
उदयपुर: चार दिन में सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा, छह आरोपी गिरफ्तार, एक सरकारी शिक्षक भी शामिल
उदयपुर जिले में पुलिस ने एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करते हुए महज चार दिनों के भीतर छह आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें एक सरकारी शिक्षक भी शामिल है। यह हत्या एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी, जिसमें आरोपियों ने मिलकर निर्दयता की सारी हदें पार कर दीं। मृतक नवीन भगोरा की नृशंस हत्या ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। इस घटना से जहां एक ओर गांव में दहशत का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर पुलिस की तत्परता और रणनीतिक जांच के चलते लोगों में सुरक्षा को लेकर विश्वास भी जगा।
यह जघन्य हत्या 12 अगस्त 2025 की रात को हुई, जब नवीन भगोरा अपने एक दोस्त के साथ गाड़ी से घर लौट रहा था। जैसे ही उनकी गाड़ी मालीफला पंचायत स्थित पुल के पास पहुंची, अचानक से 10 से 15 हथियारबंद बदमाशों ने गाड़ी को रोका और नवीन को जबरन बाहर खींच लिया। इसके बाद आरोपियों ने कुल्हाड़ियों, लोहे की रॉड और लाठियों से उस पर अंधाधुंध हमला कर दिया। इतनी बर्बरता से पिटाई की गई कि मौके पर ही नवीन की मौत हो गई। यह वारदात पूरी तरह से पूर्व नियोजित थी, और हमलावर नवीन की हर गतिविधि पर पहले से नजर रख रहे थे।
इस निर्मम हत्या की रिपोर्ट मृतक के भाई सोमेश्वर भगोरा द्वारा स्थानीय पाटिया थाने में दर्ज कराई गई। प्राथमिकी में उन्होंने बताया कि उनके भाई को जानबूझकर घेरकर मारा गया है और यह कोई अचानक हुआ अपराध नहीं है, बल्कि इसका संबंध किसी पुरानी रंजिश से है। पुलिस ने भी जांच के शुरुआती दौर में इसे एक सामान्य हत्या नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित साजिश मानकर तहकीकात शुरू की।
जांच के दौरान यह सामने आया कि नवीन और सभी आरोपी एक ही गांव के निवासी थे और एक समय पर आपस में अच्छे दोस्त हुआ करते थे। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में इनके बीच आपसी तनाव और मनमुटाव इतना बढ़ गया कि यह रंजिश एक घातक हिंसा में बदल गई। पुलिस को शुरुआती पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने नवीन से बदला लेने की ठान रखी थी और इसी उद्देश्य से वे लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। जब उन्हें सही मौका मिला, तब उन्होंने नवीन को घात लगाकर मौत के घाट उतार दिया।

घटना की भयावहता और गंभीरता को देखते हुए उदयपुर के पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने बिना देर किए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। इस टीम को अत्याधुनिक तकनीक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, सीसीटीवी फुटेज और गुप्त सूचनाओं के आधार पर जांच का जिम्मा सौंपा गया। टीम ने अत्यंत सूझबूझ और तत्परता से काम करते हुए, वारदात के महज चार दिन के भीतर ही सभी छह आरोपियों को खडकाया के जंगलों से गिरफ्तार कर लिया। यह क्षेत्र अत्यधिक दुर्गम और पहाड़ी है, जहां छिपकर रहना आसान था, लेकिन पुलिस की रणनीतिक घेराबंदी और खुफिया जानकारी के चलते आरोपी ज्यादा दिन तक बच नहीं पाए।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान बालकृष्ण, शैलेश कुमार, ब्रजेश, लाल धर्मेंद्र कुमार, गणेशलाल और जहेश के रूप में की गई है। इनमें से जहेश पेशे से एक सरकारी शिक्षक है, जो कि समाज में एक आदर्श व्यक्तित्व माने जाने वाले वर्ग से आता है। ऐसे व्यक्ति का इस तरह के हत्याकांड में शामिल होना समाज के लिए भी एक चिंतन का विषय बन गया है। बाकी सभी आरोपी भी मालीफला उखेड़ी, थाना पाटिया क्षेत्र के ही निवासी हैं। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने हत्या की योजना को कबूल करते हुए बताया कि उन्होंने काफी समय से नवीन की गतिविधियों पर नजर रखी थी और उसकी हत्या करने के लिए कई बार प्रयास भी किया था, लेकिन सही समय न मिलने के कारण वे सफल नहीं हो पाए थे।
पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने मीडिया से बातचीत में इस आपरेशन की सफलता को अपनी टीम की संवेदनशीलता, तेजी और पेशेवर दक्षता का परिणाम बताया। उन्होंने विशेष रूप से टीम के उन सदस्यों की सराहना की, जिन्होंने दुर्गम इलाके में लगातार डटे रहकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कठोरतम सजा दिलाई जाएगी। इस हत्याकांड में लागातार तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और मैनुअल खुफिया तंत्र का संयोजन बेहद निर्णायक साबित हुआ।
इस घटना ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि यदि गांव स्तर पर चल रहे विवादों को समय रहते न सुलझाया जाए, तो वे हिंसा का रूप ले सकते हैं। ग्रामीण समाज में व्यक्तिगत रंजिश, जातिगत संघर्ष और पुराने विवाद कई बार ऐसी घातक घटनाओं को जन्म देते हैं। वहीं, इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने लोगों में सुरक्षा की भावना को मजबूती दी है। लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की खुले दिल से प्रशंसा की है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्षतः, यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत दुश्मनी की खतरनाक परिणति है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अपराध करने वाले लोग अब समाज के किसी भी वर्ग से हो सकते हैं — चाहे वह शिक्षित वर्ग ही क्यों न हो। पुलिस की मुस्तैदी, आधुनिक जांच प्रणाली और सूझबूझ से यह सनसनीखेज मामला केवल चार दिनों में सुलझा लिया गया, जो कि राजस्थान पुलिस की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब जरूरत है कि समाज और प्रशासन मिलकर ऐसे जमीनी विवादों का समाधान संवाद से निकालें, ताकि किसी को भी अपने जीवन से हाथ न धोना पड़े।

