
यह खबर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर उठाए गए सख्त और प्रभावी कदम से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिया है कि अब राज्य सरकार सड़क सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी। यह निर्णय न केवल सड़क हादसों को रोकने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, बल्कि राज्य में ट्रैफिक अनुशासन को मजबूती से लागू करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की है कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएंगे, जिससे ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी जो अपने साथ-साथ दूसरों की जान को भी खतरे में डालते हैं। यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार अब केवल चालान काटने या जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लाइसेंस रद्द करने जैसे कठोर कदम भी उठाएगी ताकि लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करने से पहले सौ बार सोचें।
साथ ही, ओवरस्पीडिंग करने वालों और बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ भी लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ओवरस्पीडिंग सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक है। अक्सर देखा जाता है कि लोग गति सीमा की अनदेखी करते हैं और सड़क पर अपनी जान के साथ-साथ दूसरों की जान भी जोखिम में डाल देते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न केवल अनुशासन स्थापित करेगी, बल्कि सड़क पर जिम्मेदार ड्राइविंग की संस्कृति को भी बढ़ावा देगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की नीति यातायात नियम तोड़ने वालों के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की होगी। यानी अब कोई भी व्यक्ति अपनी राजनीतिक पहुंच, पद या प्रभाव के बल पर नियमों से बच नहीं पाएगा। यह नीति कानून के समान पालन और न्यायिक दृष्टि से भी एक सशक्त कदम है। “जीरो टॉलरेंस” नीति का अर्थ है कि चाहे अपराधी कोई भी हो, सजा अवश्य मिलेगी। इस प्रकार की सख्त नीति अपनाने से आम जनता में कानून के प्रति विश्वास बढ़ेगा और लोग स्वेच्छा से नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित होंगे।
राज्य में कल से 15 दिवसीय सड़क सुरक्षा अभियान की शुरुआत हो रही है। इस अभियान में पुलिस, परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) मिलकर काम करेंगे। यह संयुक्त प्रयास राज्य में सड़क सुरक्षा को एक जनांदोलन का रूप देने का प्रयास है। अभियान के दौरान सड़क पर गश्त बढ़ाई जाएगी, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी, साथ ही आम नागरिकों को यातायात नियमों और सुरक्षित ड्राइविंग के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।
अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, परिवहन केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की मदद से लोगों को समझाया जाएगा कि सड़क पर छोटी-छोटी लापरवाहियां कितनी बड़ी दुर्घटनाओं में बदल सकती हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट पहनने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने, और शराब पीकर वाहन न चलाने जैसे नियमों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
यह कदम इसलिए भी प्रशंसनीय है क्योंकि राजस्थान में हाल के वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा राजस्थान जैसे राज्यों का होता है। इन हादसों के पीछे मुख्य कारण हैं — ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना, मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइव करना और ट्रैफिक सिग्नलों की अनदेखी करना।मुख्यमंत्री का यह निर्णय इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए लिया गया है। सड़क सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। जब तक लोग स्वयं जागरूक नहीं होंगे, तब तक किसी भी अभियान की सफलता अधूरी रहेगी। इसलिए इस अभियान में जागरूकता को केंद्र में रखा गया है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि कानून का डर और जन-जागरूकता दोनों मिलकर ही सुरक्षित सड़कों का निर्माण कर सकते हैं।

इसके अलावा, सड़क सुरक्षा अभियान का एक और उद्देश्य यह भी है कि राज्य की सड़कों पर बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और संकेत व्यवस्था विकसित की जाए। अक्सर हादसे इसलिए भी होते हैं क्योंकि सड़कों पर उचित संकेतक नहीं होते या सड़कें जर्जर हालत में होती हैं। इस अभियान में पीडब्ल्यूडी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगी कि जहां सड़कें खराब हैं, वहां जल्द मरम्मत हो, और जहां संकेतक या लाइटिंग की कमी है, वहां तुरंत सुधार किया जाए।
इस पूरे अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी गंभीरता और निरंतरता से लागू किया जाता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह कदम न केवल एक प्रशासनिक निर्देश है, बल्कि यह एक नैतिक अपील भी है — कि हर नागरिक अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार बने। यह पहल जनता और सरकार के बीच साझेदारी को मजबूत करेगी।
यदि यह नीति सख्ती से लागू होती है, तो राजस्थान निश्चित रूप से उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां सड़क हादसे न्यूनतम स्तर पर हों। सरकार का यह रुख एक उदाहरण बन सकता है कि कैसे ठोस नीतिगत फैसलों और जनजागरूकता के संयोजन से सामाजिक सुधार लाया जा सकता है।
अंततः, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की यह पहल न केवल सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने का प्रयास है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक सुधार का प्रतीक भी है। यह पहल दर्शाती है कि सरकार जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। यदि जनता और प्रशासन मिलकर इस दिशा में काम करें, तो राजस्थान निश्चित रूप से एक “सुरक्षित यातायात वाला राज्य” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
इसलिए, यह कदम केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक सकारात्मक, दूरदर्शी और सराहनीय प्रयास है जो आने वाले समय में हजारों लोगों की जान बचाने में मदद कर सकता है।

