
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रशासन में व्यापक फेरबदल करते हुए 13 न्यायिक अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियां की हैं, वहीं 3 अधिकारियों को प्रतिक्षा सूची में रखा गया है। हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार नियुक्तियों का यह क्रम न्यायिक व्यवस्था को सुचारु संचालन और विभिन्न कोर्टों में लंबित मामलों के कुशल निस्तारण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तबादले और नई नियुक्तियां हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार निम्न न्यायिक अधिकारियों को उनके नए पदस्थापन स्थानों पर भेजा गया है—
डीजे दिनेश कुमार गुप्ता – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जालौर
डीजे अश्विनी विज – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बीकानेर
डीजे हारून – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब्यावर
डीजे अजीत कुमार हिंगड़ – स्पेशल जज, स्पेशल कोर्ट फॉर ट्रायल ऑफ बम ब्लास्ट केस, जयपुर मेट्रो-II
डीजे रविन्द्र कुमार – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्रीगंगानगर
डीजे भंवर लाल बुगालिया – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जयपुर जिला
डीजे संजीव मोंगा – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, धौलपुर
डीजे केशव कौशिक – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दौसा
डीजे बलजीत सिंह – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भरतपुर
डीजे अल्का शर्मा – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, राजसमंद
डीजे सोनिका पुरोहित – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, चूरू
डीजे मानसिंह चुंडावत – जिला एवं सत्र न्यायाधीश, चित्तौड़गढ़
डीजे दीक्षा – जज, स्पेशल कोर्ट पॉक्सो एक्ट केस नं. 2, जयपुर महानगर-I

एडीजे पुरुषोत्तम लाल सैनी – अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नाथद्वारा
आदेशों की प्रतीक्षा में रखे गए अधिकारी
हाईकोर्ट ने तीन अधिकारियों को Waiting List/Waiting Order में रखा है—
डीजे विशाल भार्गव – मुख्यालय: जिला एवं सत्र न्यायालय जयपुर मेट्रो-II
डीजे अभय जैन – मुख्यालय: राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ
एडीजे भावना भार्गव – मुख्यालय: जिला एवं सत्र न्यायालय जयपुर मेट्रो-II
न्यायिक ढांचे में किए जा रहे ऐसे तबादले सामान्यत : कार्यक्षमता बढ़ाने और न्यायालयों में लंबित मामलों का दबाव कम करने की दृष्टि से किए जाते हैं।
जयपुर और जोधपुर जैसे प्रमुख न्यायिक केंद्रों में जिम्मेदारियों का नया वितरण, तेज रफ्तार से चल रहे महत्वपूर्ण मामलों—खासकर बम ब्लास्ट केस और पॉक्सो कोर्ट—की सुनवाई को गति देने में मदद करेगा।
धौलपुर, चूरू, भरतपुर और राजसमंद जैसे जिलों में नए जिला जजों की नियुक्ति स्थानीय स्तर पर न्यायिक सेवाओं को मजबूत करेगी।
वहीं प्रतीक्षा सूची में रखे गए अधिकारियों के लिए यह निर्णय आगामी प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है, जो आगे चलकर विशेष जिम्मेदारियों के रूप में सामने आ सकता है।

