
जोधपुर (केरू)। प्रशासन की लापरवाही और लीपापोती का खौफनाक नतीजा मंगलवार को केरू-खसरा नंबर 1174 (ओरण भूमि) पर देखने को मिला। जहाँ एक ओर विभाग फाइलों में अवैध रॉयल्टी नाकों पर कार्रवाई के दावे कर रहे हैं, वहीं आज इसी ‘मूलानाडा’ अवैध रॉयल्टी नाके के पास हुए बस-ट्रेलर हादसे ने 4 लोगों की जान ले ली और 16 को घायल कर दिया।
हाईकोर्ट की चेतावनी भी बेअसर राजस्थान हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अवैध धर्मकांटों और रॉयल्टी नाकों को तुरंत हटाया जाए। कोर्ट ने कड़ी चेतावनी भी दी थी, लेकिन जमीनी हकीकत दावों के उलट है। केरू की ओरण भूमि पर संचालित इस नाके पर न तो कोई पीला पंजा चला और न ही इसका संचालन बंद हुआ।
फाइलों में ‘खानापूर्ति’, सड़क पर ‘खतरा’
स्थानीय सूत्रों और मौके की स्थिति के अनुसार यथावत ढांचा : रॉयल्टी नाके का प्लेटफॉर्म, कांटा और ऑफिस जस का तस खड़ा है।

सड़क पर बाधा : भारी वाहनों को अचानक रोकने और मोड़ने के कारण यह स्थान एक ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बन चुका है।
प्रशासनिक मिलीभगत : माइनिंग विभाग, जेडीए (JDA) और NHAI—तीनों ही विभागों ने अब तक न तो एक्सेस बंद किया और न ही ओरण भूमि पर हुए इस अवैध निर्माण को ध्वस्त किया।
हादसे ने खोली पोल : क्या यह हत्या है?20 जनवरी 2026 को हुआ यह भीषण हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता का परिणाम है।
सवाल: यदि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार समय रहते इस नाके को हटा दिया जाता और सड़क को बाधा-मुक्त कर दिया जाता, तो क्या इन 4 लोगों की जान बचाई जा सकती थी?
ओरण भूमि का उल्लंघन : आरक्षित चारागाह और ओरण भूमि पर व्यावसायिक निर्माण स्वयं में अवैध है, फिर भी प्रशासन का मौन रहना मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
प्रशासन ने फाइलों में निरीक्षण और बैठकों का उल्लेख कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, लेकिन हकीकत में ‘नो एक्शन’ मोड ने आज कई घरों के चिराग बुझा दिए। क्या अब इस हादसे के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर से एक नई फाइल दबा दी जाएगी?

