पाकिस्तान के खैबर पखतूनख्वा में पुलिस स्टेशन पर आत्मघाती हमला, पांच की मौत
नई दिल्ली । पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू इलाके में एक आत्मघाती हमले की घटना सामने आई है। शुक्रवार को बन्नू के डोमेल पुलिस स्टेशन पर एक सुसाइड कार बम धमाका हुआ। इस धमाके में हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक पुलिसवाले समेत 13 लोग घायल हो गए। डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑफिसर बख्तुल्लाह वजीर ने इसकी पुष्टि की। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मरने वालों में एक ही परिवार के पति, पत्नी, बेटी और बेटा शामिल हैं। धमाका तब हुआ, जब विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी पुलिस स्टेशन के पिछले हिस्से से टकरा गई, जिससे एक जोरदार धमाका हुआ और फिर गोलीबारी शुरू हो गई। शुरुआती रिपोर्ट में पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि इसकी आवाज मीलों दूर तक सुनी गई। धमाके में पुलिस स्टेशन की संतरी पोस्ट पूरी तरह से तबाह हो गई, जबकि बिल्डिंग का एक बड़ा हिस्सा मलबे में बदल गया। धमाके से आसपास के रिहायशी इलाकों को भी बहुत नुकसान हुआ, कई घर गिर गए और कई लोग मलबे में फंस गए। रेस्क्यू 1122 के मुताबिक, घायलों को तुरंत पास के अस्पतालों में ले जाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पाकिस्तान के खैबर पखतूनख्वा में पुलिस स्टेशन पर आत्मघाती हमला, पांच की मौत
डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑफिसर बख्तुल्लाह वजीर ने कहा कि धमाके के बाद सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। जब तक इलाका पूरी तरह से साफ नहीं हो जाता, तब तक ऑपरेशन जारी रहेगा। इसके पहले बन्नू में ही घोरा गांव में गुरुवार को एक जोरदार धमाका हुआ, जिसमें एक सरकारी स्कूल तबाह हो गया। डॉन के अनुसार, बदमाशों ने बन्नू के बाका खेल इलाके के घोरा गांव में सरकारी प्राइमरी स्कूल नूर जान बाका खेल में विस्फोटक लगाए और बिल्डिंग को उड़ा दिया। डॉन ने बताया कि धमाके की वजह से स्कूल का स्ट्रक्चर पूरी तरह तबाह हो गया। पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि आतंकवादी कथित तौर पर स्कूल के अंदर रह रहे थे और जब धमाका हुआ तो वे एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईडी) तैयार कर रहे थे। हालांकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव आयोग की सख्ती : ‘साइलेंस पीरियड’ में चुनावी प्रचार और एग्जिट पोल पर पूरी तरह रोक
नई दिल्ली । इस महीने से शुरू हो रहे विधानसभा चुनावों और उपचुनावों को लेकर गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग ने मीडिया और राजनीतिक दलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने साफ किया है कि मतदान से पहले निर्धारित ‘साइलेंस पीरियड’ के दौरान किसी भी तरह के चुनावी प्रचार या प्रभाव डालने वाली सामग्री के प्रसारण पर पूरी तरह रोक रहेगी। 15 मार्च को चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नगालैंड और त्रिपुरा की 8 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की थी। आयोग के मुताबिक, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126(1)(बी) के तहत मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले ‘साइलेंस पीरियड’ लागू हो जाता है। इस दौरान किसी भी टीवी चैनल, रेडियो या अन्य माध्यम से चुनाव से जुड़ी कोई भी सामग्री प्रसारित नहीं की जा सकती, जो मतदाताओं को प्रभावित करे। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, असम में 9 अप्रैल को मतदान होगा और यहां साइलेंस पीरियड 7 अप्रैल शाम 5 बजे से 9 अप्रैल शाम 5 बजे तक रहेगा। केरल और पुडुचेरी में भी 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जहां साइलेंस पीरियड 7 अप्रैल शाम 6 बजे से 9 अप्रैल शाम 6 बजे तक लागू रहेगा।
चुनाव आयोग की सख्ती : ‘साइलेंस पीरियड’ में चुनावी प्रचार और एग्जिट पोल पर पूरी तरह रोक
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा और यहां 21 अप्रैल शाम 6 बजे से 23 अप्रैल शाम 6 बजे तक साइलेंस पीरियड रहेगा। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होंगे। पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल को। पहले चरण के लिए साइलेंस पीरियड 21 अप्रैल शाम 6 बजे से 23 अप्रैल शाम 6 बजे तक, जबकि दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल शाम 6 बजे से 29 अप्रैल शाम 6 बजे तक लागू रहेगा। चुनाव आयोग ने मीडिया संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस दौरान प्रसारित होने वाले किसी भी कार्यक्रम में ऐसी कोई सामग्री, विचार या अपील शामिल न हो, जो किसी पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में माहौल बनाए। इसमें ओपिनियन पोल का प्रसारण भी शामिल है। इसके अलावा आयोग ने धारा 126ए के तहत एग्जिट पोल पर भी रोक लगाई है। 9 अप्रैल सुबह 7 बजे से लेकर 29 अप्रैल शाम 6:30 बजे तक किसी भी तरह का एग्जिट पोल करना या उसके नतीजे प्रकाशित करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आयोग ने चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। साथ ही सभी मीडिया संस्थानों से इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की गई है।
उदयपुर हाईवे पर किलर टैंकर का तांडव : बेकाबू होकर 12 वाहनों को रौंदा, कार-बाइक के उड़े परखच्चे, नेशनल हाईवे पर मची चीख-पुकार
उदयपुर | उदयपुर-चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर आज दोपहर एक अनियंत्रित टैंकर ने भारी तबाही मचाई। देबारी पावर हाउस के सामने तेज रफ्तार टैंकर ने सड़क पर चल रहे एक दर्जन से अधिक वाहनों को एक के बाद एक टक्कर मार दी। इस भीषण भिड़ंत में दो कारें और कई बाइक बुरी तरह पिचक गईं, जिससे हाईवे पर लंबे समय तक अफरा-तफरी और जाम की स्थिति बनी रही।
दोपहर का हादसा : ताश के पत्तों की तरह भिड़े वाहन प्रतापनगर थाना क्षेत्र के देबारी हाईवे पर दोपहर में उस वक्त कोहराम मच गया जब एक बेकाबू टैंकर ने आगे चल रहे वाहनों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टैंकर की रफ्तार इतनी अधिक थी कि 12 से ज्यादा वाहन एक-दूसरे से टकराते चले गए। दो कारें और बाइक टैंकर और अन्य वाहनों के बीच दबकर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गई। घायलों की स्थिति : सूचना मिलते ही प्रतापनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लहूलुहान घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। क्षतिग्रस्त वाहनों को क्रेन की मदद से हटाकर रास्ता साफ कराया गया।
उदयपुर हाईवे पर किलर टैंकर का तांडव : बेकाबू होकर 12 वाहनों को रौंदा, कार-बाइक के उड़े परखच्चे, नेशनल हाईवे पर मची चीख-पुकार
सुबह का हादसा : टायर फटने से पलटा केमिकल टैंकर दिलचस्प और डराने वाली बात यह है कि इसी स्थान पर आज सुबह 11 बजे भी एक बड़ा हादसा हुआ था। केमिकल रिसाव : आर्ची गैलेक्सी के सामने एक केमिकल से भरा टैंकर टायर फटने के कारण डिवाइडर फांदकर रॉन्ग साइड में पलट गया। टैंकर के हुए दो टुकड़े : टक्कर इतनी भीषण थी कि टैंकर का केबिन और पिछला हिस्सा टूटकर अलग हो गए। सड़क पर केमिकल फैलने से आग का खतरा पैदा हो गया था, जिसे दमकल की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर संभाला। पुलिस की कार्रवाई और राहत कार्य प्रतापनगर थाना पुलिस ने दोनों ही घटनाओं में तत्परता दिखाई। सुबह हुए हादसे के बाद सड़क से केमिकल साफ करवाकर यातायात सुचारू किया गया था, लेकिन दोपहर में हुए दूसरे हादसे ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल पुलिस बेकाबू टैंकर के चालक और तकनीकी खराबी की जांच कर रही है। चश्मदीदों की जुबानी : हाईवे पर मौजूद लोगों ने बताया कि टैंकर के टायर फटने और फिर वाहनों के आपस में टकराने की आवाज इतनी तेज थी कि लगा जैसे कोई बम फटा हो। गनीमत रही कि सुबह के हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन दोपहर की घटना में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
दिल्ली पुलिस की एएसबी सेल ने अवैध हथियार के साथ अपराधी को किया गिरफ्तार
नई दिल्ली । दिल्ली के पूर्वी जिले की एंटी स्नैचिंग एंड बर्गरली सेल (एएसबी) अवैध हथियारों के कब्जे और उपयोग में शामिल अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में एएसबी सेल ने एक कुख्यात अपराधी को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से संभावित आपराधिक गतिविधियों को रोका जा सका और जिले में जन सुरक्षा को बढ़ावा मिला। पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार के अनुसार, पूर्वी जिले में हाल ही में अवैध हथियारों से जुड़ी घटनाओं को देखते हुए एएसबी सेल को सक्रिय अपराधियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी सौंपा गई थी। इसके बाद एसआई अजय तोमर (प्रभारी एएसबी सेल/पूर्वी) के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया। टीम ने संवेदनशील क्षेत्रों में सादे कपड़ों में लगातार खुफिया जानकारी जुटाने के अभियान चलाया। अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए स्थानीय मुखबिरों को सक्रिय किया।
दिल्ली पुलिस की एएसबी सेल ने अवैध हथियार के साथ अपराधी को किया गिरफ्तार
इसी बीच 31 मार्च को विश्वसनीय गुप्त सूचना मिली कि एक खतरनाक अपराधी अवैध हथियार लेकर खेलगांव रोड के पास आने वाला है। तुरंत कार्रवाई करते हुए टीम ने लोहे के पुल के पास एक जाल बिछाया। शाम लगभग 6:00 बजे मुखबिर द्वारा पहचान किए जाने पर संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया। जिसकी पहचान अर्जुन उर्फ सोनू निवासी त्रिलोकपुरी, दिल्ली के रूप में हुई। तलाशी के दौरान अर्जुन के पास से एक अवैध देसी पिस्तौल और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस स्टेशन मंडावली में शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि उसे दिसंबर 2025 में मंडोली जेल से जमानत पर रिहा किया गया था और उसने एक परिचित से हथियार लिया था। पुलिस ने बताया कि हथियार देने वाले की पहचान और उसकी गिरफ्तारी के साथ-साथ व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश करने का प्रयास जारी है। कक्षा पांच पास अर्जुन उर्फ सोनू आदतन अपराधी है और 15 पूर्व आपराधिक मामलों में संलिप्त पाया गया है।
बेंगलुरु में महिला टेक-कर्मी और उसके बेटे का शव मिला, जांच जारी
बेंगलुरु । बेंगलुरु से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां एक महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उनके 11 महीने के बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतकों की पहचान प्रतिभा वाली और उनके छोटे बेटे के रूप में हुई है। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें प्रतिभा ने इस दर्दनाक कदम के पीछे की वजह बताई है। नोट के अनुसार, उनके बेटे की गलती से पानी से भरी बाल्टी में डूबने के कारण मौत हो गई थी और खुद को इसका जिम्मेदार मानते हुए उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस मामले में शिकायत प्रतिभा के पति महंतेश वाली ने दर्ज कराई है, जो पेशे से इंजीनियर हैं। यह परिवार पिछले चार साल से बेंगलुरु के बैरवेश्वरननगर इलाके में एक किराए के मकान में रह रहा था। घटना वाले दिन यानी 1 अप्रैल को महंतेश सुबह अपने काम पर चले गए थे और प्रतिभा घर से ही ऑफिस का काम कर रही थीं। जब शाम को महंतेश वापस लौटे तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था और काफी कोशिशों के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने खिड़की के पास रखी दूसरी चाबी से घर खोला।
बेंगलुरु में महिला टेक-कर्मी और उसके बेटे का शव मिला, जांच जारी
घर के अंदर का नजारा बेहद खौफनाक था, क्योंकि प्रतिभा छत के हुक से साड़ी के फंदे पर लटकी हुई मिलीं। महंतेश ने यह भी देखा कि उनकी पत्नी की कलाई पर कटने के निशान थे और पास में खून भी बिखरा हुआ था। वहीं, उनका बेटा बिस्तर पर बेसुध पड़ा था, जिसे बाद में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में प्रतिभा ने अंग्रेजी में अपनी व्यथा लिखी थी कि वह अपने बच्चे को पानी में डूबने से बचा नहीं पाई और इसी आत्मग्लानि के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। प्रतिभा ने अपने सुसाइड नोट में बेहद भावुक होकर लिखा कि जब वह कपड़े सुखाने के लिए छत पर गई थीं, तभी उनका बच्चा खेलते हुए वॉश एरिया में चला गया और पानी से भरी बाल्टी में डूबने के कारण उसकी मौत हो गई। उन्होंने खुद को बच्चे की मौत का जिम्मेदार मानते हुए लिखा कि वह उसे बचा नहीं पाईं और इसी ग्लानि में वह अपनी जान दे रही हैं। घटनास्थल पर पुलिस को टैबलेट का एक खाली पत्ता भी मिला है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि अपनी जान देने से पहले उन्होंने इन दवाइयों का सेवन किया होगा। पुलिस का मानना है कि प्रतिभा ने पहले गोलियां खाकर और अपनी कलाई काटकर जान देने की कोशिश की थी। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने वारदात की फिराक में घूम रहे बदमाश को किया गिरफ्तार, चाकू बरामद
नई दिल्ली । पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया (पीआईए) थाना पुलिस ने आईएसबीटी रोड नंबर 56, आनंद विहार के पास एक बदमाश को पकड़ लिया। आरोपी के पास एक अवैध बटन वाला चाकू और चोरी का एक मोबाइल फोन मिला। सड़क पर होने वाले अपराधों और हथियारों के अवैध कब्जे पर रोक लगाने के चल रहे प्रयासों के मद्देनजर पीआईए थाना पुलिस के स्टाफ को निगरानी बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में सक्रिय गश्त करने के निर्देश दिए गए थे। अपराध की प्रभावी रोकथाम के लिए पीआईए थाना पुलिस के एसएचओ के नेतृत्व में और मधु विहार एसीपी तिलक चंद्र बिष्ट के पर्यवेक्षण में एक विशेष पुलिस टीम तैनात की गई थी। 31 मार्च को दोपहर लगभग 1:50 बजे, एचसी सचिन और कॉन्सटेबल संदीप आईएसबीटी रोड नंबर 56 में आउट गेट के सामने के पास नियमित गश्त ड्यूटी पर थे। इस दौरान उन्होंने एक लड़के को संदिग्ध तरीके से घूमते हुए देखा। पुलिस को देखते ही वह व्यक्ति घबरा गया और गाजीपुर की ओर भागने की कोशिश करने लगा। उसके संदिग्ध आचरण को भांपते हुए पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई की और थोड़ी दूर तक पीछा करने के बाद उसे पकड़ लिया।
दिल्ली पुलिस ने वारदात की फिराक में घूम रहे बदमाश को किया गिरफ्तार, चाकू बरामद
पुलिस ने उस संदिग्ध व्यक्ति की तलाशी ली तो उसके कब्जे से एक अवैध बटन वाला चाकू और एक मोबाइल बरामद हुआ। लगातार पूछताछ करने पर आरोपी ने अपनी पहचान दीपक उर्फ हकलाना के रूप में बताई, जो झुग्गी महात्मा गांधी कैंप, शशि गार्डन (दिल्ली) का निवासी है और उसकी उम्र 28 वर्ष है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि वह चाकू का इस्तेमाल करके चोरी/झपटमारी करने के इरादे से इलाके में घूम रहा था। पुलिस टीम की सतर्क गश्त और समय पर हस्तक्षेप के कारण होने वाले अपराध को सफलतापूर्वक रोक दिया गया। पीआईए थाना पुलिस में धारा 25 आर्म्स एक्ट के तहत एक मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले में आगे की जांच चल रही है, जिसमें बरामद मोबाइल फोन का सत्यापन और अन्य मामलों में उसकी संभावित संलिप्तता की जांच शामिल है। आरोपी व्यक्ति दीपक एक आदतन अपराधी और नशे का आदी (स्मैक, ड्रग्स और शराब) है। इस पर पहले से ही पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया, हजरत निजामुद्दीन और पांडव नगर थाने में 8 मामले दर्ज हैं। पांडव नगर थाना पुलिस ने बैड कैरेक्टर घोषित किया है।
फर्जी डिग्री और अन्य अनियमितताओं को लेकर मेवाड़ यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस, यहां पढ़े नोटिस
सत्येंद्र शुक्लाजयपुर । भजनलाल सरकार ने चित्तौडगढ़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी को फर्जी डिग्री जारी करने और अन्य अनियमितताओं को लेकर परिसमापन की कार्रवाई के लिए कारण बताओं नोटिस जारी किया है । मेवाड़ यूनिवर्सिटी को 45 दिनों के अंदर नोटिस का बिंदुवार जवाब देना पड़ेगा । आपको बता दे कि यूनिवर्सिटी के अधिनियम 2009 की धारा 44(1) की उपधारा 2 और 3 के तहत संभागीय आयुक्त उदयपुर के संयोजन में 7 अप्रैल 2024 और 4 सितंबर 2025 को जांच समिति गठित की गई थी । इस समिति की तरफ से की गई जांच में विश्वविद्यालय में अग्रलिखित अनिमितताएं पाई गई है । 1. जांच समिति के जांच के मुताबिक मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौड़गढ़ में प्रवेश से लेकर परीक्षा परिणाम तक दत्तावेजों का नियमानुसार संधारण नहीं किया जा रहा है। 2. विश्वविद्यालय द्वारा DAESI डिप्लोमा कोर्स में वर्ष पर्यन्त तक प्रवेश दिया जा रहा है एवं नियम विरुद्ध परीक्षा में बैठाया जा रहा है। 3. DAESI पाठ्यक्रम की जांच में पाया गया कि छात्रों को परीक्षा आयोजन के पश्चात् भी प्रवेश दिया जाकर उपाधियां प्रदान किये जाने का अपराध किया जा रहा है। 4. DAESI पाठ्यक्रम के संचालन में विश्वविद्यालय द्वारा ना केवल National Institute of Agriculture Extension Management (MANAGE) के दिशा निर्देशों का उल्लघंन किया गया बल्कि विश्वविद्यालय के अकादमिक परिषद के निर्णय को दरकिनार करते हुए, DAESI पाठ्यक्रम का संचालन किया जाकर छात्रों को प्रमाण पत्र जारी किये गये हैं जो कि MANAGE व राज्य सरकार की नोडल एजेन्सी SAMETI के प्रावधानों का स्पष्टतः उल्लघंन है। साथ ही MANAGE व SAMETI के दिशा निर्देशों का उल्लघंन करते हुए क्षमता से कई अधिक विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया गया है, जिनकी संख्या क्षमता से कई अधिक पाई गई। 5. पाठ्यक्रम संचालन में भी दिशा निर्देशों की अवहेलना करते हुए ना तो निर्धारित बेच बनाये गए ना ही सभी छात्रों के Classroom Session व Field Visit करवाये गये। 6. जांच समिति द्वारा DAESI पाठ्यक्रम के संबंध में विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराये गये दस्तावेजों एवं भौतिक निरीक्षण के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा DAESI पाठ्यक्रम के संचालन एवं प्रमाण पत्र दिये जाने में अनियमितताएं पाई गई। 7. समिति द्वारा जांच में पाया कि विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों से DAESI पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित शुल्क रुपये 28000/- के स्थान पर अलग अलग शुल्क वसूल किया जा रहा है। 8. जांच में पाया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों की अवहेलना करते हुए पाठ्यक्रम संचालित किया गया। 9. बी.एस.सी कृषि पाठ्यक्रम संचालन के लिए ICAR, उच्च शिक्षा विभाग व कृषि विभाग द्वारा निर्धारित मापदण्डों की पूर्ति एवं ICAR से Accreditation प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा आवेदन नहीं करने तथा शैक्षणिक स्टाफ के पास निर्धारित योग्यता न होना, सिंचित भूमि, कृषि फार्म जैत्ती आवश्यक मापदण्डों की पूर्ति में प्रथम दृष्टया कमियां पाई गई। 10. मेवाड़ विश्वविद्यालय के जांच एवं प्राप्त दस्तावेजों के अवलोकन से समिति ने पाया कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी प्रो. पी. रामैया, प्रो. वी.एन.आर. पिल्लई, प्रो. वी.के. वैद्य, प्रो. कौशल किशोर चन्दुल, प्रो. के.एस. राना, प्रो. आलोक मिश्रा प्रेसीडेन्ट पद पर कार्यरत थे।
फर्जी डिग्री और अन्य अनियमितताओं को लेकर मेवाड़ यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस, यहां पढ़े नोटिस
एम. सुदर्शनम, प्रो. गोविन्द सिंह चारण, प्रो. वेंकट वी.पी.आर.पी., बी.एल. स्वर्णकार, लक्ष्मण सिंह रावत, आर. रामास्वामी, डॉ. मायाधर बरीक कुलसचिव पद पर कार्यरत थे। जिनके द्वारा शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्तियों में विश्वविद्यालय के अधिनियम / परिनियम एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मापदण्डों का उल्लंघन किया गया है तथा वर्तमान में भी किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों को नियम विरुद्ध उनके कार्य के अतिरिक्त उच्चस्थ पद का अतिरिक्त कार्यभार लम्बे समय तक सुपुर्द किया गया। जिसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय में उक्त अधिकारियों द्वारा गोपनीय दस्तावेजों एवं रिकॉर्ड का उचित संधारण नहीं किया था। परीक्षा अनुभाग से जुड़े डॉ. सैयद असगर मेंहदी, प्रियंका गौतम, अशोक खरोदिया, डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता, सुशील शर्मा, परीक्षा नियंत्रक पद पर कार्यरत थे। इन अधिकारी/कर्मचारी की फर्जी उपाधियों के वितरण में भूमिका पाई गई। एसओजी द्वारा उक्त कृत्यों में लिप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गिरफ्तारियां भी की गई जो वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में हैं। 11. विश्वविद्यालय प्रशासन एम. सुदर्शनम, गोविन्द सिंह चारण, प्रो. वेंकट वी.पी.आर.पी., बी.एल. स्वर्णकार, लक्ष्मण सिंह रावत, आर. रामास्वामी, डॉ. मायाधर बरीक कुल सचिव द्वारा परीक्षा नियंत्रक जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त अधिकारियों की नियुक्ति में नियमों की अवहेलना करते हुए पदस्थापित परीक्षा नियंत्रक सैयद असगर अली के स्थान पर अन्य कौशल किशोर चन्दुल, यथा उप-परीक्षा नियंत्रक इत्यादि को परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त कार्य सुपुर्द किया गया था। इनसे परीक्षा का आयोजन एवं उपाधियों के प्रकाशन जैसा अति संवेदनशील कार्य करवाया गया था। 12. विश्वविद्यालाय के एम. सुदर्शनम, गोविन्द सिंह चारण, प्रो. वेंकट वी.पी.आर.पी,बी.एल. स्वर्णकार, लक्ष्मण सिंह रावत, आर. रामास्वामी, डॉ. मायाधर बरीक कुलसचिव जैसे अधिकारियों से उपाधियां प्रकाशन से पूर्व अनुमति नहीं लेकर डिग्रियां छापने का गलत कार्य गोपनीय विभाग के अधिकारियों डॉ. सैयद असगर मेंहदी, प्रियंका गौतम, अशोक खरोदिया, डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता, सुशील शर्मा द्वारा किया गया था। विश्वविद्यालय प्रशसन द्वारा गोपनीय शाखा में कार्यरत अधिकारियों के कार्यों का समय-समय पर पर्यवेक्षण नहीं किया गया था। जिसके कारण फर्जी डिग्री प्रकरण हुआ। अतः फर्जी डिग्री कार्य में उपरोक्त अधिकारी एवं कुलसचिव स्तर के अधिकारियों पर संदेह की सुई जाती है। 13. विश्वविद्यालय में शोध विभाग में नियमों के विरुद्ध 425 पीएचडी शोध उपाधियां प्रदान की गई। जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियम विरुद्ध है। विश्वविद्यालय BOM द्वारा शोध छात्रों की शोध समयावधि बढ़ाने का पत्र जारी नहीं किया गया था, फिर भी प्रो प्रेसीडेन्ट प्रो. सर्वोत्तम दीक्षित एवं शोध डायरेक्टर डॉ. चेताली अग्रवाल द्वारा पीएचडी उपाधियां प्रदान की जा रही हैं। उपर्युक्त तथ्यों के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय अपने अधिनियम के प्रावधानों व यूजीसी व अन्य विनियामक निकायों के नियमों, विनियमों, मानकों इत्यादि का पूर्णतया पालन नहीं कर रहा है। अतः निर्देशानुसार मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौड़गढ़ अधिनियम, 2009 (2009 का अधिनियम संख्या 4) की धारा 44 (1) के अन्तर्गत यह कारण बताओ नोटिस जारी कर लेख है कि नोटिस का बिन्दुवार जवाब 45 दिवस की अवधि में राज्य सरकार को प्रस्तुत करें कि मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौड़गढ़ के प्रावधानों का उल्लंघन करने तथा विश्वविद्यालय में व्याप्त कुप्रशासन/अनियमितताओं की स्थिति के कारण विश्वविद्यालय के परिसमापन आदेश क्यों न जारी कर दिये जायें।
दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन कवच 13.0 के तहत 48 घंटे की सघन कार्रवाई, 452 लोग गिरफ्तार
नई दिल्ली । सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने ‘ऑपरेशन कवच 13.0’ के तहत पूरे जिले में लगातार 48 घंटे की सघन और प्रभावी कार्रवाई की। यह अभियान 29 मार्च शाम 6 बजे से 31 मार्च शाम 6 बजे तक लगातार चला। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य जिले में सक्रिय अपराधियों, नशीले पदार्थों के तस्करों, अवैध शराब के कारोबारियों, जुआरियों, हथियार रखने वालों और अन्य असामाजिक तत्वों पर निर्णायक चोट करना था। इस ऑपरेशन में नशीले पदार्थों के तस्करों, अवैध शराब के स्मगलरों, अवैध हथियार रखने वालों, जुआरियों, बीएनएसएस के तहत अपराध करने वालों, डीपी एक्ट का उल्लंघन करने वालों, सीओटीपीए का उल्लंघन करने वालों और अन्य असामाजिक तत्वों को निशाना बनाया गया। इसके जरिए जिले में सक्रिय अपराध के नेटवर्क पर निर्णायक चोट की गई। यह ऑपरेशन पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह (आईपीएस) के समग्र पर्यवेक्षण में चलाया गया, जिसमें सभी 15 पुलिस थानों, 1 साइबर पुलिस थाने और विशेष इकाइयों (स्पेशल स्टाफ, एंटी-नारकोटिक्स सेल, एएटीएस और टेक्निकल सर्विलांस यूनिट्स) ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कुल 110 समर्पित टीमों को तैनात किया गया था। इन टीमों ने पहचाने गए संवेदनशील स्थानों (हॉटस्पॉट), झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों, औद्योगिक क्षेत्रों, शराब की सप्लाई के रास्तों, संदिग्ध ठिकानों, सुनसान इलाकों, रात के समय अपराध वाले क्षेत्रों और संवेदनशील हिस्सों में खुफिया जानकारी के आधार पर 283 छापे मारे। स्पेशल स्टाफ, एएनसी, एएटीएस और तकनीकी निगरानी यूनिटों ने इंटेलिजेंस जुटाने और रियल-टाइम ऑपरेशनल सहायता देने में अहम भूमिका निभाई, जिससे जमीन पर तेजी से और असरदार कार्रवाई सुनिश्चित हुई।
दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन कवच 13.0 के तहत 48 घंटे की सघन कार्रवाई, 452 लोग गिरफ्तार
इस ऑपरेशन के दौरान चौबीसों घंटे नाका चेकिंग, मोबाइल गश्त, मानवीय और तकनीकी इंटेलिजेंस-आधारित निगरानी, एसएचओ और विशेष इकाइयों के बीच निर्बाध समन्वय, हॉटस्पॉट पर नियंत्रण, सटीक योजना के साथ एक साथ कई जगहों पर छापे, जीरो रिस्पॉन्स टाइम के साथ जमीन पर आक्रामक तैनाती, एकीकृत साइबर और जमीनी इंटेलिजेंस समन्वय, बार-बार अपराध करने वालों और ज्यादा जोखिम वाले अपराधियों पर लगातार निगरानी और रियल-टाइम कमांड और कंट्रोल की निगरानी की गई। इस दौरान कुल 452 लोग गिरफ्तार किए गए और 1,930 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा, 469 चालान भी जारी किए गए। नशीले पदार्थों और अवैध शराब के मामलों में भी कड़ी कार्रवाई हुई। एनडीपीएस एक्ट के तहत 37 मामले दर्ज हुए, 59 लोग पकड़े गए और 14.62391 किलोग्राम गांजा, 0.306 किलोग्राम हेरोइन और 0.63371 किलोग्राम स्मैक जब्त किए गए। इसके अलावा 23 पन्नी पाइप और 5,260 रुपये नकद भी जब्त किए गए। अवैध शराब के मामलों में 13 मामले दर्ज किए गए और 996 बोतलें अवैध शराब जब्त की गई। हथियार रखने के मामलों में 12 लोग पकड़े गए, जिनके पास से 10 चाकू, 2 पिस्तौल, 3 जिंदा कारतूस, 1 मोबाइल और 1 स्कूटी बरामद हुई। जुआ खेलने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई, जिसमें 41 लोग पकड़े गए और 34,210 रुपये नकद जब्त किए गए। वाहन चोरी के मामलों में 4 आरोपी सहित 5 वाहन बरामद किए गए। वहीं, अन्य कार्रवाई में 4 घोषित अपराधी पकड़े गए और धारा 40ए और 40बी के तहत 200 व्यक्ति पकड़े गए।
मुंबई के जज से ठगी: कस्टमर केयर नंबर के जरिए साइबर ठगों ने बैंक खाते से उड़ाए 93 हजार रुपए
मुंबई । देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में साइबर ठगों का आतंक जारी है। लगातार साइबर ठग लोगों को निशाना बना रहे हैं और उनकी गाढ़ी कमाई उड़ा ले रहे हैं। अब तो ताड़देव पुलिस स्टेशन क्षेत्र में रहने वाले जज को ही साइबर अपराधियों ने अपने जाल में फंसाकर 93 हजार रुपये बैंक खाते से निकाल लिए। जज की शिकायत पर ताड़देव पुलिस एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर के मुताबिक, 46 वर्षीय जज लघु वाद न्यायालय में तैनात हैं। जज ने 30 मार्च को अपने मोबाइल फोन में डिस्प्ले की समस्या देखने के बाद इंटरनेट पर तकनीकी सहायता मांगी। ऑनलाइन खोज करते समय उन्होंने सैमसंग कस्टमर केयर होने का दावा करने वाले एक नंबर पर संपर्क किया। इसके बाद फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने व्हाट्सएप के माध्यम से एक एपीके फाइल भेजी और जज को इसे डाउनलोड करने और गूगल पे के माध्यम से 20 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क भुगतान करने को कहा। जैसे ही जज ने एपीके फाइल इंस्टॉल की, साइबर ठग ने उनके बैंकिंग डेटा तक रिमोट एक्सेस प्राप्त कर लिया। जज को बाद में अपने एसबीआई बैंक खाते से 93,000 रुपये के दो अनधिकृत लेनदेन का पता चला। ताड़देव पुलिस ने एक अज्ञात संदिग्ध के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुंबई के जज से ठगी: कस्टमर केयर नंबर के जरिए साइबर ठगों ने बैंक खाते से उड़ाए 93 हजार रुपए
इसके पहले 28 फरवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट के जज से ही कुछ इसी तरह 6 लाख की ठगी हुई थी। जज ने अपने क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट्स रिडीम करने के लिए बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क करने की कोशिश की। आधिकारिक हेल्पलाइन व्यस्त होने के कारण उन्होंने इंटरनेट का सहारा लिया। इंटरनेट पर उन्हें जो नंबर मिला, वह साइबर अपराधियों का था। इस नंबर पर कॉल करने के बाद जज को 18 एमबी का एक एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए व्हाट्सअप पर लिंक मिला था। जब फाइल उनके आईफोन पर नहीं खुली तो ग्राहक सेवा अधिकारी बनकर बात कर रहे ठगों ने एंड्रॉइड डिवाइस का उपयोग करने की सलाह दी। इसके बाद जज ने अपना सिम कार्ड अपनी हाउस हेल्प के एंड्रॉइड फोन में डाला और एप्लिकेशन डाउनलोड कर लिया। उन्होंने जैसे ही एप्लीकेशन में अपने क्रेडिट कार्ड डिटेल्स डाले, ताकि क्रेडिट पॉइंट रिडीम हो सके, उनके क्रेडिट कार्ड से 6 लाख रुपए ट्रांसफर कर लिए गए थे। कफ परेड पुलिस ने इस मामले में मजहर आलम इसराइल मियां को गिरफ्तार किया था, जो झारखंड के जामताड़ा का रहने वाला है।
मुंबई में वेश्यावृत्ति रैकेट का भंडाफोड़, घाटकोपर के एक लॉज से आरोपी महिला गिरफ्तार
मुंबई । मुंबई की घाटकोपर पुलिस ने अंधेरी, साकीनाका और घाटकोपर में चल रहे एक कथित वेश्यावृत्ति रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए एक महिला को हिरासत में लिया है। अब मामले में आगे की जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार, घाटकोपर पुलिस ने कांदिवली की रहने वाली 38 वर्षीय महिला कविता अनिल माने को हिरासत में लिया है। उस पर आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को पैसे का लालच देकर उनका शोषण करने और ग्राहकों के लिए उनकी सेवाएं उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ बीएनएस की धारा 143(3) और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 और 5 के तहत मामला दर्ज किया है। घाटकोपर पुलिस को एक गुप्त मुखबिर से सूचना मिली थी कि कविता नाम की एक महिला घाटकोपर, साकीनाका और अंधेरी के होटलों में अवैध धंधे के लिए लड़कियों की आपूर्ति कर रही है। पुलिस ने एक ‘डमी ग्राहक’ (नकली ग्राहक) का इस्तेमाल करके उस महिला से संपर्क किया, जिसने कथित तौर पर अपनी और दो अन्य महिलाओं की तस्वीरें उस नकली ग्राहक को भेजीं।
मुंबई में वेश्यावृत्ति रैकेट का भंडाफोड़, घाटकोपर के एक लॉज से आरोपी महिला गिरफ्तार
माने ने कथित तौर पर ग्राहकों के लिए लड़कियां उपलब्ध कराने से पहले हर लड़की के लिए 30,000 रुपये की मांग की थी। इसी सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उस डमी ग्राहक के जरिए कविता माने को घाटकोपर-अंधेरी लिंक रोड पर स्थित एक लॉज में बुलाया। आरोपी को फंसाने के लिए पुलिस ने नोटों के बंडल तैयार किए, जिनमें सबसे ऊपर 500 रुपये के दो असली नोट थे और बाकी नोट ‘इंडियन चिल्ड्रन बैंक’ के 500 रुपये के नकली नोटों जैसे दिखने वाले नोट थे। आरोपी माने अपने साथ 32 और 31 साल की दो महिलाओं को लेकर वहां पहुंची। उसे तब गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह कथित तौर पर उन दो महिलाओं में से एक की सर्विस के लिए पैसे ले रही थी। महिलाओं ने बताया कि माने ने उनसे वादा किया था कि अगर वे ग्राहक को सर्विस देंगी, तो वह उन्हें 15,000 रुपये प्रति महिला के हिसाब से देगी।