
महवा, राजस्थान — कस्बे में आपराधिक गतिविधियों का ग्राफ दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है और शनिवार की रात घटी एक ताजा घटना ने एक बार फिर से पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जयपुर रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के सामने से एक बोलेरो पिकअप को अज्ञात चोर चुराकर ले गए। यह घटना तब और गंभीर हो जाती है जब यह समझा जाए कि यह सब एक व्यस्त मार्ग पर, एक प्रतिष्ठित बैंक के सामने, और CCTV कैमरों की निगरानी में हुआ। चोरी की यह वारदात न केवल पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ा रही है।
घटना शनिवार देर रात की बताई जा रही है, जब पिकअप मालिक रफीक खान ने अपनी बोलेरो पिकअप बैंक के ठीक सामने खड़ी की थी। अगली सुबह जब रफीक की नींद खुली और वे वाहन लेने पहुंचे, तो देखा कि उनकी पिकअप गायब थी। शुरुआत में उन्होंने सोचा कि शायद किसी परिचित ने गाड़ी ली होगी, लेकिन जब आसपास पूछताछ की और पिकअप का कोई सुराग नहीं मिला, तो उनके होश उड़ गए। घबराए रफीक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।
CCTV फुटेज से पता चला कि चोरी की यह घटना तड़के करीब सवा चार बजे की है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि चोर बेहद शांत तरीके से आए, गाड़ी का लॉक तोड़ा और फिर आराम से उसे स्टार्ट कर वहां से फरार हो गए। जिस तरह से चोरों ने पूरी वारदात को अंजाम दिया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि वे शातिर और अनुभवशाली अपराधी हैं, जिन्हें वाहन चोरी की पूरी योजना और तकनीक की समझ है। उनकी हरकतों से यह प्रतीत होता है कि उन्होंने पहले से रेकी की हुई थी और सही समय का इंतजार कर रहे थे। गाड़ी चोरी होने के साथ-साथ पिकअप में रखे 14,000 रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी चोरी हो गए, जिनमें वाहन के कागजात, लाइसेंस और अन्य निजी कागजात शामिल थे। रफीक खान ने इस घटना से आहत होकर कहा कि उन्हें इस चोरी से भारी नुकसान हुआ है क्योंकि न केवल उनका वाहन गया, बल्कि नकदी और कागजात की चोरी से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हुई है।
इस चोरी की घटना के बाद महवा में आमजन में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में पुलिस गश्त नाम मात्र की रह गई है और चोर बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। जयपुर रोड जैसे व्यस्त इलाके में, जहाँ बैंक, दुकानों और रिहायशी इमारतों की भरमार है, वहाँ इस तरह की चोरी घटना पुलिस की लापरवाही को दर्शाती है। नागरिकों का यह भी कहना है कि अगर बैंक के सामने खड़ी गाड़ी सुरक्षित नहीं है, तो फिर बाकी इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है।

पुलिस ने रफीक खान की शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फुटेज से कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और तकनीकी सहायता के जरिए चोरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, अन्य शहरों में हुई इसी तरह की घटनाओं से भी इस केस को जोड़कर देखा जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह कोई वाहन चोरी करने वाला गिरोह है, जो सुनियोजित तरीके से एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम दे रहा है।
इस बीच, स्थानीय प्रशासन से लोगों की अपेक्षा है कि सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए और ऐसे संवेदनशील स्थानों पर नियमित गश्त की जाए। व्यापारियों और वाहन मालिकों की भी यह मांग है कि रात के समय पुलिस की सक्रियता बढ़ाई जाए और सीसीटीवी नेटवर्क को और अधिक व्यापक बनाया जाए। नागरिक यह भी चाहते हैं कि ऐसी घटनाओं के आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और सख्त सजा दी जाए ताकि अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा हो।
महवा जैसी जगह, जहाँ जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और नगरीकरण की प्रक्रिया तेज है, वहाँ यदि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर होती है, तो इससे न केवल जनता का विश्वास पुलिस से उठता है, बल्कि अपराधियों को भी खुली छूट मिलती है। इस घटना से पुलिस को सबक लेते हुए अपनी कार्यशैली में परिवर्तन लाना चाहिए और गश्त, निगरानी, और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण बढ़ाना चाहिए।
अंततः, यह घटना महज एक पिकअप चोरी की नहीं है, बल्कि यह महवा में बढ़ती असुरक्षा और कमजोर होती पुलिस व्यवस्था की एक चेतावनी है। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो ऐसे अपराध और भी बढ़ सकते हैं। पुलिस को चाहिए कि वह रफीक खान को न्याय दिलाने के साथ-साथ पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करे और यह सुनिश्चित करे कि नागरिकों का जीवन और संपत्ति सुरक्षित रहे।

