
भरतपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या 3 की पीठासीन अधिकारी रेखा बाधवा ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हत्या के आरोपी टीटू उर्फ रामसरन को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों में विरोधाभास को देखते हुए आरोपी को संदेह कायह मामला 12 और 13 अगस्त 2022 की दरम्यानी रात का है, जब बराखुर निवासी अमरसिंह के साथ मारपीट की घटना हुई थी, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई थी। इस संबंध में मृतक की पत्नी सावित्री और पुत्री संजू (जो स्वयं पुलिस विभाग में कार्यरत हैं) ने थाना चिकसाना में टीटू उर्फ रामसरन सहित करीब सात व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR संख्या 361/2022) दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ धारा 302, 450 और 506 IPC के तहत आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। बचाव पक्ष के वकील यशवन्त सिंह फौजदार ने दलील दी कि मृतक का पुत्र नैमसिंह, जो राजस्थान पुलिस में तैनात है, घटना के समय ड्यूटी पर था, लेकिन उसने पुलिस में होने का फायदा उठाकर न्यायालय में झूठी गवाही दी कि वह घटना के वक्त घर पर मौजूद था।

न्यायालय ने पाया कि परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा भी आरोपी के विरुद्ध मनगढ़ंत साक्ष्य पेश किए गए थे।
इसके अलावा, न्यायालय ने 27 जनवरी 2026 को ही पुलिस को फटकार लगाई थी क्योंकि SHO चिकसाना द्वारा मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य जैसे सी.डी.आर. (CDR), कैफ आई.डी. और लोकेशन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई थी। इस लापरवाही पर न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक, भरतपुर को उचित कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे।
मामले की अंतिम सुनवाई पूर्ण होने पर अदालत ने माना कि पुलिस और परिवादी पक्ष हत्या के आरोपों को सिद्ध करने में विफल रहे हैं। आरोपी की ओर से अधिवक्ता यशवन्त सिंह फौजदार ने पैरवी की, जबकि परिवादी पक्ष की ओर से लोक अभियोजक धर्मेन्द्र सिंह और अधिवक्ता जमुना प्रसाद उपस्थित रहे।

