
नई दिल्ली में हुई साहिल सोलंकी की दिनदहाड़े हत्या के मामले को सुलझाने में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उल्लेखनीय तेजी और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया। राजधानी के रोहिणी सेक्टर-17 क्षेत्र में 14 फरवरी को घटी इस सनसनीखेज वारदात ने स्थानीय निवासियों के बीच भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया था। व्यस्त इलाके में खुलेआम गोली मारकर की गई इस हत्या ने एक बार फिर दिल्ली में सक्रिय गैंगवार की समस्या को उजागर कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और महज 48 घंटों के भीतर मामले की गुत्थी सुलझा लेने का दावा किया। इस त्वरित कार्रवाई से न केवल अपराधियों की पहचान हुई बल्कि हत्या के पीछे छिपे आपराधिक नेटवर्क और गैंग की साजिश का भी खुलासा हुआ।
क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई का नेतृत्व इंस्पेक्टर मान सिंह, इंस्पेक्टर अरविंद सिंह, इंस्पेक्टर सुंदर गौतम और इंस्पेक्टर नीरज शर्मा ने किया। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में गठित विशेष टीमों ने तकनीकी और मैन्युअल दोनों स्तरों पर सघन जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह हत्या किसी व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम नहीं, बल्कि गैंग की आपसी दुश्मनी का हिस्सा थी। जांच के दौरान पुलिस को यह संकेत मिला कि कुख्यात टिल्लू ताजपुरिया गैंग के सदस्यों की इस घटना में संलिप्तता हो सकती है। इसके बाद जांच की दिशा उसी ओर केंद्रित की गई और संदिग्धों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गईं।
ऑपरेशन-I के तहत एआरएससी की टीम ने दिल्ली के नरेला इलाके के पास जाल बिछाया। पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि गैंग का एक सदस्य वहां आने वाला है। सतर्कता और रणनीति के साथ लगाए गए इस ट्रैप में एक बदमाश को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान उसने कई अहम खुलासे किए। उसने बताया कि वह इंस्टाग्राम के माध्यम से गैंग के अन्य सदस्यों हिमांशु और मोहित के संपर्क में आया था। सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली आलीशान जीवनशैली, हथियारों का प्रदर्शन और तेज रफ्तार जिंदगी के झूठे आकर्षण ने उसे प्रभावित किया। आर्थिक तंगी और गलत संगत के चलते वह अपराध की दुनिया में कदम रख बैठा। धीरे-धीरे वह गैंग की गतिविधियों में शामिल हो गया और उसे साहिल सोलंकी की हत्या की साजिश का हिस्सा बनाया गया।
आरोपी ने खुलासा किया कि 14 फरवरी को वह हिमांशु और सोनू उर्फ गोनी के साथ रोहिणी सेक्टर-17 पहुंचा था। हत्या की योजना पहले से तैयार थी। उसकी भूमिका मोटरसाइकिल चलाने की थी ताकि वारदात को अंजाम देने के बाद साथी तेजी से मौके से फरार हो सकें। जब साहिल सोलंकी को निशाना बनाया गया, तब उसके साथियों ने गोली चलाई और वह वाहन लेकर वहां से निकल गया। यह पूरी वारदात कुछ ही मिनटों में अंजाम दे दी गई, जिससे स्पष्ट होता है कि अपराधियों ने पहले से इलाके की रेकी की थी और भागने के रास्ते तय कर रखे थे।
ऑपरेशन-II के तहत एनआर-II टीम ने तकनीकी साक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया। इलाके में लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। संदिग्ध मोटरसाइकिल और उसमें सवार व्यक्तियों की गतिविधियों को ट्रैक किया गया। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया कनेक्शन की भी गहन जांच की गई। एसआई बलराज को जांच के दौरान एक अहम सुराग मिला, जिसके आधार पर समयपुर, रोहिणी क्षेत्र में ट्रैप लगाया गया। वहां से दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसने भी अपराध में अपनी भूमिका स्वीकार की और गैंग के मास्टरमाइंड के बारे में जानकारी दी।

दूसरे आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और रोज़गार की तलाश में दिल्ली आया था। यहां किराए के मकान में रहते हुए वह गलत संगत में पड़ गया। जनवरी 2025 में उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इलाके में दहशत फैलाने के उद्देश्य से एक व्यक्ति पर चाकू से हमला किया था। उस मामले में उसे जुवेनाइल होम भेजा गया। रिहाई के बाद उसने खुद को सुधारने के बजाय फिर से अपराध की राह चुन ली। इंस्टाग्राम के जरिए उसका संपर्क टिल्लू ताजपुरिया गैंग से हुआ और पैसे के लालच तथा दबदबे की चाह में वह इस गिरोह में शामिल हो गया। गैंग के वरिष्ठ सदस्यों ने उसे विश्वास में लेकर हत्या जैसी गंभीर वारदात में शामिल कर लिया।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी से हत्या की साजिश की परतें खुल गई हैं। पुलिस अब इस मामले के मास्टरमाइंड और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि गैंगवार की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं का गैंग से जुड़ना एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। अपराधी तत्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर युवाओं को प्रभावित करते हैं और उन्हें अवैध गतिविधियों में शामिल करते हैं।
यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करता है। पहली बात, राजधानी जैसे महानगर में सक्रिय गैंगों की जड़ें कितनी गहरी हैं और वे किस तरह युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। दूसरी बात, सोशल मीडिया की निगरानी और जागरूकता कितनी आवश्यक है ताकि युवा झूठे दिखावे और अवैध आकर्षण के शिकार न बनें। तीसरी बात, पुनर्वास और सुधार गृहों से बाहर आने वाले किशोर अपराधियों के लिए प्रभावी परामर्श और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना कितना जरूरी है, ताकि वे दोबारा अपराध की दुनिया में न लौटें।
रोहिणी सेक्टर-17 में दिनदहाड़े हुई इस हत्या का पर्दाफाश कर दिल्ली पुलिस ने यह संदेश दिया है कि संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। 48 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस की तत्परता और समन्वित रणनीति को दर्शाती है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि गैंगवार की समस्या केवल पुलिस कार्रवाई से पूरी तरह समाप्त नहीं होगी, बल्कि इसके लिए सामाजिक जागरूकता, परिवार की भूमिका, शिक्षा और रोजगार के अवसरों का विस्तार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। साहिल सोलंकी की हत्या ने एक बार फिर यह साबित किया कि अपराध का रास्ता अंततः विनाश की ओर ले जाता है—चाहे वह पीड़ित के लिए हो या अपराधी के लिए। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद बंधी है और आम नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तंत्र सतर्क और सक्रिय है।

