
बूंदा-बांदी से तापमान में गिरावट मौसम के बदलाव से बच्चे और नवजात बीमार, ओपीडी की सँख्या में भारी बढ़ोतरी बयाना। मौसम का मिजाज बदला हुआ है। सुबह-शाम सर्दी का एहसास हो रहा है, तो दोपहर में मौसम गर्म रह रहा है। सुबह-शाम की ठंड बच्चों की सेहत बिगाड़ रही है। बूंदा बांदी के बाद तापमान में ओर गिरावट आ गई है। जिससे नवजात से लेकर छोटे बच्चे तेजी से सर्दी जुकाम और वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं। बयाना उप जिला अस्पताल में दीपावली के बाद बाल रोगियों की बढ़ती संख्या के बीच चिकित्सक खास एहतियात बरतने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। सुबह-शाम पड़ रही ठंड के बीच चिकित्सक छोटे बच्चों की परवरिश को लेकर लापरवाही न बरतने की हिदायत दे रहे हैं। चिकित्सकों ने ठंड से बचाब के लिए कहा है।
अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ महेश धाकड़ ने बताया कि दीपावली के त्योहार के कारण पटाखों के द्वारा फैले प्रदूषण और दिन और रात के ताप मान में परिवर्तन के चलते बच्चों में जुकाम खांसी और वायरल बुखार के केस बढ़ रहे हैं। एक माह से पांच साल तक के बच्चों में वायरल बुखार के मामले देखने में आ रहे हैं। जबकि
बदलते मौसम में नवजातों से लेकर छोटे बच्चे तेजी से सर्दी जुकाम खांसी और वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं। सीएचसी और निजी क्लीनिकों पर अभिभावक रोजाना बड़ी संख्या में बच्चों में जुकाम खांसी बुखार की समस्या के चलते इलाज कराने के लिए लेकर आ रहे हैं।

बड़े बच्चों ने खांसी जुकाम का प्रकोप अधिक दिखाई दे रहा है। सर्दी के मौसम में बच्चों में होने वाले वायरल बुखार में लापरवाही पर जानलेवा साबित हो सकता है। यदि बच्चा बुखार आने के साथ उसकी नाक बंद हो उसे तत्काल नजदीकी डाक्टर को अवश्य दिखाए उसे न्यूमोनिया भी हो सकता है। इस दौरान चिकित्सकों ने आने वाले मरीजों के परिजनों को बतया कि दीपावली के बाद वातावरण में प्रदूषण फैला हुआ है जिस कारण सांस की प्राब्लम भी हो रही है। प्रदूषण के बाद ही ठंड ने भी अपनी रफ्तार पकड़ ली है। जिस कारण बच्चों और नवजातों पर इसका असर ज्यादा दिखाई देने लगा है।
अपने आस-पास सफाई रखें व बच्चों को सुबह शाम गर्म कपडे पहनाएं
अपने घर और आसपास सफाई पर ध्यान दें।
बच्चो को सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनाएं।
नवजात और छोटे बच्चों को पैरों में जुराब और सिर पर गर्म ऊनी
कैप पहनाएं।
बच्चों को सुबह जल्दी बिस्तर से
बाहर न जाने दें।
बिल्कुल न चलाएं।
घूमने दें। घर में और बाहर
आते-जाते पैरों में जूते पहनाकर
रखें, ठंड में बच्चों को कम से कम निकालें।
समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह से ही इलाज कराएं।

