
जयपुर।
जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भारी वर्षा के कारण हुए दुखद हादसे ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने हादसे में मारे गए श्रद्धालुओं की मृत्यु पर संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत पीड़ादायक क्षण है, जब धार्मिक आस्था और विश्वास के साथ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को प्रकृति के क्रोध का शिकार होना पड़ा। राज्यपाल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और उनके शोक संतप्त परिवारों को यह अपार दुख सहन करने की शक्ति दें।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि इस प्रकार की आपदाएँ न केवल भौतिक रूप से हानि पहुँचाती हैं, बल्कि लोगों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं। उन्होंने हादसे में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए राज्य और केंद्र सरकार से यह आग्रह किया कि सभी प्रभावित श्रद्धालुओं को हर संभव सहायता प्रदान की जाए।
यह हादसा माँ वैष्णो देवी यात्रा के उस पवित्र मार्ग पर हुआ है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आस्था और श्रद्धा के साथ अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। जब इस प्रकार का भीषण हादसा एक धार्मिक स्थल के मार्ग पर होता है, तो यह केवल एक भौगोलिक आपदा नहीं रह जाती, बल्कि यह संपूर्ण समाज की भावनाओं को झकझोर देती है। राज्यपाल ने कहा कि यह समय केवल संवेदना प्रकट करने का नहीं है, बल्कि इससे सीख लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का भी है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीमों और सुरक्षाबलों की तत्परता की सराहना की, जो रात-दिन राहत कार्यों में लगे हुए हैं।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आगे यह भी कहा कि इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारियां और सतर्कता आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि धार्मिक स्थलों और यात्रा मार्गों पर पर्यावरणीय अध्ययन और आपदा प्रबंधन की सुदृढ़ व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को टाला जा सके। उन्होंने यह भी आह्वान किया कि सभी नागरिक, विशेष रूप से वे जो तीर्थयात्रा पर जाते हैं, मौसम की चेतावनियों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें ताकि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
इस हादसे ने जिन परिवारों से उनके प्रियजन छीन लिए हैं, उनके लिए यह समय अत्यंत कठिन है। राज्यपाल ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते, वे उन सभी परिवारों के साथ इस शोक की घड़ी में खड़े हैं और उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि राज्य और राष्ट्र का हर संवेदनशील नागरिक उनके दुख में सहभागी है। उन्होंने कहा कि ईश्वर से यही प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को मोक्ष प्राप्त हो और उनका परिवार इस दुःख को सहने की शक्ति अर्जित कर सके।

राज्यपाल ने यह भी आह्वान किया कि समाज के प्रत्येक नागरिक को इस त्रासदी से कुछ न कुछ सीख अवश्य लेनी चाहिए। चाहे वह पर्यावरणीय चेतना हो, प्रशासनिक व्यवस्था हो, या तीर्थयात्रियों की सुरक्षा—हर पक्ष को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह सामूहिक उत्तरदायित्व है जिसमें स्थानीय लोग, सेवाभावी संस्थाएं और स्वयं यात्री भी शामिल हैं।
घायलों की बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सभी घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और उनके इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करे। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे में जिन लोगों की जान गई है, उनके परिवारों को मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि वे इस कठिन समय में आर्थिक रूप से थोड़ी राहत पा सकें। साथ ही जो लोग अब भी लापता हैं, उनकी तलाश के लिए बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।
राज्यपाल ने कहा कि धर्म और आस्था के इन केन्द्रों की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। माँ वैष्णो देवी न केवल जम्मू-कश्मीर, बल्कि पूरे भारत की धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं और वहाँ पर होने वाली किसी भी घटना का प्रभाव देश के करोड़ों श्रद्धालुओं पर पड़ता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि वहाँ की अवस्थाओं को निरंतर बेहतर बनाया जाए।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने हादसे की गंभीरता को समझते हुए यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में तीर्थयात्रा मार्गों पर मौसम आधारित चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया जाए। साथ ही आपदा प्रबंधन टीमों को हाईटेक संसाधनों से लैस किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे शीघ्र प्रतिक्रिया दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मस्थलों के पास रहने वाले स्थानीय नागरिकों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए जिससे वे स्वयं भी राहत कार्यों में प्रशासन की मदद कर सकें।
इस प्रकार राज्यपाल का वक्तव्य न केवल संवेदना प्रकट करने का माध्यम था, बल्कि एक दूरदर्शी दृष्टिकोण का भी प्रतीक था जिसमें वे भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस रणनीति की बात कर रहे थे। उन्होंने समाज से यह भी आग्रह किया कि हमें पीड़ितों के प्रति केवल संवेदनशील नहीं, बल्कि सक्रिय सहायक बनना होगा। चाहे वह आर्थिक सहायता हो, रक्तदान हो, या राहत सामग्री इकट्ठा करना—हर नागरिक को अपने स्तर से प्रयास करने चाहिए।
अंत में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि यह घटना हमारे लिए चेतावनी है कि प्राकृतिक आपदाएं कब और कैसे आ जाएं, इसका कोई ठिकाना नहीं। लेकिन हम यदि पहले से सचेत रहें, जागरूक रहें, और योजनाबद्ध रूप से काम करें, तो हम जान-माल की हानि को बहुत हद तक रोक सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि माँ वैष्णो देवी की कृपा से हम इस आपदा से उबरेंगे और भविष्य में अधिक सुरक्षित व व्यवस्थित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करेंगे।
इस प्रकार राज्यपाल का यह शोक संदेश एक संवेदनशील, जिम्मेदार और प्रेरणादायक नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

