
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने राजधानी और एनसीआर में सक्रिय एक बड़े ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मंगलवार रात भोपुरा बॉर्डर के पास 1.504 किलोग्राम स्मैक/हेरोइन बरामद की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 7.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पति-पत्नी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो सुनियोजित तरीके से उत्तर प्रदेश से दिल्ली-एनसीआर में नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुखबिर से विशेष सूचना प्राप्त हुई थी कि आरिफ खान नामक व्यक्ति बरेली, उत्तर प्रदेश से भारी मात्रा में हेरोइन लाकर गाजियाबाद और दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वितरित करता है। सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस टीम ने भोपुरा बॉर्डर क्षेत्र में गुप्त रेकी की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। तकनीकी निगरानी और मानवीय खुफिया तंत्र को सक्रिय करते हुए इंस्पेक्टर विकास पन्नू के नेतृत्व और एसीपी/एएनटीएफ सतेंद्र मोहन के पर्यवेक्षण में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने रणनीतिक तरीके से जाल बिछाया। इसी दौरान गाजियाबाद की ओर से आती एक संदिग्ध वैगनआर टैक्सी को चिन्हित कर घेराबंदी के बाद रोका गया। कार की तलाशी लेने पर उसमें सवार आरिफ खान (36) और उसकी पत्नी शिखा अली (30) को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान दोनों के पास से 303 ग्राम हेरोइन बरामद हुई, जबकि कार की पिछली सीट पर रखे बैग की जांच करने पर 1007 ग्राम अतिरिक्त हेरोइन मिली। इस प्रकार मौके पर ही कुल 1310 ग्राम हेरोइन जब्त की गई। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे परिवार के साथ यात्रा का बहाना बनाकर रात के समय तस्करी करते थे ताकि पुलिस को उन पर संदेह न हो। दंपति ने स्वीकार किया कि वे पिछले कुछ समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय थे और सप्लाई चेन के माध्यम से नियमित रूप से ड्रग्स पहुंचाते थे। आगे की पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने हेरोइन के रिसीवर जुम्मन (32), निवासी जे.जे. कॉलोनी, भलस्वा डेयरी, दिल्ली को भी गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर 194 ग्राम हेरोइन और बरामद की गई, जिससे कुल बरामदगी 1504 ग्राम तक पहुंच गई। जांच में यह भी सामने आया कि आरिफ खान कोविड-19 महामारी के दौरान नौकरी छूटने के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और बाद में टैक्सी चलाने लगा।

इसी दौरान उसका संपर्क बरेली के एक कथित किंगपिन से हुआ, जिसने उसे तस्करी के नेटवर्क से जोड़ दिया। आरिफ और उसकी पत्नी कथित रूप से कमीशन के आधार पर ड्रग्स की ढुलाई करते थे, जबकि जुम्मन स्थानीय स्तर पर पुड़िया बनाकर खुदरा सप्लाई करता था। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें सप्लायर, कैरियर और लोकल डिस्ट्रीब्यूटर शामिल थे। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों में युवाओं और नशे के आदी व्यक्तियों को हेरोइन की आपूर्ति कर रहा था। पुलिस अब इस सप्लाई चेन के अन्य सदस्यों की पहचान करने, वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण करने और अन्य राज्यों में फैले संभावित नेटवर्क की जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन से एक महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई है, लेकिन नेटवर्क के पूर्ण उन्मूलन के लिए आगे की कार्रवाई जारी रहेगी। बरामद हेरोइन की गुणवत्ता और स्रोत की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। क्राइम ब्रांच ने स्पष्ट किया है कि राजधानी में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार चलाया जा रहा है और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से न केवल एक बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, बल्कि इससे युवाओं को नशे के जाल में फंसाने वाली गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि समाज में जागरूकता और सामुदायिक सहयोग के बिना इस समस्या पर पूर्ण नियंत्रण संभव नहीं है, इसलिए आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस कार्रवाई को दिल्ली-एनसीआर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, और पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

