झारखंडः सारंडा जंगल में नक्सलियों की बारूद ले रही हाथियों की जान, आईईडी विस्फोट में एक और हाथी जख्मी

झारखंडः सारंडा जंगल में नक्सलियों की बारूद ले रही हाथियों की जान, आईईडी विस्फोट में एक और हाथी जख्मी

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झारखंडः सारंडा जंगल में नक्सलियों की बारूद ले रही हाथियों की जान, आईईडी विस्फोट में एक और हाथी जख्मी
झारखंडः सारंडा जंगल में नक्सलियों की बारूद ले रही हाथियों की जान, आईईडी विस्फोट में एक और हाथी जख्मी

चाईबासा । झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए बिछाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) अब वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। ताजा घटना में सारंडा वन प्रमंडल के कोयना वन प्रक्षेत्र अंतर्गत कोलभोंगा क्षेत्र के पास एक दंतैल हाथी आईईडी विस्फोट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया है। जानकारी के अनुसार, हाथी का दाहिना अगला पैर जमीन में दबे आईईडी पर पड़ने से जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे उसके पैर में गहरा घाव हो गया है और वह चलने में पूरी तरह असमर्थ है। स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम बचाव और उपचार की तैयारी में जुट गई है। हालांकि, पूरे इलाके में अन्य आईईडी दबे होने की आशंका के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है और सुरक्षा बल पहले इलाके की जांच कर रहे हैं, ताकि सुरक्षित तरीके से इलाज शुरू किया जा सके।

झारखंडः सारंडा जंगल में नक्सलियों की बारूद ले रही हाथियों की जान, आईईडी विस्फोट में एक और हाथी जख्मी
झारखंडः सारंडा जंगल में नक्सलियों की बारूद ले रही हाथियों की जान, आईईडी विस्फोट में एक और हाथी जख्मी


सारंडा के जंगलों में हाथियों के आईईडी विस्फोट की चपेट में आने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी तरह की दो बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें हाथियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। पिछले वर्ष 12 अक्टूबर को एक हथिनी की आईईडी विस्फोट में घायल होने के बाद मौत हो गई थी। उसका दायां पैर बुरी तरह जख्मी था और संक्रमण फैलने के कारण तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका था।
इसी तरह 5 जुलाई 2025 को सारंडा में ही छह साल के एक हाथी, जिसे ग्रामीण प्यार से ‘गडरू’ कहते थे, ने दम तोड़ दिया था। गडरू 24 जून 2025 को विस्फोट में घायल हुआ था और उसे बचाने के लिए गुजरात की संस्था ‘वनतारा’ की मेडिकल टीम ने भी अथक प्रयास किए थे, लेकिन अंततः उसे बचाया नहीं जा सका था।

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