भरतपुर : विद्युत विभाग की लापरवाही ने ली 4 साल के मासूम की जान, पोल में आ रहे करंट से झुलसा बालक

भरतपुर : विद्युत विभाग की लापरवाही ने ली 4 साल के मासूम की जान, पोल में आ रहे करंट से झुलसा बालक

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भरतपुर : विद्युत विभाग की लापरवाही ने ली 4 साल के मासूम की जान, पोल में आ रहे करंट से झुलसा बालक
भरतपुर : विद्युत विभाग की लापरवाही ने ली 4 साल के मासूम की जान, पोल में आ रहे करंट से झुलसा बालक

भरतपुर जिले के रूपवास उपखंड के महलपुर काछी गांव में गुरुवार सुबह एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। घर के बाहर खेल रहे एक मासूम बालक की विद्युत पोल में उतर रहे करंट की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक बालक की पहचान 4 वर्षीय दिव्यांक के रूप में हुई है, जो अपने घर के बाहर अन्य बच्चों की तरह सामान्य रूप से खेल रहा था। उसके पिता सत्यप्रकाश पुत्र सोनाराम ने पुलिस को दी गई रिपोर्ट में बताया कि गुरुवार सुबह करीब 7 बजे उनका बेटा घर के सामने बने खरंजे पर खेल रहा था। खेलते-खेलते वह पास ही खड़े एक विद्युत पोल के संपर्क में आ गया।

बताया जा रहा है कि उस विद्युत पोल में पहले से ही करंट उतर रहा था, जिसकी जानकारी स्थानीय लोगों द्वारा कई बार बिजली विभाग को दी जा चुकी थी। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। जैसे ही बालक पोल के संपर्क में आया, उसे तेज करंट लगा और वह बुरी तरह झुलस गया।

घटना के बाद परिजन घबराकर तुरंत बच्चे को उठाकर रूपवास के उप जिला अस्पताल ले गए, लेकिन वहां मौजूद चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के इस बयान के साथ ही परिजनों की उम्मीदें टूट गईं और पूरे परिवार में मातम छा गया।

मासूम की मौत की खबर गांव में फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश देखा गया। लोगों का कहना है कि यह हादसा कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि बिजली विभाग की लापरवाही का सीधा परिणाम है।

पीड़ित पिता सत्यप्रकाश ने गहनौली थाना पुलिस को दी गई मर्ग रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि उक्त विद्युत पोल में पहले भी कई बार करंट उतर चुका था। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार मौखिक रूप से विभागीय कर्मचारियों को सूचित किया गया था, लेकिन किसी ने भी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।

ग्रामीणों का भी यही कहना है कि यदि समय रहते इस पोल की मरम्मत कर दी जाती या उसे सुरक्षित बना दिया जाता, तो आज एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी। लोगों ने इस घटना को विभागीय उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का उदाहरण बताया है।

भरतपुर : विद्युत विभाग की लापरवाही ने ली 4 साल के मासूम की जान, पोल में आ रहे करंट से झुलसा बालक
भरतपुर : विद्युत विभाग की लापरवाही ने ली 4 साल के मासूम की जान, पोल में आ रहे करंट से झुलसा बालक

घटना के बाद ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह सीधे लोगों की जान से जुड़ा मामला है। परिजनों ने भी पोस्टमॉर्टम कराने और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। गहनौली थाना पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगे विद्युत उपकरणों की नियमित जांच और रखरखाव क्यों नहीं किया जाता। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की लापरवाही अक्सर देखने को मिलती है, जहां शिकायतों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होती।

विशेषज्ञों का मानना है कि विद्युत पोल या तारों में करंट उतरना एक गंभीर तकनीकी समस्या है, जिसे तत्काल ठीक किया जाना चाहिए। यदि इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकता है।

यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए दुखद है, बल्कि समाज और प्रशासन के लिए भी एक चेतावनी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि छोटी-छोटी लापरवाहियां किस तरह बड़े हादसों का कारण बन सकती हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि गांव में लगे सभी विद्युत पोलों और लाइनों की जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनका समय पर समाधान किया जाए।

दिव्यांक की मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। एक मासूम की असमय मृत्यु ने सभी को भावुक कर दिया है और हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर इस हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा।

अंततः यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्रशासनिक सतर्कता और जिम्मेदारी कितनी जरूरी है। यदि समय रहते समस्या का समाधान किया जाता, तो आज एक परिवार अपनी सबसे बड़ी खुशी से वंचित न होता।

अब सभी की नजरें जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले में दोषियों को सजा मिलती है या फिर यह घटना भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ दबकर रह जाएगी।

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