
लालसोट। उपखंड मुख्यालय पर मंगलवार को रंगों का पर्व धुलंडी हर्षोल्लास और पारंपरिक उमंग के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर की गलियों और मोहल्लों में रंग-गुलाल की बौछार शुरू हो गई, जहाँ युवाओं और बच्चों की टोलियों ने एक-दूसरे को अबीर लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। पूरा शहर सतरंगी छटा में डूबा नजर आया।
तीखे व्यंग्य और हास्य से गुदगुदाया धुलंडी के विशेष अवसर पर शहर के ऐतिहासिक झरंडा चौक पर पारंपरिक ‘महामूर्ख कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में आमंत्रित कवियों ने अपनी धारदार रचनाओं और चुटीले अंदाज़ से श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। कवियों ने स्थानीय ज्वलंत मुद्दों, जनसमस्याओं और केंद्र व राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे कटाक्ष किए। हास्य और व्यंग्य की जुगलबंदी ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए और पूरा चौक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

चंद्र ग्रहण का रहा प्रभाव
इस वर्ष चंद्र ग्रहण के सूतक काल के कारण आयोजन में अन्य वर्षों की तुलना में भीड़ कुछ कम देखी गई, लेकिन उपस्थित जनसमूह के उत्साह में कोई कमी नहीं थी। ज्योतिषीय गणनाओं के चलते कई लोग बुधवार को शुद्धिकरण के पश्चात पुनः धुलंडी का पर्व मनाएंगे।
गणमान्य जनों की उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के अनेक प्रबुद्ध नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें रमेश चंद्र मिश्रा, अरुण श्रीवास्तव, रामनारायण जंगम, दंगल समिति अध्यक्ष रामफूल सैनी, महेश पाराशर और बाबू लाल नापित प्रमुख थे।
लालसोट की इस जीवंत सांस्कृतिक परंपरा ने एक बार फिर सामाजिक सरोकारों और आपसी भाईचारे का सशक्त संदेश दिया। प्रशासन और दंगल समिति के सहयोग से आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

