कर्तव्य पथ से शहादत की राह : जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा, सब इंस्पेक्टर हनुमान मीणा का निधन

कर्तव्य पथ से शहादत की राह : जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा, सब इंस्पेक्टर हनुमान मीणा का निधन

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कर्तव्य पथ से शहादत की राह : जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा, सब इंस्पेक्टर हनुमान मीणा का निधन
कर्तव्य पथ से शहादत की राह : जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा, सब इंस्पेक्टर हनुमान मीणा का निधन

दौसा/आंधी। खाकी का फर्ज निभाकर लौट रहे योद्धाओं के साथ नियति ने शनिवार की अलसुबह एक क्रूर मजाक किया। जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर नांगल बेला गांव के पास सुबह करीब 5 बजे हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में करौली के सपोटरा थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर (SI) हनुमान मीणा (55) की असामयिक मृत्यु हो गई। इस हादसे ने न केवल एक अनुभवी पुलिस अधिकारी को हमसे छीन लिया, बल्कि पुलिस परिवार में भी शोक की लहर दौड़ा दी है। 

सवाईमाधोपुर के चकेरी कुंडेरा निवासी हनुमान मीणा अपने साथियों—कॉन्स्टेबल कजोड़ जाट, रामराज बैरवा और रामनरेश मीणा के साथ एक केस के सिलसिले में मेरठ (उत्तर प्रदेश) गए थे। दिल्ली से लौटते समय रात करीब 2 बजे सभी ने एक साथ भोजन किया था, किसी को क्या पता था कि यह उनका साथ में आखिरी भोजन होगा। भावनात्मक और मर्मस्पर्शी बात यह है कि ये जवान देश की सेवा और अपराधियों की धरपकड़ के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर थके-हारे घर लौट रहे थे, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही काल ने अपना घेरा बना लिया। प्रारंभिक जांच और घायल रामनरेश मीणा के बयानों से यह व्यवहारात्मक तथ्य सामने आया है कि संभवतः कार ड्राइवर को सुबह के वक्त नींद की झपकी आ गई थी।

कर्तव्य पथ से शहादत की राह : जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा, सब इंस्पेक्टर हनुमान मीणा का निधन
कर्तव्य पथ से शहादत की राह : जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा, सब इंस्पेक्टर हनुमान मीणा का निधन

तेज रफ्तार कार आगे चल रहे ट्रेलर में जा घुसी, जिसका सीधा असर आगे वाली सीट पर बैठे एसआई हनुमान मीणा पर पड़ा। यह घटना हमें आगाह करती है कि सड़कों पर ‘स्पीड’ और ‘नींद’ का सामंजस्य कितना जानलेवा हो सकता है। लंबी दूरी की यात्राओं में पर्याप्त आराम और सतर्कता ही जीवन की सुरक्षा की पहली शर्त है।
आंधी थानाधिकारी गोपाल सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घायलों को तुरंत दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया। जहाँ घायल कॉन्स्टेबल्स का उपचार जारी है, वहीं मृतक एसआई के पार्थिव देह का पोस्टमार्टम करवाकर सम्मानपूर्वक परिजनों को सौंपा जा रहा है। विकासात्मक दृष्टि से एक्सप्रेस-वे सफर को सुगम तो बनाते हैं, लेकिन उच्च गति पर वाहन चलाने के दौरान ड्राइवरों की मानसिक स्थिति और थकान पर निगरानी रखना एक बड़ी चुनौती है। प्रशासन को ऐसे ‘ब्लैक स्पॉट्स’ और ‘नाइट विजिलेंस’ पर और अधिक काम करने की आवश्यकता है।
हनुमान मीणा जैसे समर्पित अधिकारियों का जाना विभाग के लिए एक अपूरणीय क्षति है। यह हादसा हमें सिखाता है कि जीवन के सफर में मंज़िल तक पहुँचने की जल्दी से ज्यादा महत्वपूर्ण सुरक्षित पहुँचना है। पूरा राजस्थान पुलिस परिवार और समाज इस दुख की घड़ी में शोकाकुल परिजनों के साथ खड़ा है।

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