AGTF की कार्रवाई: दो हथियार तस्कर गिरफ्तार, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क का पर्दाफाश

AGTF की कार्रवाई: दो हथियार तस्कर गिरफ्तार, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क का पर्दाफाश

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जयपुर: राजस्थान में अवैध हथियारों के जाल पर एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स की बड़ी कार्रवाई, दो हथियार तस्कर गिरफ्तार

राजस्थान में अपराधियों के नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए राज्य पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में जयपुर मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, AGTF ने हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस संयुक्त ऑपरेशन में दो कुख्यात हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके कब्जे से तीन अवैध देशी पिस्टल (.32 बोर) और पाँच मैगज़ीन बरामद की गई हैं। यह ऑपरेशन न सिर्फ हथियार तस्करी रोकने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी है, बल्कि इससे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क की जड़ें राजस्थान में कितनी गहरी हैं, इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है।

इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व वरिष्ठ अधिकारी एडीजी दिनेश एम. एन. ने किया, जो राजस्थान पुलिस में संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्यवाही के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बताया कि कार्रवाई दो अलग-अलग जिलों में अलग-अलग समय पर की गई। पहली गिरफ्तारी श्रीगंगानगर के सादुलशहर क्षेत्र में हुई, जहां पुलिस ने गुरमीत सिंह (40) नामक एक व्यक्ति को एक अवैध देशी पिस्टल के साथ दबोच लिया। प्रारंभिक पूछताछ में गुरमीत सिंह ने खुलासा किया कि उसने यह हथियार जगतार सिंह उर्फ काला से लिया था, जो पहले से ही पुलिस के रडार पर था। इस बयान ने जांच को एक नया मोड़ दिया और गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश तेज़ कर दी गई।

दूसरी महत्वपूर्ण गिरफ्तारी हनुमानगढ़ जिले के रावतसर कस्बे से हुई, जहां पुलिस ने 21 वर्षीय अभिषेक जाट को दो देशी पिस्टल और चार मैगज़ीन के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया। पूछताछ में अभिषेक ने बताया कि वह ये हथियार सोनू भांभू नामक तस्कर से खरीद चुका था। गौरतलब है कि सोनू भांभू हाल ही में उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया एक कुख्यात हथियार तस्कर है, जिसके संबंध सीधे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े हुए हैं। सोनू की गिरफ्तारी के बाद ही AGTF ने हथियार तस्करी के इस पूरे नेटवर्क पर निगरानी बढ़ा दी थी।

एडीजी दिनेश एम. एन. के अनुसार, सोनू भांभू की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि वह अब तक राजस्थान में 131 से अधिक अवैध हथियार सप्लाई कर चुका है। यह संख्या न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि हथियार तस्करी का यह नेटवर्क कितना विस्तृत और संगठित है। सोनू ने पुलिस को बताया कि वह अलग-अलग जिलों में स्थानीय एजेंट्स के माध्यम से हथियारों की आपूर्ति करता था। इनमें से कई एजेंट कॉलेज छात्र, बेरोजगार युवा और पुराने अपराधी थे, जिन्हें पैसे का लालच देकर इस अवैध धंधे में घसीटा गया।

यह मामला एक सप्ताह पहले हनुमानगढ़ में की गई एक और कार्रवाई से भी जुड़ा है। तब AGTF ने इस गिरोह के 11 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 6 अवैध हथियार बरामद किए थे। उस समय भी पुलिस ने यह जानकारी दी थी कि यह नेटवर्क लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है और हथियार तस्करी के लिए राजस्थान को एक बड़े ट्रांजिट पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में हालिया गिरफ्तारी और हथियारों की जब्ती इस ऑपरेशन का अगला महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है।

इस संयुक्त ऑपरेशन में AGTF इंस्पेक्टर सुभाष सिंह तंवर की टीम के साथ हनुमानगढ़ की डीएसटी (District Special Team) ने मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन टीमों ने गुप्त सूचना के आधार पर पहले निगरानी रखी, फिर दोनों आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया। इन अभियानों में गहन तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और स्थानीय खुफिया तंत्र का व्यापक इस्तेमाल किया गया। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अन्य संदिग्ध नामों की पहचान हुई है, जिनके खिलाफ अब आगामी चरणों में कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह और उसके सहयोगी तस्करों की गतिविधियों पर पिछले कुछ महीनों से पैनी नजर रखी जा रही थी। लॉरेंस बिश्नोई गैंग की सक्रियता खासकर राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में लगातार बढ़ रही थी, और इसके लिए अवैध हथियारों का इस्तेमाल आम बात हो गई थी। इस गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को आकर्षित करते हैं और फिर उन्हें अपराध की दुनिया में शामिल करते हैं। इसीलिए पुलिस ने न केवल धरपकड़ अभियान तेज किया है, बल्कि साइबर निगरानी और सोशल मीडिया विश्लेषण के माध्यम से भी गैंग की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

इस बीच, पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को भी अपने इलाके में हथियारों की संदिग्ध गतिविधियों, संदिग्ध व्यक्तियों या हथियार तस्करों की जानकारी हो, तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करे। पुलिस की गुप्त सूचना तंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और जानकारी देने वाले की पहचान को गोपनीय रखा जाता है।

राजस्थान पुलिस की यह कार्रवाई राज्य में संगठित अपराध के खिलाफ चल रहे “ऑपरेशन क्लीन” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य न केवल अपराधियों को पकड़ना है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को जड़ से समाप्त करना है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी कई नामों का खुलासा हो सकता है, जिनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्षतः, यह कार्रवाई राजस्थान पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह राज्य को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। हथियार तस्करी जैसे गंभीर अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस की तकनीकी, खुफिया और मैदानी टीमें लगातार काम कर रही हैं। दो तस्करों की गिरफ्तारी और अवैध हथियारों की बरामदगी निश्चित ही एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन यह भी स्पष्ट संकेत है कि अपराधियों के खिलाफ यह लड़ाई अभी जारी है। आने वाले समय में पुलिस की और भी बड़ी कार्रवाइयों की उम्मीद की जा रही है, जिससे अपराधियों के मन में भय और आमजन में विश्वास कायम रह सके।

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