महिला की संदेहात्मक मौतः ससुराल वालों पर हत्या कर फांसी पर लटकाने का आरोप

महिला की संदेहात्मक मौतः ससुराल वालों पर हत्या कर फांसी पर लटकाने का आरोप

Spread the love !!!
महिला की संदेहात्मक मौतः ससुराल वालों पर हत्या कर फांसी पर लटकाने का आरोप
महिला की संदेहात्मक मौतः ससुराल वालों पर हत्या कर फांसी पर लटकाने का आरोप

औरंगाबाद जिला के रफीगंज थाना अंतर्गत अदलपुर गांव में बीती रात एक महिला की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो जाने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतका की पहचान गांव निवासी दीपक पासवान की 29 वर्षीय पत्नी शांति देवी के रूप में की गई है। सूचना मिलते ही रफीगंज थाना अध्यक्ष शंभू कुमार अपने दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और शव को अपने कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम हेतु सदर अस्पताल, औरंगाबाद भेज दिया। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए हर कोण से जांच कर रही है, लेकिन शुरुआती स्थिति ने इसे एक जटिल और भावनात्मक विषय बना दिया है, जिसमें घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आत्महत्या और संभावित हत्या की संभावनाएं गहराती जा रही हैं।

मृतका के भाई मनोज कुमार पासवान, जो उपहारा थाना क्षेत्र के गैनी गांव निवासी हैं, ने अपनी बहन की मौत को साजिश बताते हुए कहा कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सोची-समझी हत्या है जिसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है। मनोज ने बताया कि उनकी बहन हाल ही में जितिया पर्व के बाद अपने मायके गैनी गांव से ससुराल अदलपुर गांव लौटी थी। वह मुख्यमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत एक फार्म भरने के उद्देश्य से ससुराल गई थी, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि वह दोबारा जीवित नहीं लौटेगी। मनोज ने आरोप लगाया कि सुबह ग्रामीणों ने उन्हें फोन पर सूचना दी कि उनकी बहन की मौत हो गई है, और जब परिवारजन घटनास्थल पर पहुंचे, तो पाया कि शव को फंदे से लटकाया गया है। उनके अनुसार यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है जिसे छिपाने के लिए फांसी पर लटकाया गया।

परिवार का यह भी आरोप है कि शांति देवी की शादी वर्ष 2013 में राजेंद्र पासवान के पुत्र दीपक पासवान के साथ हुई थी। विवाह के शुरुआती कुछ दिनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन जल्द ही घरेलू कलह और मारपीट की घटनाएं सामने आने लगीं। मनोज का कहना है कि बहन को ससुराल में लगातार प्रताड़ित किया जाता था और इसको लेकर कई बार गांव स्तर पर सामाजिक बैठकों का आयोजन भी किया गया था, जिसमें दोनों परिवारों को समझाने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया और अंततः यह दुखद घटना सामने आई।

मृतका शांति देवी के तीन छोटे-छोटे पुत्र हैं। अब उनके सामने मातृस्नेह विहीन जीवन की कठिन राहें खड़ी हो गई हैं। मां की मौत के बाद बच्चों की स्थिति अत्यंत दयनीय है और वे बार-बार अपनी मां को पुकारते हुए देखे गए। यह दृश्य न केवल परिजनों बल्कि गांव के हर व्यक्ति को भीतर तक झकझोर गया। मृतका की मां और अन्य परिजन भी रोते-बिलखते हुए यही कहते सुने गए कि “हमारी बेटी को मार डाला गया, और अब उसे बदनाम किया जा रहा है कि उसने खुदकुशी की है।”

महिला की संदेहात्मक मौतः ससुराल वालों पर हत्या कर फांसी पर लटकाने का आरोप
महिला की संदेहात्मक मौतः ससुराल वालों पर हत्या कर फांसी पर लटकाने का आरोप

वहीं दूसरी ओर, कुछ स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है। ग्रामीणों ने बताया कि शांति देवी मानसिक रूप से परेशान चल रही थी और घरेलू जीवन में तनाव से जूझ रही थी। हालांकि यह दावे कितने सत्य हैं, इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो पाएगा। पुलिस भी इस विरोधाभासी स्थिति को ध्यान में रखते हुए हर कोण से जांच में जुटी हुई है। थाना अध्यक्ष शंभू कुमार ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य, घटनास्थल की स्थिति और परिजनों तथा ग्रामीणों के बयान के आधार पर निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है।

इस मामले ने समाज में एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्यों महिलाओं को आज भी घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है, क्यों उन्हें बार-बार समझौता करने की सलाह दी जाती है, और क्यों समाज ऐसी घटनाओं पर आंखें मूंदे रहता है जब तक कि कोई दुखद अंत न हो जाए? शांति देवी जैसे हजारों मामलों में महिलाएं सालों तक घरेलू प्रताड़ना सहती हैं, और अंततः या तो मानसिक रूप से टूट जाती हैं, या फिर उन्हें ऐसे हालात में पहुंचा दिया जाता है जहां से लौटना असंभव होता है।

घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। पीड़िता के मायके पक्ष के लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, ससुराल पक्ष ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और पुलिस की पूछताछ में सहयोग की बात कही है। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम और रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मामला आत्महत्या का है या हत्या का।

पुलिस प्रशासन पर भी अब यह जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष और निष्णात जांच कर सच्चाई को सामने लाए। यदि यह हत्या का मामला है, तो दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में यह संदेश जाए कि महिलाओं पर अत्याचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यदि आत्महत्या है, तब भी उन सामाजिक और पारिवारिक कारणों की गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए जिन्होंने एक महिला को यह कदम उठाने पर मजबूर किया।

घटना की व्यापकता को देखते हुए महिला आयोग, मानवाधिकार संगठन, और स्थानीय प्रशासन को भी सक्रिय होकर मामले की निगरानी करनी चाहिए। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ मृतका के बच्चों के पुनर्वास की भी ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि वे अनाथता की पीड़ा से बच सकें।

यह घटना न केवल एक महिला की मौत है, बल्कि यह समाज की संवेदनहीनता, व्यवस्था की कमजोरी और महिलाओं की असुरक्षा की जीती-जागती तस्वीर है। शांति देवी की असमय और संदिग्ध मौत हम सबके लिए एक चेतावनी है कि अगर समय रहते घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह हमारे सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करता रहेगा।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *