रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में

रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में

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रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में
रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में

मुंबई। बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी सतर्कता और रणनीतिक कार्रवाई से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सभी पांचों आरोपियों को 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि उनके खिलाफ विस्तृत पूछताछ और जांच की जा सके। पुलिस ने अदालत को बताया कि इस मामले में सोमवार को गिरफ्तार किए गए सात अन्य लोग, जिनमें कथित शूटर भी शामिल है, एक अलग गिरोह से जुड़े हैं। वहीं, शुरुआती दौर में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी पुणे से मुंबई तक वाहन और हथियार पहुंचाने वाले दूसरे गिरोह का हिस्सा थे। इस रणनीति का उद्देश्य दोनों गिरोहों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि दोनों गिरोहों के बीच समन्वय किसके निर्देश पर हो रहा था और किसके फंडिंग के माध्यम से इस घटना को अंजाम दिया गया। यह जानकारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे गिरोहों की संरचना, संचालन पद्धति और उनके संभावित आगे की योजनाओं का पता चलेगा।

जांच में यह सामने आया कि रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास के बाहर पांच राउंड गोलियां चलाई गई थीं। यह घटना न केवल मुंबई बल्कि पूरे फिल्म उद्योग और आम जनता के बीच भय और सुरक्षा के प्रति चिंता का कारण बनी। मुंबई क्राइम ब्रांच की गहन जांच में पता चला कि वारदात में इस्तेमाल की गई गाड़ी पुणे से लाई गई थी। जांच के अनुसार, यह वाहन पुणे के एक व्यक्ति का था, जिसने इसे कुछ दिन पहले 30 हजार रुपये में आरोपी आदित्य गायकी को बेचा था। इसके बाद आदित्य गायकी और एक अन्य आरोपी, समर्थ पोमाजी, ने इस वाहन को मुंबई के जुहू इलाके में निर्धारित स्थान पर छोड़ दिया। पुलिस का मानना है कि वाहन की इस तरह की ढुलाई एक सुनियोजित योजना का हिस्सा थी, जिससे घटना को अंजाम देने वाले शूटर तक गाड़ी और हथियार आसानी से पहुंचे।

जांच में यह भी सामने आया कि फरार आरोपी शुभम लोनकर ने मुंबई में दहशत फैलाने की साजिश रची थी। पुलिस के अनुसार, उसने गिरफ्तार आरोपियों से स्पष्ट कहा था कि उसे मुंबई में “कुछ बड़ा” करना है। इस संदर्भ में यह बताया गया कि शुभम लोनकर ने आरोपियों के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए एक ऐप का इस्तेमाल किया और एक आरोपी के खाते में 40 हजार रुपये भी ट्रांसफर किए। यह स्पष्ट संकेत है कि अपराधियों के बीच वित्तीय और संचालन संबंधी समन्वय डिजिटल माध्यमों के जरिए किया जा रहा था, जो आज के तकनीकी युग में अपराधियों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों में से एक है।

पुलिस का कहना है कि वाहन खरीदकर मुंबई लाने वाले आरोपियों को शूटर की पहचान और उसकी भूमिका की जानकारी नहीं थी। उनका काम केवल वाहन और हथियार मुंबई तक सुरक्षित पहुंचाना था। इसके बाद शुभम लोनकर ने शूटर को गाड़ी लेने और फायरिंग की घटना को अंजाम देने के निर्देश दिए। यह मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे अपराधी एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से अपराध को अंजाम देते हैं, जिसमें विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग जिम्मेदारियां तय होती हैं।

रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में
रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में

विस्तृत जांच में यह भी सामने आया है कि मुंबई लाने वाले गिरोह और शूटर के गिरोह के बीच संबंध केवल फायरिंग तक सीमित नहीं थे, बल्कि यह नेटवर्क भविष्य में और भी संभावित अपराधों को अंजाम देने के लिए समन्वयित कार्य करने की योजना बना रहा था। पुलिस का उद्देश्य अब इन दोनों गिरोहों के बीच सम्पूर्ण संपर्क और संचालन पद्धति का खुलासा करना है ताकि अपराधियों के व्यापक नेटवर्क को तहस-नहस किया जा सके।

इसके अलावा पुलिस ने बताया कि शुभम लोनकर ने फायरिंग के लिए रणनीति बनाई थी और डिजिटल माध्यमों के जरिए आरोपियों को निर्देश दिए। यह आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर अपराधों की योजना बनाने का एक उदाहरण है। पुलिस के मुताबिक, मामले में उपयोग की गई गाड़ी और हथियार की पूरी श्रृंखला का ट्रैकिंग किया जा रहा है, जिससे यह पता चले कि गिरोह अन्य अपराधों में किस प्रकार शामिल था और क्या भविष्य में इसी तरह की घटनाओं की योजना बना रहे थे।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस उन सभी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है जो इस फायरिंग और जुड़े गिरोह के संचालन में शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस पूरी साजिश का भंडाफोड़ करने में सक्षम होगी। इसके अलावा, यह भी ध्यान में रखा जा रहा है कि मामले में शामिल गिरोहों की वित्तीय और डिजिटल लेन-देन की जांच की जाए ताकि उनके सम्पूर्ण नेटवर्क की पहचान हो सके।

मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई कानून और व्यवस्था बनाए रखने के प्रति उनकी तत्परता और सक्रियता को दर्शाती है। रोहित शेट्टी जैसे प्रमुख फिल्म निर्देशक के घर के बाहर हुई फायरिंग जैसी घटनाएं न केवल सुरक्षा की गंभीर चुनौती हैं बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय बन जाती हैं। इस घटना से स्पष्ट होता है कि अपराधियों के गिरोह योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हैं और इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को तकनीकी और मानवीय खुफिया तंत्र का समन्वय करना पड़ता है।

मुंबई क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल फायरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़े और संगठित अपराध नेटवर्क का सक्रिय होना भी सामने आया है। गिरफ्तार आरोपियों और फरार आरोपियों से पूछताछ के बाद ही पूरे नेटवर्क और उनके संचालन की रणनीति का पता चलेगा। इस प्रक्रिया में पुलिस डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों का उपयोग कर रही है।

इस पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस दोनों गिरोहों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कौन किसे निर्देश दे रहा था, कौन फंडिंग कर रहा था और किसके आदेश पर अपराध को अंजाम दिया गया। इस रणनीति से पुलिस को यह समझने में मदद मिलेगी कि गिरोहों का नेतृत्व किसके हाथ में है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से उपाय करने की जरूरत है।

साथ ही, इस मामले से यह भी संकेत मिलता है कि अपराधी डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके कम जोखिम में अधिक प्रभावशाली अपराध करने की योजना बनाते हैं। इसलिए पुलिस ने डिजिटल निगरानी को भी पूरी तरह सक्रिय किया है, ताकि अपराधियों के सभी संपर्कों और संभावित अपराधों का पता लगाया जा सके।

अंततः, रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे पूछताछ, मुंबई पुलिस की सक्रियता और अपराध नेटवर्क के खिलाफ उनकी रणनीति का परिचायक है। पुलिस का उद्देश्य न केवल इस घटना का खुलासा करना है बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपराधियों के संपूर्ण नेटवर्क को बेनकाब करना भी है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस पूरी तरह जुटी हुई है, ताकि किसी भी तरह की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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