
सदर अस्पताल परिसर में बना अत्याधुनिक यात्री विश्रामालय प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ा, मरीजों के परिजन परेशान
सहरसा जिले के सदर अस्पताल परिसर में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत करीब 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक यात्री विश्रामालय एवं प्रतिक्षालय आम लोगों के लिए अब तक उपयोग में नहीं लाया गया है। इस विश्रामालय का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों को एक उपयुक्त स्थान पर बैठने, विश्राम करने और कुछ समय के लिए सुकून पाने की सुविधा मिल सके। अस्पताल में इलाज के दौरान अक्सर परिजन पूरे दिन भर धूप, बारिश या सर्दी के बीच खुले आसमान के नीचे, दीवारों की छांव में या गलियारों में बैठने को मजबूर होते हैं। ऐसे में इस यात्री प्रतिक्षालय की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण थी, लेकिन विडंबना यह है कि निर्माण पूरा हो जाने के कई महीने बाद भी यह भवन तालाबंद पड़ा हुआ है, और इसका लाभ आज तक किसी को नहीं मिल पाया है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इस अत्याधुनिक यात्री विश्रामालय का निर्माण तो उच्च गुणवत्ता के साथ किया गया है और यह देखने में भी आकर्षक है। इसमें बेंच, रोशनी, पंखे और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और उदासीन रवैये के चलते इसका उद्घाटन तक नहीं किया गया। न तो इसका संचालन किसी एजेंसी को सौंपा गया है, और न ही अस्पताल प्रशासन ने इसे आम जनता के लिए खोलने की जहमत उठाई है। फलस्वरूप, यह भवन बंद दरवाजों के भीतर जर्जरता की ओर बढ़ रहा है, जबकि बाहर मरीजों के परिजन बदहाल अवस्था में फर्श, सीढ़ियों या अस्पताल के कोनों में बैठने को मजबूर हैं।
अस्पताल आने वाले मरीजों के परिजनों का कहना है कि बारिश हो या गर्मी, उन्हें खुले में रहना पड़ता है। न तो पीने के पानी की व्यवस्था है, न ही बैठने की कोई उपयुक्त सुविधा। कई बार बुजुर्ग परिजन या महिलाएं कई घंटे तक इलाज की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करती रहती हैं, लेकिन बैठने के लिए कोई सुरक्षित व स्वच्छ स्थान नहीं होता। ऐसे में जब अस्पताल परिसर में ही विश्रामालय मौजूद हो, तो यह और भी अधिक खटकता है कि इसे चालू क्यों नहीं किया जा रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को कई बार उठाया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही होती नहीं दिखी है। उनके अनुसार, सरकार द्वारा जनहित में करोड़ों रुपये की योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन नीतिगत सुस्ती और अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते आम जनता इन योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाती है। मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत निर्मित यह विश्रामालय इसका जीता-जागता उदाहरण है।
कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते इसे शुरू नहीं किया गया तो यह भवन जल्द ही अतिक्रमण या असामाजिक तत्वों का अड्डा बन सकता है। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ सरकारी योजनाओं के तहत बने भवन उपयोग में न आने के कारण बेकार हो गए, और बाद में उन्हें फिर से मरम्मत या नवनिर्माण के लिए अतिरिक्त बजट खर्च करना पड़ा। ऐसे में जब एक अच्छी गुणवत्ता वाला यात्री प्रतिक्षालय पहले से उपलब्ध है, तो उसे तत्काल चालू किया जाना न केवल प्रशासन की जिम्मेदारी है, बल्कि जनता के प्रति उसका उत्तरदायित्व भी है।

इस विषय में जब अस्पताल प्रशासन से जानकारी ली गई, तो कुछ अधिकारियों ने इस भवन को चालू न कर पाने के पीछे कागजी प्रक्रिया, एजेंसी निर्धारण और फंड आवंटन जैसी तमाम बहानेबाजी की। लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि जब निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और भवन उपयोग के लिए तैयार है, तो महीनों बीत जाने के बाद भी इस पर ताला क्यों लटका हुआ है? क्या प्रशासन को जनता की सुविधाओं से कोई सरोकार नहीं है?
इधर, स्थानीय लोगों में भी इस मुद्दे को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इस यात्री विश्रामालय को आम जनता के लिए नहीं खोला गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि यह भवन जनता के पैसों से बना है और जनता को ही इसका इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ऐसा भवन, जो जनहित में अत्यंत लाभकारी हो सकता है, वह प्रशासनिक अनदेखी के चलते केवल एक शो-पीस बनकर रह गया है।
अंततः यह सवाल प्रशासन के लिए है कि जब एक जनहितैषी परियोजना पर सरकारी पैसा खर्च कर उसे पूर्ण किया गया है, तो फिर उसमें जनता को प्रवेश से क्यों वंचित रखा जा रहा है? क्या योजनाएं सिर्फ निर्माण तक सीमित रह गई हैं? क्या आम जनता की सुविधाएं अब सिर्फ सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह जाएंगी?
इस प्रकार, सहरसा सदर अस्पताल परिसर में बंद पड़े इस अत्याधुनिक यात्री विश्रामालय की स्थिति न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब तक शासन-प्रशासन की नीयत में सेवा का भाव नहीं होगा, तब तक विकास कार्य केवल कागजों पर ही दम तोड़ते रहेंगे। अब जरूरत है कि इस विश्रामालय को अविलंब चालू कर मरीजों के परिजनों को राहत पहुंचाई जाए और मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के उद्देश्य को सार्थक किया जाए।

