
नई दिल्ली: वसंत विहार में पुलिस ने किया बड़े जुआ रैकेट का भंडाफोड़
नई दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले में एक बार फिर पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक संगठित अपराध का खुलासा हुआ है। इस बार पुलिस ने वसंत विहार इलाके में चल रहे एक बड़े जुआ रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से कई अभियुक्तों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है, और इनमें मास्टरमाइंड हरीश उर्फ क्रांति भी शामिल है, जो इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। यह कार्रवाई दक्षिण-पश्चिम जिले की पुलिस, विशेष रूप से थाना वसंत विहार और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम द्वारा एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत की गई।
यह ऑपरेशन 20 अगस्त 2025 को एक गुप्त सूचना के आधार पर अंजाम दिया गया, जिसमें वसंत विहार के कुसुमपुर पहाड़ी क्षेत्र स्थित मकान नंबर डी-40 को चिन्हित किया गया था। इसी स्थान पर लंबे समय से एक गोपनीय जुआ अड्डा चल रहा था। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम जिले में संगठित अपराध, विशेषकर जुए के बड़े रैकेटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके थे। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए इस अभियान को अंजाम दिया गया।
ऑपरेशन का नेतृत्व इंस्पेक्टर विजय बालियान ने किया, जबकि इसकी निगरानी सहायक पुलिस आयुक्त (संचालन) विजय पाल सिंह द्वारा की गई। जैसे ही पुलिस टीम ने जुआ अड्डे पर छापा मारा, मौके से 11 जुआरी रंगे हाथों पकड़े गए। इन सभी को जुए के दौरान खेलते हुए पकड़ा गया, और मौके से बड़ी मात्रा में नकदी एवं जुए से संबंधित सामग्री भी बरामद हुई। बाद में छापे के विस्तार में रैकेट के सरगना हरीश उर्फ क्रांति को भी गिरफ्तार कर लिया गया, जो इस अड्डे का संचालन करता था और इससे अर्जित रकम का प्रमुख लाभार्थी था।
गिरफ्तार किए गए 12 आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं: योगेश (45), सचिन (50), इरफान (30), पन्ना लाल (60), चंदन (44), शाहिद खान (50), प्रकाश सिंह (25), सोनू (35), मुकेश (48), अंकित (37), याद मोहन (44) और हरीश उर्फ क्रांति (39)। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन 12 में से छह आरोपियों पर पूर्व में भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह जुआ रैकेट केवल शौकिया जुआरियों का समूह नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क है।
मौके से जो सामान बरामद किया गया है, वह इस पूरे नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाता है। ₹15,32,500 नकद राशि, 13 पैकेट प्रीमियम क्वालिटी के ताश के पत्ते, 10 पासे और एक चमड़े का विशेष डिब्बा बरामद किया गया, जिसका उपयोग जुए के आयोजन में होता था। इतनी भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी यह स्पष्ट करती है कि यह जुआ केवल मामूली स्तर का नहीं था, बल्कि इसमें बड़ी रकम का दांव लगाया जा रहा था, जिसमें कई बार लाखों की हेराफेरी होती थी।

इस मामले में थाना वसंत विहार में एफआईआर नंबर 213/25 दर्ज की गई है। यह एफआईआर दिल्ली सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 3/4/5 के तहत दर्ज की गई है, जो गैरकानूनी रूप से जुए के आयोजन, उसमें भाग लेने और उससे अर्जित लाभों को दंडनीय अपराध घोषित करती है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुँचने के लिए अभी गहन जांच और पूछताछ में लगी हुई है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि इस रैकेट को बड़े ही सुनियोजित ढंग से चलाया जा रहा था और इसमें कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं।
पुलिस को संदेह है कि इस रैकेट का संबंध अन्य जिलों या राज्यों में चल रहे जुए के नेटवर्क से भी हो सकता है। ऐसे मामलों में अपराधी आम तौर पर मोबाइल एप्स, डिजिटल पेमेंट गेटवे और गुप्त नेटवर्किंग के जरिए अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं, ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके। हालांकि इस केस में जुआ प्रत्यक्ष रूप से स्थल आधारित (फिजिकल) था, लेकिन पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है कि क्या कहीं इसमें ऑनलाइन लिंक या फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के माध्यम से बड़े स्तर पर काले धन की आवाजाही भी शामिल थी।
इस मामले ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि दिल्ली जैसे महानगरों में अवैध गतिविधियाँ किस तरह से आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। जुए जैसी सामाजिक बुराइयाँ न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं, बल्कि परिवारों को भी तोड़ने का कार्य करती हैं। दक्षिण-पश्चिम जिले की पुलिस ने यह साबित कर दिया है कि वे ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए हर संभव कदम उठाएंगे।
पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस कार्रवाई के बाद अन्य संभावित अड्डों की निगरानी और सतर्कता और तेज कर दी गई है। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि यदि उन्हें किसी प्रकार की ऐसी गतिविधियों की जानकारी हो तो वे निःसंकोच पुलिस को सूचना दें। गुप्त सूचनाओं को पूर्णतः सुरक्षित रखा जाएगा और संबंधित कार्रवाई तुरंत की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह सिर्फ एक शुरुआत है और आने वाले दिनों में ऐसे अन्य रैकेटों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
इस केस के जरिए पुलिस यह संकेत देना चाहती है कि चाहे अपराध कितना भी संगठित क्यों न हो, यदि प्रशासन और खुफिया इकाइयाँ सतर्क रहें, तो उसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है उन लोगों के लिए जो ऐसे अवैध कार्यों में लिप्त हैं और सोचते हैं कि वे कानून की पकड़ से बाहर हैं।
निष्कर्ष के रूप में, वसंत विहार में हुआ यह खुलासा दिल्ली पुलिस की सतर्कता और अपराध पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस ऑपरेशन के माध्यम से न केवल एक सक्रिय जुआ अड्डे को खत्म किया गया, बल्कि यह भी सिद्ध किया गया कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के लिए राजधानी में कोई जगह नहीं है। आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े अन्य चेहरों को बेनकाब करने की उम्मीद है, जिससे राजधानी को जुए जैसे सामाजिक अपराधों से मुक्त किया जा सकेगा।

