
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर डीग जिले में विशेष अभियान का शुभारंभ
डीग जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर एक विशेष स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य जिले के बच्चों और किशोरों को कृमि संक्रमण से बचाना है। शुक्रवार को इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ जिला कलेक्टर उत्सव कौशल द्वारा लाला मनोहर लाल खंडेलवाल कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत फीता काटकर और विद्यालय की छात्राओं को कृमिनाशक दवा पिलाकर की गई। इस अभियान की अहमियत को रेखांकित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि यह सिर्फ एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के संपूर्ण विकास का आधार है।
इस अभियान का मूल उद्देश्य 1 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों और किशोर-किशोरियों को कृमि संक्रमण से बचाना है। कृमि संक्रमण, विशेष रूप से बच्चों में, एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो उनके संपूर्ण विकास पर गहरा प्रभाव डालती है। संक्रमित बच्चे अक्सर खून की कमी (एनीमिया), कुपोषण, थकान, भूख न लगना, और ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता जैसी समस्याओं से जूझते हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक संक्रमण रहने से उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी बाधित हो सकता है।
इस बार अभियान को अगस्त महीने की 22 और 29 तारीख को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सभी शैक्षणिक और बाल विकास संस्थानों को शामिल किया गया है। स्कूलों, मदरसों, आंगनवाड़ी केंद्रों और कॉलेजों में उपस्थित बच्चों को निशुल्क कृमिनाशक दवा दी जाएगी। इस प्रक्रिया को इस तरह से संचालित किया जा रहा है कि बच्चों को कोई परेशानी न हो और यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी बच्चा दवा से वंचित न रहे।
इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख भूमिका है, जिसे महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग का भी सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है। तीनों विभागों के संयुक्त प्रयासों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अभियान हर गाँव, हर स्कूल और हर केंद्र तक पहुंचे। विभागों ने पहले से ही आंकलन कर लिया है कि जिले में कितने बच्चे इस अभियान के दायरे में आएंगे, और उनके अनुसार दवाओं की व्यवस्था भी की गई है।
जिला कलेक्टर ने इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों, शिक्षकों, स्वास्थ्य कर्मियों और अभिभावकों से अपील की कि वे इस अभियान को सफल बनाने में अपना सक्रिय सहयोग दें। उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि किसी भी तरह की भ्रांति या अफवाहों से दूर रहकर, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। उन्होंने बताया कि दवा पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे किसी भी तरह का गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होता। बहुत कम मामलों में हल्की जी मिचलाने या पेट में हल्की गड़बड़ी की शिकायत हो सकती है, जो सामान्य है।
इसके अतिरिक्त, कलेक्टर उत्सव कौशल ने यह भी कहा कि कृमि संक्रमण को रोकने के लिए स्वच्छता और स्वच्छ जल का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को हाथ धोने की आदत डालने, खुले में शौच से बचने और स्वच्छ पेयजल पीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे बच्चों को नियमित रूप से स्वच्छता के महत्व को समझाएं, जिससे संक्रमण के स्रोत को जड़ से समाप्त किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं में भी उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने कलेक्टर से बातचीत की और इस विषय पर जागरूकता से संबंधित प्रश्न पूछे। विद्यालय स्टाफ ने इस पहल की सराहना की और भरोसा दिलाया कि वे इसे पूरी निष्ठा से लागू करेंगे। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने बच्चों को दवा देने के साथ-साथ उन्हें कृमि संक्रमण के लक्षण और सावधानियों के बारे में भी बताया। उन्हें यह भी सिखाया गया कि अगर किसी बच्चे को दवा लेने के बाद कोई तकलीफ हो तो क्या कदम उठाए जाएं।
यह अभियान केवल स्वास्थ्य सेवा का एक हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों की दीर्घकालिक सेहत को सुरक्षित करने की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है। भारत सरकार द्वारा पूरे देश में दो बार—फरवरी और अगस्त—में इस अभियान को चलाया जाता है, जिसमें करोड़ों बच्चों को लाभ मिलता है। डीग जिला प्रशासन इस अभियान को 100% लक्ष्य के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जिले के सभी विकास खंडों और ग्राम पंचायतों को इस कार्यक्रम की जानकारी पहले से भेज दी गई है। संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे समय पर दवाएं पहुँचाएं, प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करें और यह निगरानी रखें कि कोई बच्चा दवा से वंचित न रहे। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम की भी स्थापना की गई है, जहाँ से अभियान की प्रगति पर नजर रखी जाएगी और किसी भी शिकायत का तत्काल समाधान किया जाएगा।
अभियान के सफल संचालन के लिए ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी, विद्यालय के शिक्षक और चिकित्सा कर्मी सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ये सभी लोग अपनी जिम्मेदारी को सेवा के भाव से निभा रहे हैं, ताकि हर बच्चे तक यह सुरक्षा कवच पहुँच सके। जिला प्रशासन ने इन कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना की है और उन्हें अभियान के अंत तक निरंतर कार्य करने का आग्रह किया है।
निष्कर्ष रूप में, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर डीग जिले में शुरू किया गया यह विशेष अभियान एक बड़ी पहल है, जो बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को सुरक्षित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस अभियान की सफलता केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि सभी मिलकर साथ दें, तो निश्चित ही इस जिले को कृमि मुक्त बनाकर बच्चों को एक स्वस्थ और उज्जवल भविष्य प्रदान किया जा सकता है।

