जम्मू-कश्मीर के कोकरनाग में ट्रैकिंग, कैंपिंग और हाइकिंग पर रोक

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जम्मू-कश्मीर के कोकरनाग में ट्रैकिंग, कैंपिंग और हाइकिंग पर रोक
जम्मू-कश्मीर के कोकरनाग में ट्रैकिंग, कैंपिंग और हाइकिंग पर रोक

श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में अधिकारियों ने शुक्रवार को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कोकरनाग के ऊंचे इलाकों और जंगलों में ट्रैकिंग, कैंपिंग, हाइकिंग और इसी तरह की बाहरी गतिविधियों पर रोक लगा दी। कोकरनाग एसडीएम की ओर से जारी आदेश में हाल की घटनाओं का जिक्र किया गया, जिसमें कहा गया है कि कुछ लोगों ने देर रात के घंटों में नाका/चेकपॉइंट पार करने की कोशिश की है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा हुई है। यह भी कहा गया कि मार्गन टॉप, चौहर नाग और सिंथन टॉप के इलाकों में बिना रोक-टोक आवाजाही और ट्रैकिंग, कैंपिंग, हाइकिंग और इसी तरह की बाहरी गतिविधियां सार्वजनिक सुरक्षा और संरक्षा पर बुरा असर डाल सकती हैं। आदेश में कहा गया कि मैं प्रिंस कुमार, कोकरनाग सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश देता हूं कि मार्गन टॉप, चौहर नाग और सिंथन टॉप के इलाके में ट्रैकिंग, कैंपिंग, हाइकिंग और सभी दूसरी इसी तरह की आउटडोर एक्टिविटीज़ पर तुरंत असर से रोक लगाई जाती है।

जम्मू-कश्मीर के कोकरनाग में ट्रैकिंग, कैंपिंग और हाइकिंग पर रोक
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एसडीएम की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि लरनू स्टेशन हाउस ऑफिसर इस आदेश को सख्ती से लागू करना सुनिश्चित करेंगे और नाका/चेकपॉइंट पर आवाजाही को रेगुलेट करेंगे। यह भी कहा गया है कि आम जनता को इस आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया जाता है। किसी भी उल्लंघन पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
आदेश में आगे कहा गया है कि यह आदेश जारी होने की तारीख से दो महीने तक लागू रहेगा, जब तक कि इसे पहले वापस न ले लिया जाए या कानून के अनुसार बढ़ाया न जाए।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब जम्मू डिवीजन के पुंछ, राजौरी और किश्तवाड़ जिलों के ऊपरी इलाकों में जॉइंट सुरक्षा बल बड़े पैमाने पर आतंकवाद विरोधी अभियान चला रहे हैं। यह घाटी कोकरनाग इलाके में सिंथन टॉप के जरिए किश्तवाड़ जिले से जुड़ी हुई है।
ये जॉइंट ऑपरेशन आतंकवादियों, उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और हमदर्दों को निशाना बना रहे हैं। इस कोऑर्डिनेटेड तरीके का मकसद सिर्फ बंदूक चलाने वाले आतंकवादियों के पीछे जाने के बजाय आतंकवाद के पूरे सपोर्ट सिस्टम को खत्म करना है।

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