
रामगढ़ पचवारा थाना क्षेत्र के लालसोट जिले में एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें एक ट्रक चालक ने अपनी मांग पूरी न होने पर विरोधी चालक पर शारीरिक हानि, वाहन क्षति एवं उत्पीड़न आरोप लगाया है। यह मामला ट्रक मंडी में जगह दिलाने की एवज़ में हफ्तावसूली का है, जिसे वे दूसरे ट्रक चालक से मांग रहे थे। जब वह चालक इस मांग को स्वीकार करने को तैयार नहीं हुआ, तो मामला हिंसक रूप ले लिया।
पुलिस रिपोर्ट और पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने राजीव गांधी नगर थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उन्हें 12 मील केरू पुलिया के नीचे, पेपसिंह नगर निवासी बजरंग शर्मा (पुत्र जसराज शर्मा) नामक व्यक्ति मिला। बजरंग ने ट्रक को रुकवाया और कहा कि यदि वह मंडी में प्रवेश करना चाहे तो उसे ₹10,000 मासिक देना होगा—अन्यथा मंडी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। जब संजय ने इस अवैध मांग को ठुकराया और कहा कि “मैं तुम्हें किस बात के पैसे दूँ, मैं कोई पैसे नहीं दूँगा,” तब घटना चुपचाप नहीं ठहरी।
बजरंग शर्मा ने संजय से झगड़े की शुरुआत करते हुए ट्रक के कॉलर पकड़कर चालक को वाहन से बाहर निकालने की कोशिश की। संजय ने अंदर से ट्रक को लॉक कर दिया, जिससे बजरंग बाहर नहीं निकाल सके। लेकिन इसके बाद बजरंग ने लोहे के सरिए (भारी लोहे की लंबी रॉड) की सहायता से ट्रक के बाहरी हिस्से, विशेष रूप से द्वार (फाटक) तथा अन्य भागों पर दो–तीन बार गहरी चोट पहुंचाने के लिए हमला किया। इस हमले में ट्रक के कांच (दोनों साइड) भी टूट गए।

जब संजय ने ट्रक लेकर घटनास्थल से आगे निकलने की कोशिश की, तब बजरंग ने अपने स्वयं के ट्रक से टक्कर मारकर संजय के वाहन को बाधित किया। इस टक्कर का परिणाम यह हुआ कि वाहन को और क्षति पहुँचाई गई। संजय ने इस पूरी घटना को जान-माल को खतरे से जोड़ते हुए, बजरंग पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
इस प्रकार की घटनाएँ न केवल व्यक्तिगत स्तर पर हिंसा को बढ़ावा देती हैं बल्कि व्यापार और परिवहन व्यवस्था में अव्यवस्था उत्पन्न करती हैं। ट्रक चालक जो अपने व्यवसाय चलाते हैं, वे किन्हीं दबावों और अवैध मांगों के शिकार हो जाते हैं। यहां मुकदमे के दर्ज होने से यह स्पष्ट हुआ कि पीड़ित ने न्याय का मार्ग अपनाया और संबंधित पुलिस थाने में शिकायत की।
रिपोर्ट के बाद पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करते हुए बजरंग शर्मा के विरुद्ध दोषमुक्त नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जांच अधिकारी को घटना की बारीकी से छानबीन करनी होगी — जैसे सीसीटीवी फुटेज, गवाह बयान, वाहन क्षति का दस्तावेजीकरण और चोट के सबूत। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो बजरंग पर आपराधिक धाराएँ जैसे कि धारा 323 (जानलेवा हमला), 427 (संपत्ति को नुकसान), 506 (धमकी), 34 (साझा अपराध), तथा संबंधित प्रदर्शन और वाहनों की क्षति की धाराएँ लग सकती हैं।
इस मामले की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि पुलिस कितनी तत्परता और निष्पक्षता से जांच करती है। पीड़ित को सुरक्षा एवं कानूनी सहायता मुहैया कराना अनिवार्य है। यदि आप चाहें, तो मैं इस घटना के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति या मीडिया रिपोर्ट का ड्राफ्ट बना सकता हूँ—क्या आप चाहेंगे कि मैं वह तैयार करूँ?

