मुख्तार अंसारी का बेटा उमर अंसारी गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट, अब्बास के साथ रहेगा बंद

मुख्तार अंसारी का बेटा उमर अंसारी गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट, अब्बास के साथ रहेगा बंद

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परिचय:

उत्तर प्रदेश:- की राजनीति और अपराध की दुनिया में अंसारी परिवार एक चर्चित नाम रहा है। मुख्तार अंसारी, जो पूर्व विधायक और कुख्यात माफिया के रूप में जाना जाता है, के दोनों बेटों – अब्बास अंसारी और उमर अंसारी – कानून के शिकंजे में हैं। हाल ही में उमर अंसारी की जेल बदली गई है। उसे गाजीपुर जेल से स्थानांतरित कर कासगंज जेल में भेजा गया है, जहाँ पहले से उसका बड़ा भाई अब्बास अंसारी बंद है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी को एक पुराने मामले में राहत देते हुए दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है। इस रिपोर्ट में हम उमर और अब्बास अंसारी से जुड़े पूरे घटनाक्रम, उनके खिलाफ चल रहे मामलों, कोर्ट की कार्रवाई, और इसके सामाजिक-राजनीतिक असर पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।


उमर अंसारी की जेल तबादला: घटनाक्रम और कारण

उमर अंसारी, जो कि मुख्तार अंसारी का छोटा बेटा है, को 4 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उसने अदालत में फर्जी दस्तावेज दाखिल किए थे। गिरफ्तारी के बाद उसे गाजीपुर जेल में रखा गया था। लेकिन अब उसे वहां से कासगंज जेल शिफ्ट कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शनिवार सुबह 5 बजे एक पुलिस टीम उमर को लेकर कासगंज के लिए रवाना हुई।

कासगंज जेल में पहले से ही उमर का बड़ा भाई अब्बास अंसारी बंद है। ऐसे में अब दोनों भाई एक ही जेल में रहेंगे। सुरक्षा, निगरानी, और लॉ एंड ऑर्डर की दृष्टि से उमर को कासगंज स्थानांतरित करना प्रशासन की रणनीतिक योजना का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस शिफ्टिंग के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है।


अब्बास अंसारी को मिली हाईकोर्ट से राहत

इस घटनाक्रम की दिलचस्प बात यह है कि उमर अंसारी की जेल तबादला ठीक उसी सप्ताह हुआ, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसके बड़े भाई अब्बास अंसारी के खिलाफ चल रहे एक गंभीर मामले में दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया।

यह मामला 3 मार्च 2022 का है, जब मऊ सदर से विधानसभा चुनाव लड़ते समय अब्बास अंसारी ने एक जनसभा में सरकारी अधिकारियों को लेकर कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था। उनके इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर गंगाराम बिंद की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।

मऊ की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में 31 मई 2025 को अब्बास को दो साल की सजा सुनाई थी और ₹2000 का जुर्माना भी लगाया था। उनके चुनाव एजेंट मंसूर को छह महीने की कैद और ₹2000 का जुर्माना लगाया गया, जबकि उनके छोटे भाई उमर को इस मामले में बरी कर दिया गया था।

हालांकि, 20 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अब्बास को दोषमुक्त करार दिया। इससे उनकी विधानसभा सदस्यता बहाल होने का रास्ता साफ हो गया है, जो सजा के चलते खतरे में आ गई थी।


मुख्तार अंसारी का बेटा उमर अंसारी गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट, अब्बास के साथ रहेगा बंद
मुख्तार अंसारी का बेटा उमर अंसारी गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट, अब्बास के साथ रहेगा बंद

राजनीतिक निहितार्थ और अंसारी परिवार की पृष्ठभूमि

मुख्तार अंसारी एक समय में पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ताकतवर चेहरा रहे हैं। मऊ, गाजीपुर और आसपास के जिलों में उनका प्रभाव अभी भी बना हुआ है। उन्होंने पांच बार विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व किया और मऊ सदर सीट से वे लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। हालांकि, उन पर संगठित अपराध, जबरन वसूली, हत्या, अपहरण जैसे कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वर्तमान में वे आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।

मुख्तार अंसारी के दोनों बेटे – अब्बास और उमर – भी राजनीति में कदम रख चुके हैं। अब्बास ने वर्ष 2022 में मऊ सदर सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के टिकट पर चुनाव लड़ा और विजयी हुआ। उमर ने अब तक सक्रिय राजनीति में अपनी उपस्थिति बहुत प्रमुखता से दर्ज नहीं कराई, लेकिन हाल की घटनाएं उसे लगातार सुर्खियों में ला रही हैं।

अब्बास पर कई गंभीर आरोप हैं, जिनमें आचार संहिता उल्लंघन, भड़काऊ भाषण, और अपराधियों से संबंध जैसे मामले शामिल हैं। वहीं उमर पर अदालत में झूठे दस्तावेज जमा करने जैसे आरोप हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के तहत गंभीर माने जाते हैं।


अदालती प्रक्रिया में तेजी और सख्त प्रशासनिक कदम

उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन ने अंसारी परिवार के खिलाफ हाल के वर्षों में लगातार सख्त कार्रवाई की है। मुख्तार अंसारी की जेल शिफ्टिंग से लेकर उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने तक, सरकार ने ‘माफिया मुक्त प्रदेश’ की नीति के तहत कार्रवाई की है।

अब्बास और उमर अंसारी के खिलाफ दर्ज मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषसिद्धि (हालांकि अब्बास की बाद में रद्द हो गई) प्रशासन के गंभीर रुख को दर्शाती है। उमर का जेल तबादला भी इसी नीति की एक कड़ी माना जा रहा है, जिससे उसकी गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखी जा सके और बाहरी संपर्क सीमित किया जा सके।


सामाजिक और विधिक पहलू

अंसारी परिवार पर दर्ज मामलों को सिर्फ राजनीतिक या आपराधिक नज़रिए से नहीं, बल्कि सामाजिक और विधिक दृष्टिकोण से भी देखना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और राजनीतिक अखाड़े में कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां नेता आपराधिक पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसे में जब अदालतें सख्ती दिखाती हैं और सजा सुनाती हैं, तो यह न्याय प्रणाली में आम जनता के विश्वास को मजबूत करता है।

हालांकि, जब हाईकोर्ट जैसे उच्च न्यायालय दोषसिद्धि को निरस्त करता है, तो यह भी स्पष्ट करता है कि न्याय प्रणाली निष्पक्ष है और यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ है, तो उसे सुधारने की व्यवस्था मौजूद है। अब्बास अंसारी को मिली राहत इस बात का संकेत है कि अंतिम फैसला साक्ष्यों और कानून की प्रक्रिया के आधार पर ही होता है।


जनता और मीडिया की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में मीडिया और जनता की भूमिका भी अहम रही है। भड़काऊ भाषण का वीडियो वायरल होना, जनता में इसे लेकर चर्चा, और मीडिया द्वारा निरंतर रिपोर्टिंग ने प्रशासन को कार्रवाई करने के लिए बाध्य किया। यह लोकतंत्र की शक्ति को भी दर्शाता है, जहाँ एक आम नागरिक की आवाज और एक वायरल वीडियो भी प्रभावशाली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का कारण बन सकता है।


निष्कर्ष:

उमर अंसारी का जेल स्थानांतरण और अब्बास अंसारी को कोर्ट से मिली राहत, दोनों घटनाएँ उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, राजनीति, और न्याय प्रणाली के जटिल ताने-बाने को उजागर करती हैं। अंसारी परिवार, जो एक समय में पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति का मजबूत स्तंभ था, अब न्यायिक जांच और सजा प्रक्रिया से गुजर रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि अपराध और राजनीति का गठजोड़ अब पहले की तरह सहज और स्वीकार्य नहीं रहा।

वर्तमान सरकार द्वारा माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों और न्यायालयों की सक्रियता ने राज्य में एक नया संदेश देने का कार्य किया है – कि चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं। अंसारी परिवार का भविष्य अब पूरी तरह अदालतों के फैसलों और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करता है।

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