
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बड़े साइबर ठगी और सिम बॉक्स रैकेट का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इस मामले में 3 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी हुई थी, जिससे न केवल आम नागरिकों बल्कि व्यवसायिक जगत में भी सुरक्षा और डिजिटल लेन-देन को लेकर चिंता बढ़ गई है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद अमजद (38) के रूप में हुई है। उसे सोमवार को सेंट्रल कोलकाता के एमहर्स्ट स्ट्रीट इलाके में छापेमारी के दौरान पकड़ लिया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के पीछे की जानकारी अबीर शेख से पूछताछ के दौरान सामने आई, जिसे हाल ही में बिधाननगर पुलिस ने इसी तरह के सिम बॉक्स रैकेट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने बताया कि यह साइबर ठगी पिछले साल अक्टूबर में हुई थी। बेहाला के व्यवसायी बिधान घोष दस्तीदार को एक व्यक्ति ने कूरियर कंपनी का अधिकारी बनकर फोन किया और उन्हें बताया कि उनके नाम से भेजे गए एक पार्सल में प्रतिबंधित ड्रग्स पाए गए हैं। इस जानकारी के आधार पर पीड़ित को डराने और उन्हें मानसिक दबाव में लाने की योजना बनाई गई थी। इसके बाद ठगों ने मामला सीबीआई और ईडी को भेजे जाने की धमकी दी।
थोड़ी ही देर बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी अमित कुमार बताकर बिधान घोष और उनकी पत्नी से वीडियो कॉल किया। वीडियो कॉल के दौरान दंपती को गिरफ्तारी की धमकी दी गई और कहा गया कि उन्हें लगातार अपने मोबाइल ऑन रखना होगा क्योंकि सीबीआई और अन्य एजेंसियां उन्हें सर्विलांस पर रख रही हैं। इस वीडियो कॉल के दौरान ठगों ने नकली सीबीआई, ईडी और आरबीआई के पहचान पत्र और दस्तावेज भी दिखाए, ताकि पीड़ित पूरी तरह भ्रमित और डर में रहे।
इस कॉल में बाद में दो और लोग शामिल हुए, जिन्होंने खुद को आईपीएस अधिकारी बताया और पति-पत्नी को गिरफ्तार करने की धमकी दी। इस पूरे सिलसिले में पीड़ित से कुल 3 करोड़ रुपए की ठगी की गई। पुलिस ने बताया कि इस प्रकार की साइबर ठगी में ठगों ने तकनीकी ज्ञान का भरपूर इस्तेमाल किया। यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि अपराधी आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर कैसे आम नागरिकों को अपने जाल में फंसा सकते हैं।
गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने कई ठिकानों पर छापेमारी की और सिम बॉक्स रैकेट से जुड़े गैरकानूनी सामान जब्त किए। बरामद सामग्री में 12 सिम बॉक्स, एक लैपटॉप, नौ राउटर, वाई-फाई से जुड़े सीसीटीवी कैमरे, 17 मोबाइल फोन, 2,250 सिम कार्ड और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सिम बॉक्स का इस्तेमाल अपराधियों ने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल की तरह दिखाने और साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए किया था।
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी के लिए आम मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया गया था, बल्कि ‘सिम बॉक्स’ नाम के खास उपकरणों का प्रयोग किया गया। यह डिवाइस एक साथ कई सिम कार्ड को इस्तेमाल कर इंटरनेट और कॉल रूटिंग तकनीक के माध्यम से कॉल को इस तरह बदल देता था कि उसे स्थानीय कॉल की तरह दिखाया जा सके। इससे न केवल कॉल रिकॉर्डिंग और ट्रैकिंग मुश्किल होती थी बल्कि बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा भी प्रभावित होती थी।

प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि बांग्लादेश का नागरिक अबीर इस अवैध कॉल रूटिंग में सक्रिय रूप से शामिल था और ठगी के तकनीकी संचालन को नियंत्रित कर रहा था। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का मुख्य सरगना त्रिपुरा का रहने वाला बिप्लब हुसैन है, जो पूरे नेटवर्क की योजना और कार्यान्वयन को नियंत्रित करता था। उसके साथ चुंग वेई कियात नामक मलेशियाई नागरिक भी जुड़ा हुआ था, जो भारत में मेडिकल वीजा पर आया था। यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था और इसमें विदेशी नागरिकों की भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी, जिससे यह मामला और जटिल हो गया।
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह केवल ठगी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से लोगों को डराने, ब्लैकमेल करने और साइबर माध्यमों से धन हड़पने की योजना बनाई जाती थी। गिरोह के पास तकनीकी उपकरण, नकली पहचान पत्र, सिम कार्ड, और राउटर सहित कई आधुनिक साधन मौजूद थे, जिनके जरिए वे बड़े पैमाने पर अपराध को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए मोहम्मद अमजद और अन्य सहयोगी गिरोह के संचालन और तकनीकी प्रक्रियाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।
जांच के अनुसार, गिरोह ने पीड़ितों को डराने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए वीडियो कॉल और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इसके जरिए पीड़ित दंपती मानसिक दबाव में आ गए और ठगों द्वारा बताई गई शर्तों का पालन करने लगे। साइबर ठगी की इस घटना में तकनीक और डर का संयोजन स्पष्ट रूप से देखा गया, जिससे यह मामला अत्यंत गंभीर और व्यापक हो गया।
इस पूरे मामले से यह संकेत मिलता है कि साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय कॉल रूटिंग तकनीक का दुरुपयोग किस हद तक बढ़ गया है। पुलिस ने बताया कि अब जांच का मुख्य फोकस गिरोह के अन्य सहयोगियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पहचान करना है। इसके अलावा, सिम बॉक्स, राउटर और अन्य तकनीकी उपकरणों के प्रयोग और उनके नेटवर्क का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
कोलकाता पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी और उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनसे पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जानकारी हासिल की जाएगी। यह मामला तकनीकी अपराध, साइबर ठगी और अंतरराष्ट्रीय कॉल रूटिंग के जरिए किए जाने वाले अपराधों पर कानून और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता का उदाहरण है।
इस ऑपरेशन में पुलिस की सतर्कता और रणनीतिक कार्रवाई स्पष्ट रूप से दिखाई दी। छापेमारी और गिरफ्तारियों के दौरान बरामद सामग्री, सिम बॉक्स और डिजिटल उपकरणों के विश्लेषण के आधार पर अब आगे की जांच तेज कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी विशेषज्ञता का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
अंततः, कोलकाता में सिम बॉक्स रैकेट और साइबर ठगी का यह खुलासा एक गंभीर चेतावनी है कि डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय तकनीक का गलत इस्तेमाल किस प्रकार से बड़े पैमाने पर वित्तीय अपराध और ठगी को अंजाम दे सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और सभी दोषियों को कानून के तहत दंडित किया जाएगा। साथ ही, आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि इस तरह के अपराधों को रोकने में सहयोग मिल सके।

