दौसा : लोक अदालत का बड़ा फैसला—बीमा कंपनी को मृत भैंस का क्लेम 6% ब्याज के साथ देने का आदेश

दौसा : लोक अदालत का बड़ा फैसला—बीमा कंपनी को मृत भैंस का क्लेम 6% ब्याज के साथ देने का आदेश

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दौसा : लोक अदालत का बड़ा फैसला—बीमा कंपनी को मृत भैंस का क्लेम 6% ब्याज के साथ देने का आदेश
दौसा : लोक अदालत का बड़ा फैसला—बीमा कंपनी को मृत भैंस का क्लेम 6% ब्याज के साथ देने का आदेश

टैग से छेड़छाड़ के नाम पर बीमा कंपनी ने खारिज किया था क्लेम, अदालत ने ‘सर्वेयर रिपोर्ट’ केआधार पर कंपनी की दलील को नकारा

 दौसा | जिला स्थाई लोक अदालत ने किसान के हितों की रक्षा करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह किसान लक्ष्मीनारायण को उसकी मृत भैंस की बीमा राशि 50 हजार रुपये और उस पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करे। क्या था मामला?
किसान लक्ष्मीनारायण ने अपनी भैंस का बीमा कराया था, जिसकी पॉलिसी अवधि 19 फरवरी 2023 से 18 फरवरी 2024 तक थी। इस दौरान भैंस को टैग संख्या 741481 जारी किया गया था। दुर्भाग्यवश, 19 अगस्त 2023 को बीमारी के कारण भैंस की मृत्यु हो गई।
बीमा कंपनी का अड़ियल रुख
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष अग्रवाल ने बताया कि जब किसान ने क्लेम के लिए आवेदन किया, तो बीमा कंपनी ने उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “मृत पशु के कान में लगे टैग के साथ छेड़छाड़ की गई है।” कंपनी ने इसे आधार बनाकर क्षतिपूर्ति देने से साफ इनकार कर दिया था।

दौसा : लोक अदालत का बड़ा फैसला—बीमा कंपनी को मृत भैंस का क्लेम 6% ब्याज के साथ देने का आदेश
दौसा : लोक अदालत का बड़ा फैसला—बीमा कंपनी को मृत भैंस का क्लेम 6% ब्याज के साथ देने का आदेश


अदालत ने पकड़ी कंपनी की गलती
स्थाई लोक अदालत के पूर्णकालिक अध्यक्ष राजेश चंद्र गुप्ता और सदस्यगण अशोक कुमार शर्मा व सुरेश कुमार गोयल की पीठ ने मामले की गहन सुनवाई की। अदालत ने पाया कि: बीमा कंपनी की अपनी सर्वेयर रिपोर्ट में कहीं भी यह दर्ज नहीं था कि टैग के साथ छेड़छाड़ हुई है।
पत्रावली में उपलब्ध दस्तावेजों से प्रमाणित हुआ कि मृत भैंस वही थी जिसका बीमा किया गया था।
बिना किसी पुख्ता सबूत के टैग से छेड़छाड़ का आरोप लगाना गलत है।
अदालत का फैसला
न्यायालय ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह 50,000 रुपये की क्लेम राशि 6% ब्याज के साथ प्रार्थी को अदा करे। इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिली है जो अक्सर तकनीकी आधार पर बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम खारिज किए जाने से परेशान रहते हैं।

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