ट कार से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया। तलाशी में कार से 1.57 ग्राम सिंथेटिक ड्रग एमडीएमए बरामद हुआ। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इमरान उर्फ आशु पाया (26), कालू उर्फ शेख शाहरुख (27) और अजहर (28) निवासी रामगंज मंडी कोटा के रूप में हुई है।
प्रारंभिक पूछताछ में इन आरोपियों ने बताया कि वे परमानंद गुर्जर उर्फ पंडा से 100 ग्राम एमडीएमए खरीदने आए थे और इसके लिए उन्होंने 45,000 रुपये एडवांस दिए थे। पुलिस को देखते ही परमानंद गुर्जर मौके से फरार हो गया। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश कर रही है।
इस सफल अभियान में जिला स्पेशल टीम और स्थानीय पुलिस टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पुलिस थाना डग की टीम का नेतृत्व वृत्ताधिकारी जयप्रकाश अटल और एसएचओ वासुदेव सिंह ने और झालरापाटन पुलिस टीम का नेतृत्व वृत्ताधिकारी हर्षराज सिंह खरेड़ा और एसएचओ हरलाल मीणा ने किया।