जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग

जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग

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जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग
जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग

परिचय

मालपुरा। सेवायत संघ द्वारा जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन के माध्यम से मालपुरा नगर पालिका की आगामी वार्ड पार्षदों के उपचुनाव की मतदान तिथि को बदलने की मांग की गई है। संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने इस मांग के पीछे महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक कारण प्रस्तुत किए हैं।

मांग की पृष्ठभूमि

3 सितंबर 2025 को जलझूलनी एकादशी का महत्त्वपूर्ण त्योहार मनाया जाएगा, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की डोल यात्रा निकाली जाती है और पूरे नगर में उत्सव के स्वरूप में इसी कार्यक्रम को मनाया जाता है। इस कारण जिले में अवकाश घोषित किया जाता रहता है और अधिकांश लोग इस पावन अवसर का उत्सवभार और आध्यात्मिकता में सहभागी होते हैं।

सेवायत संघ के प्रतिनिधियों की भूमिका

ज्ञापन सौंपने के समय उपस्थित थे:

  • श्री चंद्रमोहन उपाध्याय
  • श्री ज्ञानेंद्र रावल
  • श्री अमरचंद मेंदवासिया
  • श्री आर. एल. दीपक
  • श्री चंद्रप्रकाश शर्मा
  • श्री दिनेश पांडे और अन्य गणमान्य सदस्य

इन प्रतिनिधियों ने एसडीएम अमित चौधरी को ज्ञापन सौंपते हुए जोर देकर कहा कि मतदान तिथि बदलाव से मतदान प्रतिशत में वृद्धि होगी, चुनावी प्रक्रिया में अधिक सहभागिता सुनिश्चित होगी और धार्मिक अनुष्ठानों व संवेदनशीलता के बीच तालमेल बनेगा।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

एसडीएम अमित चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि यह मुद्दा शीघ्र शीर्ष अधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा और उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन धर्म और लोकतंत्र, दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्षता और संवेदनशीलता से निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।

धार्मिक-लोकराज्य संतुलन का महत्व

यह मांग केवल चुनाव तिथि परिवर्तन का अनुरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक शासन और धर्मनिष्ठता के संतुलन का प्रतीक है। वोटिंग की सहूलियत से जुड़ा यह सवाल जनता की भागीदारी और व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी विषय है।

संभावित प्रभाव और लाभ

  • उच्च मतदान सहभागिता: धार्मिक उत्सवों में आने वाले लोग मतदान के अभाव में अपनी नागरिक जिम्मेदारी को निभा न सकें, यह स्थिति टाली जा सकती है।
  • धार्मिक और लोकनीति का सामंजस्य: प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह कदम सामाजिक समरसता को बढ़ावा दे सकता है।
  • सार्वजनिक विश्वास में वृद्धि: संवेदनशील निर्णयों के माध्यम से प्रशासन की परीक्षा पूरा होना और लोकशाही पर भरोसा बनना।

निष्कर्ष

इस प्रकार, मालपुरा सेवायत संघ की यह मांग लोकतंत्र और धर्मिक तटस्थता को संतुलित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। साँझा संवाद और संवेदनशील निर्णय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करता है। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वे इस मांग का उचित, समयबद्ध और सकारात्मक निर्णय निर्बाध रूप से ले।

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