
दौसा। जिले में सोमवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। तेज हवाओं और गर्जना के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने चैत्र के महीने में सावन-भादो जैसा अहसास करा दिया। इस बेमौसम बरसात से जहाँ आमजन को भीषण गर्मी से राहत मिली और तापमान में गिरावट दर्ज की गई, वहीं किसानों के लिए यह बारिश ‘आफत’ बनकर बरसी है।
फसलों को भारी नुकसान और किसानों की चिंता भीगी फसलें: खेतों में कटकर तैयार पड़ी गेहूं और चने की फसलें बारिश के पानी में भीग गई हैं, जिससे उनके खराब होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
बिकने का डर: कटी हुई फसलों के दाने काले पड़ने या झड़ने की आशंका से किसानों में भारी मायूसी है। किसान आनन-फानन में अपनी उपज को तिरपाल और अन्य साधनों से बचाने के प्रयास में जुटे हैं।

ओलावृष्टि का भय: आसमान में छाई घटाओं और तेज गर्जना के बीच किसानों को ओले गिरने का डर सता रहा है, जो खड़ी और कटी फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर सकते हैं।
कृषि विभाग की एडवायजरी: 72 घंटे में दें सूचना
नुकसान की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
अनिवार्य समय सीमा : फसल खराबे की सूचना 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है।
पंजीकरण : किसान टोल-फ्री नंबर, संबंधित बैंक या ‘क्रॉप लॉस’ ऐप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
बीमा क्लेम : समय पर सूचना देने से ही सर्वे की प्रक्रिया शुरू होगी और नियमानुसार बीमा क्लेम मिल सकेगा।

