
चंडीगढ़। नगर निगम चंडीगढ़ में जनसमस्याओं के समाधान के लिए सोमवार को आयोजित पहला ‘जनता दरबार’ चर्चा का विषय रहा। मेयर सौरभ जोशी के इस पहले दरबार में जहाँ एक ओर लोगों की उम्मीदें दिखीं, वहीं अव्यवस्था और देरी को लेकर कुछ नाराजगी भी सामने आई। निर्धारित समय से देरी पर पहुंचे मेयर सेक्टर-17 स्थित नगर निगम भवन की पांचवीं मंजिल पर मेयर कार्यालय में जनता दरबार का समय सुबह 11:00 बजे तय किया गया था। लेकिन मेयर सौरभ जोशी निर्धारित समय से 35 मिनट की देरी (11:35 बजे) से पहुंचे। इससे पहले से अपनी बारी का इंतजार कर रहे कई नागरिकों में मायूसी और गुस्सा देखा गया।
समस्याओं से ज्यादा ‘बुके’ का दिखा बोलबाला
हैरानी की बात यह रही कि जनता दरबार में वास्तविक समस्याओं को लेकर आने वाले फरियादियों की संख्या कम रही, जबकि मेयर को बधाई देने और बुके (गुलदस्ते) भेंट करने वाले समर्थकों की भीड़ ज्यादा नजर आई। मेयर पूरे समय लोगों से हाथ जोड़कर मिलते रहे और कार्यालय में ही घूम-घूम कर लोगों से संवाद करते दिखे।

फरियादियों ने उठाई गंभीर समस्याएं
दिखावे और बधाइयों के बीच कुछ गंभीर मुद्दे भी सामने आए:
ई-रिक्शा चालक की व्यथा: एक चालक ने पुलिस द्वारा बार-बार परेशान किए जाने और काम में बाधा डालने की शिकायत की।
पानी की किल्लत: मेयर के अपने वार्ड से आए एक व्यक्ति ने पानी की समस्या का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बार-बार शिकायत के बाद भी विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही: एक अन्य नागरिक ने आरोप लगाया कि अदालती आदेश होने के बावजूद संबंधित अधिकारी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
विकास के लिए 1500 करोड़ की ग्रांट की उम्मीद
जनता दरबार के दौरान मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि वे शहर के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर जमीनी स्तर पर समस्याओं को समझ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि सभी वार्डों में विकास कार्यों को सही गति मिली, तो शहर को 1500 करोड़ रुपये तक की ग्रांट मिलने की प्रबल संभावना है।
सौरभ जोशी चंडीगढ़ के पहले ऐसे मेयर हैं जिन्होंने आधिकारिक तौर पर जनता दरबार की परंपरा शुरू की है। इससे पहले केवल चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ही नियमित रूप से जनता दरबार लगाते रहे हैं।

