
बयाना के आनंद पटेल ने RAS परीक्षा में 49वीं रैंक हासिल कर रच दिया सफलता का नया कीर्तिमान
बयाना, राजस्थान की शान बन चुके आनंद पटेल ने अपने कठिन परिश्रम, अनुशासन और लगन से राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा 2025 में 49वीं रैंक हासिल कर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। लाल बाग कॉलोनी, बयाना निवासी आनंद की इस उल्लेखनीय सफलता ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे कस्बे में हर्ष और गर्व की लहर दौड़ा दी है। यह सफलता उन्होंने दूसरे प्रयास में अर्जित की है, जबकि पहले प्रयास में वे प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) भी पार नहीं कर पाए थे। लेकिन असफलता से हताश होने के बजाय उन्होंने उसे सीख के रूप में लिया और दुगने जोश व समर्पण के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहे।
आनंद पटेल की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा हिंडौन सिटी के एक निजी स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 10वीं और 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की। बचपन से ही पढ़ाई में होशियार रहे आनंद ने आगे की पढ़ाई में बीएससी (मैथ्स साइंस) को चुना और इसे राजस्थान स्वायत्त शासन कॉलेज, जयपुर से पूर्ण किया। विज्ञान विषय में गहरी रुचि रखने वाले आनंद का झुकाव शुरू से ही प्रशासनिक सेवाओं की ओर रहा, लेकिन आर्थिक सीमाओं और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। यह उनकी संघर्षशीलता और आत्मविश्वास का ही परिणाम है कि वे राजस्थान की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर सके।
आनंद का पारिवारिक परिवेश शिक्षा के प्रति समर्पित रहा है। उनके पिता श्री वृंदावन सिंह एक सरकारी शिक्षक हैं, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से सेवा दी है। वहीं मां लीला देवी एक गृहिणी हैं, जिन्होंने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया है। आनंद ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए कहा कि यह उनके संस्कार, आशीर्वाद और निरंतर सहयोग का ही नतीजा है कि वे अपने सपनों को साकार कर पाए। उन्होंने बताया कि जब वे पहले प्रयास में असफल हुए थे, तब भी उनके माता-पिता ने उनका मनोबल गिरने नहीं दिया और हमेशा सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा दी।
आनंद की सफलता की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और कभी-कभी असफलताओं से निराश होकर अपने रास्ते से भटक जाते हैं। आनंद ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी सिलेबस के अनुसार अध्ययन करे, मूलभूत अवधारणाओं को स्पष्ट रखे और निरंतरता बनाए रखे, तो वह किसी भी कठिन परीक्षा को पार कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने सीमित लेकिन विश्वसनीय स्रोतों से अध्ययन किया और रिवीजन को प्रमुखता दी।
आनंद पटेल का मानना है कि आज के दौर में संसाधनों की कमी बाधा नहीं है, बल्कि डिजिटल माध्यमों से भी बेहतर मार्गदर्शन और अध्ययन सामग्री उपलब्ध है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब चैनलों से उन्हें काफी मदद मिली, लेकिन उन्होंने इन माध्यमों का उपयोग बहुत सोच-समझकर और सीमित समय में किया, जिससे उनका ध्यान मुख्य पाठ्यक्रम पर केंद्रित रहा।

बयाना जैसे छोटे शहर से निकलकर राज्यस्तरीय सेवा में पहुंचना कोई आसान उपलब्धि नहीं है। आनंद ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ समय प्रबंधन और मानसिक संतुलन बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया। परिवार का सहयोग, खुद पर विश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उनके अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल जानकारी नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और निरंतरता का परिणाम होती है।
आनंद की इस उपलब्धि ने पूरे बयाना क्षेत्र में खुशी और गर्व का वातावरण बना दिया है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। क्षेत्रीय समाजसेवियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और नगरवासियों ने आनंद की इस सफलता को ऐतिहासिक बताया है। बयाना की गलियों में आनंद की उपलब्धि की चर्चा हर जगह हो रही है। स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में भी यह उदाहरण बन गया है कि किस प्रकार साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला विद्यार्थी भी दृढ़ निश्चय और परिश्रम से असाधारण सफलता प्राप्त कर सकता है।
उनके शिक्षक भी आनंद के बचपन के दिनों को याद करते हुए गर्वित महसूस कर रहे हैं। एक शिक्षक ने बताया कि आनंद पढ़ाई में जितना कुशल था, उतना ही विनम्र और अनुशासित भी था। उन्होंने कहा कि आनंद हमेशा से ही अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने की कोशिश करता था, जो किसी भी सफल व्यक्ति की पहचान होती है।
RAS में 49वीं रैंक प्राप्त करना आनंद के लिए सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक उदाहरण है कि किस तरह सीमित संसाधनों और साधनों के बावजूद यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और मार्गदर्शन हो, तो कोई भी सपना साकार हो सकता है। आज आनंद की सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो निरंतर प्रयास और संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।
निष्कर्षतः, आनंद पटेल की सफलता यह दर्शाती है कि कठिन परिश्रम, अनुशासित जीवनशैली, परिवार का सहयोग और सही दिशा में किया गया अध्ययन किसी भी कठिन परीक्षा को पार करने में सक्षम बनाता है। बयाना जैसे कस्बे से निकलकर राज्य प्रशासनिक सेवा में अपनी जगह बनाना न केवल आनंद की व्यक्तिगत विजय है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में आत्मविश्वास हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। आनंद की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में कई युवाओं को नई दिशा और नई प्रेरणा देगी।

