
अमृतसर। पंजाब एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (बॉर्डर रेंज) ने बीएसएफ के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए ड्रोन के जरिए भेजी गई भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की है। पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने इस सफलता की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की और बताया कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई।
ड्रोन ऑपरेशन और बरामदगी का विवरण
डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, इलाके में ड्रोन मूवमेंट की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान संदिग्ध पैकेट बरामद किए गए, जिनमें लगभग 12 किलोग्राम हेरोइन थी। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह खेप सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से भेजी गई थी। हेरोइन की यह खेप स्थानीय नेटवर्क के जरिए आगे सप्लाई की जानी थी।
पुलिस ने बताया कि मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही ड्रोन ऑपरेशन और तस्करी के नेटवर्क से जुड़े आगे और पीछे के लिंक का पता लगाने के लिए तकनीकी सबूत, मोबाइल लोकेशन और मुखबिर की मदद से जांच शुरू कर दी गई है।
ड्रोन आधारित नशीले पदार्थों की तस्करी का खतरा
पंजाब में ड्रोन का उपयोग कर नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ये ड्रोन सीमापार से मादक पदार्थों को भेजकर स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से वितरण करने का काम करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ड्रोन आधारित तस्करी पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक तेज़ और खतरनाक होती है, क्योंकि यह निगरानी और पैट्रोलिंग से बचने के लिए प्रयोग की जाती है।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि ड्रोन आधारित नशीले पदार्थों की तस्करी को रोका जाए और बॉर्डर बेल्ट में सक्रिय ड्रग नेटवर्क को समाप्त किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा।
पिछले मामलों की पृष्ठभूमि
20 दिसंबर को पंजाब की स्टेट स्पेशल ऑपरेशंस सेल (एसएसओसी), एसएएस नगर ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना के भगोड़े जवान राजबीर सिंह उर्फ ‘फौजी’ और उसके साथी को सीमा पार ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के रैकेट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने एक हैंड ग्रेनेड और 500 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि राजबीर सिंह इस साल की शुरुआत में अमृतसर ग्रामीण के पुलिस स्टेशन घरिंडा में दर्ज जासूसी मामले में वांछित था। जांच में यह भी सामने आया कि उसकी भूमिका हरियाणा के सिरसा में एक महिला पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड हमले की साजिश में भी रही थी। इसमें ग्रेनेड की डिलीवरी और हमले के लिए फंडिंग शामिल थी।
पाकिस्तान आधारित तस्करों और आतंकियों से कनेक्शन
एसएसओसी की टीम ने बताया कि राजबीर सिंह और उसके साथी पाकिस्तान आधारित तस्करों और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े थे। ये मॉड्यूल सीमा पार से ड्रग्स और हथियार भेजकर पंजाब में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों की तस्करी ही नहीं करते, बल्कि आतंकवाद और संगठित अपराध में भी सक्रिय रहते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह नेटवर्क ड्रोन, गोपनीय मार्ग और स्थानीय एजेंटों के माध्यम से मादक पदार्थों को पंजाब के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई करता था। यह नेटवर्क सीमा पार से नियंत्रित किया जाता था और इसका उद्देश्य स्थानीय अपराध और अशांति फैलाना था।

पंजाब पुलिस की रणनीति और संयुक्त कार्रवाई
पंजाब पुलिस और बीएसएफ ने इस तस्करी रैकेट को पकड़ने के लिए संयुक्त रणनीति अपनाई। खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस नेटवर्क के सहयोग से इलाके में लगातार निगरानी रखी गई। ड्रोन मूवमेंट की सूचना मिलने के बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और संदिग्ध पैकेट बरामद किए गए।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई केवल एक मादक पदार्थों की खेप को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे नेटवर्क को उजागर करना और भविष्य में होने वाली तस्करी को रोकना है।
तस्करी और ड्रोन तकनीक की चुनौती
ड्रोन आधारित तस्करी आधुनिक समय में मादक पदार्थों के अपराधियों के लिए आसान और सुरक्षित माध्यम बन गई है। ड्रोन की मदद से सीमापार से मादक पदार्थों की खेप भेजी जाती है, जिसे स्थानीय नेटवर्क वितरण के लिए प्राप्त करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पारंपरिक निगरानी तकनीकों से बचने का नया तरीका है।
इसलिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को लगातार तकनीकी प्रशिक्षण और आधुनिक निगरानी उपकरणों के जरिए ड्रोन मूवमेंट पर नजर रखनी पड़ती है। पंजाब पुलिस ने भी अपने ऑपरेशन में ड्रोन और इंटेलिजेंस आधारित रणनीति को अपनाया है, जिससे तस्करी रोकने में सफलता मिल रही है।
तस्करी रैकेट के खिलाफ आगे की कार्रवाई
पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। तकनीकी सबूतों, मोबाइल लोकेशन और मुखबिर की मदद से तस्करी रैकेट के सभी लिंक खोजने का काम चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही सभी सहयोगियों और नेटवर्क को चिन्हित किया जाएगा, पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस की प्राथमिकता है कि सीमा पार ड्रग तस्करी और आतंकवादी मॉड्यूल के नेटवर्क को पूरी तरह नष्ट किया जाए। इसके लिए राज्य की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।
सामाजिक और सुरक्षा दृष्टि
ड्रग्स और हथियारों की तस्करी केवल अपराध का मामला नहीं है। यह राज्य की सुरक्षा और समाज की शांति के लिए भी गंभीर खतरा है। ऐसे नेटवर्क न केवल नशीले पदार्थ सप्लाई करते हैं, बल्कि हिंसा और आतंकवाद फैलाने का काम भी करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों से युवाओं और समाज में ड्रग्स के प्रभाव को कम किया जा सकता है। पंजाब पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त कार्रवाई यह सुनिश्चित करती है कि तस्करी के नेटवर्क को तोड़ा जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
निष्कर्ष
अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी पंजाब पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त सफलता का प्रतीक है। यह कार्रवाई केवल मादक पदार्थों की खेप को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क को उजागर करने और भविष्य में होने वाली तस्करी को रोकने का भी संदेश देती है।
राजबीर सिंह और उसके साथी की गिरफ्तारी, पाकिस्तान आधारित तस्करों और आतंकी मॉड्यूल के साथ उनके संबंधों का खुलासा, और ड्रोन ऑपरेशन की तकनीकी सफलता यह साबित करती है कि पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं।
डीजीपी गौरव यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस ड्रोन आधारित नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने और बॉर्डर बेल्ट में सक्रिय ड्रग नेटवर्क को समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा।
इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि ड्रग तस्करी और आतंकवादी मॉड्यूल के खिलाफ राज्य और केंद्रीय एजेंसियां पूरी तत्परता और तकनीकी दक्षता के साथ काम कर रही हैं, ताकि पंजाब में सुरक्षा और शांति सुनिश्चित की जा सके।

