
उदयपुर, 5 सितंबर 2025
राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर, जिसे आमतौर पर शांति, सुंदरता और रोमांस की पहचान के रूप में जाना जाता है, शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे की गवाह बनी। झील के किनारे एक युवक की ज़िंदगी उस समय खत्म हो गई, जब वह केवल एक अच्छा पल कैमरे में कैद करने की कोशिश कर रहा था।
घटना दोपहर लगभग 12:30 बजे उदयसागर झील के पास हुई। भल्लों का गुड़ा निवासी गोपी लाल (27) अपने मोबाइल फोन से सेल्फी ले रहा था। कुछ ही सेकंडों में वह क्षण जो उसकी ज़िंदगी की यादगार तस्वीर बनने वाला था, एक त्रासदी में बदल गया। अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण गोपी लाल झील की लहरों में समा गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वह झील के किनारे खड़ा होकर विभिन्न एंगल्स से तस्वीरें ले रहा था। आसपास मौजूद कुछ लोगों ने उसे चेतावनी भी दी, लेकिन शायद तस्वीर की परफेक्शन की तलाश ने उसकी चेतावनी पर ध्यान नहीं देने दिया। और फिर, एक क्षण का असंतुलन उसे झील की गहराई में ले गया — वहाँ से फिर वह कभी वापस नहीं लौटा।
ग्रामीणों और प्रशासन की तत्परता
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। राजस्थान नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। झील के आसपास के ग्रामीणों के सहयोग से लगभग आधे घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। यह एक सांसें थाम देने वाला दृश्य था — चारों ओर शोक का माहौल और लहरों से संघर्ष करती एक टीम, जो गोपी लाल को खोजने में जी-जान से जुटी थी।
करीब 30 मिनट की मेहनत के बाद, गोपी लाल का शव उस स्थान से लगभग 300 मीटर दूर बरामद हुआ। यह क्षण परिवार और ग्रामीणों के लिए बेहद पीड़ादायक था। खुशियों की तलाश में निकला युवक अब शव रूप में लौट रहा था।
पुलिस कार्यवाही और शव का पोस्टमार्टम
घटना की जानकारी मिलते ही प्रतापनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की। मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्राथमिक जांच में किसी भी तरह की साजिश या दुर्घटना के अलावा अन्य कोई कारण सामने नहीं आया है।
रेस्क्यू टीम के नायकों की भूमिका
इस दर्दनाक हादसे के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे नागरिक सुरक्षा विभाग के सदस्यों ने सराहनीय कार्य किया।
- वाहन चालक सुरेश सालवी,
- गोताखोर हितेश सोलंकी,
- महेंद्र सिंह मसानी,
- भवानी शंकर वाल्मीकि,
- सुनील खटीक,
- और बोट ऑपरेटर कैलाश मेनारिया — सभी ने अथक प्रयास कर मृतक को खोजने में अहम भूमिका निभाई।

इन सभी का योगदान यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में यह टीम कैसे तत्परता और साहस के साथ मानवीय जिम्मेदारी निभाती है।
एक परिवार की टूटी दुनिया
इस हादसे ने सिर्फ एक युवक की जान नहीं ली, बल्कि एक परिवार की खुशियां, सपने और उम्मीदें भी झील की लहरों में डूब गईं। जो बेटा, भाई या दोस्त सुबह हँसते हुए घर से निकला था, उसकी मौत की सूचना शाम तक घर पहुंच गई।
परिजनों की हालत बेहद खराब है। मां-बाप सदमे में हैं, और गांव भर में शोक की लहर है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का कहना है कि गोपी लाल एक खुशमिजाज और मददगार युवक था। उसका अचानक इस तरह चले जाना सबके लिए अविश्वसनीय और दुखद है।
एक चेतावनी बनकर रह गया हादसा
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं है — यह एक चेतावनी है। हम सभी को यह समझने की जरूरत है कि ज़िंदगी से खूबसूरत कोई तस्वीर नहीं होती। आधुनिक समय में सेल्फी का जुनून युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है, लेकिन इस जुनून की एक छोटी सी गलती ज़िंदगी को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है।
सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा पहले भी कई बार चेतावनियाँ जारी की जा चुकी हैं कि नदियों, झीलों और ऊंचाई वाले स्थानों पर सेल्फी लेते समय सतर्कता बरतें। लेकिन जब तक समाज स्वयं इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लेता, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।
निष्कर्ष
उदयपुर की यह घटना एक दर्दनाक स्मृति बन गई है। एक हँसता-खेलता युवक अब केवल तस्वीरों और यादों में रह गया है। झील, जो आमतौर पर शांति और सुंदरता की प्रतीक होती है, आज उसकी गहराई में एक अनमोल ज़िंदगी छुपा बैठी है।
समाज को, विशेष रूप से युवाओं को, इस तरह के हादसों से सबक लेना चाहिए। सेल्फी की एक परफेक्ट तस्वीर के लिए अपनी ज़िंदगी को खतरे में डालना किसी भी तरह से समझदारी नहीं है। ज़िंदगी अनमोल है — कृपया इसे बचाएं।

