सीखने की ललक हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती 50 वर्ष की आयु में पास की दसवीं कक्षा

सीखने की ललक हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती 50 वर्ष की आयु में पास की दसवीं कक्षा

Spread the love !!!
सीखने की ललक हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती 50 वर्ष की आयु में पास की दसवीं कक्षा
सीखने की ललक हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती 50 वर्ष की आयु में पास की दसवीं कक्षा

लूनकरनसर। कहा जाता है कि यदि व्यक्ति के हौसलों में उड़ान हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है। सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को उम्र का मोहताज नहीं होना पड़ता। इसी कहावत को सच कर दिखाया है बीकानेर जिले की लूनकरनसर नगर पालिका निवासी राजेंद्र कुमार चौधरी ने, जिन्होंने 50 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षण संस्थान (NIOS) से दसवीं कक्षा उत्तीर्ण कर समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राजेंद्र कुमार चौधरी ने यह सिद्ध कर दिया कि सीखने और पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। आत्मबल और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की, जो युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

सीखने की ललक हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती 50 वर्ष की आयु में पास की दसवीं कक्षा
सीखने की ललक हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती 50 वर्ष की आयु में पास की दसवीं कक्षा

उल्लेखनीय है कि चौधरी अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए चार संतानों के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। उनकी ज्येष्ठ पुत्री विवाहित हैं, मंझली पुत्री राजकीय महाविद्यालय, तारानगर, चूरु में वनस्पति शास्त्र विषय में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं, अनुज पुत्री प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं तथा उनका इकलौता पुत्र आईटीआई उत्तीर्ण कर निजी क्षेत्र की कंपनी में सेवाएं दे रहा है। अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के बाद, उनसे प्रेरणा लेकर उन्होंने स्वयं अध्ययन प्रारंभ किया और यह संदेश दिया कि उम्र कभी भी सीखने और सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *