गाजियाबाद में तीन नाबालिग सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से लगाई छलांग, मौत
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से छलांग लगा दी। इस घटना में तीनों की मौत हो गई है। यह घटना गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ क्षेत्र की भारत सिटी सोसाइटी की है। फिलहाल, गाजियाबाद पुलिस इस घटना की छानबीन में जुटी हुई है। जानकारी सामने आई है कि तीनों नाबालिगों ने रात करीब 2 बजे एक साथ 9वीं मंजिल से छलांग लगाई। उनकी पहचान निशिका (उम्र 16 साल), प्राची (14 साल) और पाखी (12 साल) के रूप में हुई है। उनका परिवार भारत सिटी सोसाइटी के बी-1 टावर के 907 नंबर फ्लैट में रहता है। बताया गया है कि तीनों लड़कियों को मोबाइल गेम खेलने की लत थी। ये सभी ऑनलाइन टास्क बेस्ड कोरियन लवर गेम खेला करती थीं। तीनों लड़कियों की आदत इस तरह हो चुकी थी कि वे नहाने, खाने, स्कूल जाने और सोने जैसे रोजमर्रा के सभी काम एक साथ किया करती थीं। इसी तरह तीनों ने एक साथ इमारत से कूदकर आत्महत्या की। इस घटना से परिवार सदमे में है। हालांकि, अभी तक खुदकुशी का कारण नहीं पता चला है।
गाजियाबाद में तीन नाबालिग सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से लगाई छलांग, मौत
नाबालिग लड़कियों के सुसाइड की सूचना पर देर रात ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। फिलहाल, पुलिस टीम नाबालिग लड़कियों के सुसाइड करने के पीछे का कारण पता करने की कोशिश कर रही है। इससे पहले, मंगलवार को नोएडा के सेक्टर-19 स्थित एक होटल में ठहरी युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या की। पुलिस के मुताबिक, मृतका की पहचान कोमल के रूप में हुई, जो फरीदाबाद की रहने वाली थी। युवक की पहचान सुमित गौतम के रूप में हुई, जो नॉर्थ दिल्ली का निवासी है। सुमित और कोमल एक-दूसरे को पहले से जानते थे और दोनों दिसंबर 2024 से रिलेशनशिप में थे। सोमवार रात दोनों सेक्टर-19 स्थित एक होटल में रुके थे। बताया जाता है कि देर रात कोमल ने कथित तौर पर होटल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या की। घटना की सूचना युवती के साथ ठहरे उसके बॉयफ्रेंड ने पुलिस को दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इसके साथ ही, युवती के बॉयफ्रेंड से पूछताछ की गई।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर गैस टैंकर दुर्घटनाग्रस्त, 12 घंटे से अधिक समय तक ट्रैफिक बंद
पुणे। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मंगलवार देर शाम एक गंभीर हादसा हुआ, जब एक प्रोपलीन गैस से भरा टैंकर आदोशी टनल के पास पलट गया। इस घटना के बाद मुंबई जाने वाली ट्रैफिक की सभी लेन 12 घंटे से ज्यादा समय तक पूरी तरह से बंद रहीं। जानकारी के अनुसार यह हादसा शाम करीब 6:15 बजे हुआ, जब टैंकर मोड़ पर नियंत्रण खो बैठा और पलट गया। इसके बाद गैस लीक होने की सूचना मिलने पर अधिकारियों ने तुरंत पुणे से मुंबई जाने वाली लेन को बंद कर दिया। प्रोपलीन गैस बेहद ज्वलनशील होने के कारण इलाके में खतरनाक स्थिति पैदा हो गई थी। इमरजेंसी टीमों ने हादसे के बाद त्वरित कार्रवाई शुरू की, जिसमें एनडीआरएफ, फायर सर्विस, आईआरबी पुलिस और केमिकल स्पेशलिस्ट शामिल थे। इन टीमों ने गैस लीक को रोकने और टैंकर को सीधा करने के लिए लगातार काम किया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर गैस टैंकर दुर्घटनाग्रस्त, 12 घंटे से अधिक समय तक ट्रैफिक बंद
वहीं, इस घटना के कारण 25 किमी लंबा जाम लग गया, जिससे बसों और ट्रकों समेत हजारों वाहन फंसे हुए थे। यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और सुविधाओं की कमी के कारण स्थिति जटिल हो गई। अधिकारियों ने साफ किया कि जब तक विशेषज्ञ क्षेत्र को सुरक्षित घोषित नहीं करते, तब तक ट्रैफिक को फिर से शुरू नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, बुधवार सुबह तक ट्रैफिक सामान्य होने की संभावना कम है। अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे इस मार्ग का इस्तेमाल न करें और पुराने मुंबई-पुणे हाईवे जैसे वैकल्पिक मार्गों पर यात्रा करें। महाराष्ट्र हाईवे पुलिस से लाइव अपडेट लेने की सलाह भी दी गई है, क्योंकि गैस के लगातार रिसाव से खतरा बना हुआ है। अधिकारियों ने कहा कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए रास्ते को बंद किया गया है। किसी भी सूचना के लिए लोग पुलिस से बात कर सकते हैं। गैस टैंकर पलटने से कोई हताहत नहीं हुआ है। इमरजेंसी टीमें लगी हुई हैं, जल्द ही स्थिति पर कंट्रोल कर लिया जाएगा। हमें सही समय पर सूचना मिल गई थी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया है।
संसद का बजट सत्र : राहुल गांधी के भाषण के दौरान हंगामा
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस समय तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपना संबोधन दे रहे थे। राहुल गांधी के भाषण के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच जोरदार नोकझोंक शुरू हो गई, जिससे सदन का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। शोर-शराबे और आपत्तियों के चलते कुछ समय के लिए कार्यवाही भी प्रभावित हुई।
राहुल गांधी अपने भाषण में केंद्र सरकार की नीतियों, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों और शासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक प्रकाशित पत्रिका में छपी कहानी का उल्लेख किया और उसमें दिए गए कुछ उद्धरणों को सदन के पटल पर रखा। उनका दावा था कि ये उद्धरण एक पूर्व सेना जनरल के अप्रकाशित संस्मरणों से जुड़े हैं, जो देश की सुरक्षा और सैन्य निर्णय प्रक्रिया को लेकर अहम सवाल खड़े करते हैं।
राहुल गांधी के इस संदर्भ पर सत्ता पक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में जिस तरह के दस्तावेज़ों और स्रोतों का हवाला दिया जा रहा है, वे लोकसभा के नियमों और परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी प्रकाशित पत्रिका में छपी कहानी या अप्रकाशित संस्मरणों के आधार पर इस तरह के संवेदनशील विषयों को उठाना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे देश की सुरक्षा से जुड़ी संस्थाओं की छवि को भी नुकसान पहुंच सकता है।
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और यहां बोलते समय सभी सदस्यों को जिम्मेदारी और मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे अपने बयान को वापस लें या ऐसे किसी भी संदर्भ को रिकॉर्ड से हटाया जाए, जो नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं है। सत्ता पक्ष के अन्य सांसदों ने भी अपनी-अपनी सीटों से खड़े होकर इस आपत्ति का समर्थन किया और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
संसद का बजट सत्र : राहुल गांधी के भाषण के दौरान हंगामा
इसके जवाब में राहुल गांधी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने जिस स्रोत का हवाला दिया है, वह पूरी तरह प्रामाणिक है और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पूर्व सेना जनरल के अनुभव और संस्मरण सामने आते हैं, तो उन्हें देशद्रोह या नियमों के उल्लंघन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। राहुल गांधी का कहना था कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और जवाब मांगना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति को बदनाम करना नहीं है, बल्कि सरकार की नीतियों और फैसलों की पारदर्शिता पर चर्चा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी सरकार से असहज सवाल पूछे जाते हैं, तो सत्ता पक्ष नियमों का हवाला देकर बहस को दबाने की कोशिश करता है। विपक्षी सांसदों ने राहुल गांधी के समर्थन में मेजें थपथपाईं और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि सदन नियमों के तहत ही चलेगा। अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी सदस्य द्वारा नियमों के विपरीत कोई बात कही जाती है, तो उसे रिकॉर्ड से हटाने का अधिकार पीठ के पास है। हालांकि, शोर-शराबा थमने का नाम नहीं ले रहा था और कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक उद्धरण या स्रोत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सरकार और विपक्ष के बीच गहराता अविश्वास और तीखा राजनीतिक संघर्ष झलकता है। बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर जहां आर्थिक नीतियों, विकास योजनाओं और जनहित के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, वहीं बार-बार ऐसे टकराव संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार असहमति की आवाज़ को दबाना चाहती है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर ऐसे मुद्दे उठाता है, जिनसे सदन में हंगामा हो और सरकार को घेरा जा सके। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संसद में सार्थक बहस और स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद की परंपरा को कैसे मजबूत किया जाए।
बजट सत्र के दौरान हुआ यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में भी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है और क्या दोनों पक्ष सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए किसी सहमति पर पहुंच पाते हैं या नहीं।
बयाना उपखंड के नया नगला में फॉरेस्ट एरिया में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई, जांच में जुटी पुलिस
बयाना। बयाना उपखंड की ग्राम पंचायत खनखेड़ा के गांव नया नगला स्थित भेड़ा फॉरेस्ट एरिया में बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई दिनों से लगातार जंगल क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की जा रही थी, जिनकी संख्या हजारों में बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि काटे गए पेड़ों को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर खुलेआम बेचा गया, और इस पूरे मामले में वन विभाग की मिलीभगत रही है। मौके पर बड़ी संख्या में कटे हुए पेड़ पड़े मिले हैं, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है। वहीं इस पूरे मामले पर रेंजर हरभान सिंह का कहना है कि पेड़ों की कटाई कुछ ग्रामीणों द्वारा की गई है, जिनके खिलाफ सदर थाना में नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया है। विभाग द्वारा की गई जांच में करीब 159 पेड़ों की कटाई की पुष्टि हुई है। साथ ही कुछ कटे हुए पेड़ों की लकड़ी को कैर नाके पर जब्त करवा दिया गया है। इस लापरवाही के चलते दोषी बीट गार्ड और वनपाल को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े पहाड़ी और फॉरेस्ट एरिया में बिना विभागीय जानकारी के इतनी बड़ी संख्या में पेड़ कैसे काटे जा सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ों की कटाई में जेसीबी,पेडों का काटने जैसी भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया, जो बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के संभव नहीं है।
बयाना उपखंड के नया नगला में फॉरेस्ट एरिया में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई, जांच में जुटी पुलिस
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि बिलायती बबूल की आड़ में खेजड़ी, छोकड़ा, पापड़ी और देशी बबूल जैसे संरक्षित पेड़ों को भी हजारों की संख्या में काटा गया, और उन्हें बेचकर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई है। मामला बढ़ता देख एडिशनल एसपी हरिराम कुमावत मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बड़ी मात्रा में पेड़ों की कटाई हुई है, वनविभाग की ओर से सदर थाना पर मामला दर्ज कराया गया है पूरे मामले की पुलिस जांच जारी है। गौरतलब है कि एक ओर जहां राजस्थान सरकार “हरियालो राजस्थान” अभियान के तहत प्रदेशभर में पौधारोपण कर रही है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे में बयाना के नया नगला के भेड़ा फॉरेस्ट एरिया में इस तरह की बड़ी अवैध कटाई ने प्रशासन और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है, तो इसमें बड़े-बड़े अधिकारी भी फंस सकते हैं। फिलहाल, यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है और पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
नगर निगम यूडी टैक्स टेंडर : क्या सिस्टम की मिलीभगत से हो रहा है जयपुर का नुकसान?
जयपुर। भ्रष्टाचार और सरकारी संरक्षण की परतें जब खुलती हैं, तो जनता की गाढ़ी कमाई के लूट की कहानी सामने आती है। गुलाबी नगरी में इन दिनों एक ऐसा ही मामला गरमाया हुआ है, जहाँ नगर निगम के खजाने को चूना लगाने वाली फर्म स्पैरो सॉफ्टटेक को सरकारी अभयदान मिलने के आरोप लग रहे हैं। व्यापार मंडलों द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को सौंपे गए दस्तावेजों ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों का दावा है कि पिछले 6 वर्षों में अर्बन डेवलपमेंट टैक्स (UD Tax) के नाम पर जयपुर को 125 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व घाटा हुआ है। ताज्जुब की बात यह है कि जिस फर्म पर वसूली का जिम्मा था, उसी के कार्यकाल में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ीं। रिपोर्ट के मुताबिक, फर्म को GIS आधारित सर्वे और एक कार्यशील IT पोर्टल विकसित करना था, जो आज तक धरातल पर नहीं उतरा। बिना डेटा और बिना पोर्टल के, टैक्स वसूली का सारा खेल ‘अंधेरे में तीर’ चलाने जैसा रहा। व्यापारियों की ओर से दिए गए प्रतिवेदन में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोप है कि फर्म ने जानबूझकर उन छोटे व्यापारियों और परिसरों को भी भारी-भरकम टैक्स नोटिस जारी किए, जो नियमानुसार टैक्स के दायरे में आते ही नहीं थे। जब डरा हुआ व्यापारी दफ्तर पहुँचा, तो कथित तौर पर पर्दे के पीछे ‘सौदेबाजी’ की गई और बाद में उन नोटिसों को रफा-दफा कर दिया गया। यह सीधा-सीधा उगाही का मॉडल नजर आता है, जिसने व्यापारियों में रोष पैदा कर दिया है।
नगर निगम यूडी टैक्स टेंडर : क्या सिस्टम की मिलीभगत से हो रहा है जयपुर का नुकसान?
कारण बताओ नोटिस… या महज कागजी खानापूर्ति? खुद नगर निगम ने अनियमितताओं को लेकर फर्म स्पैरो सॉफ्टटेक को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किए। लेकिन सवाल यह है कि जब खामियां जगजाहिर थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आरोप है कि आयुक्त स्तर पर फर्म को लगातार संरक्षण दिया गया। अब चर्चा है कि नए टेंडर की शर्तों को इस तरह मरोड़ा जा रहा है कि उसी विवादित फर्म को दोबारा एंट्री मिल सके। सत्ता के गलियारों में सन्नाटा क्यों है भाई? करीब 125 करोड़ रुपए की चपत कोई मामूली आंकड़ा नहीं है। व्यापार मंडलों की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच हो और राजस्व नुकसान की वसूली संबंधित फर्म और लापरवाह अधिकारियों से की जाए। क्या मुख्यमंत्री कार्यालय इस ‘राजस्व रिसाव’ पर लगाम लगाएगा या फिर जयपुर का खजाना इसी तरह ‘संरक्षण’ की भेंट चढ़ता रहेगा?
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सांप्रदायिक हिंसा, कई पुलिसकर्मी घायल
रायपुर । छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में फिंगेश्वर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत दुटकैयां गांव में रविवार शाम दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प के बाद तनाव फैल गया। इस झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इलाके में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। पूरे गांव में पुलिस की कड़ी निगरानी है। यह हिंसा उस वक्त भड़की जब तीन लोग – आरिफ, सलीम और इमरान – जिन्हें हाल ही में एक साल पुराने मामले में जमानत पर रिहा किया गया था, जिसमें एक स्थानीय मंदिर में मूर्ति तोड़ने का आरोप था, उन्होंने कथित तौर पर कई ग्रामीणों पर हमला किया। पुलिस अधिकारियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, आरोपियों ने गांव और आस-पास के इलाकों के 4-6 युवाओं को निशाना बनाया। हमलों में रॉड, पत्थर और अन्य हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे पीड़ित गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों ने तीनों पर मंदिर अपवित्रता मामले में उनके खिलाफ गवाही देने वालों को लगातार डराने-धमकाने और परेशान करने का आरोप लगाया। इस हमले से गुस्साए ग्रामीणों के एक बड़े समूह ने आरिफ और उसके साथियों के घरों को घेर लिया और उनमें आग लगा दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अफरा-तफरी के दौरान कई घरों और गाड़ियों में आग लगा दी गई।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सांप्रदायिक हिंसा, कई पुलिसकर्मी घायल
जैसे-जैसे हालात बिगड़े, दखल देने और व्यवस्था बहाल करने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों पर पत्थर और ईंटें फेंकी गईं। पत्थरबाजी में कम से कम छह पुलिस अधिकारी घायल हो गए, जिनमें से कुछ को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ी। गरियाबंद के पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने पुष्टि की कि तीनों आरोपियों को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरिफ और अन्य लोगों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने बताया कि गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल, जिसमें अतिरिक्त टुकड़ियां भी शामिल थीं, भेजी गईं। सोमवार को गांव एक सुरक्षा कैंप जैसा लग रहा था, हर कोने पर पुलिसकर्मी तैनात थे। अधिकारियों ने बताया कि हालांकि स्थिति अब स्थिर और नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी तरह की पुनरावृत्ति से बचने के लिए निगरानी जारी है। अधिकारियों ने निवासियों से सहयोग करने और ग्रामीण इलाके में सद्भाव बनाए रखने के लिए अफवाहें फैलाने से बचने का आग्रह किया।
चंडीगढ़ मेयर का पहला जनता दरबार : 35 मिनट की देरी से पहुंचे सौरभ जोशी, समस्याओं से अधिक मिले बधाई संदेश
चंडीगढ़। नगर निगम चंडीगढ़ में जनसमस्याओं के समाधान के लिए सोमवार को आयोजित पहला ‘जनता दरबार’ चर्चा का विषय रहा। मेयर सौरभ जोशी के इस पहले दरबार में जहाँ एक ओर लोगों की उम्मीदें दिखीं, वहीं अव्यवस्था और देरी को लेकर कुछ नाराजगी भी सामने आई। निर्धारित समय से देरी पर पहुंचे मेयर सेक्टर-17 स्थित नगर निगम भवन की पांचवीं मंजिल पर मेयर कार्यालय में जनता दरबार का समय सुबह 11:00 बजे तय किया गया था। लेकिन मेयर सौरभ जोशी निर्धारित समय से 35 मिनट की देरी (11:35 बजे) से पहुंचे। इससे पहले से अपनी बारी का इंतजार कर रहे कई नागरिकों में मायूसी और गुस्सा देखा गया। समस्याओं से ज्यादा ‘बुके’ का दिखा बोलबाला हैरानी की बात यह रही कि जनता दरबार में वास्तविक समस्याओं को लेकर आने वाले फरियादियों की संख्या कम रही, जबकि मेयर को बधाई देने और बुके (गुलदस्ते) भेंट करने वाले समर्थकों की भीड़ ज्यादा नजर आई। मेयर पूरे समय लोगों से हाथ जोड़कर मिलते रहे और कार्यालय में ही घूम-घूम कर लोगों से संवाद करते दिखे।
चंडीगढ़ मेयर का पहला जनता दरबार : 35 मिनट की देरी से पहुंचे सौरभ जोशी, समस्याओं से अधिक मिले बधाई संदेश
फरियादियों ने उठाई गंभीर समस्याएं दिखावे और बधाइयों के बीच कुछ गंभीर मुद्दे भी सामने आए: ई-रिक्शा चालक की व्यथा: एक चालक ने पुलिस द्वारा बार-बार परेशान किए जाने और काम में बाधा डालने की शिकायत की। पानी की किल्लत: मेयर के अपने वार्ड से आए एक व्यक्ति ने पानी की समस्या का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बार-बार शिकायत के बाद भी विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। प्रशासनिक लापरवाही: एक अन्य नागरिक ने आरोप लगाया कि अदालती आदेश होने के बावजूद संबंधित अधिकारी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। विकास के लिए 1500 करोड़ की ग्रांट की उम्मीद जनता दरबार के दौरान मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि वे शहर के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर जमीनी स्तर पर समस्याओं को समझ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि सभी वार्डों में विकास कार्यों को सही गति मिली, तो शहर को 1500 करोड़ रुपये तक की ग्रांट मिलने की प्रबल संभावना है। सौरभ जोशी चंडीगढ़ के पहले ऐसे मेयर हैं जिन्होंने आधिकारिक तौर पर जनता दरबार की परंपरा शुरू की है। इससे पहले केवल चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ही नियमित रूप से जनता दरबार लगाते रहे हैं।
राजस्थान में कोहरे का कहर : भीलवाड़ा में एक के बाद एक टकराईं 6 गाड़ियां, 3 की मौत; मावठ और ओलावृष्टि की चेतावनी
भीलवाड़ा/जयपुर | राजस्थान में कड़ाके की ठंड के साथ अब घना कोहरा जानलेवा साबित हो रहा है। शुक्रवार सुबह भीलवाड़ा जिले में नेशनल हाईवे-58 (भीलवाड़ा-उदयपुर हाईवे) पर कम विजिबिलिटी के कारण एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहाँ कोहरे के कारण एक के बाद एक 6 गाड़ियां आपस में टकरा गईं, जिसमें 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 6 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के बाद लगा 4 KM लंबा जाम सुबह करीब 8 बजे हुए इस एक्सीडेंट के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ियां पूरी तरह चकनाचूर हो गईं और कई लोग मलबे में फंस गए। हादसे के कारण हाईवे पर करीब 4 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें घायलों को लेने पहुंची एम्बुलेंस भी काफी देर तक फंसी रही। स्थानीय लोगों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद गाड़ियों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। प्रदेश में कोहरे की स्थिति 27 जनवरी को हुई मावठ (बेमौसम बारिश) के बाद से ही राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में नमी और कोहरा छाया हुआ है।
राजस्थान में कोहरे का कहर : भीलवाड़ा में एक के बाद एक टकराईं 6 गाड़ियां, 3 की मौत; मावठ और ओलावृष्टि की चेतावनी
आज सुबह की स्थिति कुछ इस प्रकार रही: जयपुर-दिल्ली हाईवे: यहाँ दृश्यता (Visibility) मात्र 10 मीटर तक रह गई। प्रमुख जिले: सीकर, चूरू, अलवर और कोटा में भी घना कोहरा दर्ज किया गया। मौसम विभाग की चेतावनी: बारिश और ओले गिरने के आसार मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान के लोगों को अभी सर्दी से राहत मिलने वाली नहीं है। नया सिस्टम : 31 जनवरी से एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र : जयपुर, भरतपुर, बीकानेर और कोटा संभाग में बादल छाए रहेंगे। चेतावनी : 2 फरवरी तक प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की बारिश के साथ ओले (Hailstorm) गिरने की भी संभावना है। सावधानी : कोहरे के दौरान हाईवे पर वाहन चलाते समय ‘फॉग लाइट्स’ का प्रयोग करें और गति सीमा का विशेष ध्यान रखें।
गुरुग्राम : रैपिडो से बुक की टैक्सी और कर दी ड्राइवर की हत्या, सुल्तानपुर झील के पास मिला शव
गुरुग्राम | हरियाणा की साइबर सिटी गुरुग्राम में एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक 25 वर्षीय कैब ड्राइवर का बदमाशों ने अपहरण करने के बाद गला घोंटकर बेरहमी से मर्डर कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारों ने युवक का शव सुल्तानपुर झील के पास फेंक दिया और फरार हो गए। रैपिडो के जरिए बिछाया मौत का जाल प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने वारदात के लिए रैपिडो (Rapido) ऐप के जरिए टैक्सी बुक की थी। जब ड्राइवर टैक्सी लेकर पहुँचा, तो उसे रास्ते में बंधक बना लिया गया। पुलिस का अंदेशा है कि अपहरण के बाद किसी पुरानी रंजिश या लूटपाट के इरादे से गला घोंटकर उसकी जान ली गई। मृतक के गले पर मिले निशानों से गला घोंटने की पुष्टि हुई है। देर रात झील के पास मिला शव पुलिस को देर रात सूचना मिली थी कि सुल्तानपुर झील के पास एक अज्ञात युवक का शव पड़ा है। मौके पर पहुँची सेक्टर-9 थाना पुलिस ने जब जांच की, तो उसकी पहचान कैब ड्राइवर के रूप में हुई। पुलिस ने तुरंत शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
गुरुग्राम : रैपिडो से बुक की टैक्सी और कर दी ड्राइवर की हत्या, सुल्तानपुर झील के पास मिला शव
जांच में जुटी पुलिस और साइबर सेल पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने के लिए तकनीकी सबूतों का सहारा ले रही है: कॉल रिकॉर्ड्स: जिस नंबर से रैपिडो बुक की गई थी, उसकी जांच की जा रही है। CCTV फुटेज: टैक्सी जिस रास्ते से गुजरी, वहां के कैमरों को खंगाला जा रहा है। मोबाइल लोकेशन: आरोपियों के भागने के रूट को ट्रैक किया जा रहा है। थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या (IPC/BNS की संबंधित धाराओं) और अपहरण का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा अवस्थी और पति पर 11.5 करोड़ रुपए ठगी का आरोप, मामला दर्ज
मुंबई । भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री आकांक्षा अवस्थी और उनके पति पर 11.5 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। मुंबई के पंतनगर पुलिस स्टेशन में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित हितेश कांतिलाल अजमेरा सीमा शुल्क निकासी के व्यवसाय से जुड़े हैं, उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि आकांक्षा अवस्थी, उनके पति विवेक कुमार उर्फ अभिषेक कुमार सिंह चौहान और साथियों ने फिल्म इंडस्ट्री में मजबूत कनेक्शन और भारी मुनाफे का लालच देकर पीड़ित से पैसे ऐंठे। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने खुद को फिल्म इंडस्ट्री में प्रभावशाली बताया। अभिनेत्री आकांक्षा ने अंधेरी (पश्चिम) में स्थित अपने फिल्म स्टूडियो ‘एकेएस पाठशाला एंटरटेनमेंट’ का दावा किया, जहां भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग और नए कलाकारों की ट्रेनिंग होती है। उन्होंने स्टूडियो के मालिकाना हक, शोहरत और 200 करोड़ रुपए के ब्याज-मुक्त लोन का वादा किया। यही नहीं, अभिनेत्री के पति विवेक कुमार ने बिहार के बेतिया (पश्चिम चंपारण) में एक गोदाम में 300 करोड़ रुपए नकद फंसे होने की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि कानूनी कारणों से पैसा नहीं निकाला जा सकता और उसे छुड़ाने के लिए निवेश चाहिए। बदले में चार दिन में 200 करोड़ रुपए बिना ब्याज लौटाने का भरोसा दिया गया। इसके लिए अभिनेत्री ने खुद पीड़ित को आश्वासन दिया।
भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा अवस्थी और पति पर 11.5 करोड़ रुपए ठगी का आरोप, मामला दर्ज
जानकारी के अनुसार, मार्च से जुलाई 2024 के बीच पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 11.5 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। भरोसा मजबूत करने के लिए उन्हें पटना ले जाया गया और कथित गोदाम से जुड़े दस्तावेज दिखाए गए। बेतिया जाने की योजना भी बनाई गई। 5 जुलाई साल 2024 को बेतिया जाते समय विवेक कुमार मिठाई लेने के बहाने कार से उतरे और फिर गायब हो गए। उनका मोबाइल बंद हो गया। कुछ दिनों तक आरोपी बहाने बनाते रहे, लेकिन बाद में सभी संपर्क से गायब हो गए। पीड़ित ने बताया कि भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव से उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिस कारण शिकायत में देरी हुई। आखिरकार 28 जनवरी को एफआईआर हुई। वहीं, पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, कथित स्टूडियो, दिखाए गए दस्तावेजों और आरोपियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। मामले की जांच अब आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी गई है।