साइबर पुलिस ने दो ठगों को दबोचा, 2.15 लाख रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा
नई दिल्ली ।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के साइबर थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को वित्तीय कंपनी का एक्जीक्यूटिव बताकर एक शख्स से 2,15,681 रुपए की धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध में किया गया था। जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता वसीम (30), पुत्र रहीसुद्दीन, निवासी जोहरिपुर, जो गाजियाबाद में डेयरी व्यवसाय चलाते हैं, ने पुलिस को बताया कि 25 फरवरी 2025 को उन्हें एक व्यक्ति का कॉल आया। उसने खुद को एक नामी वित्तीय कंपनी का अधिकारी बताते हुए उन्हें लोन की पेशकश की, जिसके बाद वसीम लोन लेने के लिए राजी हो गए।
ठगों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि लोन मंजूरी के लिए बीमा पॉलिसी खरीदना अनिवार्य है। इसके बाद उन्होंने वसीम के नाम से नामी बीमा कंपनियों की फर्जी पॉलिसियां जारी कीं और पॉलिसी शुल्क, बैंक चार्ज और लोन प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर उनसे बड़ी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा ली। शिकायतकर्ता को कई बार पैसे देने के बावजूद कोई लोन उपलब्ध नहीं कराया गया। आखिरकार ठगों ने अपने नंबर बंद कर दिए।
इस शिकायत पर साइबर थाना, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में धारा 318(4)/319(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया।
साइबर पुलिस ने दो ठगों को दबोचा, 2.15 लाख रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा
पुलिस उपायुक्त मंगेश गडेम के निर्देशन में और थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राहुल कुमार की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्य जुटाने और विभिन्न स्रोतों से जानकारी लेने के बाद संदिग्धों की पहचान की गई।
इसके आधार पर छापेमारी कर रवि (27), पुत्र दिनानाथ, निवासी नंदराम पार्क, उत्तम नगर, दिल्ली और प्रीतम सिंह, पुत्र सुरेंद्र पाल, निवासी विक्रांत एसोसिएट्स के पास, उत्तम नगर, दिल्ली को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान दोनों ने अपराध कबूल कर लिया।
दोनों आरोपियों ने खुलासा किया कि वे पहले एक नामी बीमा कंपनी के कॉल सेंटर में काम कर चुके हैं। वहां से उन्हें लोन और बीमा प्रक्रियाओं की गहन जानकारी मिली, जिसका दुरुपयोग कर वे लोगों से ठगी करते थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ठगी की रकम आपस में बांटी जाती थी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इनका अन्य मामलों में कोई संलिप्तता है या नहीं। फिलहाल आगे की कार्रवाई और जांच जारी है।
लद्दाख : 17,000 फीट की बर्फीली चोटी पर फंसे विदेशी नागरिक, सेना ने बचाया
नई दिल्ली ।
लद्दाख की बर्फ से ढकी खतरनाक चोटी पर दो विदेशी नागरिकों के फंसने का एक गंभीर मामला सामने आया है। ये कोरियाई नागरिक 17,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाली चोटी पर मौजूद थे। सेना ने इसका पता लगने पर बिना देरी किए रात के अंधेरे में ही एक अत्यंत संवेदनशील व साहसिक ऑपरेशन चलाया। यह अभियान भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर की आर्मी एविएशन यूनिट ने सफलतापूर्वक संपन्न किया। कड़ी मेहनत के बाद दोनों विदेशी नागरिकों को बचा लिया गया। फिलहाल, दोनों अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है।
सेना के इस मिशन के तहत दक्षिण कोरिया के नागरिक ह्यून वू किम और उनकी पत्नी को सुरक्षित निकाला गया। विदेशी दंपति लद्दाख स्थित कोंगमारुला दर्रे में फंसे हुए थे।
सेना के मुताबिक, 4 सितंबर की रात लद्दाख में तैनात भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर को एक आपातकालीन संदेश मिला।
संदेश में बताया गया कि कोंगमारुला दर्रे पर दो दक्षिण कोरियाई नागरिक गंभीर संकट में फंसे हुए हैं और उन्हें तत्काल हवाई निकासी की आवश्यकता है।
यह ऑपरेशन रात का समय होने के कारण काफी कठिन था। वहीं, चुनौतियां और बढ़ गई थी, क्योंकि यह दुर्गम इलाका 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां चारों ओर बर्फ से ढके खतरनाक शिखर हैं और अनियमित मौसम के कारण उड़ान संचालन बेहद कठिन हो जाता है।
नाइट विजन उड़ान और लैंडिंग ने मिशन को कठिन बना दिया। इतना ही नहीं, जहां विदेशी नागरिक फंसे हुए थे, वहां कोई तैयार हेलीपैड भी नहीं था। नाइट विजन गॉगल्स की मदद से सेना के पायलटों को सटीक लैंडिंग करनी पड़ी, जिसके लिए असाधारण उड़ान कौशल और परिस्थितियों की गहरी समझ की आवश्यकता थी।
इसके बावजूद, सेना ने बिना समय गंवाए तेजी से कार्रवाई की। रात को संदेश प्राप्त होने के तुरंत बाद स्क्वाड्रन ने तेजी से कार्रवाई की और हेलीकॉप्टर को मिशन के लिए रवाना कर दिया।
इस खतरनाक माहौल में भी सेना के पायलट सफल लैंडिंग में कामयाब रहे। अब अगली चुनौती बचाव अभियान की थी। काफी अंधेरा होने के बाद भी हेलीकॉप्टर ने खतरनाक शिखर पर सुरक्षित लैंडिंग की। सेना की बचाव टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों विदेशी नागरिकों को हेलीकॉप्टर में सुरक्षित स्थानांतरित किया। बचाव के बाद दोनों को तुरंत चिकित्सा अधिकारियों के हवाले कर दिया गया।
हिमाचल : कांगड़ा में बारिश से भारी नुकसान, चंडीगढ़-मनाली हाईवे के जल्द खुलने की उम्मीद
मंडी/कांगड़ा ।
हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश के बीच अब हालात सामान्य होने लगे हैं। मंडी में लगातार पांच दिनों की मूसलाधार बारिश के बाद मौसम साफ हो गया है। ब्यास नदी का जलस्तर भी कम होने से स्थिति सामान्य हो रही है। जानकारी के अनुसार, पिछले पांच दिनों से भूस्खलन के कारण बंद पड़े चंडीगढ़-मनाली हाईवे के खुलने की संभावना है। मलबे को हटाने के लिए मशीनरी लगातार काम कर रही है। साथ ही झलौगी में फंसे वाहनों को मंडी की ओर भेज दिया गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र ने हिमाचल प्रदेश के लिए यलो अलर्ट जारी किया है, जिससे अगले कुछ दिनों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।
इस बीच, कांगड़ा जिले के नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में बारिश ने भारी तबाही मचाई है। गेही लगोड पंचायत में कई गरीब परिवारों के कच्चे मकान ढह गए हैं।
पीड़ित राय सिंह ने बताया कि भारी बारिश के कारण मेरा मकान गिर गया और इस वजह से सारा सामान मलबे में दब गया है। पटवारी ने घटनास्थल का जायजा लिया है, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली।
हिमाचल : कांगड़ा में बारिश से भारी नुकसान, चंडीगढ़-मनाली हाईवे के जल्द खुलने की उम्मीद
एक महिला ने कहा, “मेरा मकान गिर गया है। मैंने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए फॉर्म भरा था, लेकिन कोई ग्रांट नहीं मिली। मैंने 50,000 रुपए का कर्ज लेकर एक छोटा कमरा बनाना शुरू किया है। मैं अपील करती हूं कि प्रशासन मेरी मदद करे।”
भाजपा नूरपुर मंडल अध्यक्ष अनूप राणा ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सरकार और प्रशासन से मदद दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा, “कई परिवारों के मकान और सामान बारिश में बर्बाद हो गए। प्रशासन से अनुरोध है कि इन परिवारों को जल्द से जल्द राहत मुहैया कराई जाए।”
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी में सुप्रीम कोर्ट की हिमालयी क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन पर टिप्पणी का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि पहली बात जो समझने की है, वह यह है कि आपदा तो आपदा ही होती है। मैं सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दूंगा, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि अगर पेड़ों की अवैध कटाई हो रही है, तो सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि, इस बार भारी बारिश के कारण हमने जो तबाही देखी है, वह अलग है।”
समाजसेवा और वरिष्ठ नागरिकों की भलाई के लिए समर्पित खंडेलवाल पेंशनर्स सेवा समिति की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक शनिवार, 6 सितंबर 2025 को आयोजित की जाएगी। यह बैठक खंडेलवाल भवन, खिरनी घाट पर दोपहर 3 बजे आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता खंडेलवाल युवक संघ के अध्यक्ष रमेशचंद रारह करेंगे, जबकि आयोजन की पूरी रूपरेखा समिति के संयोजक नरेश खंडेलवाल द्वारा तैयार की गई है।
यह बैठक खंडेलवाल समाज के वरिष्ठ नागरिकों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें समाज के वरिष्ठ सदस्यों की समस्याओं, उनके सामाजिक योगदान और उनके कल्याण से संबंधित अनेक गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। समिति ने समाज के सभी पेंशनर्स और वरिष्ठजनों से इस बैठक में उपस्थित होकर अपने विचार रखने की अपील की है।
बैठक का उद्देश्य और मुख्य एजेंडा
समिति के संयोजक नरेश खंडेलवाल के अनुसार, इस बैठक में तीन मुख्य बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी:
समिति के पदाधिकारियों का चयन
आर्थिक रूप से पिछड़े समाजजनों के लिए सेवा गतिविधियों की योजना
पेंशनर्स को आ रही समस्याओं पर विचार-विमर्श और समाधान के प्रयास
सबसे पहले, बैठक में समिति की कार्यकारिणी का पुनर्गठन किया जाएगा, जिसमें नए पदाधिकारियों का चयन किया जाना है। इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक ढंग से, सभी पेंशनर्स की सहमति और भागीदारी से संपन्न किया जाएगा। समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इसके नेतृत्व में अनुभवी, कर्मठ और समाजसेवा के लिए प्रतिबद्ध व्यक्ति आएँ, जो पेंशनर्स की समस्याओं को सही मंच पर उठाने और समाधान तक पहुंचाने में सक्षम हों।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए सेवा योजनाएँ
इस बैठक का दूसरा महत्त्वपूर्ण उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े पेंशनर्स और वरिष्ठजनों के लिए सेवा गतिविधियों की योजना तैयार करना है। समिति की योजना है कि ऐसे वरिष्ठजन, जिनकी पेंशन बहुत कम है या जिनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, उनके लिए स्वास्थ्य सेवाएं, मासिक आर्थिक सहायता, दवा वितरण, चिकित्सा जांच शिविर, और भोजन योजनाओं जैसी पहल चलाई जाए।
समिति यह भी विचार कर रही है कि समाज के दानदाता और समाजसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर एक “पेंशनर्स राहत कोष” की स्थापना की जाए, जिससे जरूरतमंद पेंशनर्स की सहायता की जा सके। इसके अतिरिक्त, पेंशनर्स के लिए वृद्धाश्रम भ्रमण, सामाजिक मेल-मिलाप कार्यक्रम और योग एवं स्वास्थ्य शिविरों का भी आयोजन करने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
खंडेलवाल पेंशनर्स सेवा समिति की बैठक कल
पेंशनर्स की समस्याओं पर संवाद
बैठक में पेंशनर्स को आ रही विभिन्न समस्याओं पर भी चर्चा की जाएगी। इनमें मुख्य रूप से पेंशन भुगतान में देरी, महंगाई राहत में असमानता, स्वास्थ्य बीमा की जटिलताएँ, वरिष्ठ नागरिक कार्ड में समस्याएं, और सामाजिक उपेक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। समिति का उद्देश्य यह है कि पेंशनर्स की इन समस्याओं को एक मंच पर लाया जाए और स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकार और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से इनके समाधान की दिशा में कार्य किया जाए।
नरेश खंडेलवाल ने बताया कि समाज के अनेक वरिष्ठजनों ने व्यक्तिगत रूप से इन मुद्दों को लेकर समिति से संपर्क किया है और एक व्यापक बैठक की आवश्यकता जताई थी। इसी के फलस्वरूप यह बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें समाज के हर पेंशनर को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
पारदर्शिता और सहभागिता की भावना
समिति इस बैठक को पूरी तरह पारदर्शी और सहभागी प्रक्रिया के रूप में संचालित करना चाहती है। सभी पेंशनर्स को खुला निमंत्रण दिया गया है कि वे बैठक में आएं, अपनी समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं को सामने रखें। समिति का मानना है कि समाज के वरिष्ठजनों की सेवा केवल भाषणों और औपचारिक आयोजनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील भागीदारी और योजनाबद्ध क्रियान्वयन से की जा सकती है।
इसके साथ ही, यह भी प्रस्तावित है कि समिति की आगामी बैठकों का वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जाए, जिससे भविष्य में किसी भी मुद्दे पर संवाद करने, प्रस्ताव पारित करने और योजनाओं की समीक्षा के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार हो सके।
समाज में नई प्रेरणा देने की कोशिश
खंडेलवाल पेंशनर्स सेवा समिति की यह पहल न केवल पेंशनर्स की समस्याओं के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, बल्कि यह समाज में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और गरिमा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास भी है। यह बैठक समाज के अन्य युवाओं और संगठनों के लिए भी एक प्रेरणास्त्रोत बन सकती है, जो अक्सर वरिष्ठजनों की भूमिका को सीमित मानकर उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
समिति का यह भी मानना है कि समाज के विकास में पेंशनर्स का अनुभव, मार्गदर्शन और स्नेह अमूल्य संपदा हैं, जिन्हें संरक्षित और सम्मानित किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
शनिवार, 6 सितंबर 2025 को खंडेलवाल भवन, खिरनी घाट में होने वाली यह बैठक निश्चित रूप से भरतपुर के खंडेलवाल समाज के पेंशनर्स के लिए एक नई शुरुआत का संकेत हो सकती है। इससे न केवल पेंशनर्स की समस्याओं को मंच मिलेगा, बल्कि समाज में सहयोग, सेवा और सहभागिता की भावना को भी बल मिलेगा। समिति ने एक बार फिर समाज के सभी पेंशनर्स से अनुरोध किया है कि वे समय पर बैठक में पहुंचें और समाज के इस महत्त्वपूर्ण आयोजन में अपनी उपस्थिति से इसे सफल बनाएं।
बाड़मेर पुलिस की कार्रवाई: हार्डकोर मादक पदार्थ तस्कर चिमाराम की 28.20 लाख रुपए की संपत्ति फ्रीज
बाड़मेर।
जिला पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने मादक पदार्थ तस्कर चिमाराम जाट, पुत्र जेरा राम, निवासी मुकने का तला, लीलसर की करीब 28.20 लाख रुपये की अवैध संपत्ति को फ्रीज कर दिया। यह कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट की धारा 68 एफ (2) के तहत सक्षम प्राधिकारी, नई दिल्ली के आदेश पर की गई।पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीना के निर्देशानुसार चौहटन थानाधिकारी राजूराम के नेतृत्व में टीम ने संपत्ति फ्रीज करने की कार्रवाई अंजाम दी। चिमाराम, जो थाना चौहटन का हार्डकोर और हिस्ट्रीशीटर अपराधी है, लंबे समय से मादक पदार्थ तस्करी में लिप्त था। उसके खिलाफ कुल 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं,
बाड़मेर पुलिस की कार्रवाई: हार्डकोर मादक पदार्थ तस्कर चिमाराम की 28.20 लाख रुपए की संपत्ति फ्रीज
जिनमें 7 मादक पदार्थ तस्करी, 3 आर्म्स एक्ट और 5 मारपीट के मामले शामिल हैं। वह पहले एक लाख रुपये का इनामी अपराधी भी रह चुका है और मादक तस्करी के मामले में लंबे समय से फरार था। पुलिस ने उसकी अवैध संपत्ति की जांच की, दस्तावेज तैयार किए और सक्षम प्राधिकारी को प्रस्ताव भेजा। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद फ्रीज करने का आदेश जारी हुआ। गुरुवार को मुकने का तला, लीलसर स्थित आवासीय भवन को फ्रीज कर दिया गया। जिला पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई लगातार जारी है। पिछले एक सप्ताह में 6 मादक पदार्थ तस्करों की करीब 5 करोड़ रुपये की संपत्ति को फ्रीज करने में सफलता हासिल की गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाईयों से अपराधियों पर अंकुश लगेगा और मादक पदार्थ तस्करी में कमी आएगी।
दिल्ली : द्वारका में पुलिस की त्वरित कार्रवाई, दो कुख्यात स्नैचर ढाई घंटे में गिरफ्तार
द्वारका ।
दिल्ली के द्वारका जिले में पुलिस ने सड़क अपराधों पर नकेल कसते हुए दो कुख्यात स्नैचरों को महज ढाई घंटे में गिरफ्तार कर लिया।इन बदमाशों की गिरफ्तारी से 12 स्नैचिंग की घटनाओं का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इनके पास से 7 मोबाइल, नकदी, सजावटी सामान, मेट्रो कार्ड, इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल और कपड़े बरामद किए हैं।
27 अगस्त को शाम 4 बजे, सेक्टर-10, द्वारका के एक स्कूल के पास एक शिक्षिका से मोबाइल छीनने की पीसीआर कॉल मिली। इसके तुरंत बाद, द्वारका उत्तर के सेक्टर-4 में एक अन्य महिला का पर्स छीनने की सूचना मिली। पुलिस चौकी सेक्टर-10 की टीम, जिसका नेतृत्व एसआई रजत मलिक कर रहे थे, तुरंत हरकत में आई।
सीसीटीवी फुटेज की जांच और छीने गए मोबाइल की लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस ने बदमाशों का पीछा शुरू किया।
दोनों स्नैचर मोटरसाइकिल पर सवार थे और व्यस्त सड़कों व भीड़भाड़ वाली गलियों में भाग रहे थे। पुलिस ने दो मोटरसाइकिलों पर करीब 30 किलोमीटर तक उनका पीछा किया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी बड़ी कार्रवाई से बचते हुए, पुलिस ने तिलक विहार के पास बदमाशों को घेर लिया।
दिल्ली : द्वारका में पुलिस की त्वरित कार्रवाई, दो कुख्यात स्नैचर ढाई घंटे में गिरफ्तार
सेक्टर-10 चौकी प्रभारी रजत मलिक और उनकी टीम, जिसमें एएसआई संजीव सिंह तेवतिया, एएसआई कीर्ति कुमार, हेड कांस्टेबल कमलेश कुमार, नरेश कुमार, शैतान सिंह, मुकेश कुमार और सुनील शामिल थे, ने बहादुरी से दोनों को धर दबोचा। इस ऑपरेशन को डीसीपी द्वारका अंकित सिंह, एसीपी किशोर कुमार रेवला और एसएचओ राजेश कुमार साह के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।
गिरफ्तार बदमाशों की पहचान परमिंदर सिंह उर्फ प्रिंस (28) और अमनदीप उर्फ अमनप्रीत सिंह उर्फ गोलू (36) के रूप में हुई। परमिंदर तिलक नगर और अमनदीप निहाल विहार का हिस्ट्रीशीटर है।
अमनदीप को हाल ही में 18 अगस्त को जमानत मिली थी, जिसके बाद दोनों ने स्नैचिंग की वारदातों को अंजाम देना शुरू किया। इनके खिलाफ दिल्ली के सात जिलों में हत्या, डकैती, लूट, स्नैचिंग और आर्म्स एक्ट जैसे 30-30 मामले दर्ज हैं।
पुलिस ने इनके खिलाफ मजबूत सबूत जुटाए हैं और छह मामलों में जमानत रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है। दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी थे। डीसीपी द्वारका के निर्देश पर सड़क अपराधों को कम करने और पुराने मामलों को सुलझाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस की घुसपैठियों पर बड़ी कार्रवाई, 13 नाइजीरियाई और 2 बांग्लादेशियों को डिटेंशन सेंटर भेजा
दिल्ली में घुसपैठियों पर कड़ा शिकंजा: द्वारका से 15 विदेशी नागरिक डिपोर्ट
नई दिल्ली, 5 सितंबर 2025 — राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ पुलिस द्वारा बड़े पैमाने पर सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में द्वारका जिले में चलाए गए एक विशेष सर्च ऑपरेशन के तहत दिल्ली पुलिस ने 15 विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर निर्वासन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें 13 नाइजीरियाई और 2 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। यह कार्रवाई द्वारका जिले की ऑपरेशन यूनिट और संबंधित थानों की समन्वित योजना और सतत निगरानी के तहत की गई।
द्वारका के पुलिस उपायुक्त अंकित सिंह ने बताया कि अगस्त महीने के दौरान इन सभी विदेशी नागरिकों के खिलाफ जांच की गई और उन्हें डिपोर्टेशन प्रक्रिया के तहत विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को सौंपा गया। एफआरआरओ द्वारा औपचारिक कार्यवाही के बाद इन सभी को डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया, जहाँ से उन्हें उनके देश वापस भेजा जाएगा।
पुलिस के अनुसार, ये सभी 15 विदेशी नागरिक दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में बिना वैध वीजा या पासपोर्ट के अवैध रूप से रह रहे थे। इनमें कुछ ऐसे भी थे जो वीजा की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे, जबकि कुछ ने अवैध रूप से सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया था। यह न केवल भारत के कानून का उल्लंघन है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय है।
इस अभियान के दौरान द्वारका जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों की कई टीमों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इनमें मोहन गार्डन थाने की 5 टीमें, एंटी-नारकोटिक्स सेल की 5 टीमें, उत्तम नगर थाने की 3 टीमें, और डाबरी थाने की 2 टीमें शामिल थीं। ये सभी टीमें लंबे समय से द्वारका के विभिन्न इलाकों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। मुखबिरों के माध्यम से प्राप्त खुफिया जानकारी, निगरानी और स्थानीय नेटवर्क की मदद से इन विदेशी नागरिकों की पहचान की गई और फिर सुनियोजित तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
इन विदेशी नागरिकों के खिलाफ की गई कार्रवाई न केवल अवैध आव्रजन के विरुद्ध दिल्ली पुलिस की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि दिल्ली के शहरी और उपनगरीय इलाकों में अवैध रूप से रहने वालों पर अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। विशेष रूप से द्वारका जैसे क्षेत्रों में, जहां विदेशी नागरिकों द्वारा ड्रग्स, धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता की कई खबरें सामने आती रही हैं, पुलिस अब बेहद सक्रिय रूप से काम कर रही है।
डिपोर्ट किए गए 13 नाइजीरियाई नागरिकों में जिनके नाम सामने आए हैं, वे हैं — ओकुचुकु जॉन ओकाफोर, एजिक इकपारा, ओन्येकाची न्वोनवु, अकुनेसी उगोन्ना, नगोएसिना माइकल नवासा, चिनेदु विक्टर चुकवुडी, फेमी जिमो अदेबाजो, फिदेलिस एकेना नवाचुकवु, ओकेचुकुवु ओगोचुकुवु जॉन, चुकुवेमेका उचे डेनियल, अनिक्फे इग्नाटियस चिकेलू, उचे क्रिस चुक्वुल और डेसमंड अबालिग्बो ओनीबच। इनमें से कई ऐसे थे जो लंबे समय से भारत में रह रहे थे और कुछ स्थानीय व्यवसायों की आड़ में अवैध गतिविधियों में भी संलिप्त पाए गए।
दिल्ली पुलिस की घुसपैठियों पर बड़ी कार्रवाई, 13 नाइजीरियाई और 2 बांग्लादेशियों को डिटेंशन सेंटर भेजा
वहीं, जिन दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर डिपोर्ट किया गया है, उनके नाम हैं — अब्दुल मोमिन और नूरुल आलम। ये दोनों बिना वैध वीजा और अनुमति के भारत में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रह रहे थे। इन्हें भी एफआरआरओ के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें भारत छोड़ने का आदेश देते हुए डिटेंशन सेंटर भेज दिया।
पुलिस उपायुक्त अंकित सिंह ने यह भी बताया कि यह सर्च ऑपरेशन एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, और आने वाले समय में ऐसे और भी अभियान चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि, “द्वारका में जो भी विदेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हम सभी पुलिस थानों और विशेष इकाइयों को इस दिशा में निरंतर सतर्क रहने और सूचना एकत्रित करने का निर्देश दे चुके हैं।”
इसके साथ ही, उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि यदि किसी को अपने आसपास अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के बारे में जानकारी मिले, तो वे तुरंत स्थानीय पुलिस या हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है।
दिल्ली जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में अवैध विदेशी नागरिकों की मौजूदगी कई बार ड्रग्स तस्करी, जालसाजी, ऑनलाइन फ्रॉड, अवैध व्यापार और अन्य आपराधिक गतिविधियों की जड़ बन जाती है। इसलिए इन पर समय रहते नियंत्रण बेहद जरूरी हो जाता है। पुलिस की इस कार्यवाही से यह भी स्पष्ट होता है कि दिल्ली पुलिस अब केवल अपराध के बाद प्रतिक्रिया करने वाली एजेंसी नहीं रही, बल्कि पूर्व-सक्रिय रणनीति के तहत सुरक्षा और निगरानी को प्राथमिकता दे रही है।
द्वारका जिले की पुलिस द्वारा उठाया गया यह कदम कानून के शासन को मजबूत करता है और यह संदेश देता है कि भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों को भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई इनका उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी — चाहे वह किसी भी देश का नागरिक क्यों न हो।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि द्वारका में हुई यह कार्रवाई न केवल दिल्ली पुलिस की दक्षता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत अब अवैध घुसपैठ और गैरकानूनी प्रवास को लेकर सख्त रवैया अपना रहा है। इस कार्रवाई से भविष्य में अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने या बिना दस्तावेजों के रहने की सोच रखने वाले लोगों को कड़ा संदेश गया है।
गुजरात : बनासकांठा पुलिस ने नकली नोट बनाने वाली फैक्ट्री का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार
बनासकांठा ।
गुजरात की बनासकांठा पुलिस की स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) ने दिसा तालुका के महादेविया गांव में बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली भारतीय मुद्रा नोट बनाने वाली एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया।देर रात की गई छापेमारी में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी फरार है। पुलिस ने मौके से 39 लाख रुपए से अधिक के नकली नोट, पांच प्रिंटर और नकली नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए हैं। एलसीबी को गुप्त सूचना मिली थी कि महादेविया गांव में रायमल सिंह परमार के खेत में बने एक तहखाने में नकली नोट छापे जा रहे हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने देर रात छापा मारा और संजय सोनी और कौशिक श्रीमाली नाम के दो आरोपियों को हिरासत में लिया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 500 रुपए के नकली नोटों की भारी मात्रा बरामद की, जो इतने सटीक थे कि उनकी तुलना असली नोटों से की जा सकती थी। इसके साथ ही, नोट छापने के लिए इस्तेमाल होने वाले पांच प्रिंटर और अन्य सामग्री भी जब्त की गई। पुलिस के अनुसार, इस नकली नोट फैक्ट्री का मास्टरमाइंड संजय सोनी है, जिसके खिलाफ पहले से पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं। दूसरा आरोपी कौशिक श्रीमाली भी इस गैरकानूनी गतिविधि में शामिल था।
गुजरात : बनासकांठा पुलिस ने नकली नोट बनाने वाली फैक्ट्री का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार
तहखाना रायमल सिंह परमार के खेत में बना था, जो इस मामले का तीसरा आरोपी है और वर्तमान में फरार है। रायमल सिंह के खिलाफ जबरन वसूली और धोखाधड़ी सहित 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हाल ही में उसे हिरासत से रिहा किया गया था। पुलिस ने रायमल सिंह को पकड़ने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। बनासकांठा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रशांत सुम्बे ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने नकली नोट छापने की बात कबूल की है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह फैक्ट्री कब से चल रही थी, नकली नोट बनाने का सामान कहां और किससे मिलता था और इन नोटों को किसे सप्लाई किया जाता था। पुलिस को शक है कि यह एक बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संगठित अपराध संबंधी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। एसपी ने कहा, “हमें विश्वास है कि जल्द ही इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आएगी।”
भ्रष्टाचार के आरोप में हरियाणा के क्लर्क को 3 साल की जेल, 20 हजार रुपए का जुर्माना
हिसार, 5 सितंबर 2025
हरियाणा के हिसार जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अहम कानूनी कार्यवाही में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (State Vigilance and Anti-Corruption Bureau) की जांच और कानूनी कार्रवाई के चलते शिक्षा विभाग में कार्यरत एक क्लर्क को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए अदालत ने 3 साल की सजा और ₹20,000 का जुर्माना सुनाया है।
यह फैसला हिसार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय द्वारा सुनाया गया, जिससे यह संदेश गया है कि सरकारी महकमे में भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामला कब और कैसे सामने आया?
यह पूरा मामला 1 अगस्त 2018 का है। एक शिकायतकर्ता ने हिसार के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में चपरासी के पद पर डी.सी. रेट (डिप्टी कमिश्नर रेट) के तहत अस्थायी नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान उसे क्लर्क के पद पर कार्यरत संजय कुमार प्रकाश द्वारा रिश्वत देने का दबाव डाला गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, संजय कुमार ने उससे नौकरी लगाने के बदले ₹50,000 की रिश्वत की मांग की थी। बातचीत के दौरान संजय ने पहले ₹40,000 अग्रिम, और शेष ₹10,000 काम हो जाने के बाद देने की शर्त रखी थी।
सतर्कता ब्यूरो की योजना और गिरफ्तारी
शिकायत मिलते ही राज्य सतर्कता ब्यूरो हिसार ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। उन्होंने शिकायतकर्ता से पूरी जानकारी लेकर एक ट्रैप ऑपरेशन (पकड़ो और रंगे हाथों पकड़ो योजना) तैयार किया। सतर्कता टीम ने शिकायतकर्ता को विशेष रूप से चिन्हित किए गए नोटों के साथ आरोपी के पास भेजा।
जैसे ही संजय कुमार ने शिकायतकर्ता से ₹40,000 की रिश्वत की राशि स्वीकार की और ली, टीम ने मौके पर दबिश देकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के पास से सारे चिन्हित नोट भी बरामद किए गए, जिससे आरोप स्पष्ट रूप से सिद्ध हो गया।
न्यायिक प्रक्रिया और सजा
वर्ष 2018 से अब तक इस मामले की सुनवाई हिसार की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूतों, गवाहों और घटनाक्रम के आधार पर अदालत के समक्ष यह सिद्ध किया कि आरोपी संजय कुमार ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए निजी लाभ के लिए रिश्वत ली।
भ्रष्टाचार के आरोप में हरियाणा के क्लर्क को 3 साल की जेल, 20 हजार रुपए का जुर्माना
अंततः, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी मानते हुए उसे 3 वर्ष का कठोर कारावास और ₹20,000 का जुर्माना भरने की सजा सुनाई। अदालत ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि भ्रष्टाचार जैसे अपराध समाज के लिए कैंसर के समान हैं, और इन पर कठोर दंड आवश्यक है ताकि एक सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक प्रणाली को सुनिश्चित किया जा सके।
न्यायिक टिप्पणी: “लोकसेवा नहीं, लाभ का केंद्र बना पद”
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी की कि, “जिस सरकारी पद को समाज की सेवा के लिए सौंपा गया था, आरोपी ने उसे निजी लाभ का माध्यम बना लिया। यह जनता के भरोसे और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ विश्वासघात है।”
परिवार और विभाग पर प्रभाव
संजय कुमार की सजा न केवल उसके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करेगी, बल्कि उसके परिवार पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। एक स्थायी नौकरी, जिसकी बदौलत परिवार की आजीविका चल रही थी, अब खत्म हो चुकी है। साथ ही, शिक्षा विभाग में भी इस घटना को लेकर अधिकारियों के बीच चिंता की लहर है, क्योंकि यह विभाग की छवि को धूमिल करता है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
हिसार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। अधिकारियों का कहना है कि विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। किसी भी कर्मचारी के भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी, चाहे उसका पद कोई भी हो।
राज्य सतर्कता ब्यूरो ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि यह फैसला उन तमाम भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी है जो अपने पद का दुरुपयोग करते हैं।
आम जनता के लिए संदेश
यह मामला उन तमाम आम नागरिकों के लिए भी एक उदाहरण बन गया है जो रिश्वत मांगने की घटनाओं से भय या संकोच के कारण चुप रहते हैं। अगर शिकायतकर्ता साहस न दिखाता और सतर्कता विभाग से संपर्क न करता, तो शायद यह मामला भी अन्य अनगिनत भ्रष्टाचार के मामलों की तरह दबा रह जाता।
यह सच्चाई है कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने में केवल कानून या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है — इसमें जनता की भूमिका सबसे अहम है। यदि नागरिक सजग और जागरूक रहें, तो किसी भी सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार पनप नहीं सकता।
ऑपरेशन साइबर संग्राम : अलवर पुलिस ने किया 20 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़, म्यूल अकाउंट किंगपिन गिरफ्तार
अलवर।
साइबर अपराधों के खिलाफ चल रहे ‘ऑपरेशन साइबर संग्राम’ के तहत अलवर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने लगभग 20 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना बरकत अली पुत्र मोहम्मद इशाक निवासी गोपालगढ़ हाल वैशाली नगर अलवर को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल करके कमीशन पर ठगी को अंजाम देता था। पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि यह कार्रवाई सहायक पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ प्रियंका, सीओ उत्तर शहर अंगद शर्मा के मार्गदर्शन में हुई। पुलिस को साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहे एक संदिग्ध खाते की जानकारी मिली, जिसके बाद जांच में पता चला कि खाताधारक बरकत अली के पास अलग-अलग पतों पर कई पहचान पत्र हैं।
ऑपरेशन साइबर संग्राम : अलवर पुलिस ने किया 20 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़, म्यूल अकाउंट किंगपिन गिरफ्तार
वैशाली नगर एसएचओ गुरुदत्त सैनी की टीम ने बरकत अली को डिटेन किया। पूछताछ के बाद उसके किराए के मकान से 17 चेकबुक, 14 एटीएम कार्ड, 5 बैंक पासबुक, विभिन्न लोगों के हस्ताक्षर वाले चेक, 3 आधार कार्ड, 2 पैन कार्ड, 2 स्वाइप मशीन और 2 क्यूआर कोड स्कैनर मिले हैं। पूरे देश में फैला था जाल जांच में यह भी पता चला है कि बरकत अली के बैंक खातों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में करीब 32 साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें कुल 19 करोड़ 2 लाख 45 हजार 460 रुपये की धोखाधड़ी हुई है। बरकत अली एक संगठित गिरोह चलाता था, जो साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराता था और कमीशन पर ठगी गई रकम निकालता था। पुलिस अब इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है। इस कार्रवाई में थाना वैशाली नगर से एएसआई सुनील, कांस्टेबल अरशद, शेखर व मानवेंद्र और साइक्लोन सेल से हेड कांस्टेबल संदीप, अमित, करण और संजय