
टोंक। जिले के उनियारा उपखंड में कर्तव्य की वेदी पर शहीद हुए कॉन्स्टेबल भागचंद सैनी की हत्या का पुलिस ने मात्र 12 घंटों के भीतर पर्दाफाश कर दिया है. यह सनसनीखेज वारदात उस समय हुई जब बनेठा थाने की ककोड़ चौकी पर तैनात भागचंद शनिवार देर रात रूपवास मोड़ के पास गश्त कर रहे थे. गश्त के दौरान उन्होंने झाड़ियों में दो संदिग्धों को छिपे हुए देखा और उनसे वहां बैठने का कारण पूछा, जो वन्यजीवों के शिकार की फिराक में अवैध टोपीदार बंदूक लेकर बैठे थे. टोकने और पूछताछ करने पर आरोपियों ने भागचंद से झगड़ा शुरू कर दिया और उन पर सीधे फायरिंग कर दी, जिससे गोली लगने के कारण कॉन्स्टेबल की मौके पर ही मौत हो गई. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों से मिले इनपुट के आधार पर रूपवास के जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया.

तलाशी के दौरान पुलिस को जंगल के एक हिस्से से बारूद की तीखी गंध आई, जिसका पीछा करते हुए टीम उन झाड़ियों तक पहुंच गई जहां दोनों आरोपी छिपे हुए थे. गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान राजेश मीणा और दिलराज मीणा के रूप में हुई है, जो पेशे से ड्राइवर हैं और घटना की रात मोर व खरगोश जैसे वन्यजीवों का शिकार करने निकले थे. पुलिस ने इनके कब्जे से हत्या में प्रयुक्त बंदूक, छर्रे और मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली है. शहीद कॉन्स्टेबल भागचंद सैनी का जाना उनके परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, क्योंकि वे अपने परिवार में सबसे छोटे थे और उनका मात्र 21 महीने का एक बेटा है. वर्ष 2018 में पुलिस सेवा में भर्ती हुए भागचंद की शादी चार साल पहले हुई थी. शुरुआत में इस हत्याकांड में बजरी माफियाओं का हाथ होने का अंदेशा जताया जा रहा था, लेकिन पुलिस की त्वरित और वैज्ञानिक जांच ने स्पष्ट कर दिया कि यह वारदात शिकारियों की अचानक की गई आक्रामक प्रतिक्रिया का परिणाम थी.

