
लालसोट।
क्षेत्र के श्यामपुर खुर्द और सुरतपुरा गांव इन दिनों लगातार हो रही बारिश के कारण बदहाल सड़कों की समस्या से जूझ रहे हैं। बरसात के चलते सड़कों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। जगह-जगह पानी से भरे बड़े-बड़े गड्ढों ने सड़कों को नाले में तब्दील कर दिया है। न केवल वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, बल्कि पैदल चलना भी दूभर हो गया है। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए भारी परेशानी और जोखिम का कारण बन गई है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही है। कीचड़ भरी सड़कों से गुजरते समय बच्चों के जूते चिपक जाते हैं, और कई बार वे फिसलकर गिर भी जाते हैं। बच्चों के बैग और किताबें तक पानी में गिरकर खराब हो जाती हैं। कुछ अभिभावकों ने तो बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें स्कूल भेजना बंद कर दिया है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि कैसे बुनियादी ढांचे की कमी बच्चों के भविष्य के रास्ते में बाधा बन रही है।
किसानों की मुश्किलें और बढ़ीं
इस गंभीर स्थिति का दूसरा बड़ा असर क्षेत्र के किसानों पर पड़ा है। बारिश के मौसम में जब खेती के लिए काम चरम पर होता है, ऐसे में खेतों तक पहुँचने के लिए सड़कों का जर्जर होना किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। ट्रैक्टर, बैलगाड़ी या किसी अन्य वाहन का खेत तक जाना लगभग असंभव हो गया है। कई किसान ऐसे हैं जो धान, बाजरा, तिल और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और निराई-गुड़ाई जैसे कार्यों को समय पर पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इससे न केवल उनकी मेहनत प्रभावित हो रही है, बल्कि संभावित फसल उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों का कहना है कि सड़कें यदि सही होतीं, तो वे आसानी से खाद, बीज और अन्य कृषि उपकरण खेतों तक ले जा सकते थे। लेकिन वर्तमान हालत में उन्हें कंधे पर बैग उठाकर खेतों तक जाना पड़ रहा है, जिससे समय, श्रम और ऊर्जा की बहुत हानि हो रही है। बारिश का पानी खेतों तक पहुँचाने वाली नालियों में भर गया है, जिससे खेतों की जल निकासी भी बाधित हो रही है।
जनजीवन अस्त-व्यस्त
गांव के दुकानदार, मजदूर, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इस समस्या से त्रस्त हैं। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। दूध, सब्ज़ी और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं अब गांव तक समय पर नहीं पहुँच पा रही हैं। महिलाएं जो घर का राशन खरीदने के लिए आसपास के कस्बों में जाती हैं, उन्हें अब सड़क की हालत देखकर घर से निकलने में डर लगता है। बुजुर्ग और बीमार व्यक्तियों के लिए तो यह स्थिति और भी संकटपूर्ण हो गई है, क्योंकि उन्हें समय पर इलाज तक नहीं मिल पा रहा।

प्रशासन की उदासीनता
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क की स्थिति कोई नई नहीं है। कई सालों से सड़क मरम्मत की माँग की जा रही है। गांव वालों ने ग्राम पंचायत से लेकर तहसील और जिला प्रशासन तक कई बार शिकायतें की हैं। लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने कहा कि जब भी चुनाव आते हैं, तब जनप्रतिनिधि बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता।
ग्राम पंचायत से लेकर लोक निर्माण विभाग तक को दर्जनों बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। कई बार सोशल मीडिया पर भी सड़कों की तस्वीरें साझा की गईं, ताकि संबंधित अधिकारी संज्ञान लें। परंतु नतीजा सिफर ही रहा।
गंभीर खतरे की आशंका
गांव वालों का यह भी कहना है कि अगर सड़कों की स्थिति जल्द नहीं सुधारी गई, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। कई बार बाइक सवार गड्ढों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। बच्चों के फिसलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। बारिश के साथ-साथ यदि और जलभराव हो गया, तो महामारी फैलने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि पानी कई जगहों पर जमा होकर मच्छरों की उत्पत्ति का कारण बन रहा है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीणों की मांग
श्यामपुर खुर्द और सुरतपुरा के ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़कों की मरम्मत और जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। “प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना” और “राज्य सड़क विकास योजना” जैसी योजनाओं के नाम पर प्रचार तो बहुत होता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर सड़कों की मरम्मत शुरू नहीं हुई, तो वे पंचायत कार्यालय और तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे और जनप्रतिनिधियों का घेराव करेंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस बीच प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि सड़कों की मरम्मत के लिए बजट की स्वीकृति प्रक्रिया में है, और जल्द काम शुरू होगा। हालांकि, ग्रामीण इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि उन्हें पहले भी कई बार ऐसे वादे सुनने को मिल चुके हैं, जिन पर कभी अमल नहीं हुआ।
निष्कर्ष
श्यामपुर खुर्द और सुरतपुरा जैसे गांवों की स्थिति यह दर्शाती है कि ग्रामीण भारत में बुनियादी सुविधाओं की कितनी बड़ी कमी है। सड़कों की मरम्मत जैसी आवश्यक सुविधा का अभाव केवल असुविधा ही नहीं, बल्कि कभी-कभी जानलेवा भी हो सकता है। यह राज्य और केंद्र सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वे गांवों में रहने वाले लोगों को भी शहरों जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करें। बच्चों की शिक्षा, किसानों की खेती और आमजन का जीवन तब तक सुरक्षित नहीं हो सकता, जब तक सड़कों जैसी बुनियादी संरचना मजबूत न हो।
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वह इस समस्या का तत्काल समाधान करे, और ग्रामीणों के विश्वास को फिर से बहाल करे। क्योंकि जब सड़कें मजबूत होती हैं, तभी विकास की गति तेज होती है। सड़कों की हालत यदि यही रही, तो विकास के सारे दावे खोखले ही साबित होंगे।

