
बयाना (भरतपुर) –
आगामी 17 सितंबर 2025 से मुंबई और बनारस के बीच चलने वाली दिवाली स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू होने जा रहा है, जिससे देशभर के यात्रियों को त्योहारी सीजन में यात्रा की अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध होगी। हालांकि इस ट्रेन के ठहराव को लेकर बयाना क्षेत्र के यात्रियों और व्यापारिक समुदाय में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इस विशेष ट्रेन को गंगापुर सिटी और भरतपुर जैसे स्टेशनों पर तो ठहराव दिया गया है, लेकिन बयाना जंक्शन जैसे महत्त्वपूर्ण स्टेशन को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है।
इस निर्णय के विरोध में व्यापार संघ बयाना ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के अध्यक्ष जानकी प्रसाद सामरी ने केंद्रीय रेल मंत्री को एक पत्र भेजकर स्पष्ट मांग की है कि दिवाली स्पेशल ट्रेन का ठहराव बयाना जंक्शन पर भी सुनिश्चित किया जाए। पत्र में बताया गया है कि बयाना एक ऐतिहासिक एवं व्यावसायिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्टेशन है, जहाँ से प्रतिदिन हजारों यात्री विभिन्न गंतव्यों के लिए यात्रा करते हैं, विशेषकर मुंबई और बनारस जैसे महानगरों की ओर।
जानकी प्रसाद सामरी ने यह भी स्पष्ट किया कि बयाना जंक्शन का महत्त्व केवल उसके यात्रीभार के कारण नहीं, बल्कि उसके भौगोलिक स्थिति और आसपास के क्षेत्रों की निर्भरता के कारण भी है। बयाना न केवल भरतपुर जिले का एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है, बल्कि यह धौलपुर, करौली, हिण्डौन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों का भी मुख्य सहारा है। ऐसे में दिवाली जैसे महत्त्वपूर्ण त्यौहार के दौरान इस स्टेशन को नज़रअंदाज़ करना न केवल अनुचित है, बल्कि स्थानीय जनता के साथ अन्याय भी है।
व्यापार संघ ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि मुंबई और बनारस की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या बयाना से अत्यधिक है। विशेषकर दिवाली, छठ, और अन्य पर्वों के अवसर पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इस दौरान आम यात्री को आरक्षण मिलने में कठिनाई होती है, और दिवाली स्पेशल ट्रेन ऐसे यात्रियों के लिए राहत का साधन हो सकती थी। लेकिन बयाना में ठहराव न होने से वे इस सुविधा से वंचित हो जाएंगे।
पत्र में बताया गया है कि बयाना जैसे व्यस्त स्टेशन को गंगापुर सिटी और भरतपुर के बीच स्थित होने के बावजूद ठहराव सूची से बाहर रखना रेलवे की नीतियों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जबकि गंगापुर सिटी के बाद ट्रेन सीधे भरतपुर रुकेगी, जिससे बयाना को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। यह स्थिति न केवल यात्रियों के लिए असुविधाजनक है, बल्कि रेलवे की ओर से क्षेत्रीय संतुलन और यात्री सुविधा की उपेक्षा का संकेत भी देती है।
व्यापार संघ के अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रेलवे द्वारा बयाना जंक्शन पर दिवाली स्पेशल ट्रेन के ठहराव की औपचारिक घोषणा नहीं की गई, तो क्षेत्रीय व्यापारी समुदाय व जनता आंदोलन करने को बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि बयाना का व्यापारिक और सामाजिक क्षेत्र लंबे समय से रेलवे से उपेक्षित महसूस कर रहा है। अगर बार-बार की गई माँगों के बावजूद ठहराव नहीं दिया गया, तो इस बार संघर्ष अधिक व्यापक और संगठित होगा।

इस मांग को लेकर न केवल व्यापार संघ, बल्कि स्थानीय जनता, सामाजिक संगठनों, युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने भी एकजुटता दिखाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार त्योहारों पर विशेष ट्रेनों का संचालन होता है, लेकिन बयाना को नजरअंदाज कर दिया जाता है। क्षेत्रीय सांसद और विधायक से भी इस विषय में हस्तक्षेप की मांग की गई है ताकि रेलवे मंत्रालय पर दबाव बनाया जा सके।
व्यापारियों और नागरिकों का तर्क है कि यदि ट्रेन को भरतपुर स्टेशन पर ठहराया जा सकता है, तो उससे पूर्ववर्ती स्टेशन बयाना पर भी 2-5 मिनट का ठहराव देने में कोई तकनीकी या परिचालनिक बाधा नहीं होनी चाहिए। इससे हजारों यात्रियों को लाभ मिलेगा और रेलवे को भी अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही, स्थानीय जनता को यह संदेश भी जाएगा कि रेलवे उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं के प्रति संवेदनशील है।
सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता राकेश शर्मा का कहना है कि यदि बयाना को लगातार इस तरह से उपेक्षित किया जाता रहा तो यह क्षेत्र के विकास में बाधक होगा। उन्होंने कहा कि समय रहते इस पर निर्णय लेना आवश्यक है, अन्यथा जन आंदोलन को टालना कठिन होगा।
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में गंगापुर सिटी या भरतपुर जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है, जिससे अतिरिक्त समय, धन और असुविधा होती है। महिलाएं, बुजुर्ग, और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्री इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
रेलवे विभाग को चाहिए कि वह इस माँग पर गंभीरता से विचार करे और तत्काल प्रभाव से दिवाली स्पेशल ट्रेन का ठहराव बयाना जंक्शन पर घोषित करे। क्योंकि यदि ट्रेन का परिचालन 17 सितंबर से शुरू होना है, तो जनता की सुविधा के लिए समय रहते इस निर्णय को लागू किया जाना आवश्यक है।
बयाना में ट्रेनों के ठहराव को लेकर पहले भी कई बार माँगें उठ चुकी हैं, लेकिन हर बार इसे अनसुना किया गया। अब यह केवल माँग नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्वाभिमान और अधिकार से जुड़ा विषय बन गया है।

