महापंचायत के बाद जाति पूछकर भेजा था जेल! मेरठ में गुर्जर नेताओं का बिरादरी ने फूल- मालाओं से किया स्वागत
मेरठ: मेरठ की जेल में 21 सितंबर को महापंचायत में पुलिस पर पथराव हुआ।
इसके बाद गुर्जर समाज के 22 नेताओं को जेल भेज दिया गया। शुक्रवार देर रात 11 नेताओं को जमानत मिल गई। दादरी में बिना अनुमति आयोजित पंचायत को लेकर गिरफ्तार हुए इन नेताओं की रिहाई के बाद गुर्जर समाज के लोग बड़ी संख्या में जमा हुए और फूल मालाओं से उनका स्वागत किया। जेल से बाहर आते ही युवको नें पुलिस पर आरोप लगाया कि उन्होंने जाति पूछकर जेल भेजा था। युवकों के इस बयान के बाद अब राजनीति भी गर्माने लगी है।
शाम छह बजे से ही मेरठ जिला जेल परिसर के आसपास भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। आरएएफ, ट्रैफिक पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। जेल जाने वाले रास्तों को करीब एक किलोमीटर दूर से सील कर दिया गया। देर रात्रि सबसे पहले तीन लोगों को रिहा किया गया और बीस मिनट बाद बाकी आठ लोग बाहर आए। सभी को भाजपा जिला पंचायत सदस्य विपिन भडाना की गाड़ियों में बैठाकर ले जाया गया। जेल के बाहर मौजूद गुर्जर समाज के लोगों ने नारेबाजी करते हुए नेताओं का स्वागत किया।
22 में से 11 को ही क्यों मिली रिहाई?
विपिन भडाना ने बताया कि जमानत के लिए पहले एक ही जमानती की शर्त थी लेकिन बाद में नियम बदलकर एक अभियुक्त के लिए दो जमानती अनिवार्य कर दिए गए। इसी वजह से आधे लोगों की जमानत प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि बाकी अभियुक्तों की रिहाई भी जल्द होगी।
‘हम तो सामान लेने बाजार जा रहे थे, पुलिस ने पकड़ लिया’
जेल से बाहर आए अभियुक्त अतुल गुर्जर ने आरोप लगाया की पुलिस ने उन्हें जाति पूछकर गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि उस दिन हम तो सामान लेने सकौती बाजार जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने नाम के साथ जाति पूछकर पकड़ लिया। रात भर थाने में रखा, फिर मेडिकल कराकर अगली सुबह कोर्ट में पेश कर दिया और जेल भेज दिया। मुंह पर कपड़ा बांधकर पथराव किसने किया हमें नहीं पता, लेकिन हमें जाति के नाम पर फंसाया गया।
जमानत के कानूनी आधार
अभियुक्तों की पैरवी करने वाले वकील ओमपाल सिंह ने कहा कि किसी भी अभियुक्त पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज नहीं था। सभी सम्मानित परिवार से हैं और पहली बार इस तरह के मामले में फंसे। एफआईआर देर से दर्ज की गई और उसमें स्पष्ट साक्ष्य नहीं हैं। न तो कोई चश्मदीद गवाह है और न ही किसी पर पत्थरबाजी से गंभीर चोट का आरोप साबित हुआ। धारा 144 के उल्लंघन का मामला जरूर बनाया गया, लेकिन यह जमानती धाराओं के तहत आता है। इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत दी।
महापंचायत के बाद जाति पूछकर भेजा था जेल! मेरठ में गुर्जर नेताओं का बिरादरी ने फूल- मालाओं से किया स्वागत
बिरादरी के लोगों ने किया स्वागत
जैसे ही गुर्जर समाज के लोग जेल से बाहर निकले, चुंगी चौराहे पर उनका स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में बिरादरी के लोग वहां पहले से मौजूद थे। फूल मालाओं से नेताओं का स्वागत हुआ और नारे लगाए गए गुर्जर सेना जिंदाबाद। वही भाजपा जिला पंचायत सदस्य विपिन भडाना ने इस मामले को विपक्ष की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि पंचायत के विवाद को राजनीतिक रंग दिया गया और लोगों को जाति के नाम पर भड़काया गया।
राजनीतिक दलों में क्रेडिट लेने की मची होड़
गुर्जर नेताओं की रिहाई के बाद राजनीतिक दलों में इसे लेकर श्रेय लेने की होड़ मच गई है। सपा और आजाद समाज पार्टी सोशल मीडिया पर इन दलों के कार्यकर्ता इसे अपनी पार्टी की जीत बता रहे हैं। कई पोस्ट में प्रशासन को बैकफुट पर आने का दावा किया गया। वही रालोद बिजनौर सांसद चंदन चौहान जेल में बंद नेताओं से मिलने पहुंचे थे। इस मामले में लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर और अन्य भाजपा नेताओं ने इसे सीएम योगी की पहल का नतीजा बताया। इससे पहले सपा विधायक अतुल प्रधान और मंत्री सोमेंद्र तोमर भी नेताओं से जेल में मुलाकात कर चुके थे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मसले पर मेरठ पुलिस और प्रशासन से बात की थी।
नंदकिशोर गुर्जर ने जताया सीएम योगी को आभार
लोनी सीट से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने जमानत मिलने के बाद कहा कि यह सत्य की जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेहादी तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और निर्दोष लोगों को फंसाया। उन्होंने दावा किया कि समाज के लोगों की समस्या को उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा, जिसके बाद निर्दोष रिहा हो सके।
अनुमति बगैर हुई थी महापंचायत
दौराला थाना क्षेत्र में आयोजित पंचायत प्रशासन से अनुमति लिए बिना हुई थी, क्योंकि इस क्षेत्र में धारा 144 लागू थी, जिसे तोड़ने का आरोप लगा था। वही महापंचायत में पुलिस पर पत्थरबाजी की घटना हुई, लेकिन पुलिस किसी को चिह्नित नहीं कर पाई।