
जोधपुर। चर्चित साध्वी प्रेम बाईसा मामले में 10 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सकी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जोधपुर पुलिस अब पारंपरिक जांच के साथ-साथ वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा लेने की योजना बना रही है। एसीपी छवि शर्मा ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर संदिग्धों का DNA टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट (झूठ पकड़ने वाली मशीन) भी करवाया जा सकता है37 लोगों के बयान, 40 मोबाइल की सीडीआर खंगाली एसीपी छवि शर्मा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि जांच का दायरा काफी विस्तृत है। अब तक पुलिस 37 लोगों के विस्तृत बयान दर्ज कर चुकी है। तकनीक का सहारा लेते हुए जांच टीम ने 40 मोबाइल फोन की कॉल डिटेल (CDR) खंगाली है, ताकि घटना से पूर्व और बाद के संपर्कों का मिलान किया जा सके।
जांच के घेरे में अस्पताल स्टाफ और सोशल मीडिया हैंडलर
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने पूछताछ के लिए अलग-अलग टीमें बनाई हैं। अब तक की कार्रवाई में निम्नलिखित लोगों से पूछताछ की गई है:

अस्पताल प्रशासन: प्रेक्षा अस्पताल के 6 स्टाफ सदस्य और पूर्व में इलाज करने वाले 3 डॉक्टर।
करीबी रिश्तेदार: साध्वी के कजन, मैनेजर सहित परिवार के 7 सदस्य।
डिजिटल फुटप्रिंट: सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने वाले 4 हैंडलर।
अन्य: आस-पड़ोस के 5 लोग और 6 ऐसे व्यक्ति जिनके यहाँ साध्वी रुकी थीं या जो उनके संपर्क में रहे।
विसरा रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस गुत्थी को सुलझाने में विसरा रिपोर्ट की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा और जांच को एक निश्चित दिशा मिल सकेगी। फिलहाल, पुलिस संदेह के घेरे में आए 5 व्यक्तियों से गहन पूछताछ कर रही है।
“जांच पूरी निष्पक्षता और गंभीरता के साथ की जा रही है। साक्ष्यों के मिलान के लिए हम वैज्ञानिक तरीकों (DNA और पॉलीग्राफ) से भी पीछे नहीं हटेंगे। सच्चाई जल्द ही सामने आएगी।” — छवि शर्मा, एसीपी

