
जयपुर,
जिसे पिंकसिटी के नाम से जाना जाता है, मंगलवार की सुबह अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में काले बादल छा गए। कुछ ही देर में झमाझम बारिश शुरू हो गई, जो कि लगातार दो घंटे से अधिक समय तक चली। इस मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर की सूरत ही बदल दी। जयपुर के विभिन्न इलाकों में भारी जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे न केवल आम जनता को परेशानी उठानी पड़ी, बल्कि यातायात व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई।
जलजमाव ने बढ़ाई मुश्किलें
बारिश के कारण शहर की प्रमुख सड़कों से लेकर गलियों तक पानी भर गया। विशेषकर परकोटा क्षेत्र (पुराना जयपुर), मालवीय नगर, वैशाली नगर, टोंक रोड, झोटवाड़ा, मानसरोवर, विद्याधर नगर जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए। इन क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था इतनी लचर साबित हुई कि दो घंटे की बारिश ने लोगों के घरों के अंदर तक पानी पहुंचा दिया।
कई जगह तो पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि लोगों को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और बाजार जाने वाले व्यापारियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिन घरों में बेसमेंट बना हुआ था, वहां पानी घुसने से काफी नुकसान की भी खबरें आ रही हैं।
वाहन चालकों की मुसीबतें
चाहे दो पहिया वाहन चालक हों या चार पहिया वाहन चालक, सभी को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। जलमग्न सड़कों पर वाहन फंसते गए। कई दुपहिया वाहन चालकों को तो वाहन धकेलते हुए आगे बढ़ना पड़ा। कई स्कूटर और बाइक पानी में पूरी तरह डूब गए। कुछ कारें भी बीच सड़क पर बंद हो गईं और लोग अपनी कारें छोड़कर पैदल ही निकलते नजर आए।
राजमार्गों और प्रमुख चौराहों पर लंबा ट्रैफिक जाम देखा गया। जयपुर के ब्यौनी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, सांगानेरी गेट, अजमेरी गेट, और बस स्टैंड के आसपास की सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिसकर्मी और ट्रैफिक विभाग के अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे, परंतु तेज बारिश और जलजमाव ने सभी प्रयासों को कमजोर कर दिया।
घरों और दुकानों में पानी घुसा
जयपुर के पुराने इलाके, जहां सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं और जल निकासी की व्यवस्था बेहतर नहीं है, वहां की स्थिति सबसे चिंताजनक रही। कई जगहों पर दुकानों में पानी घुस गया, जिससे हजारों रुपए का नुकसान हुआ। दुकानदारों को अचानक अपने सामान को बचाने के लिए प्लास्टिक की चादरें और बोरे लगाकर पानी रोकने की कोशिश करनी पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मॉनसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन की तरफ से स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता। नगर निगम द्वारा साफ-सफाई और नालों की सफाई की बात तो हर साल की जाती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही होती है।
बिजली आपूर्ति भी बाधित
बारिश के दौरान कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई। विद्युत विभाग ने एहतियातन कुछ इलाकों में बिजली काट दी ताकि शॉर्ट सर्किट या करंट लगने की घटनाएं न हों। हालांकि इससे लोगों को काफी परेशानी हुई, खासकर उन इलाकों में जहां पहले से ही जल जमाव की स्थिति थी और लोगों को पंप से पानी निकालना था।

प्रशासन का रवैया और इंतजाम
जयपुर नगर निगम और जिला प्रशासन ने दावा किया कि स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है और जहां आवश्यकता है वहां राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं। कई जगह पंपिंग सेट लगाकर पानी निकाला जा रहा है और ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की तैयारी महज़ कागज़ों तक ही सीमित रही और ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी।
पर्यटकों को भी हुई परेशानी
जयपुर एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और यहां हर मौसम में देश-विदेश से सैलानी आते हैं। बारिश के कारण आमेर किला, हवा महल, सिटी पैलेस, जल महल जैसे पर्यटन स्थलों पर भी पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई। जो पर्यटक पहले से जयपुर में मौजूद थे, उन्हें होटल्स के अंदर ही रहना पड़ा। बारिश और जलजमाव के चलते स्थानीय टैक्सी सेवाएं भी बाधित रहीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
भारी बारिश और जलजमाव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। ट्विटर (अब एक्स), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों ने जलमग्न सड़कों, डूबी हुई गाड़ियों और घरों में घुसे पानी की तस्वीरें साझा कीं। कई लोगों ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में जयपुर की सड़कों को “नदी” और “तालाब” कहकर ट्रोल भी किया।
निष्कर्ष
जयपुर जैसे विकसित होते शहर में दो घंटे की बारिश अगर जनजीवन को इस तरह से अस्त-व्यस्त कर देती है, तो यह सोचने की जरूरत है कि नगर नियोजन और आपदा प्रबंधन में कहां चूक हो रही है। हर साल की तरह इस बार भी बारिश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कागजी योजनाओं से ज़मीनी हकीकत नहीं बदली जा सकती। जब तक नगर निगम और संबंधित विभाग मिलकर ठोस और दीर्घकालीन समाधान नहीं निकालते, तब तक हर साल पिंकसिटी की सड़कों पर यही तस्वीरें दोहराई जाती रहेंगी।

