लोकसभा में चंडीगढ़ भर्ती संबंधी जवाब में पारदर्शिता की कमी का मनीष तिवारी ने उठाया मुद्दा

लोकसभा में चंडीगढ़ भर्ती संबंधी जवाब में पारदर्शिता की कमी का मनीष तिवारी ने उठाया मुद्दा

लोकसभा में चंडीगढ़ भर्ती संबंधी जवाब में पारदर्शिता की कमी का मनीष तिवारी ने उठाया मुद्दा
लोकसभा में चंडीगढ़ भर्ती संबंधी जवाब में पारदर्शिता की कमी का मनीष तिवारी ने उठाया मुद्दा

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में रोजगार सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए, सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थानीय निवासियों के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत जवाबदेही प्रणाली की मांग की है। लोकसभा में अनस्टार्ड प्रश्न संख्या 4971 के माध्यम से यह मुद्दा उठाते हुए, तिवारी ने श्रम और रोजगार मंत्री से पिछले पांच वर्षों तथा वर्तमान वर्ष के दौरान चंडीगढ़ रोजगार एक्सचेंज में पंजीकृत व्यक्तियों का वर्ष-वार विवरण मांगा। तिवारी ने यह भी पूछा कि चंडीगढ़ प्रशासन के विभागों में अस्थायी, कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स आधार पर पंजीकृत उम्मीदवारों को किस प्रकार रोजगार प्रदान किया गया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई ऐसा नियम या आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत 20–25 प्रतिशत आउटसोर्स भर्ती रोजगार एक्सचेंज के माध्यम से करना अनिवार्य हो। तिवारी ने अंत में यह भी पूछा कि सरकार द्वारा एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कौन-सी निगरानी प्रणाली लागू की गई है।

लोकसभा में चंडीगढ़ भर्ती संबंधी जवाब में पारदर्शिता की कमी का मनीष तिवारी ने उठाया मुद्दा
लोकसभा में चंडीगढ़ भर्ती संबंधी जवाब में पारदर्शिता की कमी का मनीष तिवारी ने उठाया मुद्दा


इस मामले में भले ही श्रम और रोजगार मंत्रालय की राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने तिवारी के सवालों का जवाब दिया, लेकिन उनके द्वारा उठाए गए अधिकांश प्रमुख मुद्दे अनछुए ही रह गए। मंत्री ने केवल पिछले पांच वर्षों और वर्तमान वर्ष के दौरान रोजगार एक्सचेंज में पंजीकृत व्यक्तियों की संख्या की जानकारी दी। मंत्री ने चंडीगढ़ रोजगार एक्सचेंज में पंजीकृत उम्मीदवारों के वर्ष-वार आंकड़े तो प्रस्तुत किए, लेकिन यह जवाब तिवारी द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दों को संबोधित करने में असफल रहा।
आउटसोर्सिंग एजेंसियों के लिए निगरानी प्रणाली संबंधी तिवारी के प्रश्न के जवाब में मंत्री ने सामान्य रूप से इतना ही कहा कि विभागों द्वारा अनुबंध और दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुपालन की निगरानी की जाती है। तिवारी ने कहा कि यह जवाब भले ही औपचारिक रूप से सही है, लेकिन इसने प्रश्न के मूल बिंदु से बचते हुए किसी विशेष निगरानी प्रणाली, जांच या लागू करने के उपायों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
तिवारी के इस प्रश्न पर कि क्या 20–25 प्रतिशत आउटसोर्स भर्ती रोजगार एक्सचेंज के माध्यम से करने के लिए कोई नियम मौजूद है, मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार के कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। तिवारी ने कहा कि भले ही यह उत्तर तकनीकी रूप से स्पष्ट है, लेकिन यह बड़े प्रश्न से बचता है कि ऐसी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई और आउटसोर्स भर्ती में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
इस मामले पर अपने विचार व्यक्त करते हुए, तिवारी ने कहा कि मंत्री का जवाब यह दर्शाता है कि चंडीगढ़ के निवासियों के लिए रोजगार के निष्पक्ष अवसर सुनिश्चित करने को लेकर सरकार के दृष्टिकोण में स्पष्टता और पारदर्शिता की कमी है।

पुलिस ने शांति भंग के आरोप में कईयो को किया गिरफ्तार

पुलिस ने शांति भंग के आरोप में कईयो को किया गिरफ्तार

पुलिस ने शांति भंग के आरोप में कईयो को किया गिरफ्तार
पुलिस ने शांति भंग के आरोप में कईयो को किया गिरफ्तार

भीलवाड़ा शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए विभिन्न थाना क्षेत्रों में शांतिभंग करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बीएनएसएस (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 126/170 के तहत की गई, जिसके अंतर्गत ऐसे व्यक्तियों पर कार्रवाई की जाती है जो सार्वजनिक शांति और व्यवस्था के लिए खतरा बनते हैं।

जिला पुलिस अधीक्षक धमेन्द्र सिंह के निर्देशन में यह विशेष अभियान चलाया गया। पुलिस का उद्देश्य शहर में शांति बनाए रखना और असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाना है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे ताकि आमजन को सुरक्षित वातावरण मिल सके।

गांधीनगर थाना पुलिस ने अपने क्षेत्र में सक्रिय होकर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें बम्बू सिंह पुत्र भगवान सिंह चुण्डावत (32 वर्ष), निवासी आजाद नगर; विक्रम पुत्र तेजा राम हरिजन (26 वर्ष), निवासी कारलू, थाना जसवंतपुरा, जिला जालौर; मोहम्मद अमन पुत्र असलम (24 वर्ष), निवासी बाबा धाम; तथा निखिल पुत्र सुरेश भांभी (18 वर्ष), निवासी मालोला रोड शामिल हैं। ये सभी आरोपी क्षेत्र में शांति भंग करने की आशंका के चलते पुलिस की निगरानी में थे और उचित कार्रवाई करते हुए इन्हें हिरासत में लिया गया।

इसी क्रम में सुरेश पुत्र छीतर भांभी (45 वर्ष), निवासी मालोला रोड को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी ऐसे गतिविधियों में संलिप्त पाए गए जो सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती थीं।

पुलिस ने शांति भंग के आरोप में कईयो को किया गिरफ्तार
पुलिस ने शांति भंग के आरोप में कईयो को किया गिरफ्तार

प्रताप नगर थाना पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए मोहम्मद आरिफ पुत्र सत्तार मोहम्मद बिसायती (32 वर्ष), निवासी दर्जी मोहल्ला, हुरडा थाना गुलाबपुरा तथा मुकेश पुत्र सुखदेव खटीक (40 वर्ष), निवासी लांबा थाना बनेड़ा को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों के खिलाफ भी शांतिभंग की आशंका को देखते हुए कानूनी कार्रवाई की गई।

सुभाष नगर थाना पुलिस ने रईस मोहम्मद पुत्र इकबाल खान (28 वर्ष), निवासी सांगानेर को गिरफ्तार किया। वहीं, भीमगंज थाना पुलिस ने राजू पुत्र अर्जुन ढोली (21 वर्ष), निवासी मालीखेड़ा को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, ये सभी व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्रों में विवाद और अशांति फैलाने की स्थिति में थे।

पुलिस अधीक्षक धमेन्द्र सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से एहतियात के तौर पर की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता शहर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना है, और इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है और ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है जो समाज में अस्थिरता फैलाने की कोशिश करते हैं। बीएनएसएस की धाराओं के तहत की गई यह कार्रवाई एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाता है, जहां आगे की कार्रवाई तय होती है।

स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया है और इसे शहर में शांति बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया है। आमजन का कहना है कि इस प्रकार की सख्त कार्रवाई से असामाजिक तत्वों में भय बना रहता है और वे कानून का उल्लंघन करने से बचते हैं।

पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। साथ ही, लोगों से यह भी कहा गया है कि वे कानून का पालन करें और किसी भी प्रकार के विवाद से बचें।

कुल मिलाकर, भीलवाड़ा पुलिस की यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पुलिस की सक्रियता और सतर्कता से शहर में शांति बनाए रखने में मदद मिलेगी और आमजन खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में नशीले पदार्थों के साथ तस्कर को गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में नशीले पदार्थों के साथ तस्कर को गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में नशीले पदार्थों के साथ तस्कर को गिरफ्तार
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में नशीले पदार्थों के साथ तस्कर को गिरफ्तार

श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में एक नशीले पदार्थों के तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के पास से 771 ग्राम नशीला पदार्थ भी बरामद हुआ है। जिला पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे एक बड़े अभियान में पुलवामा पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध नशीले पदार्थ तस्कर को पकड़ा और उसके पास से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए। पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलवामा पुलिस ने महिला डिग्री कॉलेज के पास तेंगपोना रोड पर नाकाबंदी के दौरान एक व्यक्ति को पकड़ा। नाकाबंदी के दौरान पुलवामा पुलिस स्टेशन की एक टीम ने नायलॉन का थैला ले जा रहे एक संदिग्ध को रोका। तलाशी लेने पर उसके पास से लगभग 771 ग्राम चरसचोरा/गांजा जैसा पदार्थ और नायलॉन का थैला बरामद किया गया।
आरोपी की पहचान पुलवामा के मलिकपोरा के रहने वाले मोहम्मद आरिफ मलिक, पुत्र रियाज अहमद मलिक के रूप में हुई है।
तदनुसार, पुलवामा पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है और आगे की जांच जारी है। पुलवामा पुलिस ने मादक पदार्थों के खतरे को रोकने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और आम जनता से सहयोग करने तथा मादक पदार्थों के दुरुपयोग या तस्करी से संबंधित किसी भी जानकारी को साझा करने का आग्रह किया।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में नशीले पदार्थों के साथ तस्कर को गिरफ्तार
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में नशीले पदार्थों के साथ तस्कर को गिरफ्तार


जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद विरोधी अभियान चला रहे हैं, और मादक पदार्थों के तस्करों, ड्रग पेडलर्स और हवाला रैकेट तथा अन्य गैरकानूनी वित्तीय गतिविधियों में शामिल लोगों पर भी सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी है।
ऐसा माना जाता है कि मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध व्यापार और हवाला रैकेट से प्राप्त धन का इस्तेमाल अंततः जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा की रक्षा करने वाली सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) घुसपैठ, निकासी, मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा पार से होने वाली ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए तैनात हैं।
आतंकवादी संगठन पाकिस्तान की आईएसआई की मदद से ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए भारतीय सीमा में हथियार, गोला-बारूद, नकदी और मादक पदार्थों की खेप गिराते हैं, ताकि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन मिल सके।

दिल्ली के आईपी एस्टेट इलाके में मुठभेड़, हत्या के मामले में फरार चल रहा बदमाश गिरफ्तार

दिल्ली के आईपी एस्टेट इलाके में मुठभेड़, हत्या के मामले में फरार चल रहा बदमाश गिरफ्तार

दिल्ली के आईपी एस्टेट इलाके में मुठभेड़, हत्या के मामले में फरार चल रहा बदमाश गिरफ्तार
दिल्ली के आईपी एस्टेट इलाके में मुठभेड़, हत्या के मामले में फरार चल रहा बदमाश गिरफ्तार

नई दिल्ली । सेंट्रल दिल्ली के आईपी एस्टेट थाने के अंतर्गत फिरोजशाह कोटला के बैकसाइड रोज गार्डन के पास सर्विस रोड पर मंगलवार को पुलिस और एक वांटेड बदमाश के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश के पैर में गोली लग गई और घायल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को सूचना मिली थी कि लंबे समय से फरार चल रहा बदमाश अजय कालिया इलाके में आने वाला है। इसके बाद स्पेशल स्टाफ ने उसके लिए ट्रैप लगाया। जैसे ही बदमाश वहां पहुंचा, पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन अजय कालिया ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की। इस मुठभेड़ में दोनों तरफ से कई राउंड गोलियां चलीं। मुठभेड़ के दौरान अजय कालिया के पैर में गोली लगी। उसे घायल हालत में पकड़ा गया। फिलहाल आरोपी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां से उसे आगे की कार्रवाई के लिए ले जाया जाएगा।

दिल्ली के आईपी एस्टेट इलाके में मुठभेड़, हत्या के मामले में फरार चल रहा बदमाश गिरफ्तार
दिल्ली के आईपी एस्टेट इलाके में मुठभेड़, हत्या के मामले में फरार चल रहा बदमाश गिरफ्तार


पुलिस ने बताया कि अजय कई वारदात में शामिल रहा है और काफी समय से फरार था। अजय कालिया हत्या और लूटपाट जैसे गंभीर मामलों में वांटेड था। उसके पकड़े जाने के बाद इलाके में लोगों ने राहत की सांस ली।
वहीं इस मुठभेड़ में स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर भी बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लग गई थी। पुलिस की टीम ने आरोपी को तुरंत हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है। अब मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
सेंट्रल दिल्ली के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई स्पेशल स्टाफ की सतर्कता और तेज कार्रवाई का नतीजा है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे वांटेड अपराधियों को पकड़ना पुलिस और जनता की सुरक्षा दोनों के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए आगे भी ऐसे सक्रिय और खतरनाक अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

झूठे मुकदमों की बढ़ती संख्या पर पीआईएल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया

झूठे मुकदमों की बढ़ती संख्या पर पीआईएल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया

झूठे मुकदमों की बढ़ती संख्या पर पीआईएल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया
झूठे मुकदमों की बढ़ती संख्या पर पीआईएल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया


नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में आपराधिक न्याय प्रणाली में झूठी शिकायतों, मनगढ़ंत आरोपों और झूठे सबूतों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होने की संभावना है। याचिका में दावा किया गया है कि मौजूदा कानूनी ढांचा किसी पीड़ित व्यक्ति या विक्टिम को झूठी शिकायतों और मनगढ़ंत सबूतों के आधार पर कार्रवाई शुरू करने से रोकता है, जब तक कि उसे अदालत से पहले से मंजूरी न मिल जाए। इस तरह यह जवाबदेही के रास्ते में एक ढांचागत रुकावट पैदा करता है।
इसमें यह तर्क दिया गया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 215 और 379 की शाब्दिक व्याख्या ने कई दंडात्मक प्रावधानों को निष्प्रभावी बना दिया है, जिससे अपराधियों को पुलिस थानों में झूठी एफआईआर की बाढ़ लाने और अदालतों पर झूठे मामलों, झूठे आरोपों, झूठी जानकारियों, झूठे प्रमाणपत्रों, झूठे बयानों और झूठे सबूतों का बोझ डालने की छूट मिल गई है।
इस मुद्दे की गंभीरता को उजागर करते हुए याचिका में यूपी के फतेहपुर जिले की एक घटना का जिक्र किया गया है, जहां कथित तौर पर झूठे मामलों में फंसाए जाने की धमकियों का सामना करने के बाद एक परिवार ने आत्महत्या कर ली थी। याचिका में आगे कहा गया है कि जनता को बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है, क्योंकि झूठे मामलों की वजह से बेकसूर नागरिक आत्महत्या कर रहे हैं।

झूठे मुकदमों की बढ़ती संख्या पर पीआईएल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया
झूठे मुकदमों की बढ़ती संख्या पर पीआईएल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया


पीआईएल में यह तर्क दिया गया कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के रिकॉर्ड में झूठी शिकायतों और झूठी गवाही के मामलों पर खास डेटा की कमी, इस मुद्दे से निपटने में एक सिस्टम से जुड़ी कमी को दिखाती है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, पुलिस थानों में झूठी एफआईआर की बाढ़ आ गई है, जबकि अदालतों पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि झूठे आरोप झेल रहे लोगों को लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है, उनकी बदनामी होती है। साथ ही, उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
याचिका में आगे कहा गया कि पीड़ित व्यक्ति को झूठे आरोपों से होने वाली बदनामी, लंबी कानूनी लड़ाई और आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जबकि उसे खुद शिकायतकर्ता के तौर पर कार्रवाई करने का मौका नहीं मिलता।
इस याचिका में बीएनएसएस की धारा 215 और 379 की उद्देश्यपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण व्याख्या की मांग की गई है, ताकि पीड़ितों को अदालत की अनुमति से गलत जानकारी, झूठे सबूत और झूठी गवाही से जुड़े अपराधों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने में मदद मिल सके।
इसमें इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और बीएनएसएस का उद्देश्य मौजूदा कानूनी स्थिति के कारण कमजोर पड़ रहे हैं।
यह कहते हुए कि आपराधिक कानून का बेरोकटोक दुरुपयोग मौलिक अधिकारों के लिए खतरा है, याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया गया कि वह कानूनी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग को रोकने और निर्दोष नागरिकों को दुर्भावनापूर्ण मुकदमों से बचाने के लिए हस्तक्षेप करे।

दौसा: बेमौसम बारिश से मौसम हुआ खुशनुमा, लेकिन किसानों पर बरसी आफत

दौसा: बेमौसम बारिश से मौसम हुआ खुशनुमा, लेकिन किसानों पर बरसी आफत

दौसा: बेमौसम बारिश से मौसम हुआ खुशनुमा, लेकिन किसानों पर बरसी आफत
दौसा: बेमौसम बारिश से मौसम हुआ खुशनुमा, लेकिन किसानों पर बरसी आफत


दौसा।
 जिले में सोमवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। तेज हवाओं और गर्जना के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने चैत्र के महीने में सावन-भादो जैसा अहसास करा दिया। इस बेमौसम बरसात से जहाँ आमजन को भीषण गर्मी से राहत मिली और तापमान में गिरावट दर्ज की गई, वहीं किसानों के लिए यह बारिश ‘आफत’ बनकर बरसी है। 

फसलों को भारी नुकसान और किसानों की चिंता भीगी फसलें: खेतों में कटकर तैयार पड़ी गेहूं और चने की फसलें बारिश के पानी में भीग गई हैं, जिससे उनके खराब होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
बिकने का डर: कटी हुई फसलों के दाने काले पड़ने या झड़ने की आशंका से किसानों में भारी मायूसी है। किसान आनन-फानन में अपनी उपज को तिरपाल और अन्य साधनों से बचाने के प्रयास में जुटे हैं।

दौसा: बेमौसम बारिश से मौसम हुआ खुशनुमा, लेकिन किसानों पर बरसी आफत
दौसा: बेमौसम बारिश से मौसम हुआ खुशनुमा, लेकिन किसानों पर बरसी आफत


ओलावृष्टि का भय: आसमान में छाई घटाओं और तेज गर्जना के बीच किसानों को ओले गिरने का डर सता रहा है, जो खड़ी और कटी फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर सकते हैं।
कृषि विभाग की एडवायजरी: 72 घंटे में दें सूचना
नुकसान की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
अनिवार्य समय सीमा : फसल खराबे की सूचना 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है।
पंजीकरण : किसान टोल-फ्री नंबर, संबंधित बैंक या ‘क्रॉप लॉस’ ऐप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
बीमा क्लेम : समय पर सूचना देने से ही सर्वे की प्रक्रिया शुरू होगी और नियमानुसार बीमा क्लेम मिल सकेगा।

VIP कल्चर पर जया बच्चन ने जताई आपत्ति, कहा- यह जनता और सांसदों की गरिमा का मुद्दा

VIP कल्चर पर जया बच्चन ने जताई आपत्ति, कहा- यह जनता और सांसदों की गरिमा का मुद्दा

VIP कल्चर पर जया बच्चन ने जताई आपत्ति, कहा- यह जनता और सांसदों की गरिमा का मुद्दा
VIP कल्चर पर जया बच्चन ने जताई आपत्ति, कहा- यह जनता और सांसदों की गरिमा का मुद्दा

नई दिल्ली । राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने वीआईपी संस्कृति को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने इसे एक गंभीर विषय बताया। सांसद ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ती वीआईपी संस्कृति की इस प्रवृत्ति पर वह कड़ी आपत्ति जता रही हैं। अपने वक्तव्य में उन्होंने वीआईपी संस्कृति को समाज के लिए एक गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यह वीआईपी संस्कृति विशेष रूप से दिल्ली जैसे महानगर में आम नागरिकों के जीवन को बाधित कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी किसी वीआईपी का आवागमन होता है, चाहे वह राजनेता हो, उच्च अधिकारी हो या कोई अन्य गणमान्य व्यक्ति, तो सड़कों पर अन्य लोगों को रोक दिया जाता है। ट्रैफिक डायवर्जन किए जाते हैं और आम लोगों को लंबे समय तक अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। जया बच्चन ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में संसद से बाहर निकलते समय मुख्य द्वार को वीआईपी मूवमेंट के कारण बंद कर दिया गया था, जिससे उन्हें और अन्य सांसदों को भी रोका गया। उन्होंने इसे अपने 22 वर्षों के संसदीय जीवन का सबसे अपमानजनक अनुभव बताया। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है, क्योंकि वे (सांसद) किसी भी वीआईपी के लिए खतरा नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में कई ऐसे इलाके हैं जहां बड़े राजनीतिक नेता रहते हैं और वहां अक्सर सड़कें बंद कर दी जाती हैं, जिससे संसद पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि वीआईपी मूवमेंट के कारण कई बार सांसदों को आधे-आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ता है और उन्हें अपनी यात्रा का समय पहले से तय करना पड़ता है ताकि वे समय पर सदन में पहुंच सकें।

VIP कल्चर पर जया बच्चन ने जताई आपत्ति, कहा- यह जनता और सांसदों की गरिमा का मुद्दा
VIP कल्चर पर जया बच्चन ने जताई आपत्ति, कहा- यह जनता और सांसदों की गरिमा का मुद्दा


एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि रिटायर्ड हो रहे राज्यसभा सांसदों के लिए सभापति सीपी राधाकृष्णन के यहां विदाई समारोह (फेयरवेल पार्टी) आयोजित की गई थी। इसमें शामिल होने के लिए उन्हें एक घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा, जिसका कारण भी वीआईपी मूवमेंट था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आम जनता में भारी नाराजगी देखी जाती है। सांसद ने विशेष रूप से चिंता जताई कि इस वीआईपी संस्कृति के कारण एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार एम्बुलेंस को भी रोक दिया जाता है, जो मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक है। यदि समय पर इलाज न मिले तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने दुनिया के कई देशों की यात्रा की है, जहां वीआईपी मूवमेंट होता है, लेकिन वहां आम जनता को इस तरह नहीं रोका जाता। भारत में यह समस्या ज्यादा गंभीर है और इसे तत्काल सुधारने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभापति, जो देश के उपराष्ट्रपति भी हैं, से आग्रह किया कि वे सरकार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करें और ठोस कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि इस वीआईपी संस्कृति को खत्म करना जरूरी है, ताकि आम करदाता नागरिकों को सम्मान मिल सके और लोकतंत्र की मूल भावना बनी रहे। उन्होंने कहा कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में रोड रेज जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जो देश के लिए ठीक नहीं होंगी।

उदयपुर में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: थानाधिकारी सहित दो पुलिसकर्मी 8 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

उदयपुर में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: थानाधिकारी सहित दो पुलिसकर्मी 8 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

उदयपुर में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: थानाधिकारी सहित दो पुलिसकर्मी 8 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
उदयपुर में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: थानाधिकारी सहित दो पुलिसकर्मी 8 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

उदयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की इंटेलिजेंस यूनिट उदयपुर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए माण्डवा थाने के थानाधिकारी निर्मल कुमार खत्री और कांस्टेबल भल्लाराम पटेल को 8 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। 

एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, गोपनीय सूचना के आधार पर शिकायत मिली थी कि परिवादियों को एक मामले में आरोपी नहीं बनाने के बदले 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। 21 मार्च 2026 को सत्यापन के दौरान यह पुष्टि हुई कि आरोपी प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये के हिसाब से कुल 20 लाख रुपये की मांग कर रहे थे, लेकिन बाद में 8 लाख रुपये लेने पर सहमति बनी।

उदयपुर में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: थानाधिकारी सहित दो पुलिसकर्मी 8 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
उदयपुर में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: थानाधिकारी सहित दो पुलिसकर्मी 8 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

योजना के तहत एसीबी टीम ने ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया और आरोपियों को 8 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। इस राशि में 1 लाख रुपये असली नोट और 7 लाख रुपये डमी नोट (चिल्ड्रन नोट) शामिल थे।
यह कार्रवाई डॉ. रामेश्वर सिंह, उप महानिरीक्षक पुलिस के सुपरविजन में तथा एसीबी इंटेलिजेंस यूनिट उदयपुर के नेतृत्व में की गई। ट्रैप की कार्रवाई पुलिस निरीक्षक डॉ. सोनू शेखावत ने टीम के साथ मिलकर अंजाम दी।
मामले में एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक एस. परिमाला के निर्देशन में आरोपियों से पूछताछ जारी है। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित) की धारा 7 तथा बीएनएस 2023 की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की सख्त मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि रिश्वतखोरी के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

असम के एयरफोर्स स्टेशन से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, 2023 से पाकिस्तान को दे रहा था जानकारी

असम के एयरफोर्स स्टेशन से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, 2023 से पाकिस्तान को दे रहा था जानकारी

असम के एयरफोर्स स्टेशन से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, 2023 से पाकिस्तान को दे रहा था जानकारी
असम के एयरफोर्स स्टेशन से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, 2023 से पाकिस्तान को दे रहा था जानकारी

डिब्रूगढ़ । वायुसेना और राजस्थान इंटेलिजेंस की टीम ने असम के वायुसेना अड्डे पर तैनात एक कर्मचारी को पाकिस्तान की जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान सुमित कुमार (36) के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के लाहुरपार का निवासी है और एयरफोर्स स्टेशन में एमटीएस (मल्टी टास्किंग स्टाफ) के पद पर कार्यरत है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (खुफिया विभाग) प्रफुल्ल कुमार के अनुसार सुमित कुमार अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भारतीय वायुसेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां एकत्रित करता था और उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाता था। जांच में सामने आया है कि वह वर्ष 2023 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के संपर्क में था और पैसों के बदले गोपनीय सूचनाएं साझा कर रहा था। इस मामले की शुरुआत जनवरी 2026 में राजस्थान के जैसलमेर निवासी झबराराम की गिरफ्तारी से हुई थी। उससे पूछताछ के दौरान सुमित कुमार का नाम सामने आया। इसके बाद राजस्थान इंटेलिजेंस ने वायुसेना खुफिया विभाग, नई दिल्ली के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपी को छबुआ से हिरासत में लिया।

असम के एयरफोर्स स्टेशन से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, 2023 से पाकिस्तान को दे रहा था जानकारी
असम के एयरफोर्स स्टेशन से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, 2023 से पाकिस्तान को दे रहा था जानकारी


पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने न केवल छबुआ एयरफोर्स स्टेशन बल्कि बीकानेर जिले के नाल एयरफोर्स स्टेशन सहित अन्य सैन्य ठिकानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं। इनमें लड़ाकू विमानों की लोकेशन, मिसाइल सिस्टम और अधिकारियों व कर्मचारियों से संबंधित गोपनीय सूचनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, वह अपने मोबाइल नंबरों के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने में भी मदद करता था।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को राजस्थान खुफिया विभाग और वायु सेना खुफिया विभाग के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि वह 2023 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों के संपर्क में था और पैसों के बदले गोपनीय जानकारी साझा कर रहा था। पुलिस ने इस संबंध में गोपनीयता अधिनियम, 1923 और भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। व्यापक जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए आगे की जांच जारी है।
फिलहाल, आरोपी के खिलाफ गोपनीयता अधिनियम, 1923 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में व्यापक जासूसी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जांच एजेंसियां लगातार छानबीन कर रही हैं।

गोवा में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मामले में भाजपा पार्षद का बेटा गिरफ्तार

गोवा में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मामले में भाजपा पार्षद का बेटा गिरफ्तार

गोवा में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मामले में भाजपा पार्षद का बेटा गिरफ्तार
गोवा में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मामले में भाजपा पार्षद का बेटा गिरफ्तार


पणजी । दक्षिण गोवा पुलिस ने सोमवार तड़के 25 से 30 नाबालिग लड़कियों से जुड़े कथित सेक्स स्कैंडल को लेकर 20 वर्षीय युवक सोहम सुशांत नाइक को गिरफ्तार कर लिया। भाजपा के कुर्चोरेम नगर पालिका पार्षद के बेटे नाइक को उस समय हिरासत में लिया गया, जब स्थानीय लोगों की भीड़ ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी युवक पर आरोप है कि उसने कई नाबालिग लड़कियों के साथ यौन संबंध बनाए। इन घटनाओं को रिकॉर्ड किया और बाद में उन वीडियो का इस्तेमाल पीड़ितों को धमकाने और चुप रहने के लिए किया। यह मामला पिछले सप्ताह तब उजागर हुआ, जब आरोपी सोहम नाइक ने कथित तौर पर एक सामाजिक सभा में अपने कृत्यों की डींग भरी और पीड़ितों के आपत्तिजनक वीडियो अपने साथियों को दिखाए। जैसे-जैसे दक्षिण गोवा में यौन शोषण वीडियो की अफवाहें फैलने लगीं, स्थानीय तनाव चरम पर पहुँच गया।
हालांकि इससे पहले, यह मामला कुछ दिनों से इलाके में चर्चा में था। रविवार रात स्थानीय नागरिक कुडचेड पुलिस स्टेशन के पास एकत्र हुए और कार्रवाई की मांग की क्योंकि मामला एक स्थानीय भाजपा पार्षद के बेटे से जुड़ा हुआ था। अंततः पुलिस ने पार्षद के बेटे सोहम नाइक को हिरासत में ले लिया।

गोवा में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मामले में भाजपा पार्षद का बेटा गिरफ्तार
गोवा में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मामले में भाजपा पार्षद का बेटा गिरफ्तार


यह कार्रवाई तब हुई जब आरोपी ने पिछले सप्ताह एक शराब पार्टी में अपने दोस्तों को कुछ वीडियो दिखाए। इससे बीते वर्षों में नाबालिगों के कथित यौन शोषण का मामला सामने आया।
रविवार को कुर्चोरेम के निवासियों ने पुलिस स्टेशन तक मार्च किया और नाबालिगों से जुड़े कथित सेक्स रैकेट वीडियो की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि पुलिस 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार नहीं करती, तो वे बंद का आह्वान करेंगे। उन्होंने यह भी मांग की कि पुलिस पीड़ितों के सामने आने का इंतजार न करे और स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करे।
गोवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित पाटकर ने सरकार से हस्तक्षेप करने, स्वतः संज्ञान लेने और इस भयावह मामले की त्वरित, निष्पक्ष व समयबद्ध जांच कराने की मांग की।
दक्षिण गोवा पुलिस वर्तमान में डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है और यह निर्धारित करने का प्रयास कर रही है कि सोहम सुशांत नाइक द्वारा नाबालिग लड़कियों का शोषण किस पैमाने पर हुआ।
आरोपी अभी हिरासत में है जबकि फॉरेंसिक टीमें कथित रूप से ब्लैकमेलिंग में इस्तेमाल किए गए वीडियो को बरामद करने का कार्य कर रही हैं।