दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया

दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया

दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया
दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट ने एक अत्यंत जटिल और हाई-टेक क्यूआर कोड फ्रॉड मामले का खुलासा किया है। आरोपी ने दुकानों के मूल क्यूआर कोड में छेड़छाड़ कर ग्राहकों के पेमेंट को अपने अकाउंट में डायवर्ट कर दिया था। पुलिस ने इंटर-स्टेट ऑपरेशन कर राजस्थान के जयपुर से 19 वर्षीय मनीष वर्मा को गिरफ्तार किया है। इस मामले की जांच में साइबर तकनीक, डिजिटल फॉरेंसिक और यूपीआई ट्रांजेक्शन ट्रेल का व्यापक इस्तेमाल किया गया।

मामला कैसे सामने आया

केस की शुरुआत 13 दिसंबर 2025 को हुई, जब चांदनी चौक की मशहूर कपड़े की दुकान पर एक ग्राहक 2.50 लाख रुपए का लहंगा खरीदने गया। ग्राहक ने दुकान में दिखाए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर दो पेमेंट किए, जिनमें 90,000 और 50,000 रुपए शामिल थे। लेकिन दुकान वाले ने दावा किया कि पैसे उनके अकाउंट में नहीं आए। ग्राहक ने स्क्रीनशॉट दिखाया, लेकिन फिर भी दुकान को पेमेंट नहीं मिला।

पीड़ित ने तुरंत ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई, और नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत ई-एफआईआर दर्ज की गई।

साइबर सेल की कार्रवाई

जांच डीसीपी नॉर्थ के निर्देशन में, एसीपी ऑपरेशंस विदुषी कौशिक के लीडरशिप और एसएचओ साइबर नॉर्थ रोहित गहलोत के सुपरविजन में हुई। टीम ने दुकान का स्पॉट इंस्पेक्शन किया, बिलिंग प्रोसेस वेरिफाई की और स्टाफ के बयान लिए।

जांच के दौरान यूपीआई ट्रांजेक्शन ट्रेल से पता चला कि पेमेंट्स एक अलग अकाउंट में गए थे, जो राजस्थान से ऑपरेट हो रहा था। तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट्स की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई और जयपुर के चाकसू इलाके में छापेमारी कर मनीष वर्मा को गिरफ्तार किया गया।

आरोपी का modus operandi

पूछताछ में आरोपी मनीष वर्मा ने कबूल किया कि उसने एआई-बेस्ड इमेज एडिटिंग ऐप का इस्तेमाल कर मूल क्यूआर कोड में बदलाव किया और मर्चेंट की बैंक डिटेल्स अपनी बदल दीं। इस फ्रॉड का आइडिया उसे साउथ इंडियन फिल्म ‘वेट्टैयान’ के एक सीन से मिला।

मनीष ने तकनीकी कौशल का इस्तेमाल करते हुए सिस्टमैटिक तरीके से कई दुकानों को टारगेट किया। उसके मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें 100 से ज्यादा एडिटेड क्यूआर कोड, चैट और फाइनेंशियल रिकॉर्ड मिले। जांच से यह भी पता चला कि ठगी की रकम उसके अकाउंट में ट्रेस की जा चुकी थी।

साइबर फ्रॉड की तकनीक

इस मामले में तकनीक का इस्तेमाल बहुत हाई-टेक था। एआई-बेस्ड इमेज एडिटिंग ऐप के माध्यम से मनीष ने QR कोड को डिज़ाइन और मॉडिफाई किया। मूल QR कोड में मामूली बदलाव करके वह पेमेंट डायवर्ट कर सकता था, जबकि ग्राहक और दुकानदार को किसी भी तरह की असामान्यता का पता नहीं चलता था।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह फ्रॉड मॉडल अत्यधिक खतरनाक है क्योंकि यह डिजिटल पेमेंट सिस्टम की विश्वसनीयता को सीधे चुनौती देता है। ऐसे फ्रॉड में पीड़ित को यह पता नहीं चलता कि पेमेंट उनके अकाउंट में नहीं गया, और स्क्रीनशॉट या ट्रांजेक्शन रसीद अक्सर धोखे का हिस्सा बन जाती है।

दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया
दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया

इंटर-स्टेट जांच और डिजिटल फॉरेंसिक

दिल्ली साइबर सेल ने इंटर-स्टेट जांच की प्रक्रिया अपनाई। राजस्थान में आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और बैंक रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया। आरोपी के मोबाइल फोन और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मनीष वर्मा ने कई दुकानों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया।

साइबर सेल ने बताया कि आरोपी का नेटवर्क और उसके डिजिटल फूटप्रिंट अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने में मदद करेंगे। जांच से पता चला कि मनीष ने सिस्टमैटिक तरीके से लोगों को निशाना बनाया, और इस फ्रॉड को अंजाम देने में कई हफ्तों का प्लानिंग शामिल था।

पुलिस की रणनीति और भविष्य की रोकथाम

डीसीपी नॉर्थ ने कहा कि यह केस डिजिटल फ्रॉड की बढ़ती जटिलताओं को उजागर करता है। साइबर सेल की टीम ने तकनीकी कौशल और डिजिटल फॉरेंसिक का इस्तेमाल कर मामले को हल किया। भविष्य में ऐसे फ्रॉड को रोकने के लिए पुलिस ने दुकानों और व्यापारियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि दुकानदारों को QR कोड की वैरिफिकेशन, दो-स्तरीय ऑथेंटिकेशन और डिजिटल ट्रांजेक्शन की नियमित मॉनिटरिंग करनी चाहिए। इसके साथ ही, ग्राहकों को भी पेमेंट की पुष्टि बैंक अकाउंट और रसीद से करनी चाहिए।

अपराधियों की मानसिकता

पूछताछ में मनीष ने यह भी कबूल किया कि उसने अपराध की प्रेरणा फिल्म और ऑनलाइन कंटेंट से ली। यह दर्शाता है कि डिजिटल अपराध में मनोरंजन और मीडिया का प्रभाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साइबर क्राइम विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल फ्रॉड केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अपराधियों की मानसिकता, सोच और नई तकनीक का इस्तेमाल भी शामिल होता है।

निष्कर्ष

दिल्ली साइबर सेल ने क्यूआर कोड फ्रॉड केस को उजागर कर यह साबित किया कि डिजिटल अपराधों का मुकाबला करने के लिए तकनीकी कौशल, इंटर-स्टेट सहयोग और डिजिटल फॉरेंसिक की आवश्यकता है। मनीष वर्मा की गिरफ्तारी ने न केवल एक गंभीर फ्रॉड को रोका, बल्कि संभावित अन्य पीड़ितों को भी सुरक्षा दी।

इस केस से यह भी स्पष्ट होता है कि डिजिटल लेन-देन में सतर्कता, तकनीकी निगरानी और साइबर जागरूकता आवश्यक है। पुलिस का कहना है कि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए और ज्यादा एडवांस तकनीक और इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाएगा।

साइबर फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं के बीच यह केस एक चेतावनी है कि व्यवसायिक और व्यक्तिगत दोनों तरह के डिजिटल पेमेंट यूजर्स को सतर्क रहना होगा। साइबर सेल की कार्रवाई ने यह दिखाया कि उच्च तकनीक और डिजिटल फॉरेंसिक के सहारे ऐसे अपराधियों को पकड़ना संभव है।

इस कार्रवाई से यह भी संदेश जाता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां डिजिटल अपराध के मामलों में पूरी तत्परता और कौशल के साथ काम कर रही हैं, ताकि ग्राहकों और व्यापारियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और डिजिटल लेन-देन का भरोसा बनाए रखा जा सके।

पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद

पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद

पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद
पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद

अमृतसर। पंजाब एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (बॉर्डर रेंज) ने बीएसएफ के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए ड्रोन के जरिए भेजी गई भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की है। पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने इस सफलता की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की और बताया कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई।

ड्रोन ऑपरेशन और बरामदगी का विवरण

डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, इलाके में ड्रोन मूवमेंट की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान संदिग्ध पैकेट बरामद किए गए, जिनमें लगभग 12 किलोग्राम हेरोइन थी। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह खेप सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से भेजी गई थी। हेरोइन की यह खेप स्थानीय नेटवर्क के जरिए आगे सप्लाई की जानी थी।

पुलिस ने बताया कि मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही ड्रोन ऑपरेशन और तस्करी के नेटवर्क से जुड़े आगे और पीछे के लिंक का पता लगाने के लिए तकनीकी सबूत, मोबाइल लोकेशन और मुखबिर की मदद से जांच शुरू कर दी गई है।

ड्रोन आधारित नशीले पदार्थों की तस्करी का खतरा

पंजाब में ड्रोन का उपयोग कर नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ये ड्रोन सीमापार से मादक पदार्थों को भेजकर स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से वितरण करने का काम करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ड्रोन आधारित तस्करी पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक तेज़ और खतरनाक होती है, क्योंकि यह निगरानी और पैट्रोलिंग से बचने के लिए प्रयोग की जाती है।

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि ड्रोन आधारित नशीले पदार्थों की तस्करी को रोका जाए और बॉर्डर बेल्ट में सक्रिय ड्रग नेटवर्क को समाप्त किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा।

पिछले मामलों की पृष्ठभूमि

20 दिसंबर को पंजाब की स्टेट स्पेशल ऑपरेशंस सेल (एसएसओसी), एसएएस नगर ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना के भगोड़े जवान राजबीर सिंह उर्फ ‘फौजी’ और उसके साथी को सीमा पार ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के रैकेट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने एक हैंड ग्रेनेड और 500 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि राजबीर सिंह इस साल की शुरुआत में अमृतसर ग्रामीण के पुलिस स्टेशन घरिंडा में दर्ज जासूसी मामले में वांछित था। जांच में यह भी सामने आया कि उसकी भूमिका हरियाणा के सिरसा में एक महिला पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड हमले की साजिश में भी रही थी। इसमें ग्रेनेड की डिलीवरी और हमले के लिए फंडिंग शामिल थी।

पाकिस्तान आधारित तस्करों और आतंकियों से कनेक्शन

एसएसओसी की टीम ने बताया कि राजबीर सिंह और उसके साथी पाकिस्तान आधारित तस्करों और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े थे। ये मॉड्यूल सीमा पार से ड्रग्स और हथियार भेजकर पंजाब में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों की तस्करी ही नहीं करते, बल्कि आतंकवाद और संगठित अपराध में भी सक्रिय रहते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह नेटवर्क ड्रोन, गोपनीय मार्ग और स्थानीय एजेंटों के माध्यम से मादक पदार्थों को पंजाब के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई करता था। यह नेटवर्क सीमा पार से नियंत्रित किया जाता था और इसका उद्देश्य स्थानीय अपराध और अशांति फैलाना था।

पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद
पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद

पंजाब पुलिस की रणनीति और संयुक्त कार्रवाई

पंजाब पुलिस और बीएसएफ ने इस तस्करी रैकेट को पकड़ने के लिए संयुक्त रणनीति अपनाई। खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस नेटवर्क के सहयोग से इलाके में लगातार निगरानी रखी गई। ड्रोन मूवमेंट की सूचना मिलने के बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और संदिग्ध पैकेट बरामद किए गए।

डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई केवल एक मादक पदार्थों की खेप को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे नेटवर्क को उजागर करना और भविष्य में होने वाली तस्करी को रोकना है।

तस्करी और ड्रोन तकनीक की चुनौती

ड्रोन आधारित तस्करी आधुनिक समय में मादक पदार्थों के अपराधियों के लिए आसान और सुरक्षित माध्यम बन गई है। ड्रोन की मदद से सीमापार से मादक पदार्थों की खेप भेजी जाती है, जिसे स्थानीय नेटवर्क वितरण के लिए प्राप्त करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पारंपरिक निगरानी तकनीकों से बचने का नया तरीका है।

इसलिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को लगातार तकनीकी प्रशिक्षण और आधुनिक निगरानी उपकरणों के जरिए ड्रोन मूवमेंट पर नजर रखनी पड़ती है। पंजाब पुलिस ने भी अपने ऑपरेशन में ड्रोन और इंटेलिजेंस आधारित रणनीति को अपनाया है, जिससे तस्करी रोकने में सफलता मिल रही है।

तस्करी रैकेट के खिलाफ आगे की कार्रवाई

पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। तकनीकी सबूतों, मोबाइल लोकेशन और मुखबिर की मदद से तस्करी रैकेट के सभी लिंक खोजने का काम चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही सभी सहयोगियों और नेटवर्क को चिन्हित किया जाएगा, पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस की प्राथमिकता है कि सीमा पार ड्रग तस्करी और आतंकवादी मॉड्यूल के नेटवर्क को पूरी तरह नष्ट किया जाए। इसके लिए राज्य की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।

सामाजिक और सुरक्षा दृष्टि

ड्रग्स और हथियारों की तस्करी केवल अपराध का मामला नहीं है। यह राज्य की सुरक्षा और समाज की शांति के लिए भी गंभीर खतरा है। ऐसे नेटवर्क न केवल नशीले पदार्थ सप्लाई करते हैं, बल्कि हिंसा और आतंकवाद फैलाने का काम भी करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों से युवाओं और समाज में ड्रग्स के प्रभाव को कम किया जा सकता है। पंजाब पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त कार्रवाई यह सुनिश्चित करती है कि तस्करी के नेटवर्क को तोड़ा जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

निष्कर्ष

अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी पंजाब पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त सफलता का प्रतीक है। यह कार्रवाई केवल मादक पदार्थों की खेप को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क को उजागर करने और भविष्य में होने वाली तस्करी को रोकने का भी संदेश देती है।

राजबीर सिंह और उसके साथी की गिरफ्तारी, पाकिस्तान आधारित तस्करों और आतंकी मॉड्यूल के साथ उनके संबंधों का खुलासा, और ड्रोन ऑपरेशन की तकनीकी सफलता यह साबित करती है कि पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं।

डीजीपी गौरव यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस ड्रोन आधारित नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने और बॉर्डर बेल्ट में सक्रिय ड्रग नेटवर्क को समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा।

इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि ड्रग तस्करी और आतंकवादी मॉड्यूल के खिलाफ राज्य और केंद्रीय एजेंसियां पूरी तत्परता और तकनीकी दक्षता के साथ काम कर रही हैं, ताकि पंजाब में सुरक्षा और शांति सुनिश्चित की जा सके।

कोहरे की चादर में लिपटा राजस्थान: कई शहरों में घना कोहरा, जयपुर में विजिबिलिटी 10 मीटर तक गिरी, कड़ाके की ठंड का अलर्ट

कोहरे की चादर में लिपटा राजस्थान: कई शहरों में घना कोहरा, जयपुर में विजिबिलिटी 10 मीटर तक गिरी, कड़ाके की ठंड का अलर्ट

कोहरे की चादर में लिपटा राजस्थान: कई शहरों में घना कोहरा, जयपुर में विजिबिलिटी 10 मीटर तक गिरी, कड़ाके की ठंड का अलर्ट
कोहरे की चादर में लिपटा राजस्थान: कई शहरों में घना कोहरा, जयपुर में विजिबिलिटी 10 मीटर तक गिरी, कड़ाके की ठंड का अलर्ट

जयपुर । राजस्थान के कई जिलों में सोमवार को घना कोहरा छा गया, जिससे कई इलाकों में विजिबिलिटी घटकर दस मीटर रह गई। जयपुर के बाहरी इलाकों में विजिबिलिटी सिर्फ 10 मीटर थी। जैसलमेर और श्री गंगानगर जैसे बॉर्डर जिलों में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली।
छाए हुए कोहरे और उत्तर भारत पर एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर के कारण पूरे राज्य में तापमान का पैटर्न असामान्य रहा। न्यूनतम (रात का) तापमान बढ़ रहा है, वहीं दिन का तापमान काफी गिर गया है, जिससे कई इलाकों में दिन रात से ज्यादा ठंडे हो गए हैं। रविवार को कई शहरों में अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया।
इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) ने मंगलवार से कड़ाके की ठंड की चेतावनी जारी करते हुए तापमान में और गिरावट का अनुमान लगाया है।
जैसलमेर में सोमवार सुबह से ही घना कोहरा छाया रहा, जिससे ठंड और बढ़ गई। सोनार किले से देखने पर शहर कोहरे की चादर में लगभग छिपा हुआ था। पिछले 24 घंटों में घने कोहरे ने उत्तर-पूर्वी राजस्थान को प्रभावित किया, जिसमें श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली और दौसा शामिल हैं।
लगातार कोहरे की वजह से इन इलाकों में दिन के तापमान में तेजी से गिरावट आई। अलवर और करौली में रविवार अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा, जहां अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

कोहरे की चादर में लिपटा राजस्थान: कई शहरों में घना कोहरा, जयपुर में विजिबिलिटी 10 मीटर तक गिरी, कड़ाके की ठंड का अलर्ट
कोहरे की चादर में लिपटा राजस्थान: कई शहरों में घना कोहरा, जयपुर में विजिबिलिटी 10 मीटर तक गिरी, कड़ाके की ठंड का अलर्ट


दोनों जिलों में सुबह से देर शाम तक कोहरा और धुंध छाई रही। करौली में अधिकतम तापमान में 7 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट देखी गई, जबकि अलवर में 5.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। दौसा, श्री गंगानगर, कोटा, पिलानी, जयपुर, चित्तौड़गढ़ और जैसलमेर सहित अन्य शहरों में भी 1 से 7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
श्री गंगानगर में भी पूरे दिन हल्का कोहरा छाया रहा। लंबे समय तक कोहरे के कारण कई जिलों में ‘ठंडे दिन’ जैसी स्थिति रही।
पश्चिमी विक्षोभ से जुड़े बादलों के कारण उत्तरी हवाएं कमजोर हो गई हैं, जिससे न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हुई है और सुबह-शाम की ठंड कम हो गई है। कई शहरों में रविवार को रात का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया। सबसे कम न्यूनतम तापमान पाली में 8.0 डिग्री सेल्सियस और सिरोही में 8.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ का असर सोमवार तक जारी रहेगा और कुछ इलाकों में हल्के बादल छाए रहने की संभावना है।
उन्होंने आगे कहा कि 23 दिसंबर से ठंडी उत्तरी हवाएं तेज होंगी, जिससे न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। उत्तर-पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में घना कोहरा भी छाए रहने की उम्मीद है।

टोंक : नाबालिग से दुष्कर्म का मामला आया, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज,आरोपी की तलाश जारी

टोंक : नाबालिग से दुष्कर्म का मामला आया, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज,आरोपी की तलाश जारी

टोंक : नाबालिग से दुष्कर्म का मामला आया, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज,आरोपी की तलाश जारी
टोंक : नाबालिग से दुष्कर्म का मामला आया, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज,आरोपी की तलाश जारी

टोंक। कोतवाली थाना क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से रेप का मामला सामने आया है। आरोपी युवक ने पीड़िता से इस्टाग्राम पर दोस्ती की। फिर छात्रा को दस दिन पहले बहला-फुसलाकर सदर थाना क्षेत्र में अज्ञात स्थान पर ले गया और रेप किया । इसकी जानकारी मिलने के बाद इसकी रिपोर्ट पीड़िता छात्रा की मां ने कोतवाली में दी हैं। घटना दस दिन पहले की है और इसका मामला दो दिन पहले ही दर्ज हुआ है। पुलिस ने जांच कारणों से पहले मीडिया को नहीं बताया । पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल करा लिया है और आरोपी की तलाश कर रही है। कोतवाली के थाना प्रभारी भंवर लाल वैष्णव ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र का रहने वाला फिरोज (21) नाम का युवक क्रेन चलाता है।

टोंक : नाबालिग से दुष्कर्म का मामला आया, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज,आरोपी की तलाश जारी
टोंक : नाबालिग से दुष्कर्म का मामला आया, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज,आरोपी की तलाश जारी

उसमें अपने मोहल्ले में रहने वाली छात्रा से करीब दो माह पहले इंस्टाग्राम पर दोस्ती की। फिर उसे बरगलाकर दस दिसंबर को बाइक पर बिठाकर सदर थाना क्षेत्र में अज्ञात स्थान पर ले गया। जहां उसने 15 वर्षीय छात्रा से रेप किया। फिर उसे बाइक से बाजार में छोड़ गया। फिर लड़की घर चली गई,लेकिन इस दौरान कुछ लोगों ने उसे लड़के के पीछे बाइक पर बैठे देखा तो लड़के के घर वालों को बता दिया। फिर घर वालों ने छात्रा से सख्ती से पूछताछ की तो उसने युवक के साथ जाना और उसके साथ रेप की घटना होना बताया। फिर लड़की की मां ने लड़की के साथ कोतवाली पहुंचकर इस घटनाक्रम की रिपोर्ट दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। लड़की का मेडिकल मुआयना करा लिया है। इस मामलें की जांच टोंक डीएसपी मृत्युजंय शर्मा कर रहे है।

गाजियाबाद में पुलिस से मुठभेड़ में 25-25 हजार के दो इनामी बदमाश गिरफ्तार

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गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के थाना अंकुर विहार पुलिस ने रविवार देर रात मुठभेड़ के दौरान हत्या में वांछित दो बदमाशों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। गिरफ्तार किए गए दोनों बदमाशों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित था। इनके कब्जे से चोरी की मोटरसाइकिल, एक अवैध तमंचा और एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया है। मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से एक बदमाश घायल हो गया, जिसे अस्पताल भेजा गया। थाना अंकुर विहार पुलिस टीम दिल्ली-सहारनपुर हाईवे की सर्विस लेन पर गढ़ी कट्टैया कट से आगे एक खाली प्लॉट के पास चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर ने सूचना दी कि डाबर तालाब क्षेत्र में गोली मारकर हत्या करने वाले दो बदमाश एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर गढ़ी कट्टैया से सभापुर अंडरपास की ओर जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने सतर्कता बढ़ाते हुए उसी मार्ग पर चेकिंग शुरू कर दी।

गाजियाबाद में पुलिस से मुठभेड़ में 25-25 हजार के दो इनामी बदमाश गिरफ्तार
गाजियाबाद में पुलिस से मुठभेड़ में 25-25 हजार के दो इनामी बदमाश गिरफ्तार


कुछ ही देर में एक मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक गढ़ी कट्टैया की ओर से आते दिखाई दिए। पुलिस ने जब उन्हें रुकने का इशारा किया तो पीछे बैठे व्यक्ति ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायर कर दिया और मोटरसाइकिल मोड़कर खाली प्लॉट की ओर भागने लगे। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें पीछे बैठे बदमाश के दाहिने पैर में गोली लग गई। इसके बाद घायल बदमाश और उसके साथी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में घायल बदमाश ने अपना नाम अफसर बताया, जबकि दूसरे आरोपी की पहचान शहजाद के रूप में हुई।
पुलिस के अनुसार इन बदमाशों ने दिनांक 11 दिसंबर को एसएलएफ वेद विहार, डीएलएफ निवासी सुनील कुमार की गोली मारकर हत्या की थी। इस संबंध में थाना अंकुर विहार में पंजीकृत है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार घायल बदमाश अफसर के खिलाफ लूट और चोरी के अलग-अलग राज्यों में करीब 12 केस दर्ज हैं। दोनों आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है और अन्य आपराधिक मामलों की भी जांच की जा रही है।

दिल्ली: छात्र से चाकू की नोक पर लूट का मामला सुलझा, चार नाबालिग पकड़े गए

दिल्ली: छात्र से चाकू की नोक पर लूट का मामला सुलझा, चार नाबालिग पकड़े गए

दिल्ली: छात्र से चाकू की नोक पर लूट का मामला सुलझा, चार नाबालिग पकड़े गए
दिल्ली: छात्र से चाकू की नोक पर लूट का मामला सुलझा, चार नाबालिग पकड़े गए

नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के वेलकम थाना क्षेत्र में ट्यूशन से लौट रहे एक छात्र से चाकू की नोक पर हुई लूटपाट की वारदात को पुलिस ने सुलझा लिया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चार नाबालिग को हिरासत में लिया है। पुलिस ने उनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया है। दिल्ली पुलिस की ओर से सोमवार को जारी एक प्रेस नोट के अनुसार, 15-16 दिसंबर की रात वेलकम थाना पुलिस को जीटीबी अस्पताल से सूचना मिली कि कबीर नगर इलाके के 17 वर्षीय युवक को चाकू लगने की चोट के साथ भर्ती कराया गया है। घटना के तुरंत बाद पुलिस टीम अस्पताल पहुंची। घायल छात्र ने पुलिस को बताया कि रात करीब 10 बजे वह ट्यूशन से घर लौट रहा था, तभी रास्ते में पांच लोगों ने उसे घेरकर हमला किया और चाकू मारकर 350 रुपए लूट लिए।

दिल्ली: छात्र से चाकू की नोक पर लूट का मामला सुलझा, चार नाबालिग पकड़े गए
दिल्ली: छात्र से चाकू की नोक पर लूट का मामला सुलझा, चार नाबालिग पकड़े गए

पीड़ित के इस बयान के आधार पर वेलकम थाने में एफआईआर नंबर 652/2025 दर्ज की गई। शुरुआत में मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया और वेलकम थाने के एसएचओ रूपेश खत्री की अगुवाई में जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस टीम ने तकनीकी और मानवीय स्रोतों की मदद से सुराग जुटाए और शक की बुनियाद पर चार नाबालिगों (उम्र 14 से 16 वर्ष) को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के क्रम में चारों ने वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर वह चाकू भी बरामद कर लिया जो वारदात में इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस के अनुसार, एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 309(6), 311 और 3(5) भी जोड़ी गई हैं। इस पूरे मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस वारदात में शामिल पांचवां आरोपी कौन था और उसकी भूमिका क्या थी।

दिल्ली: फर्जी दवाओं और नकली कॉस्मेटिक्स रैकेट का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

दिल्ली: फर्जी दवाओं और नकली कॉस्मेटिक्स रैकेट का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

दिल्ली: फर्जी दवाओं और नकली कॉस्मेटिक्स रैकेट का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
दिल्ली: फर्जी दवाओं और नकली कॉस्मेटिक्स रैकेट का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने नकली दवाओं और फर्जी कॉस्मेटिक उत्पादों के अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई की है। सेल ने एक ऐसे मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जो स्प्यूरियस दवाओं व नकली ब्यूटी प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग तैयार कर सप्लाई करता था। दरअसल, यह मामला एफआईआर नंबर 360/25 के तहत दर्ज किया गया है और क्राइम ब्रांच थाना मामले की जांच कर रही है। इस केस में इससे पहले तीन आरोपियों को स्प्यूरियस दवाओं के निर्माण और सप्लाई की साजिश में गिरफ्तार किया गया था। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को एक ऐसे प्रिंटिंग मॉड्यूल का सुराग मिला, जो नकली दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों के लिए रैपर और पैकेजिंग सामग्री सप्लाई करता था। इसी कड़ी में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो नकली दवा ‘क्लॉप-जी’ और कॉस्मेटिक क्रीम ‘स्कीन साइन’ की पैकेजिंग बॉक्स सप्लाई करने में शामिल थे। पुलिस टीम ने राम रोड, दिल्ली स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारा, जहां से ‘स्कीन साइन’ के रैपर तैयार करने वाली दो डाई फ्रेम बरामद की गईं। इस कार्रवाई के साथ ही एक सक्रिय प्रिंटिंग यूनिट का भंडाफोड़ हो गया, जो बड़े पैमाने पर स्प्यूरियस दवाओं की पैकेजिंग सप्लाई करता था।

दिल्ली: फर्जी दवाओं और नकली कॉस्मेटिक्स रैकेट का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
दिल्ली: फर्जी दवाओं और नकली कॉस्मेटिक्स रैकेट का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार


गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अनिल सिंह रावत (46) और राहुल अग्रवाल (31) के रूप में हुई। दोनों आरोपी दिल्ली के रहने वाले हैं। अनिल सिंह रावत राम रोड स्थित प्रिंटिंग प्रेस का संचालन करता है, जहां से स्प्यूरियस दवाओं के रैपिंग बॉक्स सप्लाई किए जाते थे। मौके से ‘स्कीन साइन’ रैपर बॉक्स तैयार करने वाली दो डाई फ्रेम्स बरामद किए गए। इस मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी राहुल अग्रवाल ने खाटू श्याम प्रिंटर्स, राम रोड से नकली दवाओं के रैपिंग बॉक्स की सप्लाई के ऑर्डर बुक किए थे।
पुलिस अब इस सिंडिकेट के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक की पहचान में जुटी है, जिसमें नकली दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल कच्चे माल के स्रोत, पैकेजिंग आपूर्ति श्रृंखला और वितरण नेटवर्क का खुलासा शामिल है।
यह कार्रवाई इंस्पेक्टर मनजीत कुमार के नेतृत्व में एएसआई कंवरपाल, हेड कॉन्स्टेबल विपिन, सोहनपाल, राजेश, अनुज और कांस्टेबल सचिन की टीम ने की। पूरी कार्रवाई एसीपी अनिल शर्मा की निगरानी में और डीसीपी आदित्य गौतम के दिशानिर्देशों में संपन्न हुई।

HSVP की लापरवाही पर राइट टू सर्विस कमीशन सख्त, आवंटन प्रक्रिया में चूक पर मुआवजे के आदेश

HSVP की लापरवाही पर राइट टू सर्विस कमीशन सख्त, आवंटन प्रक्रिया में चूक पर मुआवजे के आदेश

HSVP की लापरवाही पर राइट टू सर्विस कमीशन सख्त, आवंटन प्रक्रिया में चूक पर मुआवजे के आदेश
HSVP की लापरवाही पर राइट टू सर्विस कमीशन सख्त, आवंटन प्रक्रिया में चूक पर मुआवजे के आदेश

चंडीगढ़। हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने फरीदाबाद स्थित हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के एक भूखंड से संबंधित मामले में सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों पर विचार करने के उपरांत कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पाया कि 08.10.2025 के अंतरिम आदेशों में स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद आवंटन पत्र की शर्तों के अनुसार 5.5 प्रतिशत की दर से विलंबित कब्जा ब्याज का भुगतान अब तक नहीं किया गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं अनुचित है। आयोग ने स्पष्ट किया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के सक्षम अधिकारियों द्वारा कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि एस्टेट अधिकारी द्वारा समय रहते अतिरिक्त धनराशि की मांग की गई थी। आदेशों की प्रतिलिपि फील्ड कार्यालय एवं मुख्यालय—दोनों को भेजी जा चुकी थी, इसके बावजूद अनुपालन न होना अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अधिकारियों को प्रशासनिक मार्गदर्शन देने का मंच नहीं है और भविष्य में अपेक्षा की जाती है कि अधिकारी यथोचित सावधानी रखेंगे । आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि सुनवाई के दौरान दिए गए आश्वासन के आधार पर आयोग ने निर्देश दिए हैं कि एस्टेट अधिकारी द्वारा मांगी गई धनराशि शीघ्र स्थानांतरित की जाए तथा 19.12.2025 तक विलंबित कब्जा ब्याज की राशि संबंधित आवंटी के खाते में जमा कराई जाए। किसी भी प्रकार की आगे की देरी होने पर आयोग संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा।

HSVP की लापरवाही पर राइट टू सर्विस कमीशन सख्त, आवंटन प्रक्रिया में चूक पर मुआवजे के आदेश
HSVP की लापरवाही पर राइट टू सर्विस कमीशन सख्त, आवंटन प्रक्रिया में चूक पर मुआवजे के आदेश


इसके अतिरिक्त, आयोग ने वर्ष 2022 में सेक्टर 76 एवं 77, फरीदाबाद में विकास कार्य पूर्ण हुए बिना ई-नीलामी किए जाने के मामले पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने इस निर्णय की जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्य प्रशासक, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पर निर्धारित करते हुए कहा कि इस “अनुमान आधारित निर्णय” के कारण न केवल वर्तमान आवंटी बल्कि अनेक अन्य आवंटियों को भी अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी। यह विषय उचित कार्रवाई हेतु हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव के संज्ञान में भी लाया गया है।
आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा अपने स्तर पर विलंबित कब्जा ब्याज देने की कोई सक्रिय एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था नहीं है और अधिकांश मामलों में आवंटियों को राहत केवल आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही मिल पाती है, जो अत्यंत चिंताजनक है। आवंटी को हुई मानसिक पीड़ा एवं उत्पीड़न को ध्यान में रखते हुए आयोग ने हरियाणा राइट टू सर्विस अधिनियम, 2014 की धारा 17(1)(ह) के अंतर्गत अधिकतम 5,000 रुपये का मुआवजा प्रदान करने के आदेश दिए हैं।
प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि यह राशि पहले अपने स्तर पर भुगतान की जाए तथा बाद में दोषी अधिकारियों से वसूली की कार्रवाई की जाए। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने एवं निर्धारित तिथियों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी जारी किए हैं।

यूपी में महिला अपराधों में बड़ी गिरावट, दुष्कर्म के मामलों में 34 प्रतिशत की कमी

यूपी में महिला अपराधों में बड़ी गिरावट, दुष्कर्म के मामलों में 34 प्रतिशत की कमी

यूपी में महिला अपराधों में बड़ी गिरावट, दुष्कर्म के मामलों में 34 प्रतिशत की कमी
यूपी में महिला अपराधों में बड़ी गिरावट, दुष्कर्म के मामलों में 34 प्रतिशत की कमी

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर शुरू किए गए मिशन शक्ति अभियान के सकारात्मक और ठोस नतीजे अब सामने आने लगे हैं। प्रदेश के सभी थानों में मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के बाद महिला अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह जानकारी पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण की समीक्षा बैठक में सामने आई। डीजीपी मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मिशन शक्ति केंद्र बनने के बाद दुष्कर्म के मामलों में करीब 34 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं महिलाओं और बच्चियों के अपहरण के मामलों में 17 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। दहेज हत्या के मामलों में भी लगभग 13 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि घरेलू हिंसा के मामलों में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, दहेज हत्या के मामलों में सबसे अधिक 80 प्रतिशत की कमी बलरामपुर जिले में दर्ज की गई है। वहीं दुष्कर्म के मामलों में बाराबंकी जिले में करीब 77 प्रतिशत की बड़ी गिरावट सामने आई है। महिलाओं और बच्चियों के अपहरण के मामलों में अमेठी जिले में 42 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई, जबकि घरेलू हिंसा के मामलों में श्रावस्ती जिले में करीब 36 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।
यह आंकड़े मिशन शक्ति केंद्र स्थापित होने से पहले और बाद के तीन-तीन महीनों की तुलना के आधार पर तैयार किए गए हैं। समीक्षा के दौरान 16 जून से 15 सितंबर 2025 (केंद्र स्थापना से पहले) और 16 सितंबर से 15 दिसंबर 2025 (केंद्र स्थापना के बाद) के महिला संबंधी अपराधों का विश्लेषण किया गया।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक, पुलिस आयुक्त, संयुक्त व अपर पुलिस आयुक्त, तथा सभी जिलों के मिशन शक्ति नोडल अधिकारियों के साथ बैठक कर फीडबैक लिया।

यूपी में महिला अपराधों में बड़ी गिरावट, दुष्कर्म के मामलों में 34 प्रतिशत की कमी
यूपी में महिला अपराधों में बड़ी गिरावट, दुष्कर्म के मामलों में 34 प्रतिशत की कमी


उन्होंने मिशन शक्ति केंद्रों की सफलता के लिए पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की सराहना की और आगे बेहतर कार्य के लिए कई अहम निर्देश भी दिए।
डीजीपी ने बताया कि मिशन शक्ति केंद्र अब केवल शिकायत दर्ज कराने का स्थान नहीं रह गए हैं, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक सिंगल प्वाइंट ऑफ सपोर्ट के रूप में काम कर रहे हैं। यहां महिलाओं को शिकायत की शुरुआत से लेकर न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक मानसिक, सामाजिक, कानूनी और संस्थागत सहयोग दिया जा रहा है।
बैठक में यह भी सामने आया कि मिशन शक्ति केंद्रों की वजह से कई मामलों में विवादों का समाधान आपसी बातचीत और काउंसलिंग से ही हो जा रहा है, जिससे मामलों की संख्या कम हुई है। विभिन्न जिलों में महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए नए-नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं, जैसे गोपनीय शिकायत पेटी, महिला वॉलंटियर की नियुक्ति, स्कूल स्तर पर शिकायत व्यवस्था और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि मिशन शक्ति अभियान संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें पुलिस समन्वयक और लीड एजेंसी की भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि सही क्रियान्वयन के साथ मिशन शक्ति केंद्र प्रदेश की जमीनी पुलिसिंग में लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव लाने वाला गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण के लिए मिशन शक्ति केंद्रों को और मजबूत किया जाएगा ताकि हर जरूरतमंद महिला तक समय पर मदद पहुंच सके।

'ऑपरेशन वाइलैप' के तहत आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 790 जीवित कछुओं की जब्ती, हिरासत में कई आरोपी

‘ऑपरेशन वाइलैप’ के तहत आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 790 जीवित कछुओं की जब्ती, हिरासत में कई आरोपी

'ऑपरेशन वाइलैप' के तहत आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 790 जीवित कछुओं की जब्ती, हिरासत में कई आरोपी
‘ऑपरेशन वाइलैप’ के तहत आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 790 जीवित कछुओं की जब्ती, हिरासत में कई आरोपी

मालदा । ईस्टर्न रेलवे के मालदा डिवीजन में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने अवैध वन्यजीव तस्करी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग अभियानों में कुल 790 जीवित कछुए और कछुए की प्रजातियों को बरामद किया। ये सफलता विशेष अभियान ‘ऑपरेशन वाइलैप’ के तहत मिली, जिसका उद्देश्य रेलवे के जरिए हो रही वन्यजीव तस्करी को रोकना है। यह कार्रवाई डिविजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) मनीष कुमार गुप्ता के निर्देश और डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर (डीएससी) आरपीएफ मालदा, असीम कुमार कुल्लू की देखरेख में की गई। आरपीएफ ने बताया कि मालदा डिवीजन में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों पर लगातार सतर्कता बढ़ाई गई है ताकि यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर भी अंकुश लगाया जा सके। पहली कार्रवाई में 19 दिसंबर की शाम करीब 4 बजे बरहरवा स्टेशन पर ट्रेन एस्कॉर्टिंग टीम से सूचना मिली कि ट्रेन संख्या 15734 बठिंडा–बालुरघाट फरीक्का एक्सप्रेस के कोच एस-1 में कुछ संदिग्ध बैग ले जाए जा रहे हैं। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही आरपीएफ/बरहरवा टीम ने एस्कॉर्ट स्टाफ की सहायता से सघन जांच की।

'ऑपरेशन वाइलैप' के तहत आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 790 जीवित कछुओं की जब्ती, हिरासत में कई आरोपी
‘ऑपरेशन वाइलैप’ के तहत आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 790 जीवित कछुओं की जब्ती, हिरासत में कई आरोपी


जांच के दौरान 18 बोरे बरामद किए गए, जिनमें 16 बैग में 40-40 जीवित कछुए (कुल 640), एक बैग में 21 कछुए और एक बोरे में एक बड़ा जीवित कछुआ बरामद किया गया। इस तरह इस कार्रवाई में कुल 662 जीवित कछुओं को जब्त किया गया। इस दौरान एक पुरुष और दो महिलाओं को ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया गया और साहिबगंज वन विभाग को पूरे मामले की जानकारी दी गई।
दूसरी कार्रवाई में रात तकरीबन 10 बजे मालदा टाउन स्टेशन से ट्रेन संख्या 13410 किउल-मालदा टाउन इंटरसिटी एक्सप्रेस में एस्कॉर्टिंग ड्यूटी के दौरान आरपीएफ ने एक महिला यात्री को पांच भारी बैकपैक और एक जूट बैग ले जाते देखा। न्यू फरक्का से ट्रेन निकलने के बाद महिला बैगों के बारे में कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दे सकी, जिसके बाद सूचना मालदा पोस्ट को भेजी गई। इसके बाद, मालदा टाउन स्टेशन पहुंचने पर महिला स्टाफ के साथ संयुक्त जांच में बैगों से 128 जीवित कछुए बरामद किए गए।
बरामद किए गए समस्त कछुए और आरोपियों को संबंधित वन विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया है।
आरपीएफ के अनुसार रेलवे के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध वन्यजीव तस्करी की कोशिशें होती रही हैं। ऐसे में इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई, स्टेशनों पर कड़ी निगरानी और चलती ट्रेनों में तलाशी को प्राथमिकता दी जा रही है। ऑपरेशन वाइलैप के तहत की गई यह कार्रवाई मालदा डिवीजन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।