हरियाणा : कैथल में रोडवेज बस और पिकअप की टक्कर, चार की मौत

हरियाणा : कैथल में रोडवेज बस और पिकअप की टक्कर, चार की मौत

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हरियाणा : कैथल में रोडवेज बस और पिकअप की टक्कर, चार की मौत
हरियाणा : कैथल में रोडवेज बस और पिकअप की टक्कर, चार की मौत

हरियाणा में सड़क हादसों का कहर: कैथल और बहादुरगढ़ में दर्दनाक दुर्घटनाएं, 8 की मौत, दर्जनों घायल

हरियाणा:- में सड़क हादसे लगातार गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। राज्य में तेज रफ्तार, लापरवाही और भारी वाहनों की टक्कर के कारण जानमाल का बड़ा नुकसान सामने आ रहा है। ताजा घटनाओं में सोमवार को कैथल जिले में और बीते बुधवार को बहादुरगढ़ में दो भीषण सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें कुल मिलाकर 8 लोगों की मौत हो गई जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। ये हादसे न केवल सिस्टम की विफलता की ओर इशारा करते हैं बल्कि सड़क सुरक्षा की जमीनी हकीकत को भी उजागर करते हैं।

कैथल: धार्मिक यात्रा के दौरान हादसा, 4 की मौत

हरियाणा के कैथल जिले में सोमवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया। यह हादसा नेशनल हाइवे-152 पर क्योड़क गांव के पास हुआ, जहां हरियाणा रोडवेज की बस और एक पिकअप वाहन की आमने-सामने की टक्कर हो गई। पिकअप में सवार सात लोग पिहोवा स्थित एक गुरुद्वारे में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठे लोगों के बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं रहा।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन अफसोस की बात है कि चार लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई। अन्य तीन घायल गंभीर रूप से जूझ रहे हैं और उनका इलाज जारी है। इस हादसे के बाद इलाके में दहशत और शोक का माहौल है, क्योंकि मृतक आपस में रिश्तेदार थे और एक धार्मिक यात्रा पर निकले थे।

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने तेज रफ्तार और वाहन चालकों की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण बताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग अत्यधिक व्यस्त रहता है और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इसके अलावा, भारी वाहन अक्सर तेज गति से चलते हैं जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। इस दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या पर्याप्त सावधानियां बरती जा रही हैं या नहीं।

बहादुरगढ़: मजदूरों से भरी पिकअप में भीषण टक्कर, 4 प्रवासी मजदूरों की मौत

कैथल हादसे से पहले, बुधवार को बहादुरगढ़ में भी एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ था। यह हादसा कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे पर हुआ, जहां एक तेज रफ्तार कैंटर ने मजदूरों से भरी पिकअप गाड़ी को जबरदस्त टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि पिकअप का पिछला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और कैंटर के भी आगे के शीशे टूटकर बिखर गए।

हादसे में चार प्रवासी मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 33 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मरने वालों में एक महिला और तीन पुरुष शामिल थे। पिकअप में कुल 37 मजदूर सवार थे, जो उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के अमन नगर और सीतापुर से हरियाणा के महेंद्रगढ़ के घोड़ाकैमला गांव फसल कटाई के लिए जा रहे थे। यह प्रवासी मजदूर खेतों में काम करने के लिए लंबी दूरी तय कर सड़क मार्ग से पहुंचे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें बीच रास्ते में ही मौत मिल गई।

घटना के तुरंत बाद राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया और सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई मजदूरों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें उच्च चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है। हादसे के बाद प्रवासी समुदाय में भारी गुस्सा और शोक व्याप्त है। मजदूरों के परिजनों को जैसे ही यह खबर मिली, वे बदहवास होकर अस्पतालों की ओर दौड़ पड़े।

हरियाणा : कैथल में रोडवेज बस और पिकअप की टक्कर, चार की मौत
हरियाणा : कैथल में रोडवेज बस और पिकअप की टक्कर, चार की मौत

दोनों हादसों में उभरे सवाल और सिस्टम की विफलता

इन दोनों सड़क हादसों ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या देश में सड़क सुरक्षा सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित है? कैथल और बहादुरगढ़ की घटनाओं में जो बातें सामने आईं हैं, वे संकेत देती हैं कि तेज रफ्तार, लापरवाही, ओवरलोडिंग और अधूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं ही नहीं, बल्कि सिस्टम की उदासीनता भी इन हादसों का कारण है।

कैथल हादसे में जहां धार्मिक भावनाओं से जुड़ी यात्रा त्रासदी में बदल गई, वहीं बहादुरगढ़ हादसे ने प्रवासी श्रमिकों की असुरक्षा और जोखिमभरी यात्रा की हकीकत उजागर कर दी। सड़कें तो बन गईं लेकिन उन पर चलने वालों की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय अब भी नदारद हैं। न तो भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण है और न ही ओवरलोडिंग या फिजिकल फिटनेस की जांच नियमित होती है।

आए दिन होने वाली इन घटनाओं के बावजूद सरकारी स्तर पर सजगता का अभाव दिखता है। कैथल और बहादुरगढ़ पुलिस दोनों ही मामलों की जांच में जुटी है, लेकिन यह जांच तब तक अधूरी रहेगी जब तक ऐसे हादसों को रोकने के लिए स्थायी समाधान नहीं ढूंढा जाता।

मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

दोनों हादसों के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैथल में मारे गए लोग स्थानीय समुदाय से थे, जिनकी सामाजिक पहचान थी और उनकी धार्मिक यात्रा के लिए पूरा गांव उत्साहित था। बहादुरगढ़ हादसे में मारे गए प्रवासी मजदूर गरीब परिवारों से थे, जो रोज़ी-रोटी के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर हरियाणा आए थे। दोनों ही घटनाओं में समाज के कमजोर वर्ग प्रभावित हुए हैं, जिनके लिए एक जीवन ही सब कुछ था।

प्रशासन की कार्रवाई और आगे की चुनौतियां

प्रशासन ने इन घटनाओं के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल ये है कि क्या यह कार्रवाई भविष्य में हादसों को रोक सकेगी? क्या सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता मिलेगी या ये हादसे भी अन्य हादसों की तरह सिर्फ आंकड़ों में दर्ज रह जाएंगे?

जरूरत इस बात की है कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सड़क सुरक्षा नीति को न केवल लागू करें, बल्कि स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को भी संसाधनों से सुसज्जित करें। इसके साथ ही, वाहन चालकों के लिए नियमित प्रशिक्षण, CCTV निगरानी, रफ्तार पर सख्त नियंत्रण, और ओवरलोडिंग के विरुद्ध अभियान चलाने की जरूरत है।

निष्कर्ष

हरियाणा के कैथल और बहादुरगढ़ में हुए सड़क हादसे केवल दो घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक गहरी चिंता की पुकार हैं। यह वक्त है जब सरकार, प्रशासन, ट्रांसपोर्ट विभाग और आम नागरिक मिलकर यह तय करें कि अब और जानें सड़क पर न जाएं। अगर अब भी हम नहीं जागे, तो अगला हादसा किसी और की नहीं, हमारे अपनों की भी जान ले सकता है।

सरकार को चाहिए कि मृतकों के परिवारों को मुआवजा दे, घायलों का मुफ्त इलाज कराए और साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जाए। सड़कें जीवन का माध्यम होनी चाहिए, मौत का कारण नहीं।

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