उदयपुर में अमेरिकी नागरिकों से ठगी का बड़ा खुलासा: फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोन देने का झांसा, 5 गिरफ्तार

उदयपुर में अमेरिकी नागरिकों से ठगी का बड़ा खुलासा: फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोन देने का झांसा, 5 गिरफ्तार

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उदयपुर,

जिसे झीलों की नगरी के रूप में जाना जाता है, हाल ही में एक बड़े साइबर फ्रॉड मामले के कारण सुर्खियों में आया है। हिरणमगरी क्षेत्र में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस द्वारा भंडाफोड़ किया गया है, जो अमेरिकी नागरिकों को सस्ते लोन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी कर रहा था। इस मामले में उदयपुर पुलिस की सतर्कता, तकनीकी सहायता और सक्रियता की जितनी सराहना की जाए, कम है। पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान अहमदाबाद, गुजरात से संबंधित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मौके से महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं। यह मामला ना केवल साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय नागरिकों को भी ऐसे गिरोह निशाना बना रहे हैं।

ऑपरेशन का नेतृत्व और टीम गठन:

पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल के निर्देशानुसार इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इस विशेष कार्रवाई की निगरानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा और डीएसपी छगन पुरोहित द्वारा की गई, जबकि थाना अधिकारी भरत योगी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम ने तकनीकी जांच और आसूचना (इंटेलिजेंस) के सहयोग से हिरणमगरी के सेक्टर 3 स्थित कृष्णांगन अपार्टमेंट में संचालित फर्जी कॉल सेंटर की पहचान की।

छापेमारी और बरामदगी:

पुलिस टीम द्वारा की गई छापेमारी में कॉल सेंटर से कुल 6 लैपटॉप, 10 मोबाइल फोन, 5 हेडफोन और एक नेट राउटर जब्त किया गया। ये सभी उपकरण अपराध के संचालन में उपयोग किए जा रहे थे। इनसे प्राप्त डेटा की जांच जारी है, जिससे अन्य संभावित पीड़ितों और सहयोगियों की पहचान की जा सके।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी पहचान:

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सभी गुजरात, अहमदाबाद से ताल्लुक रखते हैं। इनमें शामिल हैं:

  1. कुलदीप पटेल, पुत्र मनोज भाई पटेल (34 वर्ष)
  2. सुरज सिंह तोमर, पुत्र महेन्द्र सिंह (25 वर्ष)
  3. आसु राजपूत, पुत्र राजेन्द्र सिंह (21 वर्ष)
  4. आनंद डेगामडिया, पुत्र वीठल भाई (33 वर्ष)
  5. अर्चित पाण्डेय, पुत्र ईतेन्द्र बाबु (32 वर्ष)

इन सभी को हिरणमगरी पुलिस थाने में हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।

धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi):

इस गिरोह द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली अत्यंत शातिराना थी। ये आरोपी अमेरिकी नागरिकों को “वेयर एप्लिकेशन” के माध्यम से निशाना बनाते थे, जो अमेरिकी नागरिकों के मोबाइल नंबरों की जानकारी इन फर्जी कॉल सेंटर संचालकों को उपलब्ध कराता था। इसके बाद आरोपी उन नागरिकों को कॉल कर खुद को लोन एजेंट या बैंक प्रतिनिधि बताकर उन्हें यह भरोसा दिलाते कि उनका कम क्रेडिट स्कोर होने के बावजूद उन्हें आसान शर्तों पर लोन मिल सकता है – वह भी बिना किसी वैध दस्तावेज के।

जब अमेरिकी नागरिक इस “ऑफर” में रुचि दिखाते, तो आरोपी उनसे प्रोसेसिंग फीस, दस्तावेज सत्यापन शुल्क, और बीमा के नाम पर डॉलर में राशि मांगते थे। चूंकि अमेरिका में लोन संबंधी प्रक्रियाएं जटिल होती हैं और कई लोग तेज़ लोन की तलाश में रहते हैं, इस कारण कई पीड़ित इनके झांसे में आ जाते थे।

उदयपुर में अमेरिकी नागरिकों से ठगी का बड़ा खुलासा: फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोन देने का झांसा, 5 गिरफ्तार
उदयपुर में अमेरिकी नागरिकों से ठगी का बड़ा खुलासा: फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोन देने का झांसा, 5 गिरफ्तार

तकनीकी और सुरक्षा खामियों का लाभ:

यह गिरोह तकनीकी खामियों का बखूबी लाभ उठा रहा था। इंटरनेट कॉलिंग एप्लिकेशन्स (जैसे VoIP) और फर्जी ईमेल आईडी का उपयोग कर वे अपनी पहचान छिपा कर संचार करते थे। साथ ही, वे प्रॉक्सी सर्वर और VPN का भी इस्तेमाल कर रहे थे ताकि उनका लोकेशन और आईडेंटिटी ट्रेस न हो सके। इस पूरी योजना में तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग यह दर्शाता है कि यह कोई छोटा-मोटा फ्रॉड नहीं था, बल्कि एक संगठित अपराध था।

जांच और आगे की कार्रवाई:

फिलहाल, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान इस बात की भी जांच की जा रही है कि इनके तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े हुए हैं या नहीं। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि यह गिरोह कब से सक्रिय था और अब तक कितने लोगों को धोखा दे चुका है। साथ ही, जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि इसमें मौजूद डेटा से और सुराग मिल सकें।

विशेष भूमिका:

इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल राजेंद्र सिंह और राजकुमार जाखड़ की भूमिका उल्लेखनीय रही। इन्होंने तकनीकी और खुफिया जानकारी एकत्र कर इस ऑपरेशन की सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रभाव और चिंताएं:

यह घटना दर्शाती है कि भारत में बैठे साइबर अपराधी अब वैश्विक नागरिकों को भी निशाना बना रहे हैं। इससे भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हो सकती है। इसके अतिरिक्त, यह साइबर सुरक्षा के बढ़ते खतरे की ओर भी संकेत करता है, जहां न केवल आम नागरिक बल्कि विदेशी नागरिक भी ठगी का शिकार हो रहे हैं। इस प्रकार की घटनाएं भारत की डिजिटल इंडिया पहल के लिए भी एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती हैं।

निष्कर्ष:

उदयपुर पुलिस द्वारा किया गया यह ऑपरेशन न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि अन्य राज्यों की पुलिस के लिए एक उदाहरण भी है कि कैसे तकनीकी और इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन से साइबर अपराधों को रोका जा सकता है। इस प्रकार के संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि देश और विदेश के नागरिकों का भरोसा कानून व्यवस्था पर बना रहे।

इस केस से यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध अब सीमाओं से परे जा चुके हैं, और इनसे निपटने के लिए पुलिस, साइबर सेल और सुरक्षा एजेंसियों को तकनीकी रूप से अत्यधिक सक्षम होना होगा। अंततः, आम नागरिकों को भी सजग रहने की आवश्यकता है कि वे किसी भी प्रकार के ऑनलाइन लुभावने प्रस्तावों के प्रति सचेत रहें और बिना जांच किए किसी अनजान स्रोत को पैसे न भेजें।

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