भरतपुर में प्रीडीएलएड परीक्षा में धोखाधड़ी का खुलासा, डमी अभ्यर्थी गिरफ्तार

भरतपुर में प्रीडीएलएड परीक्षा में धोखाधड़ी का खुलासा, डमी अभ्यर्थी गिरफ्तार

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भरतपुर: प्री-डीएलएड परीक्षा में डमी अभ्यर्थी पकड़ा गया, पुलिस ने किया गिरफ्तार

भरतपुर जिले में आयोजित प्री-डीएलएड (Pre-D.El.Ed) परीक्षा में बड़ी धांधली का खुलासा हुआ है, जहां पुलिस ने एक डमी अभ्यर्थी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जिले के पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद के निर्देशन में की गई, जिन्होंने परीक्षा की पारदर्शिता को प्रभावित करने वाले इस आपराधिक कृत्य को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच के आदेश दिए। इस मामले में आरोपी अनिल कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जो परीक्षा में पार्थ नामक अभ्यर्थी की जगह बैठा था। इस प्रकरण ने शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


1. घटना का विवरण: परीक्षा में हुई धोखाधड़ी

घटना 1 जून, 2025 की है, जब भरतपुर शहर के रंजीत नगर स्थित आदर्श विद्या मंदिर परीक्षा केंद्र पर प्री-डीएलएड परीक्षा का आयोजन हो रहा था। इसी दौरान परीक्षा केंद्र पर मौजूद निगरानी टीम को एक अभ्यर्थी की गतिविधियों पर संदेह हुआ। जब उसकी पहचान पत्रों की जांच की गई, तो यह स्पष्ट हो गया कि वह व्यक्ति मूल अभ्यर्थी नहीं था, बल्कि डमी (फर्जी) अभ्यर्थी बनकर परीक्षा दे रहा था।

इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए परीक्षा केंद्र प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अनिल कुमार बताया, जो धौलपुर जिले के अतरौली गांव का निवासी है। वह पार्थ नामक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने आया था। इस गंभीर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई और इसे एक अपराध की श्रेणी में दर्ज करते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।


2. पुलिस कार्रवाई और प्रारंभिक जांच

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद ने तत्काल प्रभाव से जांच शुरू करने के आदेश दिए। सबसे पहले इस मामले में धौलपुर के निहालगंज थाने में एक जीरो नंबर एफआईआर दर्ज की गई, जिसे बाद में कार्यक्षेत्र के अनुसार भरतपुर के कोतवाली थाने में स्थानांतरित कर दिया गया।

पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतीश यादव के सुपरविजन में एक विशेष जांच टीम का गठन किया। इस टीम में थानाधिकारी विनोद कुमार, और कांस्टेबल विवेंद्र सिंह, जगदी सिंह और प्रकाश चंद को शामिल किया गया, जिन्होंने तकनीकी सहायता और कागजी साक्ष्य के माध्यम से तेजी से जांच को आगे बढ़ाया। पूछताछ के दौरान अनिल कुमार (26) ने स्वीकार किया कि उसने पार्थ की जगह पैसे लेकर परीक्षा दी थी। यह कबूलनामा जांच टीम के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हुआ, जिससे पूरे गिरोह के तार जोड़ने की प्रक्रिया तेज की गई।


3. आरोपी की पहचान और गिरोह की संभावित भूमिका

गिरफ्तार हुआ आरोपी अनिल कुमार, शिक्षा से जुड़ा कोई पेशेवर नहीं है, बल्कि वह धौलपुर जिले के अतरौली गांव का रहने वाला है और इससे पहले भी कई बार परीक्षा में दूसरों की जगह बैठने की कोशिश कर चुका है। पुलिस को संदेह है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है जो पैसों के बदले डमी कैंडिडेट्स को परीक्षा में बैठाने का काम करता है।

पुलिस अब इस मामले में मूल अभ्यर्थी पार्थ की तलाश कर रही है, जो संभवतः इस पूरे फर्जीवाड़े का सूत्रधार हो सकता है। यदि पार्थ और अनिल कुमार के बीच किसी तरह का लेन-देन हुआ है, तो यह पूरी तरह से एक संगठित आपराधिक गिरोह की तरफ इशारा करता है, जो शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार फैलाने में लिप्त है। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि परीक्षा केंद्र के किसी कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं थी, क्योंकि इस तरह की घटनाएं बिना अंदरूनी सहयोग के संभव नहीं होतीं।


4. शिक्षा प्रणाली पर सवाल और आगे की कार्रवाई

यह घटना केवल एक परीक्षा धोखाधड़ी नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्री-डीएलएड परीक्षा, जो कि शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए आयोजित की जाती है, उसमें इस तरह की गड़बड़ी आने वाले समय में शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। यदि कोई अभ्यर्थी खुद परीक्षा देने की क्षमता नहीं रखता और दूसरों के सहारे से शिक्षक बनने की कोशिश कर रहा है, तो यह बच्चों के भविष्य के साथ धोखा है।

भरतपुर पुलिस अब इस पूरे मामले को संदेह की दृष्टि से जाँचते हुए और भी संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश कर रही है। साइबर फॉरेंसिक की मदद से पार्थ के मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और परीक्षा फॉर्म में किए गए किसी भी तरह के बदलाव की जांच की जा रही है। साथ ही अनिल कुमार के पुराने रिकार्ड्स की भी छानबीन की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि वह पहले भी इस तरह की किसी गतिविधि में लिप्त रहा है या नहीं।

इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को मिलकर काम करने की जरूरत है। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, लाइव फोटो कैमरा, QR कोड आधारित पहचान पत्र और सीसीटीवी निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को अनिवार्य करना समय की मांग बन गई है। प्रशासन और पुलिस की सजगता ने इस मामले को समय रहते पकड़ लिया, परंतु भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना होगा।


निष्कर्ष:
भरतपुर में हुई यह घटना न केवल शैक्षणिक धोखाधड़ी का एक ज्वलंत उदाहरण है, बल्कि यह इस बात की चेतावनी भी है कि यदि शिक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार और सुरक्षा उपायों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इससे भविष्य में और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। पुलिस की तत्परता और टीमवर्क की वजह से एक बड़ा फर्जीवाड़ा समय रहते पकड़ लिया गया, परंतु यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे लोग दोबारा इस तरह की हरकत न कर सकें। इस दिशा में प्रशासन, शिक्षा विभाग और सुरक्षा एजेंसियों को मिलकर ठोस रणनीति बनानी होगी।

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