मुंबई एयरपोर्ट पर 24 करोड़ के ड्रग्स और 2 करोड़ का सोना जब्त, तस्करी के आरोपी पकड़े
मुंबई । कस्टम विभाग ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बड़ी कार्रवाई की है। एक सप्ताह में नशीले पदार्थ और सोने की तस्करी के कई मामलों का खुलासा किया गया। एयरपोर्ट कमिश्नरेट, मुंबई कस्टम्स जोन-III के अधिकारियों ने 11 फरवरी 2026 से 17 फरवरी 2026 तक की ड्यूटी के दौरान तस्करी के कई मामले पकड़े। इस दौरान मुख्य रूप से हाइड्रोपोनिक वीड (एक प्रकार का नशीला पदार्थ) और अवैध सोना जब्त किया गया। स्पॉट चेक और एपीआईएस प्रोफाइलिंग के आधार पर कुल छह मामले दर्ज किए गए। इनमें से तीन मामलों में बैंकॉक से आने वाले तीन यात्रियों से 9.581 किलोग्राम संदिग्ध हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुआ। इसकी अनुमानित कीमत बाजार में लगभग 9.581 करोड़ रुपए है। इन यात्रियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
मुंबई एयरपोर्ट पर 24 करोड़ के ड्रग्स और 2 करोड़ का सोना जब्त, तस्करी के आरोपी पकड़े
इसी तरह, तीन अन्य मामलों में कुल 1336.62 ग्राम सोना जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 1.85 करोड़ रुपए है। ये मामले भी प्रोफाइलिंग के आधार पर पकड़े गए, जिसमें यात्रियों से छिपाकर लाया गया सोना बरामद हुआ। खास खुफिया जानकारी के आधार पर तीन और मामले दर्ज किए गए। इनमें भी बैंकॉक से आए तीन यात्रियों से कुल 14.780 किलोग्राम संदिग्ध हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुआ। इसकी बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 14.780 करोड़ बताई गई है। इन यात्रियों को भी एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। हाल के महीनों में हाइड्रोपोनिक वीड ( यह सामान्य गांजे से ज्यादा ताकतवर होता है) की तस्करी में तेजी आई है, खासकर थाईलैंड से आने वाली उड़ानों में। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे प्रयासों को नाकाम करने के लिए लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। कस्टम विभाग ने यात्रियों से अपील की है कि वे कानून का पालन करें और कोई भी अवैध सामान न लाएं। तस्करी के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
कोलकाता: पति-पत्नी से 3 करोड़ की ठगी करने वाला गिरफ्तार, मलेशिया कनेक्शन आया सामने
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बड़े साइबर ठगी और सिम बॉक्स रैकेट का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इस मामले में 3 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी हुई थी, जिससे न केवल आम नागरिकों बल्कि व्यवसायिक जगत में भी सुरक्षा और डिजिटल लेन-देन को लेकर चिंता बढ़ गई है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद अमजद (38) के रूप में हुई है। उसे सोमवार को सेंट्रल कोलकाता के एमहर्स्ट स्ट्रीट इलाके में छापेमारी के दौरान पकड़ लिया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के पीछे की जानकारी अबीर शेख से पूछताछ के दौरान सामने आई, जिसे हाल ही में बिधाननगर पुलिस ने इसी तरह के सिम बॉक्स रैकेट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने बताया कि यह साइबर ठगी पिछले साल अक्टूबर में हुई थी। बेहाला के व्यवसायी बिधान घोष दस्तीदार को एक व्यक्ति ने कूरियर कंपनी का अधिकारी बनकर फोन किया और उन्हें बताया कि उनके नाम से भेजे गए एक पार्सल में प्रतिबंधित ड्रग्स पाए गए हैं। इस जानकारी के आधार पर पीड़ित को डराने और उन्हें मानसिक दबाव में लाने की योजना बनाई गई थी। इसके बाद ठगों ने मामला सीबीआई और ईडी को भेजे जाने की धमकी दी।
थोड़ी ही देर बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी अमित कुमार बताकर बिधान घोष और उनकी पत्नी से वीडियो कॉल किया। वीडियो कॉल के दौरान दंपती को गिरफ्तारी की धमकी दी गई और कहा गया कि उन्हें लगातार अपने मोबाइल ऑन रखना होगा क्योंकि सीबीआई और अन्य एजेंसियां उन्हें सर्विलांस पर रख रही हैं। इस वीडियो कॉल के दौरान ठगों ने नकली सीबीआई, ईडी और आरबीआई के पहचान पत्र और दस्तावेज भी दिखाए, ताकि पीड़ित पूरी तरह भ्रमित और डर में रहे।
इस कॉल में बाद में दो और लोग शामिल हुए, जिन्होंने खुद को आईपीएस अधिकारी बताया और पति-पत्नी को गिरफ्तार करने की धमकी दी। इस पूरे सिलसिले में पीड़ित से कुल 3 करोड़ रुपए की ठगी की गई। पुलिस ने बताया कि इस प्रकार की साइबर ठगी में ठगों ने तकनीकी ज्ञान का भरपूर इस्तेमाल किया। यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि अपराधी आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर कैसे आम नागरिकों को अपने जाल में फंसा सकते हैं।
गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने कई ठिकानों पर छापेमारी की और सिम बॉक्स रैकेट से जुड़े गैरकानूनी सामान जब्त किए। बरामद सामग्री में 12 सिम बॉक्स, एक लैपटॉप, नौ राउटर, वाई-फाई से जुड़े सीसीटीवी कैमरे, 17 मोबाइल फोन, 2,250 सिम कार्ड और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सिम बॉक्स का इस्तेमाल अपराधियों ने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल की तरह दिखाने और साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए किया था।
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी के लिए आम मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया गया था, बल्कि ‘सिम बॉक्स’ नाम के खास उपकरणों का प्रयोग किया गया। यह डिवाइस एक साथ कई सिम कार्ड को इस्तेमाल कर इंटरनेट और कॉल रूटिंग तकनीक के माध्यम से कॉल को इस तरह बदल देता था कि उसे स्थानीय कॉल की तरह दिखाया जा सके। इससे न केवल कॉल रिकॉर्डिंग और ट्रैकिंग मुश्किल होती थी बल्कि बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा भी प्रभावित होती थी।
कोलकाता: पति-पत्नी से 3 करोड़ की ठगी करने वाला गिरफ्तार, मलेशिया कनेक्शन आया सामने
प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि बांग्लादेश का नागरिक अबीर इस अवैध कॉल रूटिंग में सक्रिय रूप से शामिल था और ठगी के तकनीकी संचालन को नियंत्रित कर रहा था। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का मुख्य सरगना त्रिपुरा का रहने वाला बिप्लब हुसैन है, जो पूरे नेटवर्क की योजना और कार्यान्वयन को नियंत्रित करता था। उसके साथ चुंग वेई कियात नामक मलेशियाई नागरिक भी जुड़ा हुआ था, जो भारत में मेडिकल वीजा पर आया था। यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था और इसमें विदेशी नागरिकों की भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी, जिससे यह मामला और जटिल हो गया।
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह केवल ठगी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से लोगों को डराने, ब्लैकमेल करने और साइबर माध्यमों से धन हड़पने की योजना बनाई जाती थी। गिरोह के पास तकनीकी उपकरण, नकली पहचान पत्र, सिम कार्ड, और राउटर सहित कई आधुनिक साधन मौजूद थे, जिनके जरिए वे बड़े पैमाने पर अपराध को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए मोहम्मद अमजद और अन्य सहयोगी गिरोह के संचालन और तकनीकी प्रक्रियाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।
जांच के अनुसार, गिरोह ने पीड़ितों को डराने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए वीडियो कॉल और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इसके जरिए पीड़ित दंपती मानसिक दबाव में आ गए और ठगों द्वारा बताई गई शर्तों का पालन करने लगे। साइबर ठगी की इस घटना में तकनीक और डर का संयोजन स्पष्ट रूप से देखा गया, जिससे यह मामला अत्यंत गंभीर और व्यापक हो गया।
इस पूरे मामले से यह संकेत मिलता है कि साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय कॉल रूटिंग तकनीक का दुरुपयोग किस हद तक बढ़ गया है। पुलिस ने बताया कि अब जांच का मुख्य फोकस गिरोह के अन्य सहयोगियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पहचान करना है। इसके अलावा, सिम बॉक्स, राउटर और अन्य तकनीकी उपकरणों के प्रयोग और उनके नेटवर्क का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
कोलकाता पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी और उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनसे पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जानकारी हासिल की जाएगी। यह मामला तकनीकी अपराध, साइबर ठगी और अंतरराष्ट्रीय कॉल रूटिंग के जरिए किए जाने वाले अपराधों पर कानून और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता का उदाहरण है।
इस ऑपरेशन में पुलिस की सतर्कता और रणनीतिक कार्रवाई स्पष्ट रूप से दिखाई दी। छापेमारी और गिरफ्तारियों के दौरान बरामद सामग्री, सिम बॉक्स और डिजिटल उपकरणों के विश्लेषण के आधार पर अब आगे की जांच तेज कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी विशेषज्ञता का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
अंततः, कोलकाता में सिम बॉक्स रैकेट और साइबर ठगी का यह खुलासा एक गंभीर चेतावनी है कि डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय तकनीक का गलत इस्तेमाल किस प्रकार से बड़े पैमाने पर वित्तीय अपराध और ठगी को अंजाम दे सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और सभी दोषियों को कानून के तहत दंडित किया जाएगा। साथ ही, आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि इस तरह के अपराधों को रोकने में सहयोग मिल सके।
रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में
मुंबई। बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी सतर्कता और रणनीतिक कार्रवाई से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सभी पांचों आरोपियों को 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि उनके खिलाफ विस्तृत पूछताछ और जांच की जा सके। पुलिस ने अदालत को बताया कि इस मामले में सोमवार को गिरफ्तार किए गए सात अन्य लोग, जिनमें कथित शूटर भी शामिल है, एक अलग गिरोह से जुड़े हैं। वहीं, शुरुआती दौर में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी पुणे से मुंबई तक वाहन और हथियार पहुंचाने वाले दूसरे गिरोह का हिस्सा थे। इस रणनीति का उद्देश्य दोनों गिरोहों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि दोनों गिरोहों के बीच समन्वय किसके निर्देश पर हो रहा था और किसके फंडिंग के माध्यम से इस घटना को अंजाम दिया गया। यह जानकारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे गिरोहों की संरचना, संचालन पद्धति और उनके संभावित आगे की योजनाओं का पता चलेगा।
जांच में यह सामने आया कि रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास के बाहर पांच राउंड गोलियां चलाई गई थीं। यह घटना न केवल मुंबई बल्कि पूरे फिल्म उद्योग और आम जनता के बीच भय और सुरक्षा के प्रति चिंता का कारण बनी। मुंबई क्राइम ब्रांच की गहन जांच में पता चला कि वारदात में इस्तेमाल की गई गाड़ी पुणे से लाई गई थी। जांच के अनुसार, यह वाहन पुणे के एक व्यक्ति का था, जिसने इसे कुछ दिन पहले 30 हजार रुपये में आरोपी आदित्य गायकी को बेचा था। इसके बाद आदित्य गायकी और एक अन्य आरोपी, समर्थ पोमाजी, ने इस वाहन को मुंबई के जुहू इलाके में निर्धारित स्थान पर छोड़ दिया। पुलिस का मानना है कि वाहन की इस तरह की ढुलाई एक सुनियोजित योजना का हिस्सा थी, जिससे घटना को अंजाम देने वाले शूटर तक गाड़ी और हथियार आसानी से पहुंचे।
जांच में यह भी सामने आया कि फरार आरोपी शुभम लोनकर ने मुंबई में दहशत फैलाने की साजिश रची थी। पुलिस के अनुसार, उसने गिरफ्तार आरोपियों से स्पष्ट कहा था कि उसे मुंबई में “कुछ बड़ा” करना है। इस संदर्भ में यह बताया गया कि शुभम लोनकर ने आरोपियों के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए एक ऐप का इस्तेमाल किया और एक आरोपी के खाते में 40 हजार रुपये भी ट्रांसफर किए। यह स्पष्ट संकेत है कि अपराधियों के बीच वित्तीय और संचालन संबंधी समन्वय डिजिटल माध्यमों के जरिए किया जा रहा था, जो आज के तकनीकी युग में अपराधियों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों में से एक है।
पुलिस का कहना है कि वाहन खरीदकर मुंबई लाने वाले आरोपियों को शूटर की पहचान और उसकी भूमिका की जानकारी नहीं थी। उनका काम केवल वाहन और हथियार मुंबई तक सुरक्षित पहुंचाना था। इसके बाद शुभम लोनकर ने शूटर को गाड़ी लेने और फायरिंग की घटना को अंजाम देने के निर्देश दिए। यह मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे अपराधी एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से अपराध को अंजाम देते हैं, जिसमें विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग जिम्मेदारियां तय होती हैं।
रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में
विस्तृत जांच में यह भी सामने आया है कि मुंबई लाने वाले गिरोह और शूटर के गिरोह के बीच संबंध केवल फायरिंग तक सीमित नहीं थे, बल्कि यह नेटवर्क भविष्य में और भी संभावित अपराधों को अंजाम देने के लिए समन्वयित कार्य करने की योजना बना रहा था। पुलिस का उद्देश्य अब इन दोनों गिरोहों के बीच सम्पूर्ण संपर्क और संचालन पद्धति का खुलासा करना है ताकि अपराधियों के व्यापक नेटवर्क को तहस-नहस किया जा सके।
इसके अलावा पुलिस ने बताया कि शुभम लोनकर ने फायरिंग के लिए रणनीति बनाई थी और डिजिटल माध्यमों के जरिए आरोपियों को निर्देश दिए। यह आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर अपराधों की योजना बनाने का एक उदाहरण है। पुलिस के मुताबिक, मामले में उपयोग की गई गाड़ी और हथियार की पूरी श्रृंखला का ट्रैकिंग किया जा रहा है, जिससे यह पता चले कि गिरोह अन्य अपराधों में किस प्रकार शामिल था और क्या भविष्य में इसी तरह की घटनाओं की योजना बना रहे थे।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस उन सभी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है जो इस फायरिंग और जुड़े गिरोह के संचालन में शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस पूरी साजिश का भंडाफोड़ करने में सक्षम होगी। इसके अलावा, यह भी ध्यान में रखा जा रहा है कि मामले में शामिल गिरोहों की वित्तीय और डिजिटल लेन-देन की जांच की जाए ताकि उनके सम्पूर्ण नेटवर्क की पहचान हो सके।
मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई कानून और व्यवस्था बनाए रखने के प्रति उनकी तत्परता और सक्रियता को दर्शाती है। रोहित शेट्टी जैसे प्रमुख फिल्म निर्देशक के घर के बाहर हुई फायरिंग जैसी घटनाएं न केवल सुरक्षा की गंभीर चुनौती हैं बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय बन जाती हैं। इस घटना से स्पष्ट होता है कि अपराधियों के गिरोह योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हैं और इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को तकनीकी और मानवीय खुफिया तंत्र का समन्वय करना पड़ता है।
मुंबई क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल फायरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़े और संगठित अपराध नेटवर्क का सक्रिय होना भी सामने आया है। गिरफ्तार आरोपियों और फरार आरोपियों से पूछताछ के बाद ही पूरे नेटवर्क और उनके संचालन की रणनीति का पता चलेगा। इस प्रक्रिया में पुलिस डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों का उपयोग कर रही है।
इस पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस दोनों गिरोहों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कौन किसे निर्देश दे रहा था, कौन फंडिंग कर रहा था और किसके आदेश पर अपराध को अंजाम दिया गया। इस रणनीति से पुलिस को यह समझने में मदद मिलेगी कि गिरोहों का नेतृत्व किसके हाथ में है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से उपाय करने की जरूरत है।
साथ ही, इस मामले से यह भी संकेत मिलता है कि अपराधी डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके कम जोखिम में अधिक प्रभावशाली अपराध करने की योजना बनाते हैं। इसलिए पुलिस ने डिजिटल निगरानी को भी पूरी तरह सक्रिय किया है, ताकि अपराधियों के सभी संपर्कों और संभावित अपराधों का पता लगाया जा सके।
अंततः, रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे पूछताछ, मुंबई पुलिस की सक्रियता और अपराध नेटवर्क के खिलाफ उनकी रणनीति का परिचायक है। पुलिस का उद्देश्य न केवल इस घटना का खुलासा करना है बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपराधियों के संपूर्ण नेटवर्क को बेनकाब करना भी है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस पूरी तरह जुटी हुई है, ताकि किसी भी तरह की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
दिल्ली पुलिस ने 7.5 करोड़ रुपए की हेरोइन के साथ दंपति समेत तीन को किया गिरफ्तार
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने राजधानी और एनसीआर में सक्रिय एक बड़े ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मंगलवार रात भोपुरा बॉर्डर के पास 1.504 किलोग्राम स्मैक/हेरोइन बरामद की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 7.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पति-पत्नी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो सुनियोजित तरीके से उत्तर प्रदेश से दिल्ली-एनसीआर में नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुखबिर से विशेष सूचना प्राप्त हुई थी कि आरिफ खान नामक व्यक्ति बरेली, उत्तर प्रदेश से भारी मात्रा में हेरोइन लाकर गाजियाबाद और दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वितरित करता है। सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस टीम ने भोपुरा बॉर्डर क्षेत्र में गुप्त रेकी की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। तकनीकी निगरानी और मानवीय खुफिया तंत्र को सक्रिय करते हुए इंस्पेक्टर विकास पन्नू के नेतृत्व और एसीपी/एएनटीएफ सतेंद्र मोहन के पर्यवेक्षण में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने रणनीतिक तरीके से जाल बिछाया। इसी दौरान गाजियाबाद की ओर से आती एक संदिग्ध वैगनआर टैक्सी को चिन्हित कर घेराबंदी के बाद रोका गया। कार की तलाशी लेने पर उसमें सवार आरिफ खान (36) और उसकी पत्नी शिखा अली (30) को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान दोनों के पास से 303 ग्राम हेरोइन बरामद हुई, जबकि कार की पिछली सीट पर रखे बैग की जांच करने पर 1007 ग्राम अतिरिक्त हेरोइन मिली। इस प्रकार मौके पर ही कुल 1310 ग्राम हेरोइन जब्त की गई। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे परिवार के साथ यात्रा का बहाना बनाकर रात के समय तस्करी करते थे ताकि पुलिस को उन पर संदेह न हो। दंपति ने स्वीकार किया कि वे पिछले कुछ समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय थे और सप्लाई चेन के माध्यम से नियमित रूप से ड्रग्स पहुंचाते थे। आगे की पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने हेरोइन के रिसीवर जुम्मन (32), निवासी जे.जे. कॉलोनी, भलस्वा डेयरी, दिल्ली को भी गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर 194 ग्राम हेरोइन और बरामद की गई, जिससे कुल बरामदगी 1504 ग्राम तक पहुंच गई। जांच में यह भी सामने आया कि आरिफ खान कोविड-19 महामारी के दौरान नौकरी छूटने के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और बाद में टैक्सी चलाने लगा।
दिल्ली पुलिस ने 7.5 करोड़ रुपए की हेरोइन के साथ दंपति समेत तीन को किया गिरफ्तार
इसी दौरान उसका संपर्क बरेली के एक कथित किंगपिन से हुआ, जिसने उसे तस्करी के नेटवर्क से जोड़ दिया। आरिफ और उसकी पत्नी कथित रूप से कमीशन के आधार पर ड्रग्स की ढुलाई करते थे, जबकि जुम्मन स्थानीय स्तर पर पुड़िया बनाकर खुदरा सप्लाई करता था। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें सप्लायर, कैरियर और लोकल डिस्ट्रीब्यूटर शामिल थे। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों में युवाओं और नशे के आदी व्यक्तियों को हेरोइन की आपूर्ति कर रहा था। पुलिस अब इस सप्लाई चेन के अन्य सदस्यों की पहचान करने, वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण करने और अन्य राज्यों में फैले संभावित नेटवर्क की जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन से एक महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई है, लेकिन नेटवर्क के पूर्ण उन्मूलन के लिए आगे की कार्रवाई जारी रहेगी। बरामद हेरोइन की गुणवत्ता और स्रोत की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। क्राइम ब्रांच ने स्पष्ट किया है कि राजधानी में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार चलाया जा रहा है और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से न केवल एक बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, बल्कि इससे युवाओं को नशे के जाल में फंसाने वाली गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि समाज में जागरूकता और सामुदायिक सहयोग के बिना इस समस्या पर पूर्ण नियंत्रण संभव नहीं है, इसलिए आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस कार्रवाई को दिल्ली-एनसीआर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, और पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
NIA ने तीन साल से फरार आरोपी को किया गिरफ्तार, दुबई से लौटते ही एयरपोर्ट पर पकड़ा
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने केरल में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में तीन वर्ष से फरार चल रहे आरोपी मोइदीनकुट्टी पी के को संयुक्त अरब अमीरात से भारत लौटने पर गिरफ्तार कर लिया। उसे कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया, जहां केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी पहले से ही सक्रिय थी। गिरफ्तार आरोपी केरल के मलप्पुरम जिले के वलंचेरी स्थित कट्टिप्पारुथी का निवासी है और जांच एजेंसी के अनुसार वह पीएफआई के फिजिकल एजुकेशन ट्रेनिंग का कोऑर्डिनेटर था। एनआईए का कहना है कि सितंबर 2022 में जब इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई, उसके तुरंत बाद आरोपी देश छोड़कर फरार हो गया था और विदेश में छिपकर रह रहा था। जांच के दौरान एनआईए ने उसके संभावित ठिकानों पर कई छापेमारी की कार्रवाइयाँ की थीं, जिनमें आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और कथित रूप से संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए थे। एजेंसी का आरोप है कि यह मामला पीएफआई और उसके पदाधिकारियों द्वारा विभिन्न समुदायों के बीच सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने तथा युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने की एक व्यापक साजिश से जुड़ा है। जांच एजेंसी के मुताबिक संगठन युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण के नाम पर संगठित कर उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने, अनुशासित कैडर तैयार करने और हिंसक गतिविधियों के लिए धन जुटाने की रणनीति पर काम कर रहा था। एनआईए ने दावा किया है कि इस कथित साजिश का दीर्घकालिक उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करना था, जिसके लिए संगठन ने चरणबद्ध ढंग से कैडर निर्माण, वैचारिक प्रशिक्षण और संसाधन जुटाने की योजना बनाई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि पीएफआई ने अपनी गतिविधियों को संचालित करने के लिए ‘रिपोर्टर्स विंग’, ‘फिजिकल एवं आर्म्स ट्रेनिंग विंग’ और ‘सर्विस टीम्स’ जैसी विशेष इकाइयों का गठन किया था, जिनके माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर कार्यों का बंटवारा किया जाता था। एजेंसी का आरोप है कि संगठन अपने कैंपस, प्रशिक्षण केंद्रों और अन्य सुविधाओं का उपयोग शारीरिक प्रशिक्षण, फिटनेस कार्यक्रमों और योग कक्षाओं की आड़ में चयनित सदस्यों को हथियार चलाने और सामरिक गतिविधियों की ट्रेनिंग देने के लिए करता था। जांच में कथित तौर पर यह भी पाया गया कि युवाओं को वैचारिक रूप से प्रभावित करने के लिए संगठित बैठकों, डिजिटल माध्यमों और गोपनीय सत्रों का सहारा लिया जाता था।
NIA ने तीन साल से फरार आरोपी को किया गिरफ्तार, दुबई से लौटते ही एयरपोर्ट पर पकड़ा
एनआईए अब तक इस मामले में 65 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिनमें संगठन के कई पदाधिकारी और सक्रिय सदस्य शामिल बताए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के बाद फरार अन्य संदिग्धों के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है तथा जांच अभी जारी है। इससे पहले 13 फरवरी को एनआईए ने इम्ताथुल्लाह नामक आरोपी के खिलाफ भी आरोपपत्र दायर किया था, जिस पर रामलिंगम हत्या मामले में शामिल हमलावरों और साजिशकर्ताओं को शरण देने का आरोप है। उल्लेखनीय है कि मार्च 2019 में पीएफआई से जुड़े कथित सदस्यों द्वारा रामलिंगम की हत्या की घटना ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया था और उसी के बाद संगठन की गतिविधियों पर केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी और कड़ी हो गई थी। वर्तमान गिरफ्तारी को जांच एजेंसी एक महत्वपूर्ण सफलता मान रही है, क्योंकि इससे कथित नेटवर्क, उसकी संरचना और संचालन पद्धति को समझने में मदद मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण, वित्तीय लेन-देन की जांच और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पड़ताल भी की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संगठन की गतिविधियाँ किस स्तर तक फैली हुई थीं। एनआईए का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर प्रत्येक आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी और देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
दिल्ली में साहिल सोलंकी की हत्या का खुलासा, टिल्लू ताजपुरिया गैंग से जुड़े दो बदमाश गिरफ्तार
नई दिल्ली में हुई साहिल सोलंकी की दिनदहाड़े हत्या के मामले को सुलझाने में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उल्लेखनीय तेजी और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया। राजधानी के रोहिणी सेक्टर-17 क्षेत्र में 14 फरवरी को घटी इस सनसनीखेज वारदात ने स्थानीय निवासियों के बीच भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया था। व्यस्त इलाके में खुलेआम गोली मारकर की गई इस हत्या ने एक बार फिर दिल्ली में सक्रिय गैंगवार की समस्या को उजागर कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और महज 48 घंटों के भीतर मामले की गुत्थी सुलझा लेने का दावा किया। इस त्वरित कार्रवाई से न केवल अपराधियों की पहचान हुई बल्कि हत्या के पीछे छिपे आपराधिक नेटवर्क और गैंग की साजिश का भी खुलासा हुआ।
क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई का नेतृत्व इंस्पेक्टर मान सिंह, इंस्पेक्टर अरविंद सिंह, इंस्पेक्टर सुंदर गौतम और इंस्पेक्टर नीरज शर्मा ने किया। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में गठित विशेष टीमों ने तकनीकी और मैन्युअल दोनों स्तरों पर सघन जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह हत्या किसी व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम नहीं, बल्कि गैंग की आपसी दुश्मनी का हिस्सा थी। जांच के दौरान पुलिस को यह संकेत मिला कि कुख्यात टिल्लू ताजपुरिया गैंग के सदस्यों की इस घटना में संलिप्तता हो सकती है। इसके बाद जांच की दिशा उसी ओर केंद्रित की गई और संदिग्धों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गईं।
ऑपरेशन-I के तहत एआरएससी की टीम ने दिल्ली के नरेला इलाके के पास जाल बिछाया। पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि गैंग का एक सदस्य वहां आने वाला है। सतर्कता और रणनीति के साथ लगाए गए इस ट्रैप में एक बदमाश को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान उसने कई अहम खुलासे किए। उसने बताया कि वह इंस्टाग्राम के माध्यम से गैंग के अन्य सदस्यों हिमांशु और मोहित के संपर्क में आया था। सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली आलीशान जीवनशैली, हथियारों का प्रदर्शन और तेज रफ्तार जिंदगी के झूठे आकर्षण ने उसे प्रभावित किया। आर्थिक तंगी और गलत संगत के चलते वह अपराध की दुनिया में कदम रख बैठा। धीरे-धीरे वह गैंग की गतिविधियों में शामिल हो गया और उसे साहिल सोलंकी की हत्या की साजिश का हिस्सा बनाया गया।
आरोपी ने खुलासा किया कि 14 फरवरी को वह हिमांशु और सोनू उर्फ गोनी के साथ रोहिणी सेक्टर-17 पहुंचा था। हत्या की योजना पहले से तैयार थी। उसकी भूमिका मोटरसाइकिल चलाने की थी ताकि वारदात को अंजाम देने के बाद साथी तेजी से मौके से फरार हो सकें। जब साहिल सोलंकी को निशाना बनाया गया, तब उसके साथियों ने गोली चलाई और वह वाहन लेकर वहां से निकल गया। यह पूरी वारदात कुछ ही मिनटों में अंजाम दे दी गई, जिससे स्पष्ट होता है कि अपराधियों ने पहले से इलाके की रेकी की थी और भागने के रास्ते तय कर रखे थे।
ऑपरेशन-II के तहत एनआर-II टीम ने तकनीकी साक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया। इलाके में लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। संदिग्ध मोटरसाइकिल और उसमें सवार व्यक्तियों की गतिविधियों को ट्रैक किया गया। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया कनेक्शन की भी गहन जांच की गई। एसआई बलराज को जांच के दौरान एक अहम सुराग मिला, जिसके आधार पर समयपुर, रोहिणी क्षेत्र में ट्रैप लगाया गया। वहां से दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसने भी अपराध में अपनी भूमिका स्वीकार की और गैंग के मास्टरमाइंड के बारे में जानकारी दी।
दिल्ली में साहिल सोलंकी की हत्या का खुलासा, टिल्लू ताजपुरिया गैंग से जुड़े दो बदमाश गिरफ्तार
दूसरे आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और रोज़गार की तलाश में दिल्ली आया था। यहां किराए के मकान में रहते हुए वह गलत संगत में पड़ गया। जनवरी 2025 में उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इलाके में दहशत फैलाने के उद्देश्य से एक व्यक्ति पर चाकू से हमला किया था। उस मामले में उसे जुवेनाइल होम भेजा गया। रिहाई के बाद उसने खुद को सुधारने के बजाय फिर से अपराध की राह चुन ली। इंस्टाग्राम के जरिए उसका संपर्क टिल्लू ताजपुरिया गैंग से हुआ और पैसे के लालच तथा दबदबे की चाह में वह इस गिरोह में शामिल हो गया। गैंग के वरिष्ठ सदस्यों ने उसे विश्वास में लेकर हत्या जैसी गंभीर वारदात में शामिल कर लिया।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी से हत्या की साजिश की परतें खुल गई हैं। पुलिस अब इस मामले के मास्टरमाइंड और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि गैंगवार की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं का गैंग से जुड़ना एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। अपराधी तत्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर युवाओं को प्रभावित करते हैं और उन्हें अवैध गतिविधियों में शामिल करते हैं।
यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करता है। पहली बात, राजधानी जैसे महानगर में सक्रिय गैंगों की जड़ें कितनी गहरी हैं और वे किस तरह युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। दूसरी बात, सोशल मीडिया की निगरानी और जागरूकता कितनी आवश्यक है ताकि युवा झूठे दिखावे और अवैध आकर्षण के शिकार न बनें। तीसरी बात, पुनर्वास और सुधार गृहों से बाहर आने वाले किशोर अपराधियों के लिए प्रभावी परामर्श और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना कितना जरूरी है, ताकि वे दोबारा अपराध की दुनिया में न लौटें।
रोहिणी सेक्टर-17 में दिनदहाड़े हुई इस हत्या का पर्दाफाश कर दिल्ली पुलिस ने यह संदेश दिया है कि संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। 48 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस की तत्परता और समन्वित रणनीति को दर्शाती है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि गैंगवार की समस्या केवल पुलिस कार्रवाई से पूरी तरह समाप्त नहीं होगी, बल्कि इसके लिए सामाजिक जागरूकता, परिवार की भूमिका, शिक्षा और रोजगार के अवसरों का विस्तार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। साहिल सोलंकी की हत्या ने एक बार फिर यह साबित किया कि अपराध का रास्ता अंततः विनाश की ओर ले जाता है—चाहे वह पीड़ित के लिए हो या अपराधी के लिए। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद बंधी है और आम नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तंत्र सतर्क और सक्रिय है।
मौसम एक बार फिर बदलेगा मिजाज, 17 को बारिश की संभावना, NCR में AQI ऑरेंज जोन में
नोएडा । राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। मौसम विभाग के 7 दिन के पूर्वानुमान के अनुसार 17 फरवरी को आसमान में सामान्य से अधिक बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। इसके बाद न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 फरवरी को न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है तथा मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा। 17 फरवरी को भी न्यूनतम तापमान 13 डिग्री और अधिकतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है, लेकिन इस दिन सामान्यत: बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। 18 फरवरी को न्यूनतम तापमान 13 डिग्री और अधिकतम 28 डिग्री रहने का अनुमान है तथा मौसम फिर से साफ हो जाएगा। 19 फरवरी को न्यूनतम 14 डिग्री और अधिकतम 28 डिग्री, 20 फरवरी को न्यूनतम 14 डिग्री और अधिकतम 28 डिग्री तथा 21 फरवरी को भी न्यूनतम 14 डिग्री और अधिकतम 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
मौसम एक बार फिर बदलेगा मिजाज, 17 को बारिश की संभावना, NCR में AQI ऑरेंज जोन में
अधिकांश दिनों में मुख्य रूप से साफ आसमान रहने की संभावना जताई गई है। वहीं, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की बात करें तो एनसीआर में फिलहाल स्थिति आंशिक रूप से ठीक बनी हुई है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर एक्यूआई ऑरेंज श्रेणी में दर्ज किया गया है। गाजियाबाद में इंदिरापुरम का एक्यूआई 269, लोनी 299, संजय नगर 198 और वसुंधरा 259 दर्ज किया गया। दिल्ली में आनंद विहार का एक्यूआई 300, अशोक विहार 266, अलीपुर 256, बवाना 264, बुराड़ी क्रॉसिंग 240, चांदनी चौक 247, सीआरआरआई मथुरा रोड 202, डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज 212 और डीटीयू 205 दर्ज किया गया। आया नगर में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति रही, जहां एक्यूआई 155 दर्ज हुआ। नोएडा में सेक्टर-125 का एक्यूआई 225, सेक्टर-1 का 201 और सेक्टर-116 का 202 दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि एनसीआर के अधिकांश इलाकों में वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी के बीच बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 17 फरवरी को संभावित बारिश और तेज हवाओं से प्रदूषण के स्तर में अस्थायी सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि बारिश के बाद तापमान में गिरावट से सुबह और रात के समय ठंड का अहसास बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को बदलते मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतनी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विधानसभा सत्र से पूर्व ‘जनता दर्शन’ में सुनीं जन-समस्याएं
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज विधानसभा की कार्यवाही में सम्मिलित होने से पूर्व अपने सरकारी आवास पर ‘जनता दर्शन’ का आयोजन किया। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए बड़ी संख्या में लोगों ने उपमुख्यमंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं और शिकायतें प्रस्तुत कीं। उपमुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी फरियादियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना। जनता दर्शन में मुख्य रूप से भूमि विवाद, पुलिस सहायता, स्वास्थ्य उपचार हेतु आर्थिक मदद और स्थानीय विकास कार्यों से संबंधित मामले सामने आए। उपमुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों/पुलिस अधीक्षकों को फोन पर निर्देशित किया कि जन-समस्याओं का समाधान गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से किया जाए।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विधानसभा सत्र से पूर्व ‘जनता दर्शन’ में सुनीं जन-समस्याएं
मौर्य ने कहा कि सरकार जनता के द्वार पर है और किसी भी गरीब या असहाय व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि जन-समस्याओं का निराकरण करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और ‘जनता दर्शन’ का उद्देश्य शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करना है। उन्होंने एक्स पोस्ट पर भी इसकी जानकारी दी, जिसमें उन्होंने लिखा, “कैंप कार्यालय, सात कालिदास मार्ग, लखनऊ पर ‘जनता दर्शन’ के माध्यम से विभिन्न जनपदों से आए नागरिकों से भेंट कर उनकी समस्याओं को सुना तथा शीघ्र निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।” जनता दर्शन के पश्चात उपमुख्यमंत्री विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए रवाना हुए। इस अवसर पर विभागीय अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कोयंबटूर में एक करोड़ से अधिक कीमत के सामान चोरी, पुलिस ने दर्ज किया एफआईआर
कोयंबटूर । तमिलनाडु में कोयंबटूर शहर के सिंगनल्लूर इलाके में रविवार देर रात पान शॉप में अज्ञात बदमाशों ने 70 से अधिक सोने के सिक्के और 20 किलो चांदी चोरी की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामला दर्जकर जांच शुरू कर दी है। दुकान मालिक रमेश कुमार ने बताया कि उनकी दुकान घर के पास ही है और वह दुकान के पीछे स्थित अपने मकान में रहते हैं। रविवार रात वह रोज की तरह दुकान बंद कर मंदिर गए थे। इसी दौरान बदमाशों ने दुकान के पिछले हिस्से का शटर तोड़ दिया और अंदर घुस गए। आरोपियों ने दुकान में रखी तिजोरी को काटकर उसमें रखा कीमती सामान निकाल लिया और फरार हो गए। रमेश ने बताया कि चोर दुकान से करीब 70 से अधिक सोने के सिक्के और लगभग 20 किलोग्राम चांदी सहित कई अन्य जेवर भी ले गए। चोरी गए सामान की कुल कीमत एक करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
कोयंबटूर में एक करोड़ से अधिक कीमत के सामान चोरी, पुलिस ने दर्ज किया एफआईआर
रात में जब रमेश कुमार घर लौटे तो उन्होंने दुकान का टूटा हुआ शटर देखा। अंदर जाकर जांच करने पर सोने के सिक्के और चांदी गायब मिली। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही सिंगनल्लूर पुलिस मौके पर पहुंची। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने संदिग्धों का सुराग लगाने के लिए स्निफर डॉग की मदद ली है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान और उनके भागने के रास्ते का पता चल सके। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और विशेष टीमें बनाकर आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोगों की पहचान की गई है, जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। इस घटना में कितने लोग शामिल थे, अभी इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। मालिक रमेश के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया है।
भिवाड़ी में भीषण अग्निकांड : केमिकल-पटाखा फैक्ट्री में जिंदा जले 8 मजदूर, कंकाल के रूप में मिले शव
भिवाड़ी। राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी (खुशुखेड़ा) में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। यहाँ एक केमिकल और पटाखा बनाने वाली फैक्ट्री में भीषण आग लगने से 8 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। आग इतनी भयावह थी कि शव बुरी तरह जलकर कंकाल बन गए, जिन्हें रेस्क्यू टीम ने पॉलीथीन में इकट्ठा किया। मंत्री संजय शर्मा विधानसभा से सीधे मौके के लिए रवाना हो गए। सुबह 9:30 बजे हुआ हादसा, फैक्ट्रीमें थे 25 मजदूर हादसा खुशखेड़ा करौली इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित राजेंद्र नामक व्यक्ति की फैक्ट्री में सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुआ। घटना के समय फैक्ट्री के भीतर लगभग 25 मजदूर काम कर रहे थे। पुलिस गश्त के दौरान जब धुआं और आग की लपटें देखी गईं, तब मामले का पता चला और तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया।
भिवाड़ी में भीषण अग्निकांड : केमिकल-पटाखा फैक्ट्री में जिंदा जले 8 मजदूर, कंकाल के रूप में मिले शव
दिल दहला देने वाला मंजर : बॉडी पार्ट्स बटोरने पड़े मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम को फैक्ट्री के भीतर रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्य मिले। आग की तीव्रता के कारण मजदूरों के शरीर के अंग बिखर गए थे और कई शव केवल हड्डियों के ढांचे (कंकाल) में तब्दील हो चुके थे। प्रशासन ने इन अवशेषों को पॉलीथीन की थैलियों में भरकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है। केमिकल और पटाखों के अवैध भंडारण की आशंका प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस फैक्ट्री में केमिकल के साथ-साथ पटाखों का निर्माण भी किया जा रहा था, जिससे आग ने विस्फोटक रूप ले लिया। दमकल की मशक्कत : खुशखेड़ा और भिवाड़ी रीको फायर स्टेशन से आई दर्जनों गाड़ियों ने करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लापता मजदूर : 8 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि अभी भी 1 मजदूर के अंदर फंसे होने की आशंका है। मौके पर भारी पुलिस जाब्ता और अधिकारी मौजूद हादसे की गंभीरता को देखते हुए भिवाड़ी एडीएम सुमित्रा मिश्रा, एएसपी अतुल साहू, और खैरथल एडीएम शिवपाल जाट सहित प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। एफएसएल (FSL) की टीम को भी साक्ष्य जुटाने के लिए बुलाया गया है ताकि आग लगने के सही कारणों और फैक्ट्री के लाइसेंस की जांच की जा सके